Homeरायपुर : विशेष लेख : छत्तीसगढ़ के विकास में महिलाओं की महती भूमिका

Secondary links

Search

रायपुर : विशेष लेख : छत्तीसगढ़ के विकास में महिलाओं की महती भूमिका

Printer-friendly versionSend to friend
  •     चित्ररेखा श्रीवास

    रायपुर, 07 नवम्बर 2016 / किसी भी समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका प्रारंभ से ही सराहनीय रही है, क्योंकि वह जननी और जीवन का आधार है। चूंकि वह दो परिवारों के बीच सेतु का कार्य करती है। घर, परिवार और समाज के विकास में वह महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है। नया राज्य होते हुए छत्तीसगढ़ जिस प्रकार विकास के पथ पर अग्रसर है। कला, संस्कृति, खेल, कृषि, शिक्षा, उद्योग हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ अपने विकास का लोहा मनवा चुका है। अनेक उपलब्धियां छत्तीसगढ़ ने इन वर्षों में हासिल की है, जिससे उसकी ख्याति देश ही नहीं विदेश में भी फैली है। छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास में यहां के महिलाओं की भूमिका सराहनीय है जो पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकार प्रदेश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। घर की साफ-सफाई, खेतों, कल-कारखानों में काम, विभिन्न प्रशासनिक पदों से लेकर शासन स्तर पर इनकी भागीदारी देखी जा सकती है।
    राज्य सरकार ने प्रदेश की महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में सुधार लाने हेतु अनेक योजनाएं संचालित की है, क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का मानना है कि परिवार को सशक्त बनाने हेतु महिला का सशक्त होना आवश्यक है, और सशक्त परिवार से सशक्त समाज का निर्माण होगा। महिलाओं को सशक्त बनाने में महिला स्व सहायता समूहों की विशेष भूमिका रही है। प्रदेश में 50 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों में रेडी-टू-ईट बनाने ओर वितरण का काम तथा स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों में गर्म पका भोजन तैयार करने का सौ प्रतिशत काम महिला स्व सहायता समूह कर रही है। विगत कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में कुपोषण के स्तर में लगातार कमी आई है। जिसके लिए महिला स्व सहायता समूहों की सहायता से शासन द्वारा चलाये गये विभिन्न अभियान के योगदान सराहनीय रहे हैं। महिला समूहों द्वारा करीब चार हजार शासकीय उचित मूल्य की दुकानों का संचालन भी किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में कुपोषण के दर में जो कमी आयी है उसमें यहां की 60 हजार मितानिनों की सेवा को नकारा नहीं जा सकता।
    राज्य सरकार ने महिलाओं को सशक्त समर्थ बनाने हेतु अनेक योजनाओं को क्रियान्वित किया है। पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने हेतु पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण 50 प्रतिशत किया गया, जिससे इन संस्थाओं में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ी। पंचायती राज संस्थानों में बढ़ोत्तरी से महिलाओं में जागरूकता आयी तथा ये अपने अधिकारों के प्रति सजग हुई है।
    महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा राजधानी रायपुर स्थित जिला चिकित्सालय परिसर में ‘सखी’ नाम से वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। यहां सभी वर्ग की महिलाओं को सहायता मार्गदर्शन तथा संरक्षण प्रदान किया जाता है। सखी में अब तक महिलाओं की समस्याओं से संबंधित दो सौ से अधिक मामले सुलझाये जा चुके हैं। इस केन्द्र में मदद के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 181 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रमुख योजनाओं में से एक ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत प्रदेश के रायगढ़ जिले का चयन हुआ है। योजना 22 जनवरी 2015 से लागू की गई। राज्य शासन द्वारा भी घटते बाल लिंगानुपात तथा बालिकाओं के प्रति समाज में सकारात्मक सोच बढ़ाने के लिए ‘नोनी सुरक्षा योजना’ दिनांक एक अप्रैल 2014 से लागू की गई है। महिलाओं पर होने वाले अत्याचार अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने के लिए प्रदेश में राज्य महिला आयोग का गठन किया गया है। जिसके अध्यक्ष पद पर माननीया श्रीमती हर्षिता पाण्डेय तथा सदस्य के रूप में श्रीमती खिलेश्वरी किरण साहू कार्यरत है। सभी 27 जिलों में महिलाओं के लिए टोल फ्री हेल्पलाईन नं.-1091 शुरू की गई है। जिसमें किसी भी संकट के वक्त फोन लगाकर महिलाएं शिकायत दर्ज करवा सकती है। महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों के हल हेतु प्रत्येक जिला मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक के नियंत्रण में महिला परामर्श केन्द्र की स्थापना की गई है। महिलाओं पर होने वाले अपराधों की जांच के लिए राज्य के सात जिलों में अुनसंधान इकाईयों की भी स्थापना की गई है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ में महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और कानूनी हर तरह का संरक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने पसंद और रूचि का कार्य करने के लिए आगे आए और स्वयं तथा परिवार का जीवन स्तर ऊंचा उठा सकें।
    गरीब परिवार की कन्या के विवाह के संबंध में आने वाली आर्थिक कठिनाई के निवारण हेतु मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना संचालित है। इस योजनांर्तगत वित्तीय वर्ष 2014-15 में 6197 कन्याओं को लाभान्वित किया गया है। तथा वित्तीय वर्ष 2015-16 में कुल वित्तीय लक्ष्य तेरह करोड़ रूपए का बजट आबंटन उपलब्ध है। उक्त आबंटन के विरूद्ध जनवरी 2016 तक 1384 कन्याओं को लाभान्वित किया गया है।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंर्तगत सूखे से प्रभावित किसानों को उनकी कन्या के विवाह हेतु 15 हजार प्रति विवाह के स्थान पर 30 हजार प्रति विवाह प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। यह राशि  संबंधित कलेक्टर द्वारा सीधे सूखे प्रभावित किसान के खाते में जमा की जाएगी। यह योजना 01 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक लागू रहेगी। इस योजना का उद्देश्य विवाह में फिजुलखर्ची रोकना, सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना, निर्धनों के मनोबल, आत्म सम्मान में वृद्धि एवं उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार, सामूहिक विवाह में प्रोत्साहन तथा विवाहों में दहेज के लेनदेन को रोकना है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ की महिला निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है तथा अपने घर-परिवार, समाज के साथ प्रदेश के विकास में अपना बहुमूल्य योगदान दे रही है। नारी शक्ति को नमन है। क्रमांक-3843


 

Date: 
07 Nov 2016