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बैकुण्ठपुर : सरगुजा इलाके नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) से पूरी तरह मुक्त -मुख्यमंत्री डॉ.सिंह

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नक्सलवाद के खिलाफ बस्तर में अब मिल रही निर्णायक सफलता
स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को याद किया
आकाशवाणी से ‘रमन के गोठ’ की बारहवीं कड़ी प्रसारित

बैकुण्ठपुर 14 अगस्त 2016

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की मासिक रेडियो वार्ता रमन के गोठ की 12वीं कड़ी को आज प्रातः 10.45 बजे से 11.05 बजे के मध्य जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर, जिले के सभी विकासखण्ड मुख्यालयों, नगरीय निकायों, सभी ग्राम पंचायतों, लोक षिक्षा केद्रों और लाईवलीहुड कालेज के प्रषिक्षणार्थियों ने भी रमन के गोठ कार्यक्रम को उत्साह पूर्वक श्रवण किया। जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर स्थित मानस भवन में आम नागरिकों, जन प्रतिनिधियों, के साथ साथ नगर पालिका बैकुण्ठपुर के अध्यक्ष श्री अषोक जायसवाल, अपर कलेक्टर श्री ज्योति प्रकाष कुजूर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी एम एस टेकाम और जिला कौषल विकास प्राधिकरण के श्री उमेष जायसवाल ने भी तल्लीनता के साथ सुना। मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की मासिक रेडियो वार्ता रमन के गोठ को सुनने के लिए जिला प्रषासन द्वारा व्यापक व्यवस्था की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की मासिक रेडियो वार्ता रमन के गोठ आज षाम को पुनः आज षाम 8 बजे से 8.20 बजे तक आकाषवाणी के सभी केंद्रेां से प्रसारित होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज आकाशवाणी से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ की बारहवीं कड़ी में प्रदेशवासियों को 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। डॉ. सिंह ने देश की आजादी के लिए छत्तीसगढ़ में हुए स्वतंत्रता संग्राम की अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने आजादी की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के महान योद्धाओं द्वारा दी गई शहादत को याद करते हुए राज्य तथा देश के सभी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रमन के गोठ के प्रसारण का एक वर्ष पूर्ण हो गया है। इस एक साल में श्रोताओं का हमें बहुत ज्यादा आशीर्वाद और सहयोग मिला है तथा सुझाव भी मिले हैं। मुख्यमंत्री ने अपनी रेडियो वार्ता रमन के गोठ में श्रोताओं से प्राप्त पत्रों और सुझावों के लिए सबका आभार प्रकट किया।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में उनकी सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल अंचलों में काफी विकास हुआ है। राज्य सरकार ने शिक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ समग्र विकास के लिए प्रभावी और समन्वित प्रयास किए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरगुजा इलाके को नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है और बस्तर में भी अब हमें निर्णायक सफलता मिल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पहल पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) में ’बस्तरिया बटालियन’ के गठन का निर्णय लिया है। मैं इसे अंचल के शौर्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भी जोड़कर देखता हूं। मुख्यमंत्री ने कहा-पहले हमारे आदिवासी अंचल के निवासियों को शारीरिक गठन के कुछ मापदण्डों के कारण सुरक्षा बलों में स्थान नहीं मिल पाता था। अब उनके लिए ’बस्तरिया बटालियन’ में ऐसे मापदण्डों को शिथिल किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए कहा कि फिरंगियों के अन्याय और अत्याचार के खिलाफ सन 1857 में पूरे देश में जोरदार आक्रोश फूटा, जिसे हम ’आजादी की पहली लड़ाई’ कहते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की यह कहानी उसके 33 साल पहले 1824 में ही शुरू हो गई थी। इस सिलसिले में उन्होंने सन 1824 में अबूझमाड़ के परलकोट क्षेत्र के वीर गैंदसिंह को याद करते हुए कहा कि वे परलकोट में वनवासियों को छापामार युद्ध सिखा रहे थे। अंग्रेजों को इसकी खबर लगी। उन्होंने कर्नल एगन्यू के नेतृत्व में फौज को भेजा। गैंदसिंह की फौज जमकर लड़ी, लेकिन वे गिरफ्तार कर लिए गए और 10 जनवरी 1825 को परलकोट महल के सामने उन्हें फांसी दे दी गई। डॉ. रमन सिंह ने सोनाखान के वीरनारायण सिंह के महान संघर्षों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने सन 1858 में रायपुर स्थित अंग्रेजों की फौजी छावनी (तीसरी रेग्यूलर रेजिमेंट) के सिपाही ठाकुर हनुमान सिंह के नेतृत्व में हुई सशस्त्र बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्रांति के नायक बने सत्रह भारतीय सिपाहियों को फिरंगियों ने पुलिस लाईन रायपुर में खुलेआम तोप से उड़ा दिया था। डॉ. रमन सिंह ने बस्तर के सन 1876 के मूरिया विद्रोह का जिक्र करते हुए सन 1910 में वीर गुण्डाधूर के नेतृत्व में बस्तर के ’भूमकाल’ विद्रोह पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा-सन 1918 में बिहार से शुरू हुए ’ताना भगत आंदोलन’ की लपटें सरगुजा अंचल में भी फैल गई थी और उसमें कई सेनानी शहीद हुए थे।
डॉ. रमन सिंह ने आजादी की लड़ाई के दौरान सन 1920 और सन 1933 में महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास को भी याद किया। इसी कड़ी में उन्होंने पंडित सुन्दरलाल शर्मा, माधवराव सप्रे, महंत लक्ष्मी नारायण दास, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, पंडित वामनराव लाखे, डॉ. खूबचंद बघेल, इंदरू केवट, डॉ. राधाबाई, मिनी माता जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
रमन के गोठ पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की मासिक रेडियो वार्ता रमन के गोठ के संबंध मे प्रतिक्रिया देते हुए श्री फिरोज खान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने आजादी की पहली लड़ाई के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। जो हम जैसे लोगों के लिए ज्ञानवर्धक है। इसी तरह श्री अजय गुप्ता ने कहा कि डॉ.रमन सिंह की मासिक रेडियो वार्ता रमन के गोठ में बताया कि सरगुजा इलाके को नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) से पूरी तरह मुक्ति मिलने की जानकारी दी जो अंचल के लिए गौरव की बात है। उन्होने बस्तर में भी अब हमें निर्णायक सफलता मिल रही निर्णायक सफलता के लिए राज्य षासन द्वारा की जा रही पहल की प्रषंसा की।े श्री विजय प्रकाष एक्का ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) में ’बस्तरिया बटालियन’ का गठन राज्य को एक नयी पहचान दिलायेगी।  ’बस्तरिया बटालियन’ के गठन से आदिवासी अंचल के निवासियों को रोजगार मिलेगा और वे राज्य की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण भूुमिका निभा सकेंगे। श्री कृश्णकांत सोनी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि रमन के गोठ का प्रसारण सफलतापूर्वक एक वर्ष पूर्ण होने पर उन्होने मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को अपनी बधाई और षुभकामनाएं दी। उन्होने मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह द्वारा रमन के गोठ में विगत एक वर्श में विभिन्न क्षेत्रों में दी गई जानकारी को राज्य के साथ साथ जिले के विकास में सार्थक साबित बताई।


समाचार क्रमांक 1183/लहर


 

Date: 
14 Aug 2016