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विशेष लेख : रायपुर : दुर्गम, अविद्युतीकृत क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति का विकल्प: सोलर पम्प

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  •   आलेख-दर्शन सिंह सिदार

दुर्गम, पहाड़ी क्षेत्रों में जहां विद्युत की पहुंच नहीं है, वहां प्रकाश के साथ शुद्ध पेयजल नल कनेक्शन के माध्यम से उपलब्ध कराना बहुत ही दुष्कर कार्य है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के अति उग्रवाद से प्रभावित जिलों की बसाहटों में नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना राज्य शासन के लिए चुनौती से कम नहीं है। ये जिले आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं, जहां की बसाहटें एक-दूसरे से काफी दूर-दूर बसे होते हैं। ऐसी बसाहटों के लिए एकीकृत नल-जल योजना व्यवहारिक रूप से संभव एवं उपयोगी नहीं होती हैं। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योजनाओं को तैयार कर क्रियान्वयन करने का उत्तर दायित्व राज्य शासन के लोक स्वास्थ्या यांत्रिकी विभाग का है। इन क्षेत्रों में नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति करने हेतु विभाग ने सोलर पम्प को सर्वोत्तम विकल्प के रूप में अपनाया है। बसाहटों में सौर ऊर्जा आधारित ड्यूअल ऑपरेटिंग पम्प के द्वारा जल प्रदाय योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। उच्च क्षमता वाले बोरवेल में सौर ऊर्जा संचालित सब मर्सिबल पम्प स्थापित कर तीन मीटर की ऊंचाई पर स्थित एचडीपीआई/स्टेनलेस स्टील टंकी एवं पाईप लाईन के द्वारा ग्रामीण आवासों में नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल प्रदाय किए जाने का प्रावधान है। इस प्रणाली में हैंडपम्प के बोरवेल में सोलर ऊर्जा आधारित सबमर्सिबल पम्प को हैण्डपम्प सिलेण्डर से नीचे स्थापित किया जाता है। सौर ऊर्जा के द्वारा सबमर्सिबल पम्प से जल निकास स्वतः होते रहता है। साथ ही हैण्डपम्पों का उपयोग भी किया जा सकता है। इस प्रकार एक बोरवेल से दो तरह से लाभ लिया जा सकता है। सौर ऊर्जा आधारित ड्यूअल ऑपरेटिक पम्प योजना का वित्तीय व्यवस्था नेशनल क्लीन एनर्जी फंड से 40 प्रतिशत, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम से 30 प्रतिशत तथा राज्यांश से 30 प्रतिशत की अनुपात में किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य के दस जिलों (पूर्व के 18 जिलों में से) के 1722 बसाहटें इस योजना के अंतर्गत चिन्हित की गई है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य उपरोक्त योजना का क्रियान्वयन कर अधिक से अधिक बसाहटों में जल प्रदाय करने वाले राज्यों में प्रथम हैं। उपलब्धि को देखते हुए भारत सरकार ने द्वितीय चरण के लिए राशि जारी कर दिया है, जिसके अंतर्गत 1054 सोलर पम्पों की स्थापना के कार्य प्रगति पर है। बसाहटों में सौर ऊर्जा संचालित पम्प से जल प्रदाय की व्यवस्था होने से ग्रामीणों के जीवन में परिवर्तन आना स्वभाविक है। अब उन्हें कम समय व कम मेहनत से स्वतः सतत स्वच्छ जल उपलब्ध हो रही है। जल जनित बीमारियों से मुक्त होकर स्वस्थ जीवन का लाभ ले रहे हैं। महिलाओं एवं परिवार के अन्य सदस्यों को भी अधिक सहुलियत हो रही है। लोग व्यक्तिगत एवं सामुदायिक साफ-सफाई के प्रति जागरूक हो रहे हैं। बसाहटों के स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी अच्छी हो रही है, क्योंकि साफ-सफाई एवं स्वच्छ जल उपलब्ध होने से बच्चे बीमार नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों में सेहत में सुधार आने से विविध कार्य कर आय में बढ़ोत्तरी हो रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है। इन सबको दृष्टिगत रखते हुए यह कहा जा सकता है कि सोलर ऊर्जा आधारित पम्प योजना उन बसाहटों के ग्रामीणों के लिए वरदान से कम नहीं हैं। (क्रमांक-3714)

 

Date: 
27 Oct 2016