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विशेष-लेख : संजीवनी एम्बुलेंस मरीजों के लिए बनी जीवनदायनी

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  • आलेख- ओमप्रकाश डहरिया

        राज्य सरकार आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। फलस्वरूप राज्य के चिकित्सालयों की सुविधाओं में बढ़ोत्तरी, चिकित्सा महाविद्यालयों में वृद्धि और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का भी उन्नयन किया जा रहा है। स्वास्थ्य केन्द्रों के उन्नयन के साथ ही आधुनिक जीवनशैली के कारण हृदयघात, मधुमेह, रक्तचाप, कैंसर जैसी बीमारियों को रोकने के लिए पृथक इकाई स्वास्थ्य संस्थाओं में स्थापित की जा रही है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को टोलफ्री नम्बर के माध्यम से प्राथमिक उपचार की जानकारी, परामर्श एवं उपलब्ध सेवाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। रामचरितमानस से उद्धृत है कि राम-रावण यु़द्ध के समय मेघनाथ द्वारा लक्ष्मण पर शक्ति बाण लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते  हैं। उनकी जान बचाने के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत पड़ी तो महावीर हनुमान हिमालय की कंदराओं में संजीवनी बूटी खोजते रहे। संजीवनी के बारे में जानकारी नहीं होने से वह द्रोणागिरी पहाड़ के एक टुकड़े को ही ले आए। राज्य सरकार ने ऐसे ही विपत्ति की स्थिति में आपात्काल स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए महावीर हनुमान के काम के रूप में संजीवनी 108 सेवा प्रारंभ की है, 25 जनवरी 2011 से शुरू इस योजना में सर्वप्रथम 36 एम्बुलेंस से सेवा प्रारंभ की गई थी। वर्तमान में 240 एम्बुलेंस के जरिये सभी सत्ताइस जिलों के 146 विकासखण्डों में आपातकाल स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार संजीवनी 108 सेवा की सफलता को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य के क्षेत्र में और अधिक बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 100 और एम्बुलेंस बढ़ाने के लिए कार्ययोजना बना रही हैं। इसके अलावा प्रदेश के ऐसे दूरस्थ अंचल विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां डॉक्टरों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन क्षेत्रों में भी संजीवनी एक्सप्रेस मरीजों को डॉक्टरों तक पहुंचाने में वरदान साबित हो रही है। आपातकाल स्थिति में लोगों की जिंदगी बचाने के लिए एक-एक पल कीमती होता है। ऐसी स्थिति में जब किसी मरीज को अस्पताल लाया जाता है तो एम्बुलेंस से अस्पताल लाए जाने के दौरान प्राथमिक उपचार एम्बुलेंस में ही मिल जाता है। ‘108 संजीवनी’ एम्बुलेंस सेवा के तहत माह जून की स्थिति में छत्तीसगढ़ में 10 लाख 73 हजार लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। प्रदेश में वर्तमान में 240 संजीवनी वाहनों के जरिए आपात् स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही है। 108 संजीवनी एक्सप्रेस के जरिए आपातकालीन स्थिति में मरीजों को सातों दिन चौबीसों घंटे निःशुल्क परिवहन सेवा उपलब्ध कराया जाता है। 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवा के लिए स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नम्बर 108 पर प्रदेेश में लगभग 112 लाख कॉल प्राप्त हुए हैं। इसमें आपातकालीन चिकित्सा के लिए 11 लाख कॉल किए गए। लोगों के कॉल पर परिस्थिति के आधार पर शत-प्रतिशत मरीजों के लिए एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराया गया। ये एम्बुलेंस दुर्घटनाओं और हृदयाघात जैसी गंभीर आपात स्थिति के अलावा गर्भवती माताओं को डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंचाने की सुविधा दे रही है, जिससे प्रदेश में संस्थागत प्रसव बढ़ा है और इसके फलस्वरूप मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर भी घटी है। दूरदराज के पहुंच विहीन क्षेत्रों में भी इन एम्बुलेंस की सेवाएं है, जिला नारायणपुर, यहां के घने जंगलों और उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों में जहां 108 संजीवनी एम्बुलेंस पहुंच नहीं पाती, ऐसे क्षेत्रों में आपातकाल सेवा के लिए ‘बाइक एम्बुलेंस’ सेवा प्रारंभ की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए संजीवनी साबित हो रही बाइक एम्बुलेंस से शासकीय अस्पतालों में दूरस्थ अंचल की 274 गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया। बाइक एम्बुलेंस से पहाड़ी क्षेत्रों की अधिक से अधिक गर्भवती महिलाओं और शिशुओं की जान बचाने मंे सफलता मिल रही है। बाइक एम्बुलेंस की सफलता को देखते हुए ऐसे क्षेत्रों में और भी बाइक एम्बुलेंस चालाने की दिशा में तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के लोगों के समृद्ध स्वास्थ्य के लिए किए जा रहे कारगर प्रयासों से नागरिकोें को बेहतर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है। (क्रमांक-4713)
 

Date: 
29 Dec 2016