Homeदंतेवाड़ा : वेटलैंड अथारिटी के गठन से बारसूर के तालाबों से भी स्थानीय लोग उठा पाएंगे लाभ :रमन के गोठ में वेटलैंड डेवलपमेंट अथारिटी के गठन पर ग्रामीणों ने जताई खुशी

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दंतेवाड़ा : वेटलैंड अथारिटी के गठन से बारसूर के तालाबों से भी स्थानीय लोग उठा पाएंगे लाभ :रमन के गोठ में वेटलैंड डेवलपमेंट अथारिटी के गठन पर ग्रामीणों ने जताई खुशी

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                दंतेवाड़ा, 12 फरवरी, २०१७

रमन के गोठ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस बार वेटलैंड डेवलपमेंट के महत्व को बताया। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया में चीन के एक स्थान के अलावा रतनपुर एक मात्र ऐसी जगह है जहाँ १६० तालाबों की प्रणाली है। इनके विकास के लिए सरकार ने वेटलैंड अथारिटी के गठन का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री की इस बात से प्रभावित दंतेवाड़ा के स्थानीय लोग भी प्रभावित हुए। गीदम साप्ताहिक बाजार में खरीदारी करने पहुँचे श्री महेश मंडावी ने कहा कि हमारे बारसूर में भी अनेक तालाब हैं और इसे पौराणिक काल से ही तालाबों का शहर माना जाता है। अब जब शासन ने वेटलैंड डेवलपमेंट अथारिटी के गठन का निर्णय लिया है तो इसका लाभ बारसूर को भी होगा, साथ ही हमारे जलाशयों के सौंदर्यीकरण का कार्य भी तेजी से हो सकेगा। इस अवसर पर गीदम बाजार में खरीदारी करने पहुँचे छिंदनार के ग्रामीणों ने कहा कि रमन के गोठ में आज सबसे अच्छी बात तेंदूपत्ता संग्रहण के पारिश्रमिक दर को १८०० रुपए प्रति मानक बोरा करने को लेकर है। १३ साल पहले तेंदूपत्ता संग्राहकों को ३५० रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक मिलता था जो आज पाँच गुना ज्यादा हो गया है। दंतेवाड़ा जिले में कृषि को लेकर नये प्रयोग हो रहे हैं और मुख्यमंत्री की कृषि के नवाचारों के प्रति गहरी उत्सुकता को देखते हुए किसान हर महीने रमन के गोठ सुनना पसंद करते हैं। इस बार रमन के गोठ के संबंध में सोमारू उइके ने कहा कि इस बार मुख्यमंत्री ने स्ट्राबेरी की खेती के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि यूरोपियन किस्म की स्ट्राबेरी को अब छत्तीसगढ़ की मिट्टी में भी उपजाया जा सकता है। सामान्यतः स्ट्राबेरी की खेती कश्मीर, शिमला तथा हिमाचल प्रदेश में ही उपजायी जाती है। इस प्रकार के नये नवाचार हम दंतेवाड़ा के किसान भी अपना सकते हैं क्योंकि स्ट्राबेरी जैसे फलों के स्थानीय उत्पादन नहीं होने की वजह से ग्राहक इनके अच्छे दाम देना पसंद करते हैं। दंतेवाड़ा की मिट्टी वैसे भी जैविक खेती के अनुकूल हैं अतएव यहाँ स्ट्राबेरी जैसे फसलों से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। श्री उइके ने बताया कि मुख्यमंत्री ने हड़जोड़ के बारे में भी बात की। यह कमाल का औषधिय पौधा है लेकिन इस पर अभी तक किसी तरह की रिसर्च नहीं हुई थी। डॉ. गेड़ा इस पर रिसर्च कर रहे हैं। इस रिसर्च से उन कई बूटियों पर काम करने का रास्ता खुल पाएगा, जिनका औषधीय उपयोग छत्तीसगढ़ में किया जा रहा है। इनके रासायनिक घटकों के अध्ययन से हमारे बरसों के ज्ञान पर वैज्ञानिक मुहर भी लग पाएगी।

   इस अवसर पर नगर पंचायत गीदम के अध्यक्ष श्री अभिलाष तिवारी, तहसीलदार श्रीमती दिव्या पोटाई सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

Date: 
12 Feb 2017