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अम्बिकापुर : सरगुजा जिले में शुरू होगी डायल 112 योजना : मुख्यमंत्री ने दी जिलेवासियों को होली की बधाई और शुभकामनाएं

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उत्साह से सुना गया ‘‘रमन के गोठ’’

अम्बिकापुर 12 मार्च 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मासिक रेडियोवार्ता ‘‘रमन के गोठ’’ की उन्नीसवीं कड़ी में जिलेवासियों को होली की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि यह त्यौहार सबके जीवन में खुशी के नये रंग बिखेरे। उन्होंने बताया कि डायल 112 योजना के प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ के जिन 11 जिलों में शुरू की जायेगी उनमें एक सरगुजा जिला भी शामिल हैं। सरगुजा जिले के जिला मुख्यालय अम्बिकापुर में आज यहां जिला पंचायत के सभाकक्ष में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मासिक रेडियोवार्ता ‘‘रमन के गोठ’’ का सामूहिक श्रवण किया गया। इसके साथ ही सरगुजा जिले के गांव-गांव में ‘‘रमन के गोठ’’ की उन्नीसवीं कड़ी को उत्साह से सुना गया।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ‘‘रमन के गोठ’’ की मासिक रेडियोवार्ता की उन्नीसवीं कड़ी में कहा कि होली हमारा बहुत बड़ा त्यौहार है, जो एक ओर बुराई का प्रतीक होलिका दहन और अच्छाईयों के प्रतीक भक्त प्रहलाद के आग में जलने से बच जाने की घटना के माध्यम से अच्छाईयों की जीत का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि होलिका दहन के लिए पेड़ों को नहीं काटना चाहिए और होली के लिए लकड़ी नहीं जलाना चाहिए, बल्कि कंडा, कचरा या ऐसी चीजों का दहन करें जो खराब हैं। इस तरह हरियाली, प्राकृतिक संसाधनों व पर्यावरण को बचाने का संदेश भी इस पर्व के माध्यम से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह त्यौहार अमीर, गरीब, जाति-वर्ग आदि के बंधन तोड़कर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर गले मिलने का है। प्रकृति के खूबसूरत रंगो का आनंद लेने का है। उन्होंने कहा है कि होली का त्यौहार मनाते समय यह ख्याल रखना चाहिए कि त्यौहार के चटख रंग किसी विवाद या दुर्घटना से बदरंग न हो जाए। डॉ. सिंह ने कहा कि यह गलत धारणा है कि होली हुड़दंग का त्यौहार है बल्कि यह तो तो आत्मीयता का, प्रेम का, मिलन का और हास्य-व्यंग्य की फुहारों में भीगने का त्यौहार है। उन्होंने कहा कि नशा तथा ऐसी अन्य चीजों से बचना चाहिए, जो शारीरिक व मानसिक रूप से किसी को भी चोट पहुॅचा सकते हैं, तभी इस त्यौहार का असली मकसद पूरा होता है।                
मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण को हमने कर्तव्य माना है, धर्म माना है। उन्होंने कहा कि 13 वर्षो मंे हमने महिलाओं को अधिकारों, सुविधाओं योजनाओं के माध्यम से जो संसाधन दिये हैं। उसका उपयोग करते हुए छत्तीसगढ़ की नारी शक्ति अब महाशक्ति का रूप ले चुकी है। सरस्वती सायकल योजना, कन्या छात्रावास, पोर्टाकेबिन, कस्तूरबा विद्यालय, शालाओं का उन्नयन आदि सुविधाओं के कारण 15 से 17 आयू वर्ग की बेटियों का प्रतिशत 65 प्रतिशत से 90 प्रतिशत हो गया है। स्कूलों में बेटियों की दर्ज संख्या में हम राष्ट्रीय औसत 84 प्रतिशत से काफी ऊपर और देश में नवमें स्थान पर हैं। इतना ही नहीं अब छत्तीसगढ़ की बेटियां स्कूल से लेकर कॉलेज तक निःशुल्क पढ़ाई कर रही हैं और ऐसी व्यवस्था करने वाले हम देश में पहले राज्य हैं। चाहे स्वच्छता की बात हो, चाहे कुरीतियों को मिटाने की हर जगह महिलाएं एक सिपाही की तरह तैनात हैं। ऐसी अनेक योजनाओं में महिला समूह सीधी भागीदारी निभा रहीं है जो बताता है कि महिलाएं जब जागती है तो सिर्फ आर्थिक स्वावलंबन के लिए नहीं, बल्कि समग्र रूप से समाज को आगे बढ़ाने के लिए खड़ी हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि सखी वन स्टॉप सेन्टर रायपुर में स्थापित कर दी गई है और प्रदेश के 26 जिलों में सखी वन स्टाप सेन्टर की स्थापना कर दी जायेगी। उन्होंने बताया कि पूरक पोषण आहार के लिए 514 करोड़ तथा एकीकृत बाल विकास सेवा के लिए 582 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत 35 लाख महिलाओं को रसोई गैस दिया जायेगा।   
मुख्यमंत्री डा.ॅ सिंह ने बताया कि संचार क्रांति योजना ‘‘स्काई’’ के अन्तर्गत 39 लाख ग्रामीणों, शहरी क्षेत्रों के 3 लाख परिवारों और महाविद्यालय के 3 लाख विद्यार्थियों को ‘‘स्मार्ट फोन और सिम दिये जायेगें। इसके लिए इस वर्ष 200 करोड़ रूपये तक बजट प्रावधान किया गया हैं। इसका लाभ उन गरीब परिवारों को मिलेगा जिनके लिए ‘‘जैम’’ जीवन का नया आधार बनने वाला हैं। जनधन खाते, आधार और मोबाईल फोन को मिलाकर ‘‘जैम’’बनता है। इससे डीबीटी का क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा, जिसकी तैयारी के रूप में 100 प्रतिशत जन-धन खाते खोले गये हैं। 97 प्रतिशत आधार कार्ड बनाये गये हैं। उन्होंने बताया कि ‘‘स्काई’’ योजना के तहत मुख्य 3 काम होंगे जिसमें पहला स्मार्ट फोन वितरण, दूसरा टावर की स्थापना और तीसरा मोबाईल फोन के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि डायल 112 सेवा एक क्रांतिकारी कदम है, जो पुलिस व्यवस्था का कायाकल्प कर देगी। इसमें रिस्पांस टाइम के साथ पारदर्शिता, जिम्मेदारी, जवाबदेही, मदद, राहत सब कुछ मिलेगा, जो पुलिसिंग को आधुनिक दिशा देगा। उन्होंने बताया कि नई प्रौद्योगिकी, नेटवर्किंग और प्रबंधन का उपयोग करते हुए हम डायल 112 योजना शुरू कर रहे हैं, ताकि शहरी इलाकों में 10 मिटन के भीरत और ग्रामीण इलाकों में 30 मिनट के भीतर घायल अथवा संकटग्रस्त व्यक्ति को मदद पहुॅचाई जा सके। उन्होंने बताया कि 112 नंबर डायल करते ही राज्य स्तरीय कन्ट्रोल रूम में तुरन्त एक्शन चालू हो जायेगा, जिसके लिए जीपीएस युक्त 240 वाहन एवं 50 मोटर सायकिलों का नेटवर्क काम शुरू कर दिया गया है। इस योजना के लिए इस वर्ष 50 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि लोक सुराज अभियान मेरी और हमारी सरकार की पाठ्शाला है। पहले हमने ‘ग्राम सुराज अभियान’ चलाया था फिर नगर सुराज अभियान चलाया था अब दोनों को मिलाकर लोक सुराज अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता से सीधे जुड़ना एवं सीधे बात करना सुशासन का सबसे पहला कदम है और इसी से हमें सही दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि मै बजट मंत्रालय में बैठकर नहीं खेत-खलिहान, पंचायत, चौपाल में बैठक कर बनाता हूॅ तभी गावं-गली और किसान लोग मेेरे बजट के केन्द्र में होते हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष लोक सुराज अभियान तीन चरणों में हो रहा है। पहले चरण में गत 26 फरवरी से 28 फरवरी तक आवेदन लिये गये और दूसरे चरण में आवेदनों का निराकरण मार्च माह भर किया जायेगा और तीसरे चरण में 3 अप्रैल से 20 मई 2017 तक समाधान शिविर आयोजित किये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने इस बार लोक सुराज अभियान को समाधान पर्व बना दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे पहले की तरह ही किसी भी दिन किसी भी गांव, किसी भी जिले में अचानक पहुॅचकर समाधान शिविर में भाग लेंगे और जिला स्तर पर समीक्षा करेंगे तथा प्रेस से भी मिलेंगे। उन्होंने बताया कि इसके अलावा अन्य मंत्रीगण, मुख्य सचिव से लेकर वरिष्ठ अधिकारी, सांसद, विधायक सभी जनप्रतिनिधि भी प्रदेश का दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री ने लोक सुराज अभियान को अपना सहयोग प्रदान करने और समाधान शिविरों में पहुॅचकर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करने कहा है।


समाचार क्रमांक 482/2017   
 

Date: 
12 Mar 2017