Homeविशेष लेख : रायपुर : खेती-किसानी से भी बनती खुशहाली की राह : खेती-किसानी की बेहतरी से किसानों और खेतिहर मजदूरों के जीवन में आई खुशियां

Secondary links

Search

विशेष लेख : रायपुर : खेती-किसानी से भी बनती खुशहाली की राह : खेती-किसानी की बेहतरी से किसानों और खेतिहर मजदूरों के जीवन में आई खुशियां

Printer-friendly versionSend to friend
  •  आलेख - राजेश श्रीवास


दुर्ग, 29 अक्टूबर 2016 / छत्तीसगढ़ की 80 प्रतिशत जनसंख्या का जीवन यापन खेती और खेती से जुड़े अन्य रोजगार मूलक काम-धंधों से जुड़ा हुआ है। नया राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ में किसानों और खेतिहर मजदूरों की खुशहाली के लिए खेती-किसानी को फायदेमंद बनाने के लिए ठोस रणनीति बनाई गई है। राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं और कार्यक्रमों के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ में कृषि विकास दर राष्ट्रीय कृषि विकास दर की तुलना में अधिक है। खेती-किसानी की लागत को कम करने के लिए अनेक लाभकारी योजनाएं शुरू की गई। है।
खेती-किसानी की बेहतरी के लिए सिंचाई सुविधाएं बढ़ाना भी सबसे ज्यादा जरूरी है। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। सरकार ने पानी के एक-एक बूंद का सदुपयोग करने ठोस कार्य-योजना बनाई है। प्रदेश सरकार के भागीरथ प्रयासों के फलस्वरूप विगत 13 साल में सिंचाई क्षमता 23 प्रतिशत से बढ़कर 34.63 प्रतिशत हो गई है। इस अवधि में लगभग 10 प्रतिशत अधिक सिंचाई क्षमता विकसित की गई है। इन योजनाओं के खेत खलिहानों तक पहुंचने से किसानी और किसानों की हालत सुधरी है। राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से खेती-किसानी की दिशा और किसानों की दशा मे सुधार आया है।
छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए वर्ष 2010, 2012 और 2013 के लिए राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है। इन पुरस्कारों से साबित होता है कि छत्तीसगढ़ अब फिर से ’धान का कटोरा’ बन गया है। दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 2014 में दलहन उत्पादन के लिए कृषि कृर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013 में किसानों के लिए अपने घोषणा पत्र में किए गए सभी वायदे पूरे कर किसानों का दिल जीत लिया है। समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान में तीन सौ रूपए प्रति क्विटल बोनस तथा किसानों को ब्याज मुक्त ऋण देने का वायदा घोषणा के सात महीने में ही पूरा हो गया।
किसानों का बढ़ा आत्मविश्वास
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की योजना से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल रहा है। खेती-किसानी के लिए बिना ब्याज के अल्प कालीन कृषि ऋण देने की योजना ने किसानों में आत्म विश्वास जगाने का काम किया है। किसान खेती-किसानी शुरू करने के पहले ही इस योजना के तहत नकद राशि और खाद-बीज की व्यवस्था कर लेते हैं। कृषि विकास को महत्व देते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013-14 में पहली बार अलग से कृषि बजट प्रस्तुत किया। किसानों को फसलों की बोआई से लेकर कटाई तक विभिन्न कार्यों के लिए नगद राशि की जरूरत पड़ती है। फसलों की बोआई के समय बीज और खाद की व्यवस्था के साथ ही शुरू हो जाती है किसानों की जरूरतें। पहले किसानों को 14 प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण  मिलता था। अब  किसानों को ब्याज मुक्त कृषि ऋण दिया  जा रहा है। खरीफ मौसम 2016 में विभिन्न फसलों के लिए प्रदेश के साढ़े नौ लाख से अधिक किसानों को दो हजार 813 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण दिया गया है।
लघु और सीमांत किसानों के कालातीत ऋण को माफ कर हजारों किसानों को राहत पहुचाई गई। खरीफ मौसम 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने से किसानों में नया विश्वास जागा है। योजना के तहत किसानों को अब हर प्रकार की प्राकृतिक आपदा में बीमा सुरक्षा मिलेगी।  किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए जब हम नगद और बहुफसलीय व्यवस्था पर जोर देते हैं तो सबसे पहले जरूरी है बिजली की समुचित और सुचारू आपूर्ति। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में भी कारगर निर्णय लेते हुए किसानों को अनेक सहूलियतें दी हैं। किसानों को खेती के लिए 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के मामले में छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। करीब तीन लाख 27 हजार किसानों के कृषि पंपों को बिजली से जोड़कर ऐतिहासिक काम किया गया है। पंपों के उर्जीकरण के लिए 75 हजार रूपए तक की सहायता दी जाती है। राज्य सरकार की  किसान हितैषी नीति से किसानों को मीटर किराया, फिक्स चार्ज और विद्युत उपकर से मुक्ति मिल गई है। पांच हार्स पावर तक के कृषि पंपों के लिए 7 हजार 500 यूनिट निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराकर प्रदेश सरकार ने किसानांे के हित में बहुत बड़ा काम किया है।
अनुसूचित जाति एवं जनजातीय वर्ग के किसानों को किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत ट्यूबवेल खनन के लिए 43 हजार रूपए की सहायता दी जा रही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के किसानों को 35 हजार रूपए तथा सामान्य वर्ग के किसानों को 25 हजार रूपए का अनुदान दिया जा रह है। अब तक 77 हजार 345 किसानों को इस योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। खेती की जमीनों को बंजर होने से बचाने के लिए जैविक खेती आज की प्रमुख जरूरत के रूप में सामने आयी है। राज्य के चार जिलों दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और गरियाबंद को पूर्ण जैविक खेती जिला बनाने की दिशा में योजनाएं शुरू की गई है। प्रदेश के अन्य जिलों के एक-एक विकासखंड में जैविक खेती मिशन योजना लागू की गई है।
सभी विकास खण्ड मुख्यालयों में कृषि सेवा केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जहां से किसानों को किराए पर कृषि उपकरण दिए जाते हैं। किसानों को उनके खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता और प्रकार की जानकारी देने मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण योजना चालू की जा रही है। इसके तहत आगामी मार्च माह तक प्रदेश के सभी 37 लाख किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड दिए जाएंगे। इनके अलावा कृषक समृद्धि योजना, रामतिल उत्पादन प्रोत्साहन योजना, राज्य गन्ना विकास योजना, दलहन बीज प्रोत्साहन योजना, भू-जल संवर्धन योजना,लघुतम सिंचाई योजना, शकम्भरी योजना, सूक्ष्म सिंचाई योजना , खलिहान अग्नि दुर्घटना राहत योजना, बलराम कृषि यांत्रिकीकरण प्रोत्साहन योजना , पैडी ट्रांसप्लांटर पर राज्य शासन की अतिरिक्त अनुदान योजना, कम्बाईन हार्वेस्टर पर अतिरिक्त अनुदान योजना, कृषि श्रमिकों के दक्षता उन्नयन योजना, ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल को प्रोत्साहन देने की योजना, कृषि सुधार के लिए विस्तारण कार्यकम, राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई योजना,राष्ट्रीय कृषि विकास योजना हरित कांति विस्तार योजना, लघु प्रोत्साहन योजना,कृषि यांत्रिकीकरण प्रोत्साहन योजना,केन्द्र क्षेत्रीय बीज योजना आदि से किसानों के लिए खेती-किसानी सुविधाजनक हुई।
पशुपालन और मछलीपालन बना आमदनी का अतिरिक्त जरिया
किसानों के लिए खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन आय का अतिरिक्त जरिया होता है। प्रदेश सरकार की समग्र कृषि विकास की नीति में पशुपालन और मछली पालन को बढ़ावा देना भी शामिल है। सरकार की योजनाओं के सहयोग से आज अनेक किसान इन दोनों रोजगार मूलक काम-धंधों को अपनाकर उन्नति की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। पशुधन विकास विभाग द्वारा डेयरी विकास की योजना का दायरा बढ़ाते हुए नई डेयरी उद्यमिता विकास योजना शुरू की गई है। इसके लिए 12 लाख रूपए की इकाई लागत निर्धारित की गई है। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए 66 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया लि है। पशुधन विकास के लिए कामधेनु विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। प्रदेश के अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में लाखों परिवार अतिरिक्त आमदनी के लिए मुर्गीपालन को अपनाते है। प्रदेश सरकार ने  नक्सल प्रभावित जिला दंतेवाड़ा में नवीन कुक्कुट पालन प्रक्षेत्र की स्थापना करने का निर्णय लिया है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों परिवारों ने मछली पालन को अपना व्यवसाय बनाया है।
प्रदेश सरकार ने मछली पालन को आगे बढ़ाने के लिए भी अनेक प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की गई। छत्तीसगढ़ में मछली पालन के लिए उपलब्ध एक लाख 635 हेक्टेयर जल क्षेत्र में से 94 प्रतिशत क्षेत्र को मछली पालन के लिए विकसित कर दो लाख 69 हजार से अधिक मछुआरों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। छत्तीसगढ़ आज मछली बीज आपूर्ति के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। वर्ष 2015-16 में 149 करोड़ मछली बीज का उत्पादन किया गया। अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन की क्षेत्र में छत्तीसगढ़ छठवां बड़ा राज्य है। मछुआरों के कल्याण के लिए मछुआ कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है। प्रदेश के कबीरधाम जिले के मुख्यालय कवर्धा में प्रथम मात्स्यिकी महाविद्यालय की स्थापना की गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख जलाशयों में मछली पालन की क्षमता बढ़ाने के लिए केजकल्चर की स्थापना की जा रही है।
फल-फूलों और साग-सब्जियों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि
छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी फसलों की भी व्यापक संभावनाएं है। इन संभावनाओं को मूर्त रूप देने के लिए राज्य मेें फलों, साग-सब्जियों और मसाला फसलों की खेती के लिए हर संभव सहायता किसानों को मिल रही है। उद्यानिकी फसलों का रकबा पिछले दस साल में चार गुणा तथा उत्पादन पांच गुणा बढ़ा है। वर्ष 2004-05 में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा दो लाख एक हजार 555 हेक्टेयर था, जो बढ़कर वर्ष 2015-16 में सात लाख 92 हजार 943 हेक्टेयर हो गया है। इसी प्रकार 17 लाख 46 हजार 724 मीटरिक टन फल-फूल, औषधि और सुंगधित तथा सब्जियों का उत्पादन वर्ष 2004-05 में हुआ था। वर्ष 2015-16 में 91 लाख 62 हजार 691 मीटरिक टन उत्पादन हुआ। राज्य सरकार की टपक सिंचाई योजना, सूक्ष्म सिंचाई योजना, शाकंभरी योजना और स्पिं्रकलर योजना से साग-सब्जी और मसाला फसलों का रकबा और उत्पादकता बढ़ाने में खासी मदद मिली है। ( क्रमांक-3742)




 

Date: 
29 Oct 2016