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बलरामपुर : देश के आजादी में छत्तीसगढ़ के लोगों का अहम योगदान: डॉ. रमन सिंह

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बलरामपुर 14 अगस्त 2016

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ के बारहवीं कड़ी को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जिला मुख्यालय, जनपद पंचायतों एवं ग्राम पंचायतांे में लोगों ने उत्साहपूर्वक सुना गया। विकासखण्ड बलरामपुर के ग्राम पंचायत बड़कीमहरी के लोगों ने पीपल पेड़ के नीचे बने चबुतरे में बैठकर, भनौरा पंचायत के ग्रामणों ने रेडियो के माध्यम से तथा  लाव्हलीवुड कॉलेज के प्रशिक्षणार्थियों ने टी.वी. के माध्यम से रमन का गोठ को सुना।
    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस का बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश के उन सभी स्वतंत्रता सेनानियांे को याद किया जिन्होंने देश के आजादी के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ सिंह ने प्रदेश के वीर सपूतों का स्वतंत्रता की लड़ाई में दिये गये महत्वपूर्ण योगदान के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि फिरंगियों के अन्याय और अत्याचार के खिलाफ 1857 में जोरदार आक्रोश फूटा लेकिन छत्तीसगढ़ में 1824 में ही शुरू हो गई थी। अबुझमाड़ के परलकोट में वीर गेंद सिंह वनवासियों को छापामार युद्ध सिखा रहे थे। अंग्रेजों को इसकी खबर लगी तो उन्हें गिरफ्तार कर 10 जनवरी 1825 को परलकोट महल के सामने फांसी दी गई। 1856 में सोनाखान के सपूत नारायण सिंह को फिरंगियों का दमन बर्दाश्त नहीं हो रहा था। जब अकाल पड़ा और फिरंगी सरकार जमाखोरों का साथ देने लगी। तब नारायण सिंह ने अनाज के गोदाम पर हमला किया और सारा अनाज जनता को बांट दिया। उन्हें 19 दिसम्बर 1857 को रायपुर के जयस्तम्भ चौक में उन्हें फांसी दी गई। इसी प्रकार संबलपुर सुरेन्द्र साय, राजा भैरमदेव, पं रविशंकर शुक्ल, वामन राव लाखे, डीएन चौधरी, हरिबाबू चटर्जी, रावसाहेब दानी, वीर गुण्डाधूर, मूरतसिंह बख्शी, बाला प्रसाद नाजिर, वीर सिंह बंदार, लाला कालिन्द्र सिंह सहित छत्तीसगढ़ के अनेक वीर सपूतों की वीर गाथा की जानकारी दी।  
समाचार क्रमांक/580/2016/


 

Date: 
14 Aug 2016