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विशेष लेख : रायपुर : छत्तीसगढ़ गांवों में बिजली के साथ पहुंच रहा खुशियों का उजियारा

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  • आलेख-आनंद प्रकाश सिंह सोलंकी

बिजली के मामले में आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के दूर दराज के गांवों में बिजली पहुंचने से इन गांवों में अब खुशियों का उजियारा बिखरने लगा है। अब अबूझमाड़ क्षेत्र के बिजलीविहीन गांवों में भी बिजली पहुंचाने की तैयारी है। इस वर्ष मई माह में जशपुर जिले के मनोरा विकासखण्ड के पहाड़ी से घिरे गांव अलोरी में आजादी के 69 वर्ष बाद बिजली पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह दो मई को लोक सुराज अभियान के अंतर्गत अलोरी पहुंचे थे, जहां गांव की चौपाल में इस गांव के लोगों ने उनसे बिजली की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने एक माह में इस गांव में बिजली की पहुंचाने का आश्वासन दिया था, लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के 48 घंटों में ही इस गांव में बिजली पहुंचा दी गयी। इस गांव के साथ, जशपुर जिले के झारगांव, डूमरटोली और खरवाटोली में भी बिजली पहुंची। बिजली के आने से गांव की गलियों और घरों में रात में रोशनी होने लगी। बिजली से इन गांवों में खेतों की सिंचाई, शुद्धपेय जल की व्यवस्था में आसानी होगी। बच्चे रात में पढ़ाई कर सकेंगे, महिलाओं को घरेलु काम निपटाने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा और लोग मनोरंजन के लिए टेलीविजन देख सकेंगे। सुदूर वनांचलों के बलरामपुर-रामानुगंज जिले के जोकपाठ, लहसुनपाठ, बाड़ीचलगली और सीतापुर जैसे प्रदेश के विभिन्न जिलों के अनेक गांवों में सौर ऊर्जा से बिजली पहुंचायी गयी है।

वर्ष 2018 तक शत-प्रतिशत गांव होंगे रौशन

राज्य शासन द्वारा वर्ष 2018 तक प्रदेश के शत-प्रतिशत गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश में बिजली उत्पादन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि और विद्युत अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लगातार किए जा रहे कार्यों से यह लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकेगा। प्रदेश में विद्युतीकृत गांवों, विद्युतीकृत सिंचाई पम्पों की संख्या और तीस यूनिट बिजली निःशुल्क प्राप्त करने वाले गरीब परिवारों की संख्या तथा विद्युत संबंधी अधोसंरचना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य के गठन के समय प्रदेश में विद्युतीकृत गांवों की संख्या 17,108 थी, जो अब बढ़कर 18,968 हो गयी है। प्रदेश में गांवों के विद्युतीकरण का प्रतिशत बढ़कर 96.93 हो गया है। राज्य गठन के समय यह प्रतिशत 87.43 था। विद्युतीकृत मजरे-टोलों की संख्या भी दस हजार 375 से बढ़कर 26 हजार 980 हो गयी है। प्रदेश के ऐसे गांव और मजरे-टोले जहां परम्परागत रुप से बिजली की लाइन डाल कर बिजली पहुंचाना संभव नहीं है, ऐसे 1525 गांवों और मजरे-टोलों में सौर ऊर्जा के जरिए बिजली पहुंचाई गयी है।

प्रदेश के 14 जिले हुए पूर्ण विद्युतीकृत

वर्तमान में प्रदेश के 27 जिलों में से 14 जिलों में शतप्रतिशत गांवों के विद्युतीकरण का काम पूरा हो गया है। इन जिलों में रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमंुद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, जशपुर, बलरामपुर और कोरिया शामिल हैं। जिन गांवों में बिजली पहुंची वहां लोगों को अपने दैनिक कामों के निपटारे और बच्चों को स्कूल की पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय मिलने लगा है। ग्रामीण जन-जीवन में और भी अधिक सक्रिया आ गयी है। राज्य में विद्युत उत्पादन, वितरण और पारेषण अधोसंरचना के विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी द्वारा इस अवधि में लगभग बाइस हजार करोड़ रुपए का निवेश किया गया। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी की कुल विद्युत उत्पादन  क्षमता 3424.70 मेगावाट है, जो राज्य के गठन के समय 1360 मेगावाट थी। गरीब परिवारों को दिए जा रहे एकलबत्ती कनेक्शनों की संख्या सोलह लाख तक पहुंच गयी है। राज्य गठन के समय केवल छह लाख 30 हजार परिवारों को एकलबत्ती कनेक्शन दिए गए थे। इसी तरह आज विद्युतीकृत सिंचाई पम्पों की संख्या बढ़कर तीन लाख 73 हजार हो गयी है। राज्य गठन के समय मात्र 72 हजार 400 सिंचाई पम्प विद्युतीकृत थे। कृषक जीवन ज्योति के अंतर्गत किसानों को फ्लेट रेट का विकल्प दिया गया है। इस योजना में किसानों को प्रति एच.पी. एक सौ रुपए के मान से भुगतान करना होता है। इस योजना में किसानों को तीन हॉर्स पावर तक के पंप पर सालाना छह हजार यूनिट और तीन से पांच हॉर्स पावर तक के सिंचाई पम्पों पर साढ़े सात हजार यूनिट बिजली निःशुल्क दी जा रही है। इस वर्ष प्रदेश की 117 तहसीलों के सूखा प्रभावित किसानों को नौ हजार यूनिट निःशुल्क दी गयी। बारहवी पंचवर्षीय योजना के अंत तक प्रदेश की विद्युत स्थापित क्षमता 22 हजार मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है, जो देश के लिए विद्युत उत्पादन के लक्ष्य का एक चौथाई हिस्सा है।

देश का पहला बिजली कटौती मुक्त राज्य

पिछले आठ वर्षो से बिजली कटौती से मुक्त छत्तीसगढ़ में सस्ती दर पर बिजली की आपूर्ति की जा रही है। विकसित राज्यों के आंकलन में प्रति व्यक्ति बिजली की औसत खपत भी एक महत्वपूर्ण पैमाना है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत तीन सौ यूनिट प्रति व्यक्ति से बढ़कर 1724 यूनिट प्रति व्यक्ति हो गयी है। इस मामले में भी छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में अति उच्चदाब केन्द्र एवं पारेषण प्रणाली का विस्तार भी तेजी से किया जा रहा है। वर्तमान में पारेषण प्रणाली के 96 अति उच्चदाब केन्द्र संचालित हो रहे हैं। प्रदेश गठन के समय इन केन्द्रों की संख्या केवल 27 थी। प्रदेश में अति उच्च दाब लाइनों का विस्तार लगातार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में ग्यारह हजार 414 सर्किट किलोमीटर से अधिक अति उच्च दाब लाइन हैं। राज्य स्थापना के समय इनकी लंबाई 5205 किलो मीटर थी। राज्य में विद्युत उत्पादन में हो रही वृद्धि के अनुरूप पारेषण कंपनी ने अपनी पारेषण क्षमता एक हजार तीन सौ पचास मेगावाट से बढ़ाकर छः हजार एक सौ नब्बे मेगावाट से भी अधिक कर ली है। प्रदेश में पहली बार गैस आधारित अतिउच्चदाब उपकेन्द्र का निर्माण रायपुर के रावणभाटा में किया गया है। इसी तरह पहली बार हाईब्रिड तकनीक पर आधारित अति उच्चदाब उपकरणांे का उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति हेतु दोहरी पारेषण-वितरण प्रणाली विकसित करने की अभिनव पहल की गई है। ऐसी स्थिति में किसी एक प्रणाली से विद्युत व्यवधान उत्पन्न होने पर दूसरी वैकल्पिक प्रणाली से विद्युत आपूर्ति की जा सकेगी। राज्य की विद्युत प्रणाली का तेजी से विस्तार और आधुनिकीकरण कर उपभोक्ता सेवा में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी और इसे उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक बनने की पहल की गयी है। राज्य गठन के समय प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या 18.91 लाख थी, जो वर्तमान में बढ़कर लगभग 45 लाख हो गई है। शहरी एवं ग्रामीण उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली देने हेतु नये 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्रों का निर्माण कार्य भी युद्धस्तर पर किया गया, वर्तमान में उपकेन्द्रों की संख्या 248 से बढ़कर 966 से अधिक हो गई है।

विद्युत अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण के लिए पांच वर्ष में 7466 करोड़ की योजना

छत्तीसगढ़ में तेज गति से विद्युत विकास करने एवं विद्युत अधोसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु पांच वर्षीय केपिटल इनवेस्टमेन्ट प्लान (सीआईपी) बनाया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी की इस योजना के अन्तर्गत 7466 करोड़ रूपये के कार्य कराए जाएंगे। आगामी पांच वर्षो के दौरान 965 करोड़ रूपये लागत के कार्य कराए जाएंगे, जिनमें बिजली की चोरी की रोकथाम के लिए खुले तार के स्थान पर नौ हजार किलोमीटर केबल लगाने का काम भी शामिल है। गांवों और शहरों की विद्युत अधोसंरचना को उन्नत एवं विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना, मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाय) एवं एकीकृत विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) प्रारंभ की गई है।
बिजली उपभोक्ताओं को देयक जमा करने के लिए प्रदेश में 65 एटीपी मशीन, 32 राष्ट्रीय तथा निजी बैंक से नेट पेमेट तथा 656 पे-पाईंट सेंटर के माध्यम से बिजली बिल का भुगतान की सुविधा दी गयी है। विद्युत उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी सूचना निःशुल्क देने हेतु ई- संपर्क सेवा प्रारंभ की गई है। वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर मासिक विद्युत बिल, भुगतान, विद्युत शिकायत, विद्युत अवरोध की सूचना तथा 4 घंटे से अधिक ब्रेकडाउन की निःशुल्क जानकारी एसएमएस से दी जाती है। उपभोक्ताओं सेवा-सुविधाओं की जानकारी पॉवर कंपनी की वेब साईट ‘‘डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट सीएसपीडीसीएल डॉट जीओव्ही डॉट आई एन‘‘ पर तथा सेन्ट्रल कॉल सेंटर के दूरभाष क्रमांक 1912 पर ली जा सकती है। प्रदेश में सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्पों का सिंचाई और पेयजल के लिए उपयोग किया जा रहा है।

‘सौर सुजला योजना’ में इस वर्ष किसानों को मिलेंगे 11 हजार सोलर सिंचाई पम्प

‘सौर सुजला योजना’ के अंतर्गत इस वर्ष किसानों को अनुदान पर तीन तथा पांच हार्स पावर के ग्यारह हजार सोलर सिंचाई पम्प अनुदान पर देने का लक्ष्य है। आने वाले ढाई वर्षों में किसानों को 51 हजार सोलर पम्प अनुदान पर दिए जाएंगे। बस्तर के लगभग ऐसे दो सौ दुर्गम गांव जहां अब तक बिजली नहीं पहुंच पायी है, वहां ढाई वर्ष में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है। दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत 119 गांवों में बिजली पहुंचायी जाएगी। प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में लो-वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए 33/11 के.व्ही. क्षमता के 198 विद्युत उपकेन्द्रों का निर्माण माह जून 2017 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। इन विद्युत उपकेन्द्रों में से राजनांदगांव जिले में 30, दुर्ग जिले में 27, रायगढ़ और रायपुर जिले में 22-22, महासमुंद जिले में 18, सरगुजा जिले में 17, बिलासपुर जिले में 15, जांजगीर-चांपा जिले में 14, बस्तर (जगदलपुर) जिले में 12, कांकेर जिले में 11 और कोरबा जिले में 10 विद्युत उपकेन्द्रों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 132 के.व्ही. और उससे अधिक क्षमता के 29 विद्युत उपकेन्द्रों और रायता से जगदलपुर तक 400 के.व्ही. क्षमता की विद्युत लाईन स्थापित की जा रही है। इन विद्युत उपकेन्द्रों का निर्माण आगामी दो वर्षों में पूर्ण करने के निर्देश दिए। बिजली की बचत के लिए राज्य सरकार द्वारा ‘उजाला’ योजना के अंतर्गत एल.ई.डी. बल्बों के वितरण की बड़ी योजना प्रारंभ की गयी है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 16 लाख गरीब परिवारों को तीन-तीन एल.ई.डी. बल्ब निःशुल्क और ए.पी.एल. उपभोक्ताओं को दस एल.ई.डी. बल्ब 85 रुपए प्रति बल्ब की दर पर दस रुपए की मासिक किश्त पर दिए जाएंगे। नौ वाट के एल.ई.डी. बल्ब से एक सौ वाट के सामान्य बल्ब के बराबर रोशनी होती है, इन बल्बों के उपयोग से बिजली की बचत होगी।
राज्य सरकार द्वारा किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को अन्य राज्यों की तुलना में कम दर पर गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति की जा रही है। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बिजली की 24 घंटे उपलब्धता से उद्योगों के विकास का अच्छा वातावारण निर्मित हुआ। डिजिटल छत्तीसगढ़ के सपने को साकार करने में प्रदेश में बिजली की निरंतर उपलब्धता का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा। (क्रमांक-3739)

Date: 
28 Oct 2016