Homeनारायणपुर : आकाशवाणी से ‘‘रमन के गोठ’’ की चौथी कड़ी प्रसारित : नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में सड़क निर्माण हेतु कृषि भूमि दान करने वाले आदिवासी किसान मंगलसाय वडडे का किया जिक्र

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नारायणपुर : आकाशवाणी से ‘‘रमन के गोठ’’ की चौथी कड़ी प्रसारित : नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में सड़क निर्माण हेतु कृषि भूमि दान करने वाले आदिवासी किसान मंगलसाय वडडे का किया जिक्र

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मंगलसाय वडडे सहित अबूझमाड़िया ग्रामीणों ने सुना ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम
मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के द्वारा नाम लेने पर भावुक हुए मंगलसाय वडडे
मंगलसाय वडडे ने कहा क्षेत्र की जनता की सुविधा के लिए दान किया जमीन

नारायणपुर, 13 दिसम्बर 

मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के आज आकशवाणी से प्रसारित मासिक रेडियो वार्ता ‘‘रमन के गोठ’’ की चौथी कड़ी को नारायणपुर जिले के नागरिकों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सुना। प्रदेश के मुखिया डॉ. रमनसिंह के इस रेडियो वार्ता को विशेष रूप से जिले के ग्रामीण ईलाकों में सुनने के लिए ग्रामीणों ने काफी उत्सुकता दिखायी। इस दौरान धुर माओवादी प्रभावित नारायणपुर जिले में सड़क निर्माण करने के लिए अपनी कृषि भूमि दान देने वाले आदिवासी किसान मंगलसाय वडडे सहित अबूझमाड़िया ग्रामीणों ने ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम को ध्यानपूर्वक सुना। मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने इस अवसर पर नारायणपुर जिले के अंतर्गत धुर माओवादी प्रभावित क्षेत्र झाराघाटी में सड़क बनाने के लिए जमीन दान करने वाले आदिवासी कृषक मंगलसाय वडडे का जिक्र किया और उनकी मिसाल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि नक्सली प्रभावित अंदरूनी क्षेत्र में सड़क बनाने का कार्य लंबे समय से नहीं हो पा रहा था, क्योंकि निजी भूमि सड़क पर आ रही थी। ऐसे में ग्राम मुंडपाल मुसकुड़पारा निवासी आदिवासी किसान मंगलसाय ने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि को सड़क निर्माण के लिए शासन को दान कर दिया। इस अहम योगदान के लिए मंगलसाय वडडे जैसे किसान की उदारता की जितनी तारीफ की जाये वह कम है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास हेतु 11 सूत्रीय समयबद्ध कार्यक्रम क्रियान्वयन की कटिबद्धता व्यक्त करते हुए इस दिशा में आगामी 3 वर्ष के भीतर सकारात्मक पहल कर उन्हें लाभान्वित किये जाने पर बल दिया। इस मौके पर नारायणपुर जिले के हलामीमुंजमेटा में ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम सुनने के लिए आये आदिवासी किसान मंगलसाय वडडे ने मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के द्वारा उनका नाम लेने तथा उनकी प्रशंसा करने पर भावुक होकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया।
    मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह की यह रेडियो वार्ता जनसंपर्क विभाग के सहयोग से आकाशवाणी रायपुर सहित प्रदेश के अन्य आकाशवाणी केन्द्रों पर एक साथ प्रसारित की गयी। इसे टेलीविजन के क्षेत्रीय न्यूज चैनलों ने भी प्रसारित किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के इस रेडियो वार्ता को सुनकर नारायणपुर जिले में सड़क निर्माण के लिए कृषि भूमि दान करने वाले आदिवासी किसान मंगलसाय वडडे ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मेरा नाम लेकर मेरे त्याग को सराहा है। मैंने गांव के लोगों से सलाह-मशविरा कर क्षेत्र की जनता की सुविधा को मददेनजर रखते हुए अपनी कृषि भूमि को सड़क बनाने के लिए दान दिया है। जिससे इस नक्सली प्रभावित क्षेत्र में 3 किलोमीटर की सड़क के स्थान पर मात्र एक किलोमीटर सड़क बन रही है। उक्त सड़क के बन जाने से क्षेत्र के लोगों तथा वाहनों को आने-जाने में सुविधा होगी। मंगलसाय वडडे ने पूरे प्रदेश में अपने नाम और उसके त्याग की प्रशंसा करने के लिए मंख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के प्रति आभार जताया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री टामनसिंह सोनवानी ने जिले में सड़क निर्माण हेतु कृषि भूमि दान करने वाले मंगलसाय वडडे के बारे में जिक्र को पूरे जिले के लिए गौरव की बात निरूपित करते हुए कहा कि इस धुर नक्सली प्रभावित क्षेत्र में सड़क निर्माण हेतु एक कदम आगे आकर स्वेच्छापूर्वक अपनी कृषि भूमि को दान करने वाले किसान मंगलसाय वडडे विकास पुरूष हैं, जो जिले की जनता के लिए प्रेरणास्रोत बन गये हैं। उनके इस अनुकरणीय पहल के फलस्वरूप अब जिले की जनता सड़क पुल-पुलिया निर्माण के साथ ही अन्य विकास कार्यों के लिए आगे आ रही है। वहीं जिले में विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय सहभागिता निभा रही है। इस मौके पर मंगलसाय वडडे के पुत्र बित्तूराम और पुन्नूराम ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए पूरे परिवार की सहमति से जमीन को दान दिये हैं। उक्त दोनों ने प्रदेश के मुखिया द्वारा अपने पिता का नाम लेने सहित उनके त्याग को सराहने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। वहीं मुख्यमंत्री के मासिक रेडियो वार्ता को जनता से संवाद स्थापित करने की दिशा में सार्थक पहल निरूपित किया। इस मौके पर फरसगांव की सरपंच श्रीमती रामेश्वरी गोस्वामी, ग्राम पंचायत हलामीमुंजमेटा के सरपंच श्री चुछाय शोरी सहित अन्य पंचायत पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के संबोधन कार्यक्रम ‘‘रमन के गोठ’’ को सुनकर कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह किसानों को राहत पहुंचाने और श्रमिकों के भलाई के प्रति संवेदनशील हैं। वहीं विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए उनकी कटिबद्धता परिलक्षित होती हैं। जिले के अबूझमाड़ प्रखंड अंतर्गत कुरूषनार में ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम को सुनने वाले सरपंच कुरूषनार श्रीमती रजनीबाई, उपसरपंच श्री रानूराम सहित कन्हैया वडडे, सत्यनारायण उसेण्डी, महेश कुमेटी, रामप्रसाद दुग्गा, दसरू कुमेटी, सगराम पोटाई, दीनू नेताम, संतोष पोटाई, बुधराम उईके इत्यादि ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास हेतु समयबद्ध कार्यक्रम क्रियान्वयन को सार्थक पहल निरूपित करते हुए कहा कि नारायणपुर जिले के सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले भू-भाग में निवासरत अबूझमाड़िया जनजाति के परिवारों को आगामी 3 साल के भीतर मूलभूत सुविधायें सुलभ कराने कटिबद्धता व्यक्त कर मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखायी है। इस सार्थक पहल के जरिये जहां अबूझमाड़िया जनजाति के आवासहीन परिवारों को आवास के लिए मदद मिलेगी। वहीं इन परिवारों के बसाहटों में स्वच्छ पेयजल और विद्युतीकरण की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही अबूझमाड़िया जनजाति के परिवारोें को स्मार्ट कार्ड, राशन कार्ड और वनाधिकार पटटे प्रदान करना सरकार की सकारात्मक पहल को रेखांकित करती है। अबूझमाड़ ईलाके के कुरूषनार में ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम श्रवण करने आये इन पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने अबूझमाड़िया जनजाति परिवारों को समाजिक सुरक्षा एवं खाद सुरक्षा के लिए मदद देने सहित कौशल उन्नयन प्रशिक्षण देकर उन्हें आजीविका के साधनों को विकसित करने हेतु मदद देने सरकार की कटिबद्धता को सराहा। इसके साथ ही अबूझमाड़िया परिवारों को देश-दुनिया से जुड़ने के लिए रेडियो प्रदाय करने सहित कंबल एवं छाता देने की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह को साधुवाद दिया। कुरूषनार में ‘‘रमन के गोठ’’ कार्यक्रम को श्रवण करने के पश्चात सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री जीआर शोरी ने अबूझमाड़िया परिवारों के विकास के लिए सरकार के पहल के बारे में ग्रामीणों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी और इस दिशा में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं-कार्यक्रमों से लाभान्वित होने का आग्रह ग्रामीणों से किया। जिले में मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के मासिक रेडियो वार्ता को आश्रम-छात्रावासों के बच्चों और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने ध्यानपूर्वक सुना। वहीं जिले के दूरस्थ ग्रामीण ईलाके अबूझमाड़ प्रखंड मुख्यालय ओरछा, बेनूर, एड़का, छोटेडोंगर, धौंड़ाई, देवगांव, बिंजली, बाकुलवाही इत्यादि प्रमुख बसाहटों में उक्त कार्यक्रम को सुनने के लिए पंचायत पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने काफी उत्साह दिखाया।

Date: 
13 Dec 2015