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विशेष लेख : रायपुर : प्रकृति ने छत्तीसगढ़ को दिया है जल संसाधन का अनमोल तोहफा : जल संसाधन के बेहतर उपयोग से तेरह साल में सिंचाई क्षमता 11 प्रतिशत से अधिक बढ़ी : दशकों पुरानी सिंचाई योजनाओं को पूर्ण करने अभियान लक्ष्य भागीरथी

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  •     आलेख-राजेश श्रीवास

   छत्तीसगढ़ के बहुमूल्य संसाधनों में जल संसाधन का विशेष महत्व है। प्रकृति ने जल संसाधन का अनमोल तोहफा छत्तीसगढ़ को दिया है। प्रदेश की सभी दिशाओं में नदी-नाले बहते हैं। इस राज्य की 80 प्रतिशत जनसंख्या खेती-किसानी पर निर्भर है। इसीलिए छत्तीसगढ़ के विकास के लिए जल संसाधनों का प्रभावी और समुचित उपयोग बहुत जरूरी है। प्रदेश सरकार ने जल संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए हर खेत तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने प्राथमिकता से कार्य किया है।  सरकार ने पानी के एक-एक बूंद का सदुपयोग करने ठोस कार्य-योजना बनाई है। प्रदेश सरकार के भागीरथ प्रयासों के फलस्वरूप सिंचाई क्षमता में 11 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश सरकार ने अगले बारह वर्ष अर्थात् 2028 तक सतही जल के माध्यम से 32 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखकर व्यू रचना की है।
    राज्य शासन ने यहां के जल संसाधनों के समुचित विकास और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्य की खेती वाली जमीन का 75 प्रतिशत अर्थात् करीब 43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। भौगोलिक संरचना के अनुसार प्रदेश को पांच नदी कछारों में बांटकर सिंचाई सुविधा बढ़ाने के कारगर पहल की गई है। इनमें गंगा कछार उत्तर में, नर्मदा कछार पश्चिम में, ब्राहृणी कछार उत्तर पूर्व में, महानदी कछार मध्य में तथा गोदावरी कछार दक्षिण में स्थित है। राज्य गठन के समय 13 लाख 28 हजार हेक्टेयर में सिंचाई होती थी, जो बढ़कर अब 19 लाख 73 हजार हेक्टेयर हो गया। इस प्रकार पिछले तेरह साल में छह लाख 45 हजार अतिरिक्त रकबे में सिंचाई सुविधा विकसित की गई है। वर्ष 2003 की तुलना में प्रदेश की सिंचाई क्षमता में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
    प्रदेश की नदियों में एनिकट बनाकर सिंचाई के साथ-साथ उद्योगों और निस्तारी के लिए पानी दिया जा रहा है। राज्य में 617 एनिकटों तथा स्टापडेमों के निर्माण तथा जल संरक्षण के उपायों से भू-जल संरक्षण की दिशा में प्रदेश सरकार को समुचित सफलता मिली है। केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय द्वारा अभी हाल में ही कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार छत्तीसगढ़ के तीन जिलों ने बारिश के पानी को सहेजने में देश के दस जिलों में अपना स्थान बनाया है। इनमें राजनांदगांव, बस्तर और सरगुजा जिला शामिल हैं। इसी सर्वे के अनुसार छत्तीसगढ़ देश में बरसात के पानी को संचय कर भू-जल स्तर बढ़ाने में तीसरे स्थान पर है।
    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत राज्य के 10 प्रतिशत से कम सिंचाई सुविधा वाले जिलों को केन्द्रित करते हुए कार्य योजना बनाई गई है। प्रदेश सरकार ने लम्बे समय से अपूर्ण सिंचाई योजनाओं को एक समय सीमा में पूरा करने के उद्देश्य से अभियान लक्ष्य भागीरथी के रूप में अभिनव पहल की गई है। पिछले तीन पांच माह में ही इस योजना को आशातीत सफलता मिल रही है। लक्ष्य भागीरथी अभियान के तहत वर्ष 2016-17 में 108 अपूर्ण योजनाओं में से 88 योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन योजनाओं के पूरा होने से 71 हजार 322 हेक्टेयर रकबे में सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। इस दिशा में अभी तक उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले माह तक 22 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा विकसित कर ली गई है। प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ में सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रीप तथा स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धित को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। सूक्ष्म सिंचाई योजना के तहत उद्यानिकी फसलों जैसे फल-फूल, सब्जियों के साथ-साथ दलहन-तिलहन की खेती में बेहतर उपयोग किए जा सकते हैं।
    त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत 122 योजनाएं पूर्ण कर ली गई है। इस योजना में तीन वृहद सिंचाई परियोजनाएं जैसे केलो, खारंग और  मनियारी के अलावा 110 अन्य लघु सिंचाई योजनाओं का निर्माण जारी है। प्रदेश में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य मद के अतिरिक्त नाबार्ड से सहायता प्राप्त की गई। नाबार्ड के 12वें चरण से 21वें चरण तक कुल 126 सिंचाई योजनाएं शामिल की गई है। इनमें से 38 योजनाएं पूरी हो गई है। इन परियोजनाओं से 24 हजार 146 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आयाकट के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में 11 हजार 215 हेक्टेयर क्षेत्र में फिल्ड चैनल का निर्माण किया गया है। इनमें तीन हजार 112 स्ट्रक्चर लगाए गए हैं। इसी प्रकार 79 हजार 562 मीटर में लाइनिंग की गई है।(क्रमांक-3757/राजेश)


 

Date: 
31 Oct 2016