Homeउत्तरबस्तर(कांकेर) : छात्र परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करने के तनावग्रस्त न बनें-मुख्यमंत्री

Secondary links

Search

उत्तरबस्तर(कांकेर) : छात्र परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त करने के तनावग्रस्त न बनें-मुख्यमंत्री

Printer-friendly versionSend to friend
उत्तरबस्तर(कांकेर)10फरवरी 2017
 
जिले के कांकेर विकासखण्ड के ग्राम कोकडी के पंचायत भवन में रमन के गोठ की 18वीं कड़ी का समुहिक श्रवण कार्यक्रम का आयोजन किया गया । मुख्यमंत्री ने तालाबों को प्रकृति की किडनी बताते हुए जलाशयों की सुरक्षा पर विशेष रूप से बल दिया है। उन्होंने इसमें ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, सामाजिक संगठनों और सभी नागरिकों से सहयोग का आव्हान किया है। आकाशवाणी से आज प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ की 18वीं कड़ी में मुख्यमंत्री ने कहा - छत्तीसगढ़ में तालाबों की अपनी एक विशेष संस्कृति है। इसका ऐतिहासिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व भी है जो स्थानीय आबादी की आस्था के साथ-साथ उसकी आजीविका से भी जुड़ता है। तालाबों की वजह से भू-जल स्तर बना रहता है। 
उन्होंने अपने रेडियो प्रसारण में छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए नागरिकों द्वारा किए जा रहे नये प्रयोगों (नवाचारों) की विस्तार से चर्चा की। गरियाबंद जिले के ग्राम रसेला (विकासखंड-छुरा) की महिलाओं द्वारा बड़ी-बड़ी कम्पनियों के मुकाबले में बनाए जा रहे सी.एफ.एल. बल्ब का भी मुख्यमंत्री ने आज की रेडियो वार्ता में विशेष उल्लेख किया और कहा कि जंगलों से घिरे इस अनजाने से गांव के महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं के इस कार्य को देखकर मैं खुद हैरत में पड़ गया। 
मुख्यमंत्री ने परीक्षाओं के मौसम को ध्यान में रखकर छात्र-छात्राओं को तनावमुक्त रहने, परीक्षा का तनाव दूर करने के लिए पढ़ाई के बीच कुछ समय मिलने पर योग अभ्यास और हल्का फुल्का व्यायाम करने अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों को हिम्मत नही हारने की भी सलाह देते हुए बच्चों के अभिभावकों का भी आव्हान किया है कि वे परीक्षा के दिनों में घर के वातावरण को शांत और सहयोगात्मक बनाकर बच्चों के साथ स्नेहपूर्ण व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि इस दौरान घर में कोई ऐसा आयोजन नही किया जाए जिसकी वजह से बच्चों को अलग रहना पड़े या उनका ध्यान भटके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तालाबों के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार ने वेटलैण्ड प्राधिकरण का गठन किया । उन्होंने कहा कि राज्य में वेस्टलैण्ड नीति बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ.डी.के. मरोठिया द्वारा तालाबों के संरक्षण और वेटलैण्ड के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने ने कहा- वेस्टलैण्ड का मतलब उस जमीन से है, जो तालाबों के विस्तार में लम्बे समय तक पानी में डुबी हुई हो। इस वजह से ऐसी जमीन की पहचान अलग से होती है। मुख्यमंत्री ने डॉ.डी.के. मरोठिया और उनकी टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा रतनपुर, दलपतसागर और कुटुम्बसर (बस्तर) की अद्भुत जलीय संरचनाओं को विश्व प्रसिद्ध ‘रामसर-साईट’ में जगह दिलाने की कोशिश की जा रही है, जो ऐतिहासिक महत्व के स्थानों को विश्व स्तरीय मान्यता दिलाती है।
मुख्यमंत्री ने आज के अपने रेडियो प्रसारण में छत्तीसगढ़ में हो रहे विभिन्न नवाचारों (नये प्रयोगों) का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ‘‘मैं ज्यादातर समय जनता के बीच रहता हूं, दूर-दराज के गांवों का दौरा करता हूं। लोगों के बीच बैठता हूं तो समस्याएं भी पता लगता हैउससे समाधान के तरीके भी निकलते हैं। मुझे लगता है कि ‘नवाचार’ की सबसे अच्छी एप्रोच यही है कि जो कार्य नही हो पो रहा है, वह जल्द से जल्द किसी नये तरीके से हो जाए।‘‘ उन्होंने कहा-उदाहरण के लिए जब हमने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) को ठीक करने के लिए कम्प्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी (आई.टी.) का उपयोग किया, तो एक नवाचार ही था। जब 20 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेललाईन बिछाने का सवाल आया तो हमनें ऐसी तमाम संस्थाओं से बात की, जिनको उनसे लाभ मिलता है और वे सब सहमत हो गए, तो यह भी एक ‘नवाचार’ है कि राज्य सरकार का ज्यादा पैसा लगे बिना बहुत बड़ा काम हो गया। 
उन्होने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने डी.एम.एफ. (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) के रास्ते खनिज बहुल जिलों के विकास के लिए भरपूर राशि की व्यवस्था की और हमने इसमें से दो-ढाई सौ करोड़ रूपए रेलवे लाईन बिछाने के लिए दे दिए, तो यह भी एक नवाचार है कि हम काम बनाने के लिए पैसे की व्यवस्था कैसे करते हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा - हमर छत्तीसगढ़ योजना, सौर सुजला योजना और लाइवलीहुड कॉलेज जैसे अनेक कार्य ‘नवाचार’ की देन है। उन्होंने कहा - मैंने अपने अधिकारियों को यह छूट दी है कि जनहित के लिए वे जो भी नये कदम उठा सकते हैं, जरूर उठाएं। आम जनता को जल्द से जल्द सुविधाएं देना ही हमारा लक्ष्य है।  
डॉ. सिंह ने कहा तेन्दूपत्ता संग्राहकों को तेरह साल पहले सिर्फ 350 रूपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक मिलता था, जिसे क्रमशः बढ़ाते हुए हमने 1500 रूपए कर दिया और अब यह फैसला किया है कि नये सीजन में उनकी पारिश्रमिक दर 1800 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया जाए। इस प्रकार तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाला पारिश्रमिक पांच गुना से ज्यादा कर दिया गया है। उनहोंने कहा कि यह हमारे प्रेरणा सा्रेत पं. दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को अमल में लाने और सार्थक बनाने का बहुत अच्छा उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने तेन्दूपत्ते की ऑनलाईन नीलामी ‘ई-नीलामी’ का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी नजर में यह भी एक ‘नवाचार’ है, जो समाज के सबसे पिछड़े तबके की जिन्दगी बदल रहा है। हमने तेन्दूपत्ते के पूरे काम-काज को सुनियोजित किया है, ताकि इसका लाभ वनवासियों को मिले। ऐसा पहले नही होता था। हमने उनकी जिंदगी को आमदनी के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी से भी जोड़ा है। 
मुख्यमंत्री ने उन लोगों और संस्थाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिनके द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग किए जा रहे हैं। डॉ. सिंह ने उनके नवाचारों की तारीफ की। उन्होंने राजनांदगांव के उद्यानिकी कॉलेज में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा यूरोपियन स्ट्राबेरी को छत्तीसगढ़ की मिट्टी में उपजाने के लिए नई किस्म तैयार किए जाने का जिक्र किया। 
मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के डॉ. ए.के. गेड़ा को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा ‘एमेरिटस सांइटिस्ट’ के पद पर चुने जाने पर खुशी जताई और कहा कि - लगभग 29 वर्ष बाद छत्तीसगढ़ के किसी वैज्ञानिक को यह सम्मान मिला है। डॉ. गेड़ा औषधीय पौधे - हड़जोड़ में मुख्य रासायनिक घटकों का अध्ययन करेंगे। हमारे यहां वैद्यों द्वारा ऐसी जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है, लेकिन उस पर कोई सुव्यस्थित शोध नही हुआ था। अब यह कार्य डॉ. गेड़ा करेंगे। 
मुख्यमंत्री ने गरियाबंद जिले के ग्राम रसेला (विकासखंड-छुरा) के महिला स्व-सहायता समूह द्वारा सी.एफ.एल. बल्ब बनाने की चर्चा करते हुए कहा कि आम तौर पर राज्य के गांव-गांव में महिला समूहों द्वारा पापड़, बड़ी, अचार, अगरबत्ती, साबुन, ईंट, रेडिमेड कपड़े बनाने, उन्हें बाजार में बेचने और किराए पर खेत लेकर किसानी करने की खबरें तो बहुत दिनों से सुन रहे हैं, लेकिन जंगलों से घिरे इस गांव की महिलाओं के इस कार्य को देखकर मैं खुद हैरत में पड़ गया। इस अनजाने से गांव की महिलाएं ‘सी.एफ.एफ. बल्ब’ बनाती है और उसे उतनी ही ‘वारंटी’ देकर बेचती हैं, जितनी बड़ी-बड़ी कम्पनियां देती हैं। इतना ही नहीं, बल्कि रसेला गांव के सी.एफ.एल. बल्ब  बड़ी कम्पनियों की तुलना में काफी कम कीमत पर बेचे जाते हैं। 
मुख्यमंत्री ने रमन के गोठ में सभी लोगों से नया रायपुर में पहली बार 19 फरवरी को होने वाले 21 किलोमीटर के राज्य स्तरीय हाफ मैराथन में शामिल होने का आव्हान किया। उन्होंने कहा इस हाफ मैराथन के अलावा दस, पांच, तीन, दो और एक किलोमीटर की दौड़ भी आयोजित की जा रही है। हाफ मैराथन दौड़ 13 समूहों में होगी, जिसमें कुल 30 लाख रूपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रथम पुरस्कार तीन लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार दो लाख रूपए, तृतीय पुरस्कार एक लाख रूपए, चौथा पुरस्कार पचास हजार रूपए, पांचवा पुरस्कार पच्चीस हजार रूपए का होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अलावा इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रतियोगी भी शामिल होंगे। बालक-बालिकाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग वर्ग भी बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि यह अवसर अपना जोश और अपनी फिटनेस दिखाने और अपनी सेहत और अपने विकास के लिए एकजुटता दिखाने का भी है। इसमें लोग बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। 
प्रतिक्रियाएं-
ग्राम कोकडी के श्री भुवनलाल जैन ने रमने के गोठ कार्यक्रम प्रसारण सुनकर कहा कि वे इस कार्यक्रम से बहुत खुश हैं। वर्तमान मं होने वाली कार्यक्रम के बारे में राज्य के मुख्यिा द्वारा जानकारी दी गई । माघ पूर्णिमा, राजीम कुम्भ, तालाबों का सौंदर्यीकरण और बच्चों की वार्षिक परीक्षा मंे तनाव करने जो उपाय बताया है वह लाभदायक है। गुड गर्वनर द्वारा सही कार्य को प्राथमिकता देने बात बताई गई।  संतोष शांडिल्य ग्राम कोकडी ने बतायाकि मुख्यमंत्री ने आज की कार्य्रम में जो महत्वपूर्ण बातें बताई उनके लिए उन्होंने डॉ.रमन सिंह का कोटिस बधाई देकर धन्यवाद ज्ञापित किया है। श्री लुकेश्वर साहू ने कहा कि प्रदशे के मुख्यिा डॉ रमन संह द्वारा रमन के गोठ कार्यकम का सीधा जनसंवाद एक बेहतनी माध्यम है शासन की विभिन्न योजनाओं का सीधा जानकारी हमें सीधे मुख्यमंत्री की वाणी में सुनने का अवसर मिला है। जिसके लिए उन्होंने धन्यवाद दिया है। 
सरपंच कोकडी श्रीमती पूर्णिमा भस्कर, उपसरपंच श्री जोहर साहू, पंच बासनवाही किर्ति मेश्राम, अमर सिंह जुर्री, हरीराम साहू, पटेल प्रकाश साहू, अपर कलेक्टर श्री अरविंद शर्मा, तहसीलदार श्री टी.पी.साहू, जनपद सीईओ गोवर्धन गजबल्ला, करारोपण अधकारी संतोष कौशिक इंद्रदेव सिन्हा, सचिव नरेन्द्र कुमार शांडिल्य, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे। 
 
क्र//संत
 
Date: 
12 Feb 2017