Homeरायपुर : डॉ.रमन सिंह अब ’रेडियो वाले बाबा’ के नाम से भी हुए लोकप्रिय : आकाशवाणी से मुख्यमंत्री की मासिक रेडियो वार्ता को मिली भारी लोकप्रियता

Secondary links

Search

रायपुर : डॉ.रमन सिंह अब ’रेडियो वाले बाबा’ के नाम से भी हुए लोकप्रिय : आकाशवाणी से मुख्यमंत्री की मासिक रेडियो वार्ता को मिली भारी लोकप्रियता

Printer-friendly versionSend to friend

रायपुर, 03 अप्रैल 2016

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ को प्रदेश के सभी 27 जिलों में आम जनता से उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है। मुख्यमंत्री राज्य में गरीबों को सस्ता चावल देने की अपनी महत्वपूर्ण योजना से हाल के वर्षों में चाउंर वाले बाबा के नाम से लोकप्रिय हुए और अब विगत सात महीनों से जारी अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम  के जरिए प्रदेश के जन-जन में रेडियो वाले बाबा के नाम से भी लोकप्रिय हो गए हैं।
आकाशवाणी से हर महीने के दूसरे रविवार को सवेरे 10.45 से 11 बजे तक प्रसारित होने वाले कार्यक्रम की लोकप्रियता का यह आलम है कि लोग घरों और चौपाल में प्रसारण का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस कार्यक्रम की सात कड़िया प्रसारित हो चुकी हैं और प्रत्येक प्रसारण के बाद लोग मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। अपने पत्रों में किसी ने उन्हें रेडियो वाले बाबा कहा तो किसी ने कार्यक्रम को संबल प्रदान करने वाला कहा है। मुख्यमंत्री की इस मासिक रेडियो वार्ता कार्यक्रम की अगली कड़ी का प्रसारण इस महीने की 10 तारीख को होगा। कार्यक्रम के पुनः प्रसारण को लेकर मुख्यमंत्री को भारी तादाद में श्रोताओं से पत्र मिले हैं। श्रोताओं के पत्रों में की गयी मांग को देखते हुए इसके पुनः प्रसारण का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम का पुनः प्रसारण सोमवार 11 अप्रैल को प्रातः 10.45 बजे से 11 बजे तक होगा।
मुख्यमंत्री को कबीरधाम (कवर्धा) जिले के निवासी श्री कमलकांत गुप्ता अपने पत्र में लिखते हैं कि इस बार के बजट में आपके द्वारा गांव, गरीब और किसान की चिंता करते हुए विशेष पिछड़ी जनजातियों को रेडियो बांटने का निर्णय लिया गया है, इसके लिए हम लोग आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं। रायपुर जिले के खमतराई के श्री हीरा साहू ने लिखा है कि हम लोग ’’रमन के गोठ’’ कार्यक्रम पूरी तन्मयता के साथ सुनते हैं। यह कार्यक्रम हमें बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि राज्य के मुखिया स्वयं विभिन्न प्रकार की गतिविधियों की जानकारी देते हैं। कार्यक्रम की प्रत्येक कड़ी ज्ञानवर्धक और प्रेरणात्मक लगती है। राजनांदगांव निवासी श्री झग्गर राम साहू ने 13 मार्च को प्रसारित कार्यक्रम को सफल और अनुपम बताते हुए मुख्यमंत्री को बधाई दी है। कबीरधाम जिले के ग्राम पिपरिया निवासी श्री दुर्गाराम साहू ने अपने पत्र में 25 पैसे वाला मेघदूत कार्ड छपवाने की मांग की है। बेमेतरा जिले के श्री भुवन दास जांगड़े ने लिखा है कि ’’रमन के गोठ’’ कार्यक्रम को शाम की सभा में पुनःप्रसारित करवाएं, ताकि कार्यक्रम न सुन पाने वाले श्रोता फिर से यह कार्यक्रम सुन सके। विकासखंड नवागढ़ जिला बेमेतरा निवासी श्री नारायण प्रसाद वर्मा ने कार्यक्रम की प्रतिक्रिया में भेजे गए पत्र में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को ‘रेडियो वाले बाबा’ के नाम से सम्बोधित किया है।  आगे लिखते हैं कि यदि रेडियो नहीं होता तो हम कैसे ’’रमन के गोठ’’ सुन पाते।
गरियाबंद जिले के ग्राम फुलझर निवासी श्री योगेश्वर साहू ने कार्यक्रम की सफल प्रस्तुति के लिए मुख्यमंत्री और आकाशवाणी परिवार को बधाई दी है। उन्होंने लिखा है कि ’’रमन के गोठ’’ कार्यक्रम की जगह-जगह चर्चा हो रही है। आपकी प्रस्तुति प्रभावी है। धरसीवा विकासखंड जिला रायपुर के आकांक्षा रेडियो लिस्नर्स क्लब के श्री छेदूलाल यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अपनी भावनाएं कुछ इस तरह से व्यक्त की हैं-’’रमन के गोठ कार्यक्रम हमें बहुत अच्छा लगता है। प्रदेश के मुखिया की हर बात हमें संबल प्रदान करती है। हम सब चाहते हैं कि यह कार्यक्रम चलता रहे, जिससे सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास जन-जन तक पहुंच सके।’’ दुर्ग जिले से श्री छगन लाल नागवंशी ने लिखा है-’’रमन के गोठ कार्यक्रम बहुत ही सराहनीय है। मुख्यमंत्री की छवि एक जनसेवक के रूप में प्रभावी रही है। ग्राम कोरबी बिलासपुर जिले के श्री मोहन सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कुछ इन शब्दों में अपनी बात रखी है-’’मुझे बहुत खुशी होती है कि आप रेडियो के माध्यम से प्रदेश की जनता को संबोधित करते हैं और संचार क्रांति के क्षेत्र में रेडियो की अहम भूमिका है। इस प्रसारण से आप जनता के दिलों में बस गए हैं।’’ जांजगीर-चांपा जिले के श्री श्रीराम खुंटे ने मनरेगा के तहत 50 दिनों का अतिरिक्त रोजगार देने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। कार्यक्रम की बढ़ती लोकप्रियता के चलते स्कूली बच्चों के लिए स्कूलों में और लोक शिक्षण केन्द्रों मंे भी इसके पुनः प्रसारण और श्रवण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

क्रमांक-54/रचना
 

Date: 
03 Apr 2016