Homeविशेष लेख : रायपुर : छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के बड़ते कदम

Secondary links

Search

विशेष लेख : रायपुर : छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के बड़ते कदम

Printer-friendly versionSend to friend

आलेख-शशिरत्न पाराशर

रायपुर, 28 अक्टूबर 2016 /व्यक्ति के सम्पूर्ण विकास और उसकी संभावनाओं को अनंत आकार देने के लिए शिक्षा का होना अनिवार्य है। अनिवार्य होने से यहां तात्पर्य है कि शिक्षा हमारा मौलिक अधिकार हो। भारत को युवाओं का देश कहा जाता है, एक आंकलन के मुताबिक कुल जनसंख्या का 65 प्रतिशत हिस्सा 35 वर्ष से कम आयुवर्ग का है। इसका मतलब यह हुआ कि और देशों की तुलना में यहॉं काम करने को ज्यादा हाथ और दिमाग है।
    सरकार का काम सिर्फ शिक्षा उपलब्ध कराना ही जरूरी नहीं वरन उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और उसे प्राप्त होने वाली सुविधाओं का समाज के हर वर्ग के लोगों तक पहुंच  को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। आम लोगों को शिक्षा के प्रति आकर्षित करना सरकार का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है । छत्तीसगढ़  सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने जन-सम्पर्क अभियानों से जमीनी स्तर पर विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी चीजों में व्यापक स्तर पर सुधार किया गया । उच्च शिक्षा विभाग में संबंद्ध अधिकारियों की जनता के बीच उपस्थिति से त्वरित निणर्य लिए गए है। कई मूलभूत नीतियों व योजनाओं को अंदरूनी स्तर पर संगठित करने के लिए दीर्घकालीक प्रबिद्धता अनिवार्य की गई है। राज्य निर्माण के बाद कुछ समय जरूर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में  गति धीमी  थी । छत्तीसगढ़ राज्य निमार्ण के बाद प्रथम विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा चुनी गई राज्य सरकार के गठन के बाद  अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ उच्च शिक्षा  पर विशेष जोर दिया गया है।
राज्य सरकार की पिछले बारह साल की विकास यात्रा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कई उपलब्धियां हासिल की है। सरकार की इस विकास यात्रा में उच्च शिक्षा विभाग निश्चय ही अनेक चुनौतियों तथा बाधाओं को पार कर उपलब्धियों के स्वर्णिम शिखर को छूने के लिए प्रयासरत रही है, यही कारण है कि अंचल का प्रत्येक क्षेत्र उच्च शिक्षा के आलोक से आज आलोकित है । छत्तीसगढ़ राज्य में ऐसा कोई भी अंचल नहीं, जहां उच्च शिक्षा का सूर्य प्रकाशमान न हो रहा हो। सुदूर आदिवासी अंचलों तथा दुर्गम वन प्रांतरों में भी आज उच्च शिक्षा का दीप प्रज्जवलित हो रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य के अस्तित्व में आने के पश्चात उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मुश्किले, चुनौतियॉं तथा बांधाएं कम नहीं थी । विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों की अपर्याप्त संख्या, भवन विहीन महाविद्यालय, आदिवासी अंचलों में अपर्याप्त विश्वविद्यालय, तथा महाविद्यालयो जैसी चुनौतियां जहां विद्यमान थी वहीं हमारे पाठ्यक्रम भी समयानुकूल नहीं थे । प्राध्यापकों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी । इन सभी बाधाओं को सरकार द्वारा पार करने का यथासंभव प्रयास किया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य ने बढ़ी उपलब्धियां हासिल की है। नया रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानल (ट्रिपल आईटी) 23 जून 2015 से प्रारंभ हुआ । भिलाई नगर के लिए 07 अगस्त 2016 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भवन निर्माण होने तक रायपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में शुरूआत हुई । राज्य के सभी 27 जिलों के युवाओं को पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए 47 शासकीय कॉलेजों में विभिन विषयों में स्नातकोत्तर पाठयक्रम स्वीकृत किए गए है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा योजना अनुदान योजना-कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए सिर्फ एक प्रतिशत ब्याज पर अधिकतम चार लाख रूपए की ऋण सुविधा दी जा रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को इस योजना के तहत ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। यह योजना दो लाख रूपए तक वार्षिक आमदनी वाले परिवारों के विद्यार्थियों के लिए संचालित है।
राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अब तक शासकीय कॉलेजो में विभिन्न विषयों मे सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पदो के विरूद्ध लगभग एक हजार बीस  अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की गई है। वही विभाग द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग को सहायक प्राध्यापकों के 966 पदों की भर्ती के लिए मांग पत्र भेजा है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य की विशेष पहचान हो, यहां का युवा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग छाप छोड़ सके, इसके लिए उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों का अधिकाधिक विस्तार करने के साथ-साथ गुणवत्तायुक्त उत्कृष्ट शिक्षण की व्यवस्था करना विभाग की प्राथमिकता रही है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पश्चात ही उच्च शिक्षा विभाग इस दिशा में निरंतर प्रयत्नशील रहा है कि उच्च शिक्षा प्रदेश के युवाओं के लिए सर्वसुलभ हो, इस हेतु राज्य के सुदूर अंचलों में भी नवीन महाविद्यालय की स्थापना के साथ-साथ वर्ष 2008 में दो विश्वविद्यालय बस्तर विश्वविद्यालय, जगदलपुर और सरगुजा विश्वविद्यालय, अम्बिकापुर में की गई है। हाल ही में दुर्ग विश्वविद्यालय,दुर्ग में स्थापना की गई है। दूरस्थ शिक्षा पद्धति से शिक्षा प्रदान करने के लिए  वर्ष 2005 में पं. सुन्दर लाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय, बिलासपुर  और जन संचार माध्यमों की बढ़ती महत्ता और इस क्षेत्र में सुशिक्षा की दृष्टि से कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में  2005 की स्थापना अंचल के लिए समसामयिक सौगात थी। राज्य के 100 महाविद्यालयों में ई-लाईब्रेरी हेतु पायलट परियोजना प्रारंभ करने कल ए चिप्स को पच्चीस लाख रूपए की राशि प्रदान की गई है। सूचना प्रौद्योगिकी के युग में प्रदेश के बड़े महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयय परिसर को ॅप.थ्प  युक्त बनाए जाने  के संबंध में प्रथम चरण के अन्तर्गत प्रदेश के सभी अग्रणी कॉलेजों  एवं विश्वविद्यालयों में ॅप.थ्प   सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। इस कड़ी में सरकारी कॉलेज दिग्विजय स्नातकोत्तर, राजनांदगांव स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुगर्, कवर्धा एवं बिलासपुर का सम्पूर्ण कैम्पस वाई-फाई युक्त हो गया है, जबकि अन्य महाविद्यालयों में आंशिक रूप से यह सुविद्या उपलब्ध है।
राज्य में प्रतिवर्ष नवीन शासकीय महाविद्यालयों की स्थाापना से महाविद्यालयों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है।  दो वर्ष पूर्व  बीस नवीन कॉलेज, पाली, जिला-कोरबा, मैनपुर, फिगेंश्वर, जिला-गरियाबंद,  फरसगांव जिला-कोण्डागांव, सोनहत जिला-कोरिया, भैरमगढ़, जिला बीजापुर, बतौली, जिला-सरगुजा, तोकापाल, जिला-बस्तर, सरोना जिला-कांकेर, रामचंद्रपुर जिला बलरामपुर, जरही, जिला सूरजपुर, मंगचुआ, बेलोदी, जिला-बालौद, अम्बिकापुर जिला- अम्बिाकपुर, साल्हेवारा, जिला-राजनांदगांव, पिपरिया जिला-कबीरधाम, जोबी, जिला-रायगढ़, भाटरापारा, जिला-बालौदाबाजार-भाटापारा में स्थापित किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन समस्त महाविद्यालयों में  ंएक साथ कला, वाणिज्य एवं विज्ञान संकायों को आरंभ किया गया है और इनमें से अधिकांश महाविद्यालय सुदूर वनांचलों में स्थित है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात पहली बार इस वर्ष तीन अशासकीय महाविद्यालयों को अशासकीय महाविद्यालय नागरिक अशासकीय महाविद्यालय, नंदनी नगर, अहिवारा, जिला-दुर्ग, ग्राम्यभारतीय विद्यापीठ, हरदीबाजार, जिला-कोरबा और कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, देवेन्द्रनगर, रायपुर का शासकीयकरण किया गया है। इसी के साथ ही उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए चालू शिक्षा सत्र में जशपुर जिले के कांसाबेल, ग्राम जिला दुर्ग के खुर्सीपार (भिलाई) जिला -दूर्ग, नवागढ़ जिला जांजगीर-चॉपा में नवीन महाविद्यालय शुरू किए। इन्हें मिलाकर अब राज्य में शासकीय महाविद्यालयों की संख्या 214 हो गई है।
 प्रदेश सरकार द्वारा महिला -शिक्षा को बढ़ा देने के उद्ेश्य से विशेष ध्यान दिए जाने के परिणामस्वरूप राज्य में अब तक इक्कीस कन्या महाविद्यालय अस्तित्व में आ चुके है। वर्ष 2000 में 15 शासकीय कन्या महाविद्यालय थे। राज्य शासन द्वारा वर्तमान शिक्षण सत्र से  सभी शासकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत एवं प्रवेश लेने वाली छात्राओं को अब स्नातक स्तर तक शिक्षा निःशुल्क दी जा रही हैं। शिक्षा सत्र 2012-13 में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में छत्तीसगढ़ी में स्नातकोत्तर कक्षा प्रारंभ की गई है। सीटो की संख्या 100 रखी गई है। प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं शतप्रतिशत रहा है । राज्य में स्नातक एवं राज्य में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए पाठ्य पुस्तकें एवं संदर्भ पुस्तकें हिन्दी में प्रकाशित कर उपलब्ध कराने के लिए जनवरी 2006 में छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी की स्थापना की गई। प्रदेश सरकार द्वारा राज्य गठन के समय राज्य में कुल 03 विश्वविद्यालये 116 शासकीय महाविद्यालय थे। वर्तमान में कुल आठ  राज्यकीय विश्वविद्यालय एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है ।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के अन्तर्गत राज्य स्तरीय उच्चतर शिक्षा योजना तैयार की जा रही है। इस योजना का वैशिष्ट्य यह है कि समस्त संस्थाओं द्वारा अपने प्रस्तावों में अकादमिक, परीक्षा, प्रशसनिक सुधार तथा पाठ्यक्रम निर्माण एवं सुधार को समाहित करते हुए अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्ताव तैयार किया गया है। ताकि नवीन विषयों,रोजगारोन्मुखी पाठयक्रमों एवं अधोसंरचना का सृदृढ़ीकरण के प्रस्तावों को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अभिदृश्य योजना में शामिल किया गया है। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रदेश के दो महाविद्यालयों शासकीय दूधाधारी बजरंग स्नातकोत्तर महाविद्यालय,रायपुर और शासकीय वाल्मिकी महाविद्यालय,भानुप्रतापपुर  को कम्यूनिटी कॉलेज की सूची  में शामिल किया गया है। विभाग द्वारा शासकीय कॉलेजों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत आवश्यकतानुसार व्ही.टी.पी. ( वोकेशनल टेªनिग प्रोवाइडर) के रूप में पंजीयन किया जा रहा है। प्रदेश में शिक्षण सत्र 2016-17 में शासकीय कॉलेजों में छात्र-छात्राओं की संख्या दो लाख से ज्यादा  है जबकि शिक्षण सत्र 2003-2004 में उच्च शिक्षा  में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या 65 हजार 683 थी । मुख्यमंत्री युवा सूचना क्रान्ति योजना के अन्तर्गत प्रदेश में बच्चों को टेबलेट का वितरण किया गया है । राज्य गठन के बाद वित्तीय वर्ष 2003-04 में  उच्च शिक्षा विभाग का वार्षिक बजट में 129.57 करोड़ था जो बढ़कर चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में दो हजार 776 करोड़ हो गया है। (क्रमांक-3728)


 

Date: 
28 Oct 2016