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विशेष लेख : रायपुर : साक्षर भारत कार्यक्रम: पढ़-लिखकर सशक्त बनने का अच्छा अवसर : राज्य में लगभग 33 लाख असाक्षरों में से अब तक 28 लाख बने साक्षर

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  • प्रेमलाल पटेल


रायपुर, 27 अक्टूबर 2016-किसी भी व्यक्ति को उसके सम्पूर्ण विकास के लिए शिक्षित होना जरूरी है। इनके शिक्षित होेने पर ही वे अपनी क्षमता और प्रतिभा का पूरा-पूरा उपयोग कर सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 29 दिसम्बर 2009 से साक्षर भारत कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जो वर्तमान में धमतरी, दुर्ग, बालोद तथा बेमेतरा जिले को छोड़कर अन्य सभी 23 जिलों में लागू है। कार्यक्रम के तहत साक्षरता के माध्यम से प्रदेश में व्यक्ति को न केवल पढ़ने-लिखने तथा अंक ज्ञान में आत्म निर्भर बनाया जा रहा है, वरन् इससे भी बढ़कर कार्यात्मकता-सशक्तिकरण और आगे सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके माध्यम से 80 प्रतिशत साक्षरता को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित है, जेण्डर गेप को 10 प्रतिशत कम कर क्षेत्रीय सामाजिक तथा आर्थिक असमानता को भी दूर किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 23 जिलों में 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के 33 लाख 14 हजार 993 असाक्षरों में से अब तक 27 लाख 45 हजार 29 को बुनियादी साक्षरता प्रदान किया जा चुका है।
राज्य में साक्षर भारत कार्यक्रम 23 जिलों के 130 विकासखंड के अंतर्गत आठ हजार 401 ग्राम पंचायतों में संचालित है। इसके तहत आठ हजार 401 लोक शिक्षा केन्द्र तथा तीन लाख 31 हजार 498 साक्षरता केन्द्र बनाए गए हैं, जिसमें 16 हजार 802 प्रेरक, तीन लाख 31 हजार 498 अनुदेशक और 288 कार्यक्रम समन्वयक कार्यरत हैं। राज्य में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व और स्कूल शिक्षा मंत्री श्री केदार कश्यप के सफल मार्गदर्शन में साक्षर भारत कार्यक्रम प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ ने देश में फिर एक बार राष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहराया और राज्य को प्रतिष्ठित साक्षर भारत पुरस्कार 2016 के लिए चुना गया। साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यो को देखते हुए 8 सितम्बर 2016 को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के करकमलों से यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर यह पुरस्कार पूरे देश में से एक राज्य, दो जिले तथा तीन पंचायतों को मिलता हैं। पुरस्कार की इन श्रेणीयों में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद यह दूसरा मौका हैं। जब राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण को यह पुरस्कार मिल रहा हैं। राज्य को इससे पहले 2013 में भी यह गौरव मिला था। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को दूसरी बार हासिल करते हुए छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर अपने कार्य की श्रेष्ठता दर्ज करा दी हैं। साक्षर भारत कार्यक्रम के बुनियादी साक्षरता के उद्देश्य को देखते हुए इस लक्ष्य संख्या को पंचायत लोक शिक्षा व साक्षरता केन्द्रांे से जोड़ा गया। इसके लिए उपयुक्त माहौल बनाया गया, और पठन-पाठन के बाद वर्ष 2010 से ही प्रतिवर्ष राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान एन.आई.ओ.एस. तथा राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की संयुक्त परीक्षा के माध्यम से शिक्षार्थियों का आंकलन कराया गया। आगे इन्हें बुनियादी शिक्षा -समतुल्यता से भी जोड़ा गया हैं। साथ ही कौशल विकास गतिविधियों से सम्मानित किया गया हैं। देश में छत्तीसगढ़ पहला राज्य है, जहॉ शहरी क्षेत्रों के लिए भी मुख्यमंत्री शहरी साक्षरता कार्यक्रम के राज्य सरकार ने अपने बजट में शामिल कर लिया हैं। साथ ही इस वर्ष से प्रदेश में साक्षरता के क्षेत्र में उत्कृष्ठ कार्य करने वाले इकाईयों को प्रेरकों व अक्षर सैनिकों को मुख्यमंत्री साक्षता सम्मान व अक्षर सम्मान प्रदान किया जाएगा। छत्तीसगढ़ एक मात्र प्रदेश हैं, जो दसवीं व बारहवीं के शिक्षार्थियों के लिए स्वयंसेवी साक्षरता अनुदेशक के रुप में कार्य करने पर, 10 बोनस अंक प्रदान करता हैं। प्रदेश में साक्षरता के समर्पित कार्यकताओं को सम्मानित , पुरस्कृत करने प्रदेश स्तरीय पुरस्कारों, सम्मान समारोह की शुरुआत की तथा प्रतिवर्ष पुरस्कृत करता हैं। साक्षरता के अकादमिक प्रकृति के कार्य को देखते हुए राज्य में पहल कर ‘राज्य स्त्रोत समूह‘ का गठन किया गया, जिसमें प्रौढ़ शिक्षा से संबंधित अनुभवी जन अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसकी अभिकल्पना राष्ट्रीय साक्षरता मिशन ने की थी।
प्रदेश में 8 सितम्बर से 14 सितम्बर तक प्रत्येक वर्ष साक्षरता सप्ताह का उल्लासपूर्ण आयोजन किया जाता है तथा जन-जन तक शिक्षा साक्षरता जीवन पर्यन्त सीखने का संदेंश दिया जाता हैं। कार्यक्रम की देखरेख तथा प्रभावी बनाए रखने अत्यन्त कुशल सूचना प्रबंधन तंत्र विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायत से लेकर विकासखंड जिला तथा अन्य संचार माध्यमों, फिल्ड भ्रमण के सहित वीड़ियो कान्फ्रेसिंग, सोशल मीडिया का भी पर्याप्त उपयोग किया जाता हैं। प्रदेश के साक्षरता कार्यबल के माध्यम से प्रधानमंत्री जी के सर्वोच्च प्राथमिकता कार्यक्रमों स्वच्छ भारत, प्रधानमंत्री जनधन योजना , प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में अद्भूत कार्य किया गया हैं। प्रेरकों के सहयोग से लगभग प्रधानमंत्री जनधन योजना के 25 लाख खाते खोला जाना एक कीर्तिमान ही कहा जाएगा। सांसद आदर्श ग्रामों में यह विशेष प्रयास करते हुए उन्हे पूर्ण साक्षरता की ओर अग्रसर किया गया है। मार्च 2016 तक इन सांसद आदर्श ग्रामों में अधिकांश पंजीकृत शिक्षार्थी, परीक्षा में बैठ चुके हैं। इसी तरह 75 विधायक ग्रामों को भी शत्-प्रतिशत साक्षरता की ओर बढ़ने प्रेरित किया गया हैं।
राज्य में साक्षरता अमले के लिए सेटअप बनाया गया है, यहां ग्राम पंचायत लोक शिक्षा केन्द्र के सुविधा युक्त सुरुचि सज्जापूर्ण तथा आकर्षक बनाया गया हैं। 55 केन्द्रों को आरईसीएल के सहयोग से आदर्श लोक शिक्षा केन्द्र बनाया गया हैं। जेलों में कैदियों को साक्षर बनाने का कार्य किया गया, राज्य में समतुल्यता की परीक्षा से लोगों को बुनियादी शिक्षा दिलाने की पहल की गई हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य, साक्षरता के एक नए युग में प्रवेश कर रहा हैं राज्य ने राज्य संसाधन केन्द्र द्वारा निर्मित डिजिटल प्रवेशिका के माध्यम से डिजिटल साक्षरता की दिशा में कदम बढ़ा दिये हैं। इस के लिए राज्य संसाधन केन्द्र छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित साक्षर भारत कार्यक्रम को लगातार प्रशिक्षण, सामग्री निर्माण, अनुसंधान, अनुश्रवण व वातावरण निर्माण के क्षेत्र में अकादमिक व तकनीकी संसाधन समर्थन करता आ रहा है। क्रमांक-3705/प्रेमलाल


 

Date: 
27 Oct 2016