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विशेष लेख : रायपुर : छत्तीसगढ़ में कृषि विपणन व्यवस्था का ढॉचागत विकास

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  • आलेख-दर्शन सिंह सिदार

कृषि विपणन से तात्पर्य कृषि उत्पादों का आवश्यक संसाधनों यथा-परिवहन, भण्डारण, प्रशीतन, मूल्य निर्धारण, पैकेजिंग-सोर्टिंग इत्यादि के द्वारा सुव्यवस्थित रीति से क्रय -विक्रय किए जाने से है। कृषि उत्पादों में विभिन्न फसलों के अलावा उद्यानिकी, पशुपालन, मत्सयिकी तथा वनोपज भी सम्मिलित होते हैं। कृषि विपणन आधुनिक कृषि का अपरिहार्य घटक होने के साथ-साथ आय वृद्धि का महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरा है। कृषक अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ता अथवा विपणन केन्द्रों में विक्रय करता है, जिससे विक्रय की अनिश्चितता तथा बिचौलियों से भी मुक्ति मिल जाती है। किसानों में बाजार के प्रति जागरूकता बढ़ी है। यही कारण है कि वे परम्परागत फसलों की खेती से विमुख होकर बाजारोन्मुख फसलों में गहरी रूचि ले रहे हैं। आज सफल किसान वही है, जिसकी एक ऑख हल में तो दूसरी बाजार में होती है।
केन्द्र तथा राज्य सरकार ने कृषि विपणन  व्यवस्था में आवश्यक सुधार तथा आधुनिक तकनीकी विकास से किसाों को साधन सम्पन्न बनाने के अनेक प्रयास किए हैं, जैसे विपणन केन्द्रों का कम्प्यूटरीकरण, उन्नत वजन मशीनों का प्रयोग, किसान पोर्टल, ईनाम इत्यादि। इसके अलावा रेडियो एवं टेलीविजन के माध्यम से भी कृषकों को कृषि विपणन से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है। छत्तीसगढ़ में मुख्य कृषि उत्पाद धान है, जिसे खरीफ एवं रबी दोनों सीजनों में खेती की जाती है। धान की अधिक खेती एवं पैदावार होने से छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। कृषि विपणन भी मुख्य रूप से धान फसल का होता है, जो प्रदेश के विभिनन विपणन समितियों के द्वारा किया जाता है। छत्तीसगढ़ में कृषि उपजों के क्रय-विक्रय करने के लिए कृषि मंडी बोर्ड का गठन छत्तीसगढ़ शासन कृषि विभाग की अधिसूचना 23 दिसम्बर 2000 के द्वारा की गई है। इसका प्रमुख उद्देश्य मंडी अधिनियम को लागू करना तथा उन पर नियंत्रण रखने के साथ वित्तीय प्रबंधन एवं अधोसंरचना विकास है। मंडी बोर्ड में कृषि उपज मंडी बोर्ड अधिनियम 1972 के प्रावधान लागू होत हैं। कृषि उपजों के विपणन तथा प्रशासन के सुचारू संचालन हेतु त्रि-स्तरीय व्यवस्था की गई है। इसमें छत्तीसगढ़ शासन का कृषि विभाग सर्वोच्च प्रशासनिक विभाग है, द्वितीय स्तर पर मंडी बोर्ड है (जो कृषि विभाग में संलग्न होकर कार्य करता है), तृतीय स्तर पर कृषि उपज विपणन समितियां हैं, जो मंडी बोर्ड के अधीन तथा उनके न्यायाधिकार क्षेत्र में कार्य करते हैं। मंडी बोर्ड के अध्यक्ष कृषि मंत्री होते हैं। इसके साथ ही अन्य प्रबंध संचालक तथा सचिव होते हैं। कृषि विपणन केन्द्रों में सुधार एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी मंडी बोर्ड की होती है। मंडी बोर्ड क्षेत्रीय स्तर पर कृषि उपजों के क्रय-विक्रय हेतु कृषि उपज विपणन संघ की गठन करती है। कृषि उपज मंडी विपणन समितियों ही यहां धान का क्रय शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर करती है। मंडी अधिनियम के अनुसार क्रयकर्ता को कृषि उपज मंडी समिति में पंजीकृत होनी चाहिए।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 73 मंडी, 97 उपमंडी तथा 14 अनाधिसूचित मंडी कार्यरत है। 73 मंडियों में 12 ग्रेड-ए, 17 ग्रेड-बी, 30 ग्रेड-सी तथा 14 ग्रेड-डी है। वर्ष 2015-16 में 1986 धान खरीदी केन्द्रों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की गई। छत्तीसगढ़ सरकार किसान हितैषी सरकार के रूप में स्थापित होने हर संभव प्रयास कर रही है। जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश के 14 मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़े जाने हेतु विस्तृत परियोजना का प्रस्ताव शासन के माध्यम से भारत सरकार को प्रेषित किया गया है। प्रथम चरण में वर्ष 2015-16 हेतु नावापारा, राजनांदगांव, कवर्धा, भाटापारा एवं कुरूद-द्वितीय चरण वर्ष 2016-17 हेतु रायपुर, दुर्ग, धमतरी, बिलासपुर एवं जगदलपुर-तृतीय चरण में वर्ष 2017-18 हेतु राजिम, बालोद, मुंगेली एवं रायगढ़ मंडियों को जोड़ा जाएगा। इन मंडियों के राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ने से उनमें आवश्यक सुविधाएं, संसाधन उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ ही वनोपज चिरौंजी, इमली, महुआ को भी राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा गया है। प्रदेश में फल-सब्जी के विपणन हेतु फल सब्जी मंडी/उपमंडी प्रांगण अधिसूचित है। वर्तमान में फल सब्जी प्रांगण दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़ तथा फल सब्जी उपमंडी प्रांगण तिफरा (बिलासपुर) में फल सब्जी का विपणन हो रहा है। इन मंडियों में क्लिनिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग सुविधा स्थापित किया जाना है। 04 स्थानों पर कोल्ड स्टोरेज एवं रायपनिंग चेम्बर बनाए जाने की कार्रवाई की जा रही है। रायपुर एवं पंखाजूर की फल सब्जी मंडियों को प्रारंभ कर सुविधा युक्त करना अपेक्षित है। कृषि उपजों को सुरक्षित रखने हेतु भण्डारण क्षमता में वृद्धि किए जाने की योजना है। वर्तमान में कुल 134700 मीटरिक टन क्षमता वाले गोदाम उपलब्ध है, जिसे आगामी वर्षों में 49 मंडी/उपमंडी प्रांगणों में दो लाख 58 हजार 500 मीटरिक टन विभिन्न क्षमता के गोदाम बनाए जाएंगे। प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों को बिना किसी मध्यस्था के सीधे अपने उपज को उपभोक्ता को विक्रय कर अधिकाधिक कीमत प्राप्त करने के उद्देश्य से किसान उपभोक्ता बाजारों की स्थापना की जा रही है। इसके अंतर्गत कृषि उपज मंडी बेमेतरा, बरमकेला एवं उपमंडी चिखली (रायगढ़) प्रस्तावित है।
एग्रीबिजनेस योजना के तहत प्रदेश के कृषि स्नातक/एग्रीक्लिनिक डिप्लोमा धारक युवकों को जिले के मंडी प्रांगण में उपलब्ध दुकानों में से 05-05 दुकानंे, जैविक उत्पाद, उद्यानिकी उत्पाद, दुग्ध उत्पाद एवं अन्य कृषि उत्पाद के विक्रय हेतु सुरक्षित रखी गई है। एगमार्क योजना अंतर्गत प्रदेश के 69 कृषि उपज मंडियों मेें कम्प्यूटर की स्थापना की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार के उपयुक्त ठोस पहल से स्पष्ट है कि सरकार किसानों की आय दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध एवं संवेदनशील है। राज्य सराकर यह बखूबी समक्षती है कि अन्नदाता की खुशहाली और समृद्धि से ही राज्य विकास पथ पर प्रशस्त होगी। सुदूर अंचल के ग्रामीण किसानों को शिक्षा के लोक व्यापीकरण के माध्यम से कृषि विपणन के प्रति जनजागृति का प्रचार-प्रसार किए जाने से विपणन केन्द्रों में किसानों के पंजीयन में वृद्धि हो रही है। यह किसानों के विपणन के प्रति जागरूकता का परिचायक है। छत्तीसगढ़ सरकार कृषि विपणन व्यवस्था के सुद्ढ़ीकरण के लिए निश्चित रूप से ठोस रणनीति के तहत कार्य कर रही है। (क्रमांक-3715)
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Date: 
27 Oct 2016