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विशेष लेख : रायपुर : वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिये सुगम हुआ जन शिकायतों का निराकरण

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  •    छेदी लाल तिवारी

   रायपुर, 27 अक्टूबर 2016 / छत्तीसगढ़ में आम जनता की समस्याओं का निदान वीडियो कॉन्फ्रेन्सिग के जरिये किया जा रहा है । वीडियो कॉफ्रेन्सिग में आवेदक स्वयं उपस्थित होकर अपनी समस्या संबंधित अधिकारी को अवगत कराता है । रूबरू बातचीत के जरिये मौके पर ही शिकायों का निराकरण किया जाता है । इससे आम जनों का शासन-प्रशासन के सीधा संपर्क स्थापित हो रहा है । वर्ष 2015 मे वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से 1500 से अधिक जन शिकायतों का निराकरण किया गया है । देश में वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिये प्रतिदिन जन शिकायतों के निराकरण करने वाला छत्तीसगढ़ एक मात्र राज्य है ।
         छत्तीसगढ़ में आम जनों के शिकायतों का निराकरण वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिये प्रतिदिन किया जा रहा है । इसके लिये मंत्रालय (महानदी भवन) में स्थापित वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग केन्द्र (एन.आई.सी.) से प्रदेश के सभी 27 जिलों को जोड़ा गया है। इस केन्द्र में वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग से प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से डेढ़ बजे तक जिला मुख्यालय के वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग केन्द्र में उपस्थित शिकायतकर्ता के पक्ष को सुना जाता है । शिकायतकर्ता की शिकायत का विषय जिला स्तर का होने पर संबंधित विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी को बुलाकर उसके प्रकरण का निराकरण कराया जाता है । यदि शिकायत के निराकरण में संबंधित जिला अधिकारी कठिनाई महसूस करते हैं और शासन स्तर पर मार्गदर्शन चाहते हैं तो ऐसे प्रकरण में उस विभाग के सचिव अथवा संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारीे को मंत्रालय स्थित व्ही.सी. केन्द्र में  बुलाकर शिकायतों का निराकरण कराया जाता है । वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग से लोंगो की समस्याओं का निदान उनकी मौजूदगी में हो रहा है । वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग पर लोककल्याणकारी योजनाओं जैसे पी.डी.एस. दुकानों से राशन न मिलना, सीमांकन न होना, स्मार्ट कार्ड योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायतों का भी निराकरण किया जा रहा है । वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग में प्रतिदिन प्रदेश के आठ जिला मुख्यालयों के वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग केन्द्रों को एक साथ मंत्रालय स्थित वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग केन्द्र से जोड़कर शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है।  
    आम जनता से प्राप्त अर्जियों का रखरखाव कम्प्यूटराईज्ड प्रोग्रामिंग कराकर रखा जा रहा है जिससे लोक अर्जियों का रखरखाव और उन पर की गई कार्यवाही का संधारण सुचारू रूप से नियमित हो सके। यहां तक की राज्य में संचालित जनदर्शन के समस्त प्रकरणों की भी कम्प्यूटराईज्ड प्रोग्रामिंग की गई है। इससे निराकरण और मॉनिटरिंग में सुविधा हुई है और लोकअर्जियां समय पर मिल भी रहीं है। कम्प्यूटराईज्ड प्रोग्रामिंग से यह भी लाभ हुआ है कि सभी विभागों के सचिव, विभागाध्यक्ष अपने -अपने विभागों के प्रकरणों की समीक्षा सुगमता से कर सकते हैं। जनदर्शन के लिये सभी विभागों को लॉगइन आईडी और पासवर्ड आबंटित किया गया है।
    प्रदेश का कोई भी व्यक्ति घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकता है । आम नागरिकों के लिये राज्य शासन की वेबसाईट http:// janshikayat.cg.nic.in एवं भारत शासन की वेबसाईट http://pgportal.gov.in  पर भी शिकायत ऑनलाईन घर बैठे दर्ज करने की सुविधा है। इन पर प्राप्त होने वाली शिकायतों पर कार्यवाही जनशिकायत निवारण विभाग द्वारा ऑनलाईन एवं मैनुअल दोनों तरह से की जा रही है। शिकायत कर्ताओं के शिकायत पर की गई कार्यवाही को ऑनलाईन देखा जा सकता है, साथ ही जनशिकायत निवारण विभाग द्वारा आवेदक को लिखित मेें भी जानकारी दी जाती हेै। इसके अलावा अब ऑनलाईन शिकायतों से जनदर्शन की वेबसाईट http://cg.nic.in/jandarshan पर स्वयं मुख्यमंत्री  के समक्ष भी शिकायतकर्ता अपना प्रकरण निराकरण हेतु दर्ज कर सकता है। इस वेबसाईट पर दर्ज शिकायतों की अद्यतन कार्यवाही जानने के लिये शिकायतकर्ताओें को विशेष टोकन नंबर (12 अंको का कोड) भी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे आम जनता तक प्रशासन के भरोसेमंद और विश्वसनीय पहुंच सुनिश्चित हुई है।
    जनता से प्राप्त होने वाले आवेदनों, ऑनलाईन की गई शिकायतों पर कार्यवाही एवं वीडियो कान्फ्रेंसिग पर प्राप्त होने वाली शिकायतों की जानकारी नियमित संधारित हो और उसकी मॉनिटरिंग सतत् रूप से हो, इस हेतु सभी जिलों में कम से कम डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी को एवं मंत्रालय में कम से कम अवर सचिव स्तर के अधिकारी को जन शिकायत निवारण का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। लोकअर्जियों के निराकरण के लिए नोडल अधिकारी नामित करने की व्यवस्था प्रदेश के सभी विभागों में विकासखण्ड स्तर तक करने की भी तैयारी है । क्रमांक-3712/सी.एल.

 

Date: 
27 Oct 2016