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‘रमन के गोठ’ आकाशवाणी से प्रसारित विशेष कार्यक्रम (दिनांक 12 फरवरी, 2017, समय प्रातः 10.45 से 11.05 बजे)

श्रोताओं नमस्कार!
(पुरूष उद्घोषक की ओर से)

-   आकाशवाणी के विशेष प्रसारण ‘रमन के गोठ’ में हम, सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं। कार्यक्रम की अठारहवीं कड़़ी के लिए आकाशवाणी के स्टुडियो में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी पधार चुके हैं।
-    डॉक्टर साहब नमस्कार, बहुत-बहुत स्वागत है इस कार्यक्रम में।
मुख्यमंत्री जी
-    धन्यवाद। आपका भी और अपने रेडियो व टीवी सेट्स के सामने बैठकर मुझे सुन रहे श्रोताओं का भी।
-    जम्मो संगी-जहुंरिया, सियान-जवान, महतारी-बहिनी मन ला जय जोहार।
-    माघी पुन्नी ले शुरू होय कबीर धरम-नगर दामाखेड़ा के मेला म शामिल होय के अवसर मिलिस। ये हमर सौभाग्य आय के छत्तीसगढ़ ल संत कबीर के अब्बड़ आशीर्वाद मिले हे अउ राज्य के विकास म कबीरपंथी मन के सहयोग मिले हे। संत कबीर के किरपा ले छत्तीसगढ़ समरसता के, शांति के, बराबरी के, समानता के अउ आपसी प्यार के राज्य बने हे। जम्मो कबीरहा भाई-बहिनी मन ल साहेब बंदगी साहेब!
-    परनदिन ले राजिम मेला शुरू हो गे हे। जेन हर अब ‘राजिम कुम्भ’ के नाम ले देश अउ दुनिया म परसिद्ध हो गे हे।
-    ए दारी माघी पुन्नी के दिन ‘राजिम कुम्भ’ के बारा बछर पूरा होइस हे अउ मेला के समापन महाशिवरात्रि के दिन होही।
-    महाशिवरात्रि हमर सब समाज के बड़का तिहार हे।
-    हमर आदिवासी समाज बूढ़ादेव के स्वरूप ल पूजथे।
-    भगवान राजीवलोचन, कुलेश्वर महादेव, शिवशंकर भगवान, बूढ़ादेव के पूजा-पाठ के संगे-संग, ‘छत्तीसगढ़ के प्रयाग’ म नहाय के अब्बड़ महात्तम हे। देस-परदेस के साधु-महात्मा के भागवत, प्रवचन, कीर्तन राजिम म चलत हे, जेखर आनन्द अउ पुन-परताप आप मन ल मिलत हे।
-    माघी पुन्नी के दिन हमर प्रदेश के जम्मो नदिया-तरिया म नहाय जाथे, डुबकी लगाय जाथे अउ जघा-जघा मेला घलोक भराथे।
-    आप सबो मन ल ए बेरा म मोर तरफ से बधाई अउ शुभकामना हे।
-    आज मोला लक्ष्मण मस्तूरिया के एक गीत सुरता आवत हे-
        मोर संग चलव रे, मोर संग चलव गा
        मैं लहरी अंव मोर लहर म
        फरौ-फूलौ हरियावव
        महानदी म अरपा पैरी
        तन-मन धो फरियावव
        कहां जाबे बड़ दूर हे गंगा
        मोर संग चलव रे...
        मोर संग चलव गा....
‘वेटलैण्ड डेवलपमेंट’ के बारे में मुख्यमंत्री जी का विशेष कथन-
-    मुझे इस बात की खुशी है कि प्रदेश के एक प्रखर चिन्तक और वैज्ञानिक डॉ. डी.के. मरोठिया ने मुझे कहा कि ‘वेटलैण्ड’ के संरक्षण, संवर्धन और विकास का जिक्र ‘रमन के गोठ’ में जरूर करूं।
-    वैटलैण्ड का मतलब वो जमीन जो तालाबों के विस्तार में पानी में डूबा हो और लम्बे समय तक पानी में डुबने के कारण उस क्षेत्र की पहचान अलग से होती है।
-    छत्तीसगढ़ में तालाबों की अपनी विशेष संस्कृति रही है। इसका ऐतिहासिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व भी रहा है, जो स्थानीय आबादियों की आस्था के साथ ही उनकी आजीविका से भी जुड़ता है।
-    मछली के साथ कमल का फूल, मखाना, सिंघाड़ा, जल कोचई आदि उत्पाद भी इन तालाबों का वरदान हैं, जो स्थानीय लोगों की आय का जरिया बनते हैं। तालाबों से भू-जल स्तर बना रहता है। जलवायु परिवर्तन थमा रहता है। पक्षियों का बसेरा होता है, और ‘जैव-विविधता’ का संरक्षण होता है। इनके आस-पास औषधीय तथा सुगंधित पौधों की खेती होती है। इस तरह तालाब प्रकृति की ‘किडनी’ की तरह काम करते हैं।
-    मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि डॉ. मरोठिया की टीम हमारे रतनपुर, दलपत सागर और कुटुम्बसर जैसी अद्भुत जलीय संरचनाओं को विश्व-प्रसिद्ध ‘रामसर-साइट’ में जगह दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, जो ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को वैश्विक मान्यता भी देती है।
-    रतनपुर में जो 160 तालाबों की प्रणाली है, वह इस स्थान को ‘लेक सिटी’ की अन्तरराष्ट्रीय मान्यता दिला सकती है। विशेषज्ञों का कहना है, कि किसी एक स्थान पर ऐसी अद्भुत संरचना दुनिया में सिर्फ दो स्थानों पर ही है, जिसमें से एक चीन में है और दूसरा हमारे रतनपुर में।
-    इसलिए तालाबों के महत्व को देखते हुए हमने ‘वेटलैण्ड अथॉरिटी’ का गठन किया है। राज्य की ‘वेटलैण्ड पॉलिसी’ बनाने जा रहे हैं।
-    मैं ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों के साथ ही प्रदेश के प्रत्येक जागरूक नागरिक, सामाजिक संगठनों से अपील करता हूं कि वे जहां भी हैं, वहां अपने जलाशयों को सुरक्षित रखने में योगदान करें। गहरीकरण और सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान किया जाए। सौर-ऊर्जा से रोशनी किया जाए। वैसे भी गर्मी का मौसम निकट है, जिसमें हमें जलाशयों की आवश्यकता का ज्यादा अहसास होता है। हमें यह काम निश्चित कार्ययोजना बनाकर करना चाहिए, ताकि किसी एक मौसम की नहीं, बल्कि सालभर की योजना बनाकर काम किया जा सके।
महिला उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, अब स्कूली परीक्षा का मौसम आ गया है। यह ऐसा समय है, जब हमारे बच्चे, उनके पालक, माता-पिता से लेकर घर के सभी सदस्य परीक्षा के तनाव में रहते हैं। ऐसा बोझिल वातावरण सबके लिए नुकसानदेह है। ऐसे में बच्चों और उनके पालकों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
मुख्यमंत्री जी
-    मैं बच्चों से साफ कहना चाहता हूॅ, कि परीक्षा को लेकर तनावग्रस्त ना हो और परीक्षा को लेकर तनाव आने का सबसे बड़ा कारण है, कि हमारी सालभर की तैयारी और जिस तरह के परिणाम की अपेक्षा होती है, उसके बीच सही तालमेल नहीं होता।
-    एक शिक्षा-सत्र कई कालखण्डों में बटा होता है, जिससे आप अपने पूरे पाठ्यक्रम के छोटे-छोटे हिस्से में पढ़ाई करते हैं। सालभर के ‘परफॉरमेंस’ से यह पता चलता है कि बच्चे का अंतिम परिणाम क्या आने वाला है। परीक्षा के समय पर एकदम से चमत्कारिक सफलता की उम्मीद न करें और बच्चों पर बड़े लक्ष्य का दबाव न डालें।
-    बच्चों को यह समझाना पड़ेगा कि पढ़ाई की ‘लान्ग टर्म’ की रणनीति व ‘शॉर्ट टर्म’ की रणनीति में फर्क होता है और दोनों के परिणाम भी उसी के अनुरूप होते हैं। बड़ी सफलता का कोई ‘शॉर्ट कट’ नहीं होता।
-    नियमित रूप से पढ़ाई करने के बाद भी बच्चें और पालकों को तनाव रहता है, तो इसके लिए घर का वातावरण शांत, सहयोगात्मक और स्नेह से भरा बनाए। घर में कोई ऐसे आयोजन न करें, जिससे बच्चे को अलग रहना पड़े, या बच्चों का ध्यान भटक जाए।
-    पढ़ाई करे इस बीच समय मिले तो आप योग अभ्यास अथवा हल्के-फुल्के व्यायाम से अपने तनाव को दूर कर सकते है।
-    यदि तैयारी अच्छी नहीं है, तो भी अपनी रणनीति स्पष्ट रखें। अपने ‘स्ट्रांग’ और ‘वीक पॉइन्ट्स’ को चिन्हांकित करें और उसके अनुसार ही तैयारी को ‘फिनिशिंग टच’ दें।
-    यह विचार अपने मन में कतई न लाएं कि आप जो परीक्षा अभी दे रहे हैं, वही जीवन का अंतिम अवसर है। ऐसी हड़बड़ी में किसी तरह से आपा न खोएं, हिम्मत न हारें और न ही कोई गलत कदम उठाएं।
-    हर बच्चे को अपना कोई न कोई ‘आदर्श व्यक्तित्व’ ढूंढना चाहिए, जिससे वे प्रेरणा लेते रहे। हर सफल व्यक्ति कभी न कभी असफलता का स्वाद चखा रहता है। इसलिए असफलता से डरिए मत, बल्कि इसे एक सुधार का अवसर समझिए।
-    विगत वर्ष मैंने आपसे कहा था कि यदि परीक्षा, परीक्षा प्रणाली या ऐसी समस्या पर आपको बात करने का मन हो, जिसका समाधान आपके स्तर पर नहीं निकल पा रहा हो या कहीं पक्षपात जैसी कोई शिकायत महसूस हो रही हो, जहां आप सही हो और आपको गलत साबित किया जा रहा हो, तो आप मुझे ‘फेसबुक’ पर सम्पर्क कर सकते हैं।
पुरूष उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, छत्तीसगढ़ में आपके नेतृत्व में शासन और प्रशासन का कायाकल्प हो गया है। सरकार और प्रशासन के संचालन के तौर-तरीके काफी बदले हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं और संस्थाएं तो मजबूत हुई हैं, साथ ही बेहतर नतीजे के लिए नई ‘एप्रोच’, नई रणनीति और नए तरीकों से काम हुआ है, जिसे प्रशासन की भाषा में ‘नवाचार’ या ‘इनोवेशन’ कहा जाता है। क्या आप अभी और ‘नवाचार’ करना चाहते हैं या पुरानी योजनाओं पर ही जोर देना चाहते हैं?
मुख्यमंत्री जी
-    मैं ज्यादातर समय जनता के बीच रहता हूं। दूर-दूर गांवों का दौरा करता हूं। लोगों के बीच बैठता हूं। तो समस्याएं भी पता चलती हैं और समाधान के तरीके भी निकलते हैं। मुझे लगता है कि ‘नवाचार’ की सबसे अच्छी ‘एप्रोच’ यही है, कि जो काम नहीं हो पा रहा है, वह जल्दी से जल्दी, किसी नए तरीके से हो जाए।
-    उदाहरण के लिए, जब हमने पी.डी.एस. को ठीक करने के लिए कम्प्यूटर और आई.टी. का उपयोग किया, तो वह भी ‘नवाचार’ था।
-    प्रोटीन की कमी से निपटने के लिए चना और दाल का वितरण किया, तो वह भी ‘नवाचार’ था।
-    और जब 20 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेलवे लाइन बिछाने का सवाल आया, तो हमने ऐसी तमाम संस्थाओं से बात की, जिनको उससे लाभ मिलना है और वे सब सहमत हो गए, तो यह भी एक ‘नवाचार’ है कि राज्य सरकार का ज्यादा पैसा लगे बिना बहुत बड़ा काम हो गया।
-    माननीय प्रधानमंत्री जी ने डी.एम.एफ. के रास्ते खनिजधारित जिलों के विकास के लिए भरपूर राशि की व्यवस्था की और हमने इसमें से दो-ढाई सौ करोड़ रूपए रेल्वे लाइन बिछाने के लिए दे दिए, तो यह भी एक ‘नवाचार’ है, कि अपना काम बनाने के लिए पैसे की व्यवस्था कैसे करते है।
-    हमर छत्तीसगढ़ योजना, सौर सुजला योजना, लाइवलीहुड कॉलेज जैसे अनेक काम ‘नवाचार’ की देन हैं।
-    मैंने अपने अधिकारियों को खुली छूट दी है, कि जनहित के लिए जो भी नए कदम उठा सकते हैं, उन्हें जरूर उठाएं। आम जनता को जल्दी से जल्दी सुविधाएं देना ही हमारा लक्ष्य है।
-    नवाचारों के कारण छत्तीसगढ़ को एक अलग प्रतिष्ठा और पहचान मिली है।
-    26 जनवरी 2017 के अवसर पर मैंने जो नई घोषणाएं की हैं, वे भी ‘नवाचार’ के माध्यम से अभावों को जल्दी से जल्दी दूर करने की कोशिश है।
-    छत्तीसगढ़ में दूरस्थ ग्रामीण और वनांचलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित अंचलों में यह चुनौती और ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थिति में नई सोच और नई रणनीति कारगर होती है। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि अभावों और कठिनाइयों के बीच भी अनेक सेवाभावी चिकित्सक दुर्गम स्थानों में अपनी सेवाएं देकर राष्ट्र निर्माण में योगदान करना चाहते हैं। ऐसे विशेषज्ञों और समर्पित चिकित्सकों का उपयोग करने के लिए हम प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री मेडिकल फेलोशिप प्रोग्राम’ शुरू करेंगे। इससे इन अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, वहीं विभिन्न स्थानों पर निर्मित अधोसंरचना, जैसे- ऑपरेशन थियेटर और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग भी बेहतर क्षमता के साथ होगा।
महिला उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, गणतंत्र दिवस के अवसर पर आपने ‘मुख्यमंत्री गुड गवर्नेन्स फेलोशिप’ की घोषणा भी की है। ये क्या है? और प्रदेशवासियों को इसका क्या लाभ मिलेगा?
मुख्यमंत्री जी
-    मैं अक्सर आई.आई.टी. और आई.आई.एम. आदि संस्थाओं से ताजा-ताजा पढ़के निकले युवाओं से बात करता हूं, तो उनकी प्रतिभा और विचार सुनकर बहुत खुशी होती है। उनकी ऊर्जा, उनके जोश और जज्बा देखकर लगता है, कि इनका उपयोग भी तो कहीं होना चाहिए।
-    हमने यह धारणा पाल ली है कि नए पढ़े-लिखे युवा सिर्फ पैसे के लिए काम करते हैं, लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है। सही पहल होती है तो डॉक्टर बीजापुर मंे काम करने पहुंच जाते हैं। सही पहल होती है तो आई.आई.टी. से निकला नौजवान किसी गांव में काम करने लगता है। हमें इस सेवाभावी सोच का भी सम्मान करना है।
-    नई पीढ़ी के पास नए-नए आइडियाज़ हैं। इसके लिए हम ‘मुख्यमंत्री गुड गवर्नेन्स फेलोशिप’ के अंतर्गत प्रत्येक जिला कलेक्टर के साथ एक प्रतिभाशाली ‘फेलो’ को संलग्न करेंगे, जो न सिर्फ जनहितकारी व विकासपरक योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद करेगा, बल्कि इसमें आने वाली समस्याओं का हल भी करेगा और जनता को बेहतर लाभ दिलाने वाली  योजनाओं के बारे में चिंतन करेगा, सोच-विचार करेगा, उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन के बारे में सुझाव भी देगा।

पुरूष उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि में वृद्धि करने की घोषणा जगदलपुर में की थी। इसके बारे में हमारे श्रोताओं को आप क्या बताना चाहेंगे।
मुख्यमंत्री जी
-    भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने का काफी लम्बा संघर्ष हमारे पूर्वजों ने किया था, जिसके कारण अन्ततः 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था। देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जवानी को खपाने वाले और आजादी के बाद भी अपने उसूलों, और अपने आदर्शों पर डटे रहकर भारत के नवनिर्माण को दिशा देने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के हम सदैव ऋणी रहेंगे।
-    उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को प्रतिमाह 15 हजार रूपए का मानदेय देने की व्यवस्था है।
-    हमने निर्णय लिया है कि अब इन सेनानियों को सम्मान-स्वरूप मिलने वाली यह राशि बढ़ाकर 25 हजार रूपए कर दी जाए।
-    इसी प्रकार देश में एक और ऐसा दौर आया था, जब हमारा लोकतंत्र खतरे में पड़ गया था। हमारे लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले जेल में डाल दिए गए थे, जिन्हें ‘मीसाबंदी’ के रूप में जाना जाता है। हमने यह निर्णय लिया है कि मीसाबंदियों को ‘लोकतंत्र सेनानी’ के रूप में जाना जाए और उनकी मानदेय राशि भी 50 से 66 प्रतिशत तक बढ़ा दी जए।

महिला उद्घोषक
-    डॉक्टर साहब, आपने तेन्दूपत्ता संग्राहकों का पारिश्रमिक बढ़ाने की भी घोषणा की है। क्या इसमें भी कोई ‘नवाचार’ है?
मुख्यमंत्री जी
-    जी हाँ, हमने तेन्दूपत्ता के पूरे काम-काज को सुनियोजित किया है, ताकि इसका लाभ वनवासियों को मिले। ऐसा पहले नहीं होता था। हमने तेन्दूपत्ता संग्राहकों की जिन्दगी को उसकी आय के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर और सूचना प्रौद्योगिकी आदि से जोड़ा है।
-    अब तेन्दूपत्ता की भी ई-नीलामी हो रही है, जिसका पूरा लाभ वनवासियों को मिलेगा। मेरी नजर में यह एक ‘नवाचार’ ही है, जो समाज के सबसे पिछड़े तबके की जिन्दगी बदल रही है।
-    आपको विश्वास नहीं होगा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 13 वर्ष पहले मात्र 350 रूपए प्रति मानक बोरा संग्रहण पारिश्रमिक मिलता था, जिसे क्रमशः बढ़ाते हुए हमने 1500 रूपए तक ला दिया। इसलिए अब फैसला किया है कि नए सीजन में तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर 1800 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया जाए। इस तरह आप देख सकते हैं कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाला पारिश्रमिक 5 गुना से अधिक कर दिया गया है।
-    मैं सोचता हूं कि हमारे प्रेरणास्त्रोत पं. दीनदयाल उपाध्याय के अन्त्योदय और एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को अमल में लाने और उसको सार्थक बनाने का यह बहुत अच्छा उदाहरण है।

पुरूष उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, आप ‘नवाचार’ या ‘इनोवेशन’ के हिमायती हैं। परम्परागत रूप से चली आ रही योजनाओं या प्रशासन की परिपाटियों से अलग हटते हुए आपने अनेक नए निर्णय लिए हैं, जिसका लाभ अनेक जरूरतमंदों को मिला है, लेकिन क्या आपसे प्रेरणा लेकर राज्य की अन्य संस्थाएं या व्यक्तिगत रूप से लोग भी ‘नवाचार’ कर रहे हैं?
मुख्यमंत्री जी
-    निश्चित रूप से कर रहे हैं। अनेक उदाहरण दे सकता हूं।
-    हमने राजनांदगांव में ‘कृषि उद्यानिकी कॉलेज’ खोला है, जहां से एक नई खबर आई है, कि कृषि वैज्ञानिकों ने यूरोपियन किस्म की स्ट्राबेरी को छत्तीसगढ़ की मिट्टी में उपजाने की किस्म तैयार कर ली है।  सामान्यतः स्ट्राबेरी की खेती कश्मीर, शिमला और हिमाचल प्रदेश जैसे ठण्डे स्थानों पर होती है।
-    इस किस्म से एक एकड़ के खेत में लगने वाले स्ट्राबेरी से 5 से 10 लाख रूपए तक की आय हो सकती है, सब्जी-भाजी तथा अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को स्ट्राबेरी की फसल लेने से काफी लाभ होगा।
-    इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. ए.के. गेड़ा को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा ‘एमेरिटस साइंटिस्ट’ के पद हेतु चुना गया है। 29 वर्ष बाद छत्तीसगढ़ के किसी वैज्ञानिक को यह सम्मान मिला है।
-    डॉ. गेड़ा औषधीय पौधा हड़जोड़ में उपस्थित मुख्य रासायनिक घटकों का अध्ययन करेंगे। हमारे यहां वैद्यों द्वारा ऐसी जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन उस पर कोई सुव्यवस्थित शोध नहीं हुआ था। अब यह कार्य अब डॉ. गेड़ा करेंगे।
-    हमारे राज्य के गांव-गांव में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा पापड़, बड़ी, अचार, अगरबत्ती, साबुन, ईंट, रेडीमेड कपड़े बनाने और उसे बाजार में बेचने तथा किराए पर खेत लेकर किसानी करने तक की खबरें तो बहुत दिनों से सुन रहे हैं, लेकिन गरियाबंद के छुरा विकासखण्ड के अन्तर्गत जंगलों से घिरे एक गांव की महिलाओं का कारनामा देखकर तो मैं खुद हैरत में पड़ गया था।
-    आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि, इस अनजाने से रसेला गांव की महिलाएं ‘सी.एफ.एल. बल्ब’ बनाती हैं और उसे उतनी ही ’’वारंटी’’ देकर बेचती हैं, जितनी बड़ी-बड़ी कम्पनिया देती हैं। इतना ही नहीं, रसेला गांव के सी.एफ.एल. बल्ब बड़ी कम्पनियों की तुलना में काफी कम कीमत पर बेचा जाता है।
-    ग्राम रसेला के सांई कृपा महिला स्व-सहायता समूह ने यह काम सीखा और खुद दिन में सौ सी.एफ.एल. बल्ब असेम्बल कर लेती हैं।
-    इस आत्मविश्वास, इस हौसले और इस जज्बे को मैं सलाम करता हूं।
-    रसेला गांव में बनने वाला सी.एफ.एल. बल्ब जिले के आश्रम-छात्रावासों  को रोशन कर रहा है और इस काम से महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों को अच्छी आमदनी हो रही है।
-    ऐसे अनेक नवाचार प्रयासों और सफलताओं के बारे में मैं आगे भी बताऊंगा कि, किस तरह सरकार की सोच और समाज की सोच अब एक रास्ते पर चल रही है।
महिला उद्घोषक
-    श्रोताओं! आपकी प्रतिक्रियाएं हमें आपके पत्र, सोशल मीडिया- फेसबुक, ट्विटर के साथ SMS से भी बड़ी संख्या में मिल रही हैं। इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
-    आगे भी आप अपने मोबाइल के मेसेज बॉक्स में RKG के बाद स्पेस लेकर अपने विचार लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेजते रहिए और संदेश के अंत में अपना नाम और पता लिखना ना भूलें।
-    मुख्यमंत्री जी, पिछली कड़ी में आपने छत्तीसगढ़ की ‘डिजिटल आर्मी’ और ‘कैशलेस लेन-देन’ के बारे में विस्तार से बताया था, जिससे हमारे श्रोताओं को बहुत जानकारी मिली थी। आप उनके पत्रों और एसएमएस के जवाब में क्या कहना चाहेंगे?

मुख्यमंत्री जी
-    योगेश वर्मा, मोहन सिंह, रोहित साहू, योगेन्द्र वर्मा, कैलाश गोपाल, डॉ.राजेन्द्र पुरोहित, परदेसी भगत सिंह, उत्कर्ष सिंह, विवेक परिहार, छगनलाल नागवंशी, मीना नागवंशी, बेदूराम सिन्हा, उमंेंद निषाद, मोहेश्वरी, देविका, नूतन, निहाल सिंह निर्मलकर, योगेश्वर साहू आदि ने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया भेजकर जो उत्साह बढ़ाया है, उसके लिए बहुत शुक्रिया।
रायपुर हाफ मैराथन
-    मैं आप लोगों को आज एक महत्वपूर्ण सूचना देना चाहता हूं और इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित भी करता हूं।
-    पहली बार राज्य स्तरीय हाफ मैराथन का आयोजन 19 फरवरी को नया रायपुर में किया जा रहा है। 21 किलोमीटर की इस हाफ मैराथन के अलावा 10, 5, 3, 2 तथा 1 किलोमीटर की दौड़ भी आयोजित की जा रही है।
-    यह दौड़ 13 समूहों में होगी, जिसमें कुल 30 लाख रूपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ और पंचम पुरस्कार क्रमशः  3 लाख, 2 लाख, 1 लाख, 50 हजार और 25 हजार रूपए के हैं।
-    इसमें हमारे प्रदेश के सभी जिलों के अलावा राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगी भी शामिल होंगे और बालक-बालिका, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग वर्ग भी बनाए गए हैं।
-    यह अवसर अपना जोश दिखाने का, अपनी फिटनेस दिखाने का, सेहत और विकास के लिए एकजुटता दिखाने का भी है। मैं चाहता हूं कि आप लोग इसमें बड़ी संख्या में शामिल हों।
-    मैं चाहता हूं, कि यह पहला अवसर ही इतना अच्छा और इतना सफल हो कि राष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बने और आगामी वर्षों में बड़े-बड़े लोग इसमें शामिल होने आएं।

पुरूष उद्घोषक
-    और श्रोताओं, अब बारी है ‘क्विज’ की।
नौवें ‘क्विज’ का प्रश्न था-
    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘कैशलेस ट्रांजेक्शन’ के लिए जारी किए गए मोबाइल एप का क्या नाम है?
    जिसका सही जवाब है - ।A. मोर खीसा
-    सबसे जल्दी जिन पांच श्रोताओं ने सही जवाब भेजे हैं, उनके नाम हैं-
1.    पुष्पा पटेल, रायगढ़
    2.    दीनू बघेल, कुरुद
    3.      प्रज्ञा, रायपुर
    4.     आरती, फुसेरा-धमतरी और
    5.    विक्रांत कुमार, कांकेर


महिला उद्घोषक
-    और श्रोताओं अब समय है दसवें क्विज़ का।
    जिसका सवाल है-
-    ‘मुख्यमंत्री मेडिकल फैलोशिप योजना’ से दूरस्थ अंचलों में क्या नई सुविधा मिलेगी?
-    इसका सही जवाब    । (A) डॉक्टर या
                    (B) एम्बुलेंस
    में से कोई एक है।
-    अपना जवाब देने के लिए, अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में QA लिखें और स्पेस देकर A या B जो भी आपको सही लगे, वह एक अक्षर लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेज दें। साथ में अपना नाम और पता अवश्य लिखें।
-    आप सब ‘रमन के गोठ’ सुनते रहिए और अपनी प्रतिक्रियाओं  से हमें अवगत कराते रहिए। इसी के साथ आज के अंक का हम यहीं समापन करते हैं। अगले अंक में 12 मार्च को होगी आपसे फिर मुलाकात। तब-तक के लिए दीजिए हमें इजाजत। नमस्कार।


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Date: 
12 February 2017 - 7am