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मुख्य सचिव परिचय

मुख्य सचिव श्री  विवेक ढाँड - जीवन परिचय

 

  • जन्म तिथि -    25 मार्च, 1958
  • जन्म स्थान     -    पलारी, जिला बलौदा बाजार (अविभाजित जिला रायपुर)
  • पिता      -    रायपुर के प्रतिष्ठित व्यवसायी श्री सतपाल ढाँड
  • माता         - स्व. श्रीमती राजकुमारी ढाँड। बचपन से ही माँ से विशेष लगाव तथा संपूर्ण जीवन पर उनका प्रभाव।
  • स्कूल शिक्षा   -  वर्ष 1961 से 1974 तक होलीक्रास स्कूल, बैरन बाजार,रायपुर में हायर सेकेण्डरी तक की शिक्षा। हायर सेकेण्डरी साईन्स समूह में (हायर सेकेण्डरी में अविभाजित मध्यप्रदेश में 13 वां स्थान प्राप्त)।
  • कॉलेज शिक्षा - शासकीय विज्ञान महाविद्यालय,रायपुर -बी.एस.सी.  (पार्ट-1)  में रविशंकर विश्व-विद्यालय में प्रथम स्थान।

    - बी.एस.सी.  (अंतिम)  वर्ष  1977,  विषय फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स। रविशंकर विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान। रविशंकर विश्वविद्यालय का क्षेत्र, उस वक्त संपूर्ण छत्तीसगढ़ प्रान्त था। एम.एस.सी. (गणित)-1979 में रविशंकर विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान।

  • वर्ष 1979 से 1980 तक शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, रायपुर में सहायक प्राध्यापक (गणित) के रुप में अध्यापन कार्य।
  • वर्ष 1981 में प्रथम प्रयास में ही आई.ए.एस. में चयन। गणित और रसायन शास्त्र विषय के साथ। आई.ए.एस. में पूरे देश में 14वां स्थान प्राप्त। अविभाजित मध्यप्रदेश में अपने बैच में सबसे युवा, तथा सबसे उच्च स्थान प्राप्त किया।
  • अविभाजित बस्तर जिला (जो वर्तमान में बस्तर संभाग है), वहां वर्ष 1982-83 में सहायक कलेक्टर के रुप में पदस्थ होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान बस्तर के समस्त क्षेत्रों में भ्रमण करने का अवसर प्राप्त हुआ।
  • वर्ष 1983-84 में अनुविभागीय दण्डाधिकारी, बुरहानपुर के पद पर पदस्थ। वर्ष पर्यन्त साम्प्रदायिक सद्भाव बनाये रखने में सफल।
  • वर्ष 1984 से 1986 तक परियोजना अधिकारी, आदिवासी विकास परियोजना, व परियोजना अधिकारी, बैगा विकास अभिकरण, डिण्डोरी, जिला मण्डला के पद पर पदस्थ। विशेष पिछड़ी जन जाति बैगा क्षेत्र में दो वर्ष तक कार्य करने का अनुभव प्राप्त हुआ। कई ऐसे दूरस्थ ग्रामों में कार्य करवाया, जहां पूर्व में प्रशासन की दस्तक नहीं थी।
  • अविभाजित सरगुजा जिला में वर्ष 1986-87 में जिला कलेक्टर के रुप में प्रथम नियुक्ति। सरगुजा जिले के सभी दूरस्थ इलाकों का भ्रमण कर प्रशासन की दस्तक दी।
  • वर्ष 1987 से 1989 तक प्रशासक, नगर निगम, भोपाल के पद पर पदस्थ। गैस राहत पुनर्वास के अंतर्गत भोपाल शहर की समस्त तंग बस्तियों के विकास हेतु विशेष रुप से कई महत्वपूर्ण कार्य किये।
  • वर्ष 1989 से 1991 तक अविभाजित दुर्ग जिला में जिला कलेक्टर के पद पर पदस्थ। इस दौरान जिले के 4 लाख निरक्षर व्यक्तियों को साक्षर बनाने हेतु साक्षरता अभियान का कुशल संपादन किया। दुर्ग जिले मेें अविभाजित मध्यप्रदेश के पहले साक्षर जिला बनने की नींव डली।
  • वर्ष 1991 से 1992 तक कलेक्टर, जिला उज्जैन के पद पर पदस्थ। सिंहस्थ का सफलतापूर्वक, बिना किसी विवाद, दुर्घटना-मुक्त, सफल आयोजन।
  • वर्ष 1992 से 1994 तक अविभाजित जिला जबलपुर (म.प्र.) में जिला कलेक्टर के पद पर पदस्थ। 6 दिसम्बर, 1992 को राम-जन्मभूमि बावरी-मस्जिद की घटना के तारतम्य में जबलपुर में कर्फ्यू लगाकर शांति स्थापित रखी, तथा कोई जन हानि नहीं हुई।
  • वर्ष 1994 से 1996 तक भोपाल में संचालक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा नियंत्रक, नाप-तौल के पद पर पदस्थ।
  • वर्ष 1996 से 1998 तक आयुक्त, पंचायत एवं समाज सेवा, मध्यप्रदेश के पद पर पदस्थ। उस दरम्यान पंचायत अधिनियम तथा तीनों स्तरों की पंचायतों को सुदृढ़ करने के संबंध में महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका निभाई।
  • वर्ष 1998 से 1999 तक प्रबंध संचालक, म.प्र.तिलहन संघ के पद पर पदस्थ।
  • वर्ष 1999 से 2000 तक कमिश्नर, बस्तर संभाग के पद पर पदस्थ। बस्तर संभाग के सभी क्षेत्रों में सघन भ्रमण।
  • नवम्बर, 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण पश्चात् प्रथम सचिव, लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा चेयरमेन, रायपुर विकास प्राधिकरण व राजधानी क्षेत्र विकास अभिकरण के रुप में कार्य किया।
  • वर्ष 2003 से 2009 तक विभिन्न कालावधि में डॉ. रमन सिंह, मान. मुख्यमंत्री के सचिव/ प्रमुख सचिव तथा सचिव/ प्रमुख सचिव, जनसंपर्क, विमानन, ऊर्जा एवं जल संसाधन विभाग के पद पर पदस्थ।
  • वर्ष 2008 से 2012 तक प्रमुख सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति के पद पर पदस्थ। छत्तीसगढ़ के सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य किया।
  • वर्ष 2010 से 2011 एवं वर्ष 2012 से फरवरी, 2014 तक प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव, श्रम विभाग के पद पर पदस्थ। श्रम विभाग में अनेक नई योजनाएं प्रारंभ करने में भूमिका।
  • वर्ष 2011 से फरवरी, 2014 तक प्रमुख सचिव/ अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पद पर पदस्थ। राज्य को मनरेगा तथा ई-पंचायत में राष्ट्रीय पुरस्कार।
  • प्रशासनिक लक्ष्य - मान. मुख्यमंत्री जी की इच्छा अनुरुप छत्तीसगढ़ में ''लोक सेवा गारंटी अधिनियम'' का प्रभावी क्रियान्वयन प्रदेश में सुनिश्चित करना।