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रायपुर : विशेष लेख : उन्नत खेती बदलेगी किसानों की तकदीर: राष्ट्रीय कृषि मेला बनेगा माध्यम

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दूसरे साल में ही मेले की भव्यता की चर्चा देशभर में
स्कूलों में (किसान पाठशाला) पढ़ने सभी किसान दिखे उत्सुक

  आलेख-राजेश श्रीवास

   रायपुर, 04 फरवरी 2017 / वैसे तो सभी तीज-त्यौहार और मेले-मड़ई खेती-किसानी और किसानों से सीधे जुड़े होते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दूसरी बार आयोजित किसानों के कुंभ ’राष्ट्रीय कृषि मेले’ का प्रदेश के किसानों के लिए अलग महत्व है। खेती-किसानी की बेहतरी की दिशा में लगातार मिल रही सफलता के इस दौर में राष्ट्रीय कृषि मेला छत्तीसगढ़ के छोटे-बड़े सभी किसानों के लिए निश्चित ही प्रेरणादायक साबित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को थीम बनाकर बीते 27 जनवरी से 31 जनवरी तक रायपुर में आयोजित दूसरे राष्ट्रीय कृषि मेले से छत्तीसगढ़ की खेती किसानी की पहचान भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो गई है। राष्ट्रीय कृषि मेला इस मायने में भी विशेष रहा, कि मेले में खेती-किसानी और किसानों के लिए राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी एक ही जगह मिली।
    इस बात में कोई दो राय नहीं है कि प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी को उन्नत बनाने लगातार कार्य करने की जरूरत है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है खेती-किसानी को फायदे का व्यवसाय बनाकर इसमें किसानों को जागरूक कर रूचि पैदा करना। विगत कुछ वर्षों में इस दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाये गए कदमों से खेती-किसानी की हालत निश्चित रूप से बेहतर हुई है। प्रदेश के लगभग एक लाख किसानों की उत्साह के साथ भागीदारी भविष्य में छत्तीसगढ़ के कृषि विकास में जरूर कारगर साबित होगी। बस्तर के सुदूर सुकमा जिले से लेकर सरगुजा तथा महासमुंद से लेकर कवर्धा जिले तक अर्थात् प्रदेश के सभी 27 जिलों के लगभग डेढ़ लाख से अधिक किसानों की मेले में सहभागिता से किसानों की खेती-किसानी के प्रति सोच में जरूर बदलाव आएगा। पर्याप्त वर्षा, उपजाउ धरती, अनुकूल मौसम और मेहनतकश किसान छत्तीसगढ़ को खेती-किसानी के मामले में भी शिखर तक पहुंचाने में सफल होंगे। मेले में जिस प्रकार से अनाज, दलहन, तिलहन और फल-फूलों की खेती के साथ-साथ पशुपालन तथा मछली पालन के संबंध में राज्य सरकार के विभिन्न विभागांे, अन्य पड़ोसी राज्यों, केन्द्र शासन के उपक्रमों तथा निजी कम्पनियों के स्टॉलों में किसानों को मिली खेती-किसानी की बुनियादी और उन्नत तौर तरीकों की जानकारी इस व्यवसाय को फायदेमंद बनाने में सहायक होगी।
    इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सामने जोरा गांव के पास 27 जनवरी को मेले के औपचारिक शुभारंभ के बाद अंतिम दिन 31 जनवरी तक मेले में लगे सभी स्टॉल किसानों से खचाखच भरे रहे। जिलों से आए किसान समूहों में स्टॉलों में घूम-घूमकर खेती-किसानी की नई और उन्नत तकनीकों को जानने-समझने जुटे रहे और रूचि लेकर जानकारी लेते रहे। दस एकड़ के एरिया में लगे भव्य दूसरे राष्ट्रीय कृषि मेला अनाज, दलहन-तिलहन फसलों, फल-फूलों की खेती, पशुपालन, मछलीपालन, कुकुट पालन की जानकारियों का खजाना था। मेले के स्टालों में सबसे अच्छी बात यह देखने को मिली कि किसान वहां प्रदर्शित खेती की उपजों और खेती-किसानी के संसाधनों के बारे में आपस में चर्चा करते देखे गए।  छत्तीसगढ़ के मेहनतकश किसानों को आगे बढ़ाने के लिए व्यवहारिक और तकनीकी जानकारी तथा मार्ग-दर्शन देने की जरूरत है, जो इस मेले से पूरी हो जाएगी। किसानों ने यहां खेती-किसानी में हो रहे नित नये अनुसंधानों और बदलावों को देखा। खेती में उपयोग होने वाले छोटे से छोटे उपकरण और बड़ी-बड़ी मशीनें किसानों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मार्ग दर्शन में और कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय कृषि मेले का आयोजन किसानों के हित में एक नई पहल साबित होगा। अब हर साल राष्ट्रीय कृषि मेला आयोजित करने का राज्य सरकार का निर्णय किसानों को खेती-किसानी में नया प्रयोग करने प्रेरित करेगा।

तीन नये कृषि विज्ञान केन्द्रों की मिली सौगात

किसानों को उन्नत खेती के तौर तरीके सिखाने में कृषि विज्ञान केन्द्रों की अहम भूमिका होती है। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में 27 जनवरी को आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेले के शुभारंभ समारोह में छत्तीसगढ़ के तीन जिलों के लिए कृषि विज्ञान केन्द्रों की सौगात दी। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर ही दुर्ग जिले के लिए नये कृषि विकास केन्द्र का लोकार्पण किया। इसके अलावा मुंगेली और बेमेतरा जिले में नये केन्द्र खोलने की घोषणा की। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने आगामी मार्च माह तक प्रदेश के शेष जिलों सूरजपुर, कोण्डागांव, बालोद और सुकमा में भी नये कृषि विज्ञान केन्द्र की मंजूरी देने का ऐलान किया। इसके बाद छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र खुल जाएंगे। दुर्ग जिले में दो कृषि विज्ञान केन्द्र संचालित होंगे। इनमें से एक कृषि विज्ञान केन्द्र पशुधन पर केन्द्रित रहेगा, जो छत्तीसगढ़ कामधेनू विश्वविद्यालय द्वारा संचालित होगा।

किसानों के स्कूलों का मेले में खास आकर्षण

दूसरे राष्ट्रीय कृषि मेले में किसानों के लिए पांच स्कूल (किसान पाठशाला) खोले गए थे, जहां किसान बैठकर विषय विशेषज्ञों और देश-प्रदेश के प्रगतिशील किसानों से खेती-किसानी के नये-नये पाठ पढ़ते थे। मिट्टी परीक्षण, बीजों के उपचार से लेकर फसल कटाई, मिसाई, भंडारण और खरीदी बिक्री तक की जानकारियां किसानांे को स्कूलों में मिली। विशेषज्ञों ने किसानों की दोगुनी आय, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जैविक खेती, मिट्टी परीक्षण, छतीसगढ़ में दो सफल क्षेत्रों, फल एवं फलों की उन्नत खेती, चारा प्रबंधन, दूध उत्पाद मूल्य संवर्धन, मछलीपालन, छत्तीसगढ़ में दलहन उत्पादन, छत्तीसगढ़ में पीली क्रांति-दहलन उत्पादन, पशु प्रजनन, प्रबंधन, दूध एवं मछली उत्पादन, समन्वित कृषि प्रणाली, उच्च तकनीक की बागवानी, खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण, पशु पोषण, स्वास्थ्य, दूध उत्पाद गुणवत्ता, कृषि आधारित लघु उद्यम, कृषि यांत्रिकी करण, समन्वित पौध संरक्षण, किसानों के लिए उपयोगी पशुपालन और मछली पालन की तकनीकी आदि से संबंधित पाठ किसानों को इन स्कूलों में पढ़ाए गए।
    मेले में कृषि विभाग का विशाल मंडप में प्रदर्शित परम्परागत खेती के साथ-साथ समन्वित और उन्नत खेती का आकर्षक मॉडल किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। उद्यानिकी विभाग के मंडप में रखे गए रंग-बिरंगे फल-फूल किसानों को लुभाते रहे। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का मंडप जहां खेती-किसानी की सभी जानकारियों से परिपूर्ण था, वहीं कामधेनू विश्वविद्यालय का मंडप पशुधन विकास, पशुपालन, डेयरी व्यवसाय को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करने में सफल रहा। पशु-पक्षियों की एक अलग दुनिया मेले में बसायी गई थी, जहां उन्नत नस्ल के दुधारू गायांे, भेंड बकरियों और अलग-अलग प्रजातियों के मुर्गे-मुर्गियां मेले में आने वाले लोगों को अपने पास बुलाने में पूरी तरह सफल हो रही थी। साहीवाल और गीर नस्ल की गायों को देखने पशु पालक किसानों की भीड़ हमेशा इस मंडप में लगी रही। मछली पालन विभाग द्वारा जीवंत प्रदर्शन कर मछली पालक किसानों को मछली पालन के नये-नये उपायों के बारे में बताया गया।

आत्मा योजना के तहत प्रदेश के 210 उन्नत किसान सम्मानित

दूसरे राष्ट्रीय कृषि मेले में प्रदेश के अनाज, दलहन, तिलहन और फल-फूलों की खेती तथा पशु पालन-मछली पालन के क्षेत्र में नया प्रयोग करने और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित करने की नई परम्परा शुरू हुई है। कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत प्रदेश के 210 किसानों को सम्मानित किया गया। इनमें से 10 किसानों को राज्य स्तरीय उत्कृष्ट कृषक तथा 200 किसानों को जिला स्तरीय उत्कृष्ट कृषक पुरस्कार से नवाजा गया। इन किसानों को प्रशस्ति पत्र के साथ पुरस्कार की नगद राशि के चेक प्रदान  किए गए। केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री सुदर्शन भगत, मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, हरियाणा के कृषि मंत्री श्री अशोक धनगड़ और विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल सहिने भी राष्ट्रीय कृषि मेले में शिरकत की। उन्होंने स्टालों में जाकर कृषि प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। प्रगतिशील किसानों को पुरस्कृत कर उनका उत्साह बढ़ाया। सभी अतिथियों ने छत्तीसगढ़ के कृषि विकास की तारीफ करते हुए राष्ट्रीय कृषि मेले को किसानों के लिए प्रेरक बताया।  क्रमांक-5439/राजेश श्रीवास

 

Date: 
04 Feb 2017