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जांजगीर-चांपा : इग्नाइट अवार्ड से सम्मानित हिमांशु रतेरिया के दादा-दादी ने सुना ‘रमन के गोठ’

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दादी ने कहा,बच्चों की उपलब्धियों की चर्चा से मिलती है आगे बढ़ने की प्रेरणा

जांजगीर-चांपा, 13 नवम्बर 2016

राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के हाथों अब्दुल कलाम इग्नाइट अवार्ड से सम्मानित सक्ती के हिमांशु रतेरिया के दादा-दादी ने आज सपरिवार मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मासिक रेडियो वार्ता कार्यक्रम ‘रमन के गोठ’ सुना। हिमांशु की दादी श्रीमती विमला ने कहा कि विज्ञान और खेल के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाले बच्चों को मुख्यमंत्री ने ‘रमन के गोठ’ के माध्यम से बधाई दी है। इससे उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों के साथ दूसरे बच्चों को भी आगे बढ़ने और दे-समाज के लिए कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को बाल दिवस की बधाई दी है। हिमांशु की दादी ने कहा कि रमन के गोठ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले के सुदुर अंचल के बच्चे किस तरह वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप ये बच्चे आगे चलकर जरूर देश के लिए बड़ा काम करेंगे।
दादी के साथ हिमांशु के पिता श्री सुनील रतेरिया, मां श्रीमती सरोज रतेरिया और दादा श्री बलराम साहनी ने भी रमन के गोठ कार्यक्रम को सुना। उल्लेखनीय है कि जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड मुख्यालय सक्ती के रहने वाले श्री सुनील रतेरिया के बेटे हिमांशु ने बुजुर्गो को दवा खाने का समय याद दिलाने के लिये ‘मेडिसीन का सूचक‘ (उपकरण) नाम से एक प्रादर्श बनाया है, जिसकी वैज्ञानिकों ने काफी सराहना की है। इस प्रादर्श को बनाने के लिए हिमांशु को पिछले सात नवम्बर को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने राष्ट्रीय इग्नाईट अवार्ड से किया है। वर्तमान में हिमांशु रतेरिया उड़ीसा के भुवनेष्वर में कक्षा 11 वीं में अध्ययनरत् है। हिमांशु के अलावा छत्तीसगढ़ के दो और छात्रों को भी यह अवार्ड मिला है। श्री रतेरिया ने प्रादर्श के बारे में चर्चा के दौरान बताया कि हिमांशु को अपने दादा-दादी से बहुत लगाव है और घर में वह ज्यादातर उन्हीं के साथ रहता है। उसकी दादी सुगर और ब्लडप्रेसर की मरीज है और वह कई बार समय पर दवाई लेना भूल जाती है। कभी-कभी स्वास्थगत कारणों से उन्हें ऑक्सीजन भी लगाना पड़ता है। यह सब देखकर ही हिमांशु ने इस तरह का प्रादर्श बनाया, जिससे उसकी दादी सहित दुनिया के सभी बुजुर्गों को दवाईयां लेने में सहूलियत हो। श्री रतेरिया ने बताया कि हिमांशु शुरू से ही मेधावी और अपने शिक्षकों का प्रिय छात्र रहा है। वह अपने दे के लिए खूब काम करना चाहता है।


क्रमांक-सुनीता

 

Date: 
13 Nov 2016