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दुर्ग : जागरूक नागरिक, सामाजिक संगठनों से अपील : जलाशयों को सुरक्षित रखने में करें योगदान - मुख्यमंत्री

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दुर्ग, 12 फरवरी 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज अपने मासिक रेडियो वार्ता रमन के गोठ की 18वीं कड़ी का प्रसारण में छत्तीसगढ़ में तालाबों की अपनी विशेष संस्कृति रही है। इसका ऐतिहासिक, धार्मिक और आर्थिक महत्व भी रहा है, जो स्थानीय आबादियों की आस्था के साथ ही उनकी आजीविका से भी जुड़ता है। मछली के साथ कमल का फूल, मखाना, सिंघाड़ा, जल कोचई आदि उत्पाद भी इन तालाबों का वरदान हैं, जो स्थानीय लोगों की आय का जरिया बना हैं। तालाबों से भू-जल स्तर बना रहता है। जलवायु परिवर्तन थमा रहता है। पक्षियों का बसेरा होता है, और जैव-विविधता का संरक्षण होता है। इनके आस-पास औषधीय तथा सुगंधित पौधों की खेती होती है। इस तरह तालाब प्रकृति की किडनी की तरह काम करते हैं। साथ ही क्षेत्र के लोगों ने भी रमन के गोठ को सुना।
उन्होंने रमन के गोठ के माध्यम से ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों के साथ ही प्रदेश के प्रत्येक जागरूक नागरिक, सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे जहां भी हैं, वहां अपने जलाशयों को सुरक्षित रखने में योगदान करें। गहरीकरण और सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान किया जाए। सौर-ऊर्जा से रोशनी किया जाए। वैसे भी गर्मी का मौसम निकट है, जिसमें जलाशयों की आवश्यकता का ज्यादा अहसास होता है। यह काम निश्चित कार्ययोजना बनाकर करना चाहिए, ताकि किसी एक मौसम की नहीं, बल्कि सालभर की योजना बनाकर काम किया जा सके।
उन्होंने बच्चों से परीक्षा को लेकर तनावग्रस्त ना हो और परीक्षा को लेकर तनाव आने का सबसे बड़ा कारण बताया है कि हमारी सालभर की तैयारी और जिस तरह के परिणाम की अपेक्षा होती है, उसके बीच सही तालमेल नहीं होता। एक शिक्षा-सत्र कई कालखण्डों में बटा होता है, जिससे आप अपने पूरे पाठ्यक्रम के छोटे-छोटे हिस्से में पढ़ाई करते हैं। सालभर के ’परफॉरमेंस’ से यह पता चलता है कि बच्चे का अंतिम परिणाम क्या आने वाला है। परीक्षा के समय पर एकदम से चमत्कारिक सफलता की उम्मीद न करें और बच्चों पर बड़े लक्ष्य का दबाव न डालें। बच्चों को यह समझाना पड़ेगा कि पढ़ाई की ’लान्ग टर्म’ की रणनीति व ’शॉर्ट टर्म’ की रणनीति में फर्क होता है और दोनों के परिणाम भी उसी के अनुरूप होते हैं। बड़ी सफलता का कोई ’शॉर्ट कट’ नहीं होता। नियमित रूप से पढ़ाई करने के बाद भी बच्चें और पालकों को तनाव रहता है, तो इसके लिए घर का वातावरण शांत, सहयोगात्मक और स्नेह से भरा बनाए। घर में कोई ऐसे आयोजन न करें, जिससे बच्चे को अलग रहना पड़े, या बच्चों का ध्यान भटक जाए।
भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने का काफी लम्बा संघर्ष हमारे पूर्वजों ने किया था, जिसके कारण अन्ततः 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था। देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जवानी को खपाने वाले और आजादी के बाद भी अपने उसूलों और अपने आदर्शों पर डटे रहकर भारत के नवनिर्माण को दिशा देने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के हम सदैव ऋणी रहेंगे। उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को प्रतिमाह 15 हजार रूपए का मानदेय देने की व्यवस्था है। अब इन सेनानियों को सम्मान-स्वरूप मिलने वाली यह राशि बढ़ाकर 25 हजार रूपए कर दी।  


क्रमांक-136/प्रभाकर

 

Date: 
12 Feb 2017