Homeदुर्ग: रमन के गोठ की 16वीं कड़ी का जगह-जगह श्रवण

Secondary links

Search

दुर्ग: रमन के गोठ की 16वीं कड़ी का जगह-जगह श्रवण

Printer-friendly versionSend to friend

दुर्ग, 11 दिसम्बर 2016

रमन के गोठ की 16वीं कड़ी को आज दुर्ग जिले में अनेक स्थानों पर उत्साहपूर्वक सुना गया। दुर्ग जिले के ग्राम बिरौदा एवं दुर्ग शहर के राजीव नगर सहित कई स्थानों पर रमन के गोठ का प्रसारण सुना।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बड़े पैमाने पर नगद लेन-देन के हिसाब-किताब छुपाने या नगद राशि की सुरक्षा उसके सदुपयोग या दुरुपयोग को लेकर अनेक समस्याएं आती हैं। उसका अनुभव सिर्फ भारत को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को होता है। माननीय प्रधानमंत्री जी प्रत्येक भारतीय नागरिक को यह सुविधा देना चाहते हैं, जो विकसित देश के नागरिकों को उपलब्ध है। इसलिए उन्होंने कैशलेस ट्रांजेक्शन या नकद रहित लेन-देन को भारत में भी बढ़ावा देने का मन बनाया है। इस व्यवस्था में ज्यादातर प्लास्टिक से बना हुआ कार्ड उपयोग में आता है। इस तरह प्लास्टिक-मनी का शब्द लोकप्रिय हुआ।
इसी तरह से ई-बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर होता है जब आप बैंक में एटीएम कार्ड या इंटरनेट के माध्यम से नगद रकम को हाथ लगाए बिना भी अपने बैंक एकाउंट में जमा रकम का लेन-देन न सिर्फ अपने गांव-शहर में बल्कि, दूसरे गांव या शहर में भी कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रत्येक पंचायत में स्थापित किए जा रहे उपभोक्ता सेवा केन्द्र में यह सुविधा दी जाएगी। जिले में बड़ी पहल हुई है, जहां सी.एस.सी. बैंक की सेवाएं देने को तैयार हैं। जिन खाताधारकों ने अपने बैंक एकाउंट में आधार सीडिंग नहीं कराई है, वे लोग बैंक में जाकर एक बार आधार नम्बर नोट कर ले, तो उन्हें यह सुविधा अपने घर के पास और बहुत आसानी से मिलने लगेगी। सी.एस.सी. के बेहतर ढंग से काम करने पर आपको न तो बैंक जाने की जरूरत पड़ेगी न एटीएम। राज्य शासन अपने स्तर पर भी सभी पंचायतों में सी.एस.सी. या उपभोक्ता सेवा केन्द्र को सक्षम बना रहा है और इसके लिए प्रशिक्षित किए गए लोगों के माध्यम से गांव-गांव में प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने समर्थन मूल्य में धान खरीदी से किसानों भाई-बहनों का सालभर का बजट बनता है। हमेशा की तरह इस बार भी धान खरीदी की शानदार व्यवस्था की है। 1333 सहकारी समितियों के 1889 उपार्जन केन्द्रों में धान की आवक तेजी से हो रही है। उपार्जन केन्द्रों में धान बेचने वाले किसानों को उनकी उपज का ऑनलाइन भुगतान करने की व्यवस्था है। जिला सहकारी बैंकों को अभी तक लगभग 6 सौ करोड़ नगद राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है और आगे भी इसमें कोई समस्या नहीं आएगी।

क्रमांक-1220/पंकज/नोहर



 

Date: 
11 Dec 2016