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विशेष लेख : रायपुर : छत्तीसगढ़ में रोजगार प्रशिक्षण

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  • आलेख-शशिरत्न पाराशर


 रायपुर 27 अक्टूबर 2016 / कुशल भारत के सपने को साकार करने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। इसी कारण छत्तीसगढ़ सरकार वित्तीय वर्ष 2015-16 में युवाओं का एक पृथक बजट प्रस्तुत कर देश का पहला राज्य बना है । राज्य की आयोजना का छठवां हिस्सा युवाओं के लाभार्थ संचालित योजनाओं को आबंटित किया गया है। इसमें से 735 करोड़ का आवंटन युवाओं के कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए था । कौशल विकास योजनाओं में इस वर्ष से विभाग की मांगों में संचालित योजनाओं के अतिरिक्त 100 करोड़ का प्रावधान मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के लिए किया गया है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत अब तक राज्य में  2 लाख 35 हजार  131 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
    वर्ष 2000-2001 से 2002-2003 के तीन वर्षो में सत्रह आई.टी.आई प्रारंभ हुए। इसमें प्रशिक्षण हेतु मात्र 704 सीटो की वृद्धि हुई थी, वहीं विगत 13 वर्षो में 110 नवीन आई.टी.आई प्रारंभ किए है ।  इनमें  लगभग 15 हजार से ज्यादा सीटों की वृद्धि हुई । वर्तमान में सभी 27 जिलों में 171 शासकीय आई.टी.आई. तथा 98 निजी आई.टी.आई संचालित है, जिनमें 34 हजार 193 युवाओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता है। राज्य सरकार द्वारा सुदूर चार आदिवासी बहुल विकासखंडों सहित कुल ं10 नवीन  आई.टी.आई दंतेवाड़ा, मैनपाट, ओड़गी, खडगवां, पेंड्रा, लोरमी, सिमगा, छुरिया जैजैपुर तथा नारी में  खोले गए हैं । आई.टी.आई भिलाई जिला दुर्ग को मॉडल आई.टी.आई. के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश के लगभग  हर जिले में पॉलीटेक्निक कॉलेज व हर ब्लॉक में आई.टी.आई की स्थापना की गई है। वर्ममान में मात्र आठ विकास खण्ड आई.टी.आई. विहीन है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के हर विकास खंड में एक सरकारी आई.टी.आई. खोला जाएगा,जिससे स्थानीय युवाओं को फायदा होगा । इसी प्रकार राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के सहयोग से भी  स्किल डेव्हलपमेंट योजना के तहत राज्य के सात नक्सल प्रभावित जिलों राजनांदगांव के अंबागढ़ चौकी, सरगुजा जिले के सीतापुर, बस्तर जिले के बकावंड, उत्तर बस्तर (कांकेर) के नररपुर, दंतेवाड़ा (दक्षिण बस्तर) के कोण्टा, बीजापुर के भैरमगढ़ तथा नारायणपुर के नारायणपुर में आई.टी.आई. शुरू किए गए है। वहीं आई.टी.आई के प्रशिक्षण में आधुनीकीकरण की दृष्टि से आई.टी.आई के व्यवसाय स्टेनोग्राफी हिन्दी एवं अंग्रेजी के प्रशिक्षणर्थियों को कम्प्यूटर से टायपिंग की सुविधा उपलब्ध करायी गई है। राज्य में स्टेनोग्राफी हिन्दी एवं अंग्रेजी में प्रशिक्षणरत युवाओं को लाभ होगा। नक्सल प्रभावित जिलों के हितग्राहियों को आवासीय प्रशिक्षण देने के लिए मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत सेन्ट्रल इन्सटीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नालॉजी (सीपेट) में नक्सल प्रभावित जिलो के तीन हजार से अधिक युवाओ ंको प्लास्टिक से संबंधित रोजगारपरक कार्सेस में आवासीय प्रशिक्षण की कार्रवाई की गई।
    छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात् राज्य शासन द्वारा तकनीकी शिक्षा के विस्तार को विशेष प्रथमिकता प्रदान की गयी है। यह इससे परिलक्षित  होता है, कि जहॉ राज्य गठन के समय 13 जिलों में संचालित 44 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई.) में पांच हजार 960 युवाओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता थी, वहीं वर्तमान में 27 जिलों में 171  शासकीय  तथा 98  निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई.)  में तकनीकी एवं गैर तकनीकी व्यवसायों में 34 हजार 193 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करने की क्षमता है । प्रदेश मे सरकारी और  निजी  269  आई.टी.आई में 20 हजार से ज्यादा  युवा प्रशिक्षणरत हैं । छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के बाद प्रदेश में रोजगार सेवा का संचालन समस्त जिलों में जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्रों से सफलता के साथ हो रहा है। प्रदेश के समस्त 27 जिलों में जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र स्थापित हैं ।
    छत्तीसगढ़ युवाओं के कौशल विकास अधिकार अधिनियम 2013 के तहत 14 वर्ष से 45 वर्ष के युवाओं को कौशल विकास का अधिकार प्रदान किया है । इसके तहत आवेदित दिनांक से 90 दिवस के भीतर कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। युवाओं को कौशल प्रशिक्षण हेतु 78 सेक्टर्स में लघु अवधि ( न्यूनतम 50 घेंट से लेकर अधिकतम 1800 घंटे तक) के 602 एम.ई.एस कोर्सेस उपलब्ध है। कौशल प्रशिक्षण हेतु युवओं को प्राधिकरण वेब-पोर्टल ऑन लाईन आवेदन करने की सुविधा प्रदान की गई है।  मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत अब तक 2 लाख 35 हजार 131 युवाओं को विभिन्न विभागों द्वारा प्रयोजित योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया गया है। केन्द्र शासन की स्किल डेवलपमेंट एनिशिएटिव योजना के तहत 92 हजार 665 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।    इसके अलावा राज्य में जेल बंदियों का कौशल विकास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजनाओं के तहत राज्य के विभिन्न जिले में एक हजार 679 जेल बंदियों को विभिन्न कौर्सेस में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सभी 27 जिलों में विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण की सुविधा देने के लिए  आजीविका कॉलेज (लाइवलीहुड कॉलेज) की स्थापना की गई है। इससे प्रत्येक जिले के कम पढ़े लिखे गरीब युवा जो संचालित आई.टी.आई या अन्य प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर सकते है, उन्हें अल्प अवधि का आवासीय प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर दिलाया जा रहा है। अब तक लगभग 30 हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है।  राज्य के युवाओं का कौशल उन्नयन सर्वोच्च प्राथमिकता में है। प्रदेश सरकार ने बेरोजगारों की मदद के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल की प्रतियोगी परीक्षाओं में परीक्षा शुल्क में एक सौ रूपए से तीन सौ रूपए तक विशेष छूट दी है। तकनीकी शिक्षा विभाग के अन्तर्गत राज्य में संचालित विभिन्न तकनीकी संस्थाओं के लिए पिछले साल की तुलना में चालू   वित्तीय वर्ष के बजट में वृद्धि की गयी है।
युवाओं की क्षमता में विकास के लिए  नवीन ‘‘युवा क्षमता विकास योजना‘‘प्रारंभ की गई है । इस योजना में युवाओं को व्यापम की विभिन्न परीक्षाओं में 100 रूपए प्रति परीक्षार्थी छूुट मिलेगीं । शासकीय आई.टी.आई. में अध्ययनरत छात्रों के शिक्षण शुल्क एवं परीक्षा शुल्क में 50 फीसदी की कमी की गई है। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के द्वारा आयोजित डिप्लोमा, स्नातक तथा स्नात्कोत्तर परीक्षाओं (बैंक पेपर्स छोड़कर) के परीक्षा शुल्क में पचास प्रतिशत की दर से कमी कर लगभग पचास हजार युवाओं को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही स्वरोजगार हेतु प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के हितग्राहियों के ब्याज दर में छह प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है,  वहीं राज्य शासन के जनशक्ति नियोजन विभाग द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले शिक्षित बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता योजनान्तर्गत रूपए 500 को बढ़ा कर अब प्रदेश सरकार द्वारा रूपए 1000 किया गया है। वहीं नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के समस्त जिलों में स्थानीय युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार चयनित व्यवसायों में अल्पकालिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह लक्ष्य तीन हजार प्रशिक्षणार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिए जाने का लक्ष्य रखा गया । रोजगार मेला के तहत निजी क्षेत्र के औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में रोजगार उपलब्ध कराने हेतु चालू वित्तीय वर्ष में एक करोड़ साठ लाख का प्रावधान किया गया है। रोजगार एवं स्वरोजगार केन्द्रों के कार्य को और व्यापक बनाने की दृष्टि से जिला रोजगार एवं स्वरोजगार केन्द्र दुर्ग को मॉडल कैरियर सेन्टर के रूप में विकसित किया गया है ।क्रमांक -3606




 

Date: 
27 Oct 2016