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सूरजपुर : परीक्षा के समय पर एकदम से चमत्कारिक सफलता की उम्मीद न करें और बच्चों पर बड़े लक्ष्य का दबाव न डालें -डा0 रमन सिंह

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मासिक रेडियोवार्ता ‘‘रमन के गोठ’’ की अठारहवीं कड़ी का प्रसारण का श्रवण किया गया
 
सूरजपुर 12 फरवरी 2017
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मासिक रेडियोवार्ता ‘‘रमन के गोठ’’ की अठारहवीं कड़ी में विद्यार्थियों से कहा है कि वे परीक्षा को लेकर तनावग्रस्त न हो और रणनीति बनाकर परीक्षा की तैयारी करें। अपने मन में यह विचार कतई न लायें कि जो परीक्षा दे रहे हैं वही जीवन का अंतिम अवसर है और ऐसी हड़बड़ी में आपा न खोयें, हिमत न हारें और न ही कोई गलत कदम उठायें। सूरजपुर जिले के कस्तूरबा गांधी छात्रावास के छात्राओं द्वारा ध्यानपूर्वक सुना गया इसके साथ ही सूरजपुर जिले के गांव-गांव में ‘‘रमन के गोठ’’ की अठारहवीं कड़ी को उत्साह से सुना गया। 
        डा0 रमन सिंह ने कहा कि अब स्कूली परीक्षा का मौसम आ गया है। यह ऐसा समय है, जब हमारे बच्चे, उनके पालक, माता-पिता से लेकर घर के सभी सदस्य परीक्षा के तनाव में रहते हैं। ऐसा बोझिल वातावरण सबके लिए नुकसानदेह है। ऐसे में बच्चों और उनके पालकों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे। उन्होने कहा कि मैं बच्चों से साफ कहना चाहता हूॅ, कि परीक्षा को लेकर तनावग्रस्त ना हो और परीक्षा को लेकर तनाव आने का सबसे बड़ा कारण है, कि हमारी सालभर की तैयारी और जिस तरह के परिणाम की अपेक्षा होती है, उसके बीच सही तालमेल नहीं होता। एक शिक्षा-सत्र कई कालखण्डों में बटा होता है, जिससे आप अपने पूरे पाठ्यक्रम के छोटे-छोटे हिस्से में पढ़ाई करते हैं। सालभर के ‘परफॉरमेंस’ से यह पता चलता है कि बच्चे का अंतिम परिणाम क्या आने वाला है। परीक्षा के समय पर एकदम से चमत्कारिक सफलता की उम्मीद न करें और बच्चों पर बड़े लक्ष्य का दबाव न डालें। बच्चों को यह समझाना पड़ेगा कि पढ़ाई की ‘लान्ग टर्म’ की रणनीति व ‘शॉर्ट टर्म’ की रणनीति में फर्क होता है और दोनों के परिणाम भी उसी के अनुरूप होते हैं। बड़ी सफलता का कोई ‘शॉर्ट कट’ नहीं होता। नियमित रूप से पढ़ाई करने के बाद भी बच्चें और पालकों को तनाव रहता है, तो इसके लिए घर का वातावरण शांत, सहयोगात्मक और स्नेह से भरा बनाए। घर में कोई ऐसे आयोजन न करें, जिससे बच्चे को अलग रहना पड़े, या बच्चों का ध्यान भटक जाए। पढ़ाई करे इस बीच समय मिले तो आप योग अभ्यास अथवा हल्के-फुल्के व्यायाम से अपने तनाव को दूर कर सकते है। यदि तैयारी अच्छी नहीं है, तो भी अपनी रणनीति स्पष्ट रखें। अपने ‘स्ट्रांग’ और ‘वीक पॉइन्ट्स’ को चिन्हांकित करें और उसके अनुसार ही तैयारी को ‘फिनिशिंग टच’ दें। यह विचार अपने मन में कतई न लाएं कि आप जो परीक्षा अभी दे रहे हैं, वही जीवन का अंतिम अवसर है। ऐसी हड़बड़ी में किसी तरह से आपा न खोएं, हिम्मत न हारें और न ही कोई गलत कदम उठाएं। हर बच्चे को अपना कोई न कोई ‘आदर्श व्यक्तित्व’ ढूंढना चाहिए, जिससे वे प्रेरणा लेते रहे। हर सफल व्यक्ति कभी न कभी असफलता का स्वाद चखा रहता है। इसलिए असफलता से डरिए मत, बल्कि इसे एक सुधार का अवसर समझिए। विगत वर्ष मैंने आपसे कहा था कि यदि परीक्षा, परीक्षा प्रणाली या ऐसी समस्या पर आपको बात करने का मन हो, जिसका समाधान आपके स्तर पर नहीं निकल पा रहा हो या कहीं पक्षपात जैसी कोई शिकायत महसूस हो रही हो, जहां आप सही हो और आपको गलत साबित किया जा रहा हो, तो आप मुझे ‘फेसबुक’ पर सम्पर्क कर सकते हैं।
           डा0 रमन सिंह ने ‘नवाचार’ के बारे में बताया कि मैं ज्यादातर समय जनता के बीच रहता हूं। दूर-दूर गांवों का दौरा करता हूं। लोगों के बीच बैठता हूं। तो समस्याएं भी पता चलती हैं और समाधान के तरीके भी निकलते हैं। मुझे लगता है कि ‘नवाचार’ की सबसे अच्छी ‘एप्रोच’ यही है, कि जो काम नहीं हो पा रहा है, वह जल्दी से जल्दी, किसी नए तरीके से हो जाए। उदाहरण के लिए, जब हमने पी.डी.एस. को ठीक करने के लिए कम्प्यूटर और आई.टी. का उपयोग किया, तो वह भी ‘नवाचार’ था। प्रोटीन की कमी से निपटने के लिए चना और दाल का वितरण किया, तो वह भी ‘नवाचार’ था और जब 20 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेलवे लाइन बिछाने का सवाल आया, तो हमने ऐसी तमाम संस्थाओं से बात की, जिनको उससे लाभ मिलना है और वे सब सहमत हो गए, तो यह भी एक ‘नवाचार’ है कि राज्य सरकार का ज्यादा पैसा लगे बिना बहुत बड़ा काम हो गया। हमर छत्तीसगढ़ योजना, सौर सुजला योजना, लाइवलीहुड कॉलेज जैसे अनेक काम ‘नवाचार’ की देन हैं।  नवाचारों के कारण छत्तीसगढ़ को एक अलग प्रतिष्ठा और पहचान मिली है। छत्तीसगढ़ में दूरस्थ ग्रामीण और वनांचलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित अंचलों में यह चुनौती और ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थिति में नई सोच और नई रणनीति कारगर होती है। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि अभावों और कठिनाइयों के बीच भी अनेक सेवाभावी चिकित्सक दुर्गम स्थानों में अपनी सेवाएं देकर राष्ट्र निर्माण में योगदान करना चाहते हैं। ऐसे विशेषज्ञों और समर्पित चिकित्सकों का उपयोग करने के लिए हम प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री मेडिकल फेलोशिप प्रोग्राम’ शुरू करेंगे। इससे इन अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, वहीं विभिन्न स्थानों पर निर्मित अधोसंरचना, जैसे- ऑपरेशन थियेटर और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग भी बेहतर क्षमता के साथ होगा।
      ‘मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह ने गुड गवर्नेन्स फेलोशिप’ के बारे में बताया कि प्रदेशवासियों को इसका लाभ मिलेगा  उन्होने बताया कि  अक्सर आई.आई.टी. और आई.आई.एम. आदि संस्थाओं से ताजा-ताजा पढ़के निकले युवाओं से बात करता हूं, तो उनकी प्रतिभा और विचार सुनकर बहुत खुशी होती है। उनकी ऊर्जा, उनके जोश और जज्बा देखकर लगता है, कि इनका उपयोग भी तो कहीं होना चाहिए। हमने यह धारणा पाल ली है कि नए पढ़े-लिखे युवा सिर्फ पैसे के लिए काम करते हैं, लेकिन हकीकत ऐसी नहीं है। सही पहल होती है तो डॉक्टर बीजापुर मंे काम करने पहुंच जाते हैं। सही पहल होती है तो आई.आई.टी. से निकला नौजवान किसी गांव में काम करने लगता है। हमें इस सेवाभावी सोच का भी सम्मान करना है। नई पीढ़ी के पास नए-नए आइडियाज हैं। इसके लिए हम ‘मुख्यमंत्री गुड गवर्नेन्स फेलोशिप’ के अंतर्गत प्रत्येक जिला कलेक्टर के साथ एक प्रतिभाशाली ‘फेलो’ को संलग्न करेंगे, जो न सिर्फ जनहितकारी व विकास पर योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद करेगा, बल्कि इसमें आने वाली समस्याओं का हल भी करेगा और जनता को बेहतर लाभ दिलाने वाली  योजनाओं के बारे में चिंतन करेगा, सोच-विचार करेगा, उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन के बारे में सुझाव भी देगा।
         मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह ने कहा कि हमने तेन्दूपत्ता के पूरे काम-काज को सुनियोजित किया है, ताकि इसका लाभ वनवासियों को मिले। ऐसा पहले नहीं होता था। हमने तेन्दूपत्ता संग्राहकों की जिन्दगी को उसकी आय के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर और सूचना प्रौद्योगिकी आदि से जोड़ा है। अब तेन्दूपत्ता की भी ई-नीलामी हो रही है, जिसका पूरा लाभ वनवासियों को मिलेगा। मेरी नजर में यह एक ‘नवाचार’ ही है, जो समाज के सबसे पिछड़े तबके की जिन्दगी बदल रही है।आपको विश्वास नहीं होगा कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 13 वर्ष पहले मात्र 350 रूपए प्रति मानक बोरा संग्रहण पारिश्रमिक मिलता था, जिसे क्रमशः बढ़ाते हुए हमने 1500 रूपए तक ला दिया। इसलिए अब फैसला किया है कि नए सीजन में तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर 1800 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया जाए। इस तरह आप देख सकते हैं कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाला पारिश्रमिक 5 गुना से अधिक कर दिया गया है।
 
समाचार क्रमांक /1301/2017
 
 
Date: 
12 Feb 2017