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रायपुर : रमन के गोठ पर प्रदेश के प्रबुद्धजनों की उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया

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रायपुर 13 सितम्बर 2015

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के आज से प्रारंभ नियमित रेडियो प्रसारण की पहली प्रस्तुति पर साहित्यकारों, कलाकारों और प्रबुद्ध नागरिकों में भी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया देखी गयी। आकाशवाणी से प्रसारित और प्रदेश सरकार के जनसम्पर्क विभाग द्वारा आयोजित इस अभिनव कार्यक्रम के बारे में लोगों ने अलग-अलग तरह से अपनी त्वरित प्रतिक्रिया व्यक्त की। कार्यक्रम के बारे में यहां प्रस्तुत है, राज्य के प्रबुद्धजनों की प्रमुख टिप्पणियां-
 श्री हसन खान, सेवानिवृत्त केन्द्र निदेशक आकाशवाणी रायपुर- रमन के गोठ कार्यक्रम अच्छा प्रयास है। लोगों की भलाई के लिए यह एक अच्छी शुरूआत है। इसे निरंतर जारी रखना चाहिए। फिल्म अभिनेता श्री अनुज शर्मा- यह एक अच्छी पहल है, जिससे लोगों को मुख्यमंत्री से सीधे जुड़ाव महसूस हुआ है। कार्यक्रम प्रसारण के दौरान राज्य शासन द्वारा किसानों, विद्यार्थियों की भलाई के लिए उठाए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। श्री केयूर भूषण स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व लोकसभा सांसद- ’रमन के गोठ’ बहुत ही रोचक ढंग से अच्छी शैली में प्रस्तुत की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति, तीज-त्यौहारों, ठेठरी-खुरमी जैसे ठेठ छत्तीसगढ़ी पकवानों को याद किया और उनका महत्व सामने रखा। तीजा पर माताओं और बहनों को बधाई दी तो अकाल से आशंकित किसानों के लिए भी राहत कार्य एवं कृषि बीमा की बात की। मुख्यमंत्री का लोगों के साथ व्यक्तिगतरूप से जुड़ाव महसूस हुआ। मुख्यमंत्री जी ने शासकीय योजनाओं को भी व्यापक रूप में प्रस्तुत किया।
पद्मश्री सम्मानित डॉ. महादेव प्रसाद पाण्डेय, (स्वतंत्रता सेनानी) रायपुर - ’रमन के गोठ’ राज्य सरकार के जनसम्पर्क विभाग का एक सकारात्मक प्रयास है। इसमें सभी वर्गों एवं समुदाय के लोग लोकहित की भावना समाहित है। इस कार्यक्रम के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि इसके अगले प्रसारण का इंतजार रहेगा। श्री बबन प्रसाद मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार रायपुर - मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की बहुआयामी सोच का यह प्रतीक है कि आज उन्होंने जनता से सीधे संवाद का माध्यम रेडियो को चुना और यह प्रतिबद्धता जतायी कि दीन-दुखियों के लिए पूरी संवेदना के साथ प्राप्त सूचनाओं के आधार पर वे जन्मोन्मुखी और सर्वहारा वर्ग के लिए प्रयास करते रहेंगे। आसन्न में सूखे से प्रभावित छत्तीसगढ़ में कृषि को बचाने, पलायन को रोकने, धार्मिक और तार्किक प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए उन्होंने प्रदेशवासियों को शिक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने आज उन्होनंे रेडियो के माध्यम से अपनी बात रखी।
श्री रमेश नैय्यर, निदेशक छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी रायपुर - ’रमन के गोठ’ में बहुत सारी बातें मेरे जैसे मध्यम वर्ग के व्यक्ति के मन को छूने वाली थी, परन्तु समय और परिस्थितियों के अनुसार उनका सम्बोधन मुख्यरूप से किसानों के लिए था। उन तमाम किसानों के लिए था जो, सूखे के मंडराते संकट को लेकर आंशकित हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हंे सरकार की पूरी तत्परता और स्वयं के संकल्प के साथ आश्वस्त किया कि सरकार सूखा प्रभावित परिवारों की राहत के लिए हरसंभव प्रयत्न करेगी। एक प्रकार से उनके आश्वासन में एक संकल्प की भावना गूंज रही थी। मैं समझता हूं कि ’रमन के गोठ ’ के पहले प्रसारण में ऐसी समस्याओं पर चर्चा की गई, जो लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
श्री दानेश्वर शर्मा, (दुर्ग) पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग- रमन के गोठ ‘सुनकर बहुत अच्छा लगा। मुख्यमंत्री द्वारा प्रारंभ किया गया यह प्रयास मर्म-स्पर्शी कहा जा सकता हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता के दर्द को महसूस करने का प्रयास किया है। ‘रमन के गोठ‘  में तीज त्यौहार की बात कही गई है जिसकी आवश्यकता आज के युवा पीढ़ी़ में अपने संस्कृति और परम्परा के प्रति जागरूकता लाने जरूरी था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को आगे प्रकृति के सरंक्षण की दिशा में तथा युवाओं के स्वरोजगार के लिए मार्गदर्शन देने बात रखनी चाहिए। श्री श्याम लाल चतुर्वेदी (बिलासपुर) पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग- डॉ. रमन सिहं ह आम जनता के मन के बात कहिस। रमन सिंह हा आज रेडियो म मन ला छू लेने वाला बात कहिस। तिहार-बार, रोटी-पीठा, दुकाल के आम जनता के बात कहिस। अच्छा प्रयास हे। ’रमन के गोठ’ म जस दिन जाही तस दिन जनता के बिचार जोड़े ले ओखर नतीजा सामने आही।
श्री सुधीर सक्सेना (नई दिल्ली) वरिष्ठ पत्रकार - छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित ’रमन के गोठ’ देश के किसी भी प्रांत में प्रारंभ अपनी तरह का अभिनव व सार्थक प्रयास है। महात्मा गांधी ने कहा था कि ’’आकाशवाणी में मैं शक्ति देखता हंू। लोग तब तक वाणी के माध्यम से अपने सरोकारों और अभिष्ठ को व्यक्त करने की दृष्टि से कार्यक्रम उपयोगी हो सकता है’’। ’रमन के गोठ’ में मुख्यमंत्री के सम्बोधन के साथ ही अंत में दो तीन श्रोताओं के प्रश्नों का भी समावेश किया जाना चाहिए। इससे कार्यक्रम अंतर्संवादी व अधिक जनोपयोगी होगा। डॉ. मन्नुलाल यदु (रायपुर) भाषा वैज्ञानिक और समाजसेवी - यह मुख्यमंत्री का आम जनता से जुड़ाव का अभिनव कार्यक्रम है। इसमें मुख्यमंत्री ने जनहित के अनेक मुद्दों पर बात की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के तीज-त्यौहारों का विशेष उल्लेख करते हुए माताओं एवं बहनों को तीजा की छत्तीसगढ़ी में बधाई दी, जिसमें उनकी आत्मीयता झलकती है। यह जनसम्पर्क विभाग का अच्छा प्रयास है और इसके निरंतर बनाए रखना चाहिए।
डॉ. प्रताप अग्रवाल (जगदलपुर) वरिष्ठ अधिवक्ता- मुख्यमंत्री का यह सराहनीय प्रयास है। ऐसे कार्यक्रम यदि साक्षात्कार शैली में होते हैंतो एक ओर शासन को जनता का अच्छा फीड बैक मिलेगा, वहीं इससे प्रशासकीय कार्यों में भी मजबूती आएगी। श्री नरेन्द्र पाढ़ी (जगदलपुर) वरिष्ठ रंगकर्मी- ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहना चाहिए, साथ ही इसकी समय अवधि भी बढ़ायी जानी चाहिए। यह कार्यक्रम समाज के विभिन्न पहलुओं को छुआ है। इसमें साहित्य और कला जैसे विषयों को भी जोड़ना चाहिए। श्रीमती मोहनी ठाकुर (जगदलपुर) साहित्यकार- इस कार्यक्रम में किसानों और विद्यार्थियों के हित में अच्छी बातें बतायी गई है। ऐसे प्रयास करना चाहिए जिससे प्रदेश में खेती-किसानी उन्नत हो और किसानों की कठिनाई कम हो।
श्री आर.पी. मिश्र (दुर्ग) वरिष्ठ शिक्षाविद्- छत्तीसगढ़ प्रदेश के वासी बहुत ही सहज, सरल और स्वाभिमानी होते हैं। यहां के वासी धीर गंभीर होने के साथ ही अपनी बोली, भाषा, संस्कृति और खान-पान में सदाचार का व्यवहार रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन ंिसंह में इन सभी बातों की झलक देखने को मिलती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के चहुमुंखी विकास के साथ ही सभी वर्गों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रहे हैं। आज ‘रमन के गोठ ‘ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की छत्तीसगढ़ प्रदेश के तरक्की के लिए ललक की झलक देखने को मिली है। श्री संजीव तिवारी (दुर्ग) ब्लॉगर और वरिष्ठ अधिवक्ता- बने लागिस, ये ह अभिनव पहल रहिस हे। सरकार अउ और जनता के बीच संवाद के प्रयास होईसे। सरकार के उद्देश्य और योजना ला बताईस हे। हमर प्रदेश के परम्परा के बात ला कहीसेे। छत्तीसगढ़ के तीजा-त्यौहार म महिला म ला बधाई दे के महिला मन के सम्मान करीसे।

क्रमांक-2801/कुशराम
 

Date: 
13 Sep 2015