महिला उद्घोषक
श्रोताओं नमस्कार!

  • आकाशवाणी के विशेष प्रसारण ‘रमन के गोठ’ में हम, सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं। आज ‘रमन के गोठ’ की चौबीसवीं कड़़ी है। आकाशवाणी के स्टुडियो में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी पधार चुके हैं।
  • डॉक्टर साहब नमस्कार, कार्यक्रम में आपका हार्दिक स्वागत है। ‘रमन के गोठ’ के सफलतापूर्वक दो वर्ष पूरे होने पर आपको बधाई।    

मुख्यमंत्री जी

  • जम्मो संगी-जहुंरिया, सियान-जवान, महतारी-बहिनी मन ला जय जोहार। 
  • चौबीस कड़ी का मतलब चौबीस महीना। आज चौबीसवीं कड़ी का प्रसारण है, अर्थात् इस कार्यक्रम को दो साल पूरे हो गए हैं। आप लोगों ने बहुत लगन से, बहुत गंभीरता से मुझे सुना, इसके लिए आप सबका तहेदिल से आभार।

पुरूष उद्घोषक

  • मुख्यमंत्री जी, कल 14 अगस्त को आप मुख्यमंत्री के रूप में पांच हजार दिन पूरे कर रहे हैं। लगातार तीन कार्यकाल के लिए जनादेश मिलना और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना किसी भी राजनेता के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। बहुत से राजनेताओं को तीन से अधिक बार भी मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला, लेकिन लगातार तीन कार्यकाल पूरा करने की ओर आगे बढ़ना और लगातार 5 हजार दिन पूरा करना बहुत बड़ी बात है, आप इसे किस रूप में लेते हैं।

मुख्यमंत्री जी

  • मुख्यमंत्री के रूप में 5 हजार दिन पूरे करने पर बधाई देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
  • सच पूछिए तो ऐसा कोई सपना भी नहीं था, और ऐसा कोई लक्ष्य नहीं था।
  • इसे मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि मुझे प्रदेश की जनता और हमारे नेतृत्व ने यह अवसर प्रदान किया।
  • जनता की सेवा करने का जो सपना मन में था, उसको पूरा करने का अवसर प्रदान करने के लिए मैं प्रदेश की जनता, अपने शीर्ष नेतृत्व और सभी कार्यकर्ताओं को दिल की गहराई से धन्यवाद देता हूं।

महिला उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, सन् 2003 में जब आपके हाथ में शासन की बागडोर आई, तब की परिस्थितियां क्या थीं और आपने किस तरह उसमें बदलाव लाया?

मुख्यमंत्री जी

  • एन.डी.ए. सरकार ने सन् 2000 में तीन नए राज्य का गठन करते हुए हमारे पुरखों का सपना पूरा किया। मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ उस समय के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को जिन्होंने छत्तीसगढ़ के निर्माण की कल्पना को साकार किया और उनका एक सपना था कि ये क्षेत्र विकसित होगा और छत्तीसगढ़ को निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य बनाने के लिए उस सपने (उन सपना) को हम पूरा करने के लिए लगे हुए हैं, और मुझे खुशी है कि आज राज्य निर्माण के इस यात्रा में हम सफल हुए हैं।
  • सन् 2003 में हमारे हाथ खाली थे। विरासत में समस्याओं का अम्बार मिला था।
  • भयंकर बिजली कटौती, धान खरीदी का कोई इंतजाम नहीं, सड़कें खोजना मुश्किल था।
  •  स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, पंचायत, आंगनबाड़ी, सभी जगह अव्यवस्था थी।
  • विकास के लिए न नीतियां थीं, न नीयत। जनकल्याण, गरीब, मजदूर, किसान की बेहतरी तो जैसे कोई मुद्दा था ही नहीं।
  •  ऐसी परिस्थिति में हमने काम शुरू किया ।
  • तीन आंकड़ों से भी बहुत स्पष्ट हो जाएगा कि तब राज्य का बजट मात्र 7 हजार करोड़ था, आज 80 हजार करोड़ हो गया है।
  • जी.एस.डी.पी. 47 हजार करोड़ थी, अब बढ़कर 250 हजार करोड़ हो गई है। 
  • प्रति व्यक्ति आय 12 हजार से बढ़कर 82 हजार रूपया हो गया है।
  • इन तीन आंकड़ों से आप समझ सकते हैं कि 5 हजार दिनों में राज्य में कितने बड़े बदलाव आए हैं।

पुरूष उद्घोषक

  • मुख्यमंत्री जी, सन् 2000 में तो एन.डी.ए. सरकार ने विकेन्द्रीकरण के लिए, अर्थात् सरकार को जनता के पास पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश से अलग करके नया राज्य छत्तीसगढ़ बना दिया था, लेकिन आपने सरकार को जनता के पास पहुंचाने के लिए इन 5 हजार दिनों में क्या किया?

मुख्यमंत्री जी

  • अटल जी ने 3 नए राज्यों को जन्म दिया और जब छŸाीसगढ़ बना तो 16 जिले इसमें थे।
  • हमने जिला प्रशासन सेवाओं को जनता के नजदीक ले जाने के लिए 11 नए जिलों का निर्माण किया, जिससे बढ़कर अब 27 जिले छŸाीसगढ़ में हो गए हैं।
  • अब जिला उनके नजदीक आया है। ना केवल जिला नजदीक आया है जिला प्रशासन यानी कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार जिला प्रशासन के अन्तर्गत आने वाले 34 जिला स्तरीय अधिकारियों को यह सुविधा मिली है कि वे अपने जिले में विभिन्न स्थानों तक बार-बार दौरा कर सकें।
  • इसी तरह प्रदेश के तहसीलों की संख्या 98 से बढ़कर 150 हुई है। नगर पंचायत की संख्या 49 से 112 हो गए हैं, नगर पालिका परिषद की संख्या 28 से बढ़कर 43 हो गए हैं और नगर निगमों की संख्या 10 से बढ़कर 13 हो गई है।
  • इसके अलावा हमने विशेष आवश्यकता वाले क्षेत्रों में समन्वित प्रशासनिक व्यवस्था कायम की है, जिसके तहत पहले से प्रचलित व्यवस्था के अलावा विशेष प्राधिकरणों का गठन भी किया गया है।
  • बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र विकास प्राधिकरण, सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण विकास प्राधिकरण का गठन करके आदिवासी, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़े क्षेत्रों में प्राथमिकता और तेजी के साथ विकास का रास्ता बन गया है।
  • इन चारों प्राधिकरणों की बैठक एक ‘मिनी कैबिनेट’ की तरह होती है, जहां समस्याएं बताई जाती हैं, तो तुरंत वहां उपस्थित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर निर्णय लेते हैं, जिससे तत्काल राहत मिल सके।
  • इस तरह हमने विकास का क्षेत्रीय असंतुलन समाप्त करने, सबकी समस्याओं का हल करने और अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन करने और तुरंत निदान करने की रणनीति अपनाई है।
  •  छोटे राज्य की सौगात को जन-जन तक पहुंचाने में हमने कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखा है।महिला उद्घोषक
  •  डॉक्टर साहब, 5 हजार दिनों में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव आया है? ऐसा क्या हो गया है, जो पहले नहीं था?

मुख्यमंत्री जी

  • पांच हजार दिन की यात्रा में हमने शिक्षण संस्थाओं की संख्या में न केवल वृद्धि की है, बल्कि यह वृद्धि असाधारण है।
  • प्राथमिक स्कूलों की संख्या 13 हजार से बढ़कर 38 हजार हो गई है।
  • मिडिल स्कूलों की संख्या 5 हजार से बढ़कर साढ़े 16 हजार हो गई है।
  • हाई स्कूल की संख्या 9 सौ से बढ़कर 2 हजार 600 हो गई है।
  • हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 6 सौ से बढ़कर 3 हजार 715 हो गई है।
  • एक और महत्वपूर्ण परिवर्तन आया है बल्कि उसका असर बच्चों में दिख रहा है और वो असर है, ड्रॉप आउट रेट पर। ड्रॉप आउट रेट 2003 में 11 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत हो गया है।
  • इसी तरह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांति हुई है।
  • सन् 2003 में एक भी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं था, लोग पूछते हैं, कि राज्य के निर्माण का लाभ क्या मिलता है, राज्य को, मैं उनको बताना चाहता हूँ यदि राज्य नहीं बना होता, ना छत्तीसगढ़ को आई.आई.टी. मिलता, ना छत्तीसगढ़ को ट्रिपल आई.टी. मिलता, एन.आई.टी. नहीं मिल पाता, एम्स की स्थापना हो गई है, आई.आई.एम. की स्थापना हो गई है इस प्रकार से अलग-अलग संस्थान जो बढ़े हैं, यह अपने आप में छŸाीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर में शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित किए हैं।
  • सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या 3 से बढ़कर 13 हो गई है। 
  • शासकीय महाविद्यालय जो सिर्फ 116 थे आज बढ़कर 224 हो गए हैं।
  • मेडिकल कॉलेज 2 से बढ़कर 10 हो गए हैं।
  •  इंजीनियरिंग कॉलेज सिर्फ 12 थे आज 50 हो गए हैं।
  • कृषि महाविद्यालय, सिर्फ चार महाविद्यालय उस समय थे आप आश्चर्य करेंगे इसकी संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
  • पॉलिटेक्निक 10 से 51 और आई.टी.आई. 61 से बढ़कर 176 हो गए हैं।
  • अनुसूचित जाति-जनजाति छात्रावासों और आश्रम शालाओं की संख्या 1 हजार 837 थी बढ़कर 3 हजार 250 हो गई है।
  • हमने शिक्षण संस्थाओं के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया है।
  • दूरस्थ अंचलों में, नक्सलवादी गतिविधियों के कारण जिन बच्चों की पढ़ाई में बाधा आती थी, उनके लिए आवासीय संस्थाएं बनाई गई हैं, जहां पढ़ाई के अलावा ऐसे प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है, जो प्रतियोगी परीक्षा में सफलता दिलाते हैं।
  • यानी, बच्चों का भविष्य संवारने के लिए माता-पिता अपने घर में जो व्यवस्था करते हैं, वह सुविधा हमारी सरकार ने भी दी है। 
  • यही वजह है कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक तथा अन्य ग्रामीण अंचलों के बच्चे बड़े पैमाने में सफल हो रहे हैं तथा देश के प्रतिष्ठित कॉलेजों में पढ़ रहे हैं।
  • हमने सिर्फ लोहा, सीमेंट, कांक्रीट से अधोसंरचना नहीं बनाई, बल्कि ऐसी शिक्षा की अधोसंरचना बनाई है, जो शिक्षित और स्वावलंबी नई पीढ़ी का निर्माण कर रही है।
  • मैं सोचता हूं 5 हजार दिन में यह सबसे यह बड़ी उपलब्धि है।

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, सन् 2003 में प्रदेश में आम जनता से लेकर किसान भाई तक ‘लोड शेडिंग’, बिजली कटौती से परेशान रहते थे, लेकिन अब बिल्कुल भी बिजली कटौती नहीं होती। 5 हजार दिनों में यह चमत्कार कैसे हुआ?

मुख्यमंत्री जी
-    हमने राज्य में विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा वितरण, सभी क्षेत्रों में उदारता और उत्साह की नीति अपनाई, जिसके कारण छत्तीसगढ़ की धरती पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा बिजली उत्पादन 4 हजार 732 मेगावॉट से बढ़कर 22 हजार 764 मेगावॉट हो गया है।
-    अति उच्चदाब उप-केन्द्रों की संख्या 28 थी जो बढ़कर 96 हो गई है।
-    ट्रांसमिशन लाइनों की लम्बाई 5 हजार 205 सर्किट किलोमीटर से बढ़कर 11 हजार 522 सर्किट किलोमीटर हो गई है।
-    ट्रांसमिशन क्षमता सिर्फ हमारी 1350 मेगावाट थी, आज हमारी ट्रांसमिशन क्षमता 6 हजार 350 मेगावाट हो गई है।
-    हमने राज्य क्षेत्र के अलावा सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादकों की भागीदारी भी बढ़ाई है।
-    इससे एक ओर जहां राज्य के उपयोग के लिए भरपूर बिजली मिलने लगी, वहीं हम दूसरे राज्यों को निर्यात करने की स्थिति में आ गए हैं।
-     उपभोक्ताओं की संख्या 18 लाख से बढ़कर 42 लाख हो गई है।
-    प्रति व्यक्ति वार्षिक विद्युत खपत आज 5000 दिन के बाद 350 यूनिट से बढ़कर 1724 यूनिट है, जो देश में सर्वाेत्तम में से एक है।
-    हम किसानों को 7 हजार 5 सौ यूनिट तक बिजली निःशुल्क दे रहे हैं।
-    विद्युत पंपों की संख्या सिर्फ 72 हजार थी, आज बढ़कर ये 4 लाख हो गई है।
-    जहां परम्परागत विद्युत पहुंचाने में कठिनाई हो रही है, उन खेतों में ‘सौर सुजला योजना’ के तहत 51 हजार सोलर पम्प देने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 12 हजार पम्प दिए जा चुके हैं।
-    हम सौ प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण के करीब हैं और अगले साल यह सपना भी पूरा होगा।
महिला उद्घोषक
-    मुख्यमंत्री जी, आपने अधोसंरचना विकास की बात कही। आखिर क्या कारण है कि 5 हजार दिनों पहले जो अधोसंरचना नहीं दिखाई पड़ती थी, वह अब दिखने लगी है?
मुख्यमंत्री जी
-    हमारी सोच और रणनीति ही अलग थी।
-    हमने तय कर लिया था कि जिन अभावों के कारण छŸाीसगढ़ प्रदेश की जनता का जीना दूभर है, जिन अभावों के कारण विकास में बाधा आती है, जो अभाव लाखों लोगों की प्रगति में अड़ंगा बनते हैं, उन अभावों को तेजी से दूर कैसे  करें।
-    यही वजह है, हमने राज्य में अच्छी सड़कों का जाल बिछाने का फैसला किया, इससे अधिक आर्थिक संसाधन जुटाने हेतु केन्द्र से राज्य तक धरती और आसमान एक कर दिया।
-    इसी मेहनत का परिणाम है, 5 हजार दिनों में 60 हजार किलोमीटर सड़कें, 12 सौ वृहद - मध्यम पुल और 23 हजार से अधिक पुलियों का निर्माण किया गया।
-    रेल लाइनों का अभाव हमारे राज्य की एक प्रमुख समस्या है।
-    सार्वजनिक उपक्रमों को जोड़ा, ताकि उसको खनिज परिवहन में मदद मिले और दूरस्थ अंचलों की जनता को रेल यात्रा की सुविधा जुटाने में अब मदद मिले।
-    इसी तरह की रणनीति से ‘पी.पी.पी.’ मॉडल बना और हमने राज्य के मौजूदा रेलवे नेटवर्क को दो गुना से अधिक करने की ओर बढ़ चले।
-    150 वर्षों के इतिहास में प्रदेश में सिर्फ 1187 किलोमीटर रेल लाइन थी, लेकिन हमने 13 सौ किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
-    जल्दी ही हमारे कई जिला, रेल सुविधाविहीन जिलों की श्रेणी से हट जाएंगे और रेल अनेक जिलों के विकास में भागीदारी बनेगी।
पुरूष उद्घोषक
-    मुख्यमंत्री जी, छत्तीसगढ़ को रचनात्मक सोच और नवाचार के कारण एक अलग पहचान मिली है। ऐसे कौन से प्रमुख काम हैं, जिन्हें आप 5 हजार दिनों की उपलब्धियों के तौर पर याद करना चाहेंगे?
मुख्यमंत्री जी
-    मैं दो प्रमुख विषय की ओर ध्यान आकर्षित करूंगा। नम्बर-एक पर ‘मुख्यमंत्री खाद्य एवं पोषण सुरक्षा कानून’ और नम्बर-दो पर ‘‘पैडी प्रौक्योरमेन्ट सिस्टम’’, इन दोनों योजनाओं के माध्यम से हमने छत्तीसगढ़ में ‘भूख’ को हराया है। लगभग 59 लाख परिवारों को एक रूपए किलो चावल, आयोडीनयुक्त नमक, प्रोटीनयुक्त चना आदि का लाभ मिल रहा है।
-    नम्बर-तीन ‘कौशल उन्नयन कानून’ है, जिसे लागू करने में हम देश के पहले राज्य में हैं। हर साल एक लाख युवाओं को प्रशिक्षण, हुनर सिखाने का काम सिर्फ छत्तीसगढ़ कर रहा है।
-    किसानों को बिना ब्याज  ऋण देने वाली योजना को लीजिए, इसके कारण ऋण प्रदान की राशि 150 करोड़ रूपये से बढ़कर 3 हजार करोड़ रू. हो गई है।
-    तेन्दूपत्ता जिसमें 5 हजार दिन में हमने तेन्दूपत्ता की मजदूरी की दर 350 रूपए से बढ़ाकर 18 सौ रूपया कर दी है और 25 सौ करोड़ रूपये का भुगतान भी किया गया है।
-    ‘स्वास्थ्य बीमा योजना’, हम पहले राज्य हैं, जिसने सभी 58 लाख परिवारों को ‘स्मार्ट कार्ड’ के माध्यम से निःशुल्क इलाज की सुविधा दी है। प्रति कार्ड 30 हजार रूपए का इलाज इस योजना से होता है।
-    महिलाओं को पंचायत चुनावों से लेकर सरकारी नौकरी तक में आरक्षण, महिला समूहों को मात्र 3 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण तथा अनेक शासकीय योजनाओं में भागीदारी के माध्यम से महिला सशक्तीकरण का बड़ा अभियान हम चला रहे हैं।
-    युवाओं को निःशुल्क लेपटॉप, टेबलेट, एक प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण, बेटियों को निःशुल्क शिक्षा देने जैसी अनेक योजनाएं हैं, जिससे हमारे युवा प्रदेश की विकास योजनाओं से जुड़े हैं।
-    हमने तो सरगुजा और बस्तर में मेडिकल कॉलेज भी नवाचार से खोला है और सभी जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज का संचालन भी हमारे नवाचार के सफल मॉडल का प्रतीक है।
-    प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने विगत 3 वर्षों में अनेक नवाचार किए, जिनमें छत्तीसगढ़ की उपलब्धि अग्रणी है। चाहे वह जन-धन का खाता हो, मुद्रा योजना हो, स्वच्छता अभियान हो, उज्ज्वला योजना हो, मेक इन इण्डिया हो, स्टार्ट-अप इण्डिया हो, आवास योजनाएं हों या बीमा योजनाएं।
-    माननीय मोदी जी की विशेष पहल से खनिज राजस्व का लाभ स्थानीय विकास में देने की प्रणाली बनाने में छत्तीसगढ़ अव्वल रहा है। 
-    खनिज विकास निधि से हम रेल, सड़क और विमानन सेवाओं का विकास कर रहे हैं।
-    किसका-किसका नाम लूं, लिस्ट बहुत लम्बी है।
महिला उद्घोषक
-    महोदय जी, उपलब्धियों को परखने के लिए कुछ मापदण्ड बनाए गए हैं। पिछले 5 हजार दिनों में इन मापदण्डों पर छत्तीसगढ़ की स्थिति का आकलन कैसे करेंगे?
मुख्यमंत्री जी
-    किसी भी मापदण्ड को देखिए और खासतौर से मैं इन 5 हजार दिनों में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं में जो सुधार हुआ है, जो नए हॉस्पिटल बने है, नए डॉक्टरों की भर्ती हुई है और जिला स्तर में दन्तेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा में चिकित्सकों कीे भर्ती हुई है, विशेष कार्ययोजना बनाकर उसका असर हुआ है। कुपोषण भी दूर हुआ है और सबसे चमत्कारिक जो आंकड़े हैं, मैं आपको बताऊगां।
-    शिशु मृत्यु दर जो 76 था घटकर 41 हो गया है।
-    मातृ मृत्यु दर 407 से घटकर 221 हो गया है।
-    जन्म दर 26 से घटकर 23.2 हो गया है।
-    कुपोषण 52 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत हो गया है।
-    इस प्रकार हम देखेंगे संस्थागत प्रसव 7 से बढ़कर 70 प्रतिशत हो चुका है।
-    ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में देश में छत्तीसगढ़  चौथे स्थान में  है।
-    आजकल औद्योगिक निवेश को भी विकास का एक मापदण्ड माना जाता है।
-    मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि विगत 4 वर्षों में देश में सर्वाधिक निवेश के प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हुए हैं।
-    डिजिटल इण्डिया के मापदण्ड पर भी हम देश में अग्रणी रहे हैं। ई-प्रशासन के लिए अनेक ऑनलाइन सेवाएं संचालित की गई हैं। 
-    भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ की बेहतरी पर राशि खर्च करने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल नम्बर है। 
-    देश में बजट में जी.एस.डी.पी. के अनुपात से सामाजिक क्षेत्र में व्यय 7.9 प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह प्रतिशत 15.8 प्रतिशत है।
-    इसी प्रकार विकासमूलक कामों में हमारा 22.7 प्रतिशत का प्रावधान ही देश के 12.8 प्रतिशत के औसत से लगभग दो गुना है।

पुरूष उद्घोषक
-    श्रोताओं! आपकी प्रतिक्रियाएं हमें आपके पत्र, सोशल मीडिया- फेसबुक, ट्विटर के साथ SMS से भी बड़ी संख्या में मिल रही हैं। इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
-    आगे भी आप अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में RKG के बाद स्पेस लेकर अपने विचार लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेजते रहिए और संदेश के अंत में अपना नाम और पता लिखना ना भूलें।
मुख्यमंत्री जी
-    सोशल मीडिया तथा पत्रों के माध्यम से बहुत से श्रोताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं और सुझाव दिए हैं। आप सबको धन्यवाद। आज मैं आप सबको एक विशेष सुझाव देना चाहता हूं। एक विशेष अनुरोध भी आपसे करना चाहता हूं।
-    बहुत से भाइयों और बहनों को अपना हक प्राप्त करने के लिए या अपने विवादों के निराकरण के लिए कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे बहुत समय और धन और मेहनत की बरबादी होती है।
-    इससे बचने के लिए लोक अदालतों की व्यवस्था की गई है। जिसमें कोर्ट-फीस नहीं लगता और न ही कोई खर्च होता। यहां तक कि जिन मामलों में कोर्ट-फीस अदा कर दी गई है, वो कोर्ट-फीस पक्षकारों को वापस करने का भी प्रावधान है।
-    अदालतों में लंबित प्रकरणों के अलावा जो मामले अभी न्यायालय नहीं पहुंचे हैं, ऐसे ‘प्री-लिटिगेशन’ प्रकरणों का निराकरण भी लोक अदालत में होता है।
-    9 सितम्बर। ये तारीख याद रखिए। मैं दूसरी बार बोल रहा हूँ 9 सितम्बर ये तारीख आप जरूर याद रखें। 9 सितम्बर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उपस्थित होकर आप अपनी समस्या का हल करा सकते हैं।
-    अतः मैं चाहूंगा आप लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस अवसर का लाभ उठाएं। और विवादों और तनावों से मुक्त होकर सुखद जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
-    अगस्त, धार्मिक एवं राष्ट्रीय पर्वों का महीना है। 
-    मैं बाल गंगाधार तिलक की पुण्य तिथि तथा रानी अवंति बाई लोधी, मदर टेरेसा के जन्म दिन के अवसर पर उन्हें सादर नमन करता हूं। उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व हम सबको प्रेरणा देता रहेगा। 
-    यह महीना स्वतंत्रता दिवस जैसे महान राष्ट्रीय पर्व और रक्षाबंधन, हलषष्ठी, कृष्ण जन्माष्टमी, हरितालिका तीज पर्व, गणेश चतुर्थी, नवाखाई  जैसे त्यौहारों के कारण हम सबको आनंद और ऊर्जा से सराबोर रखेगा।
-    आप सबको बधाइयां और शुभकामनाएं।
महिला उद्घोषक
-    और श्रोताओं, अब बारी है ‘क्विज’ की। 
-    पन्द्रहवें ‘क्विज’ का प्रश्न था-
-    14 अगस्त 2017 को डॉ. रमन सिंह जी, मुख्यमंत्री के रूप में कितने दिन पूरे कर रहे हैं-
-    जिसका सही जवाब है- (B) 5000 दिन
-    सबसे जल्दी जिन पांच श्रोताओं ने सही जवाब भेजे हैं, उनके नाम हैं- 
1.    श्री चन्द्रा कुमार पैकरा, ग्राम परसोड़ी, जिला बिलासपुर  
2. श्री पूनम दास, बुंदेली, जिला महासमुंद
3.    श्री कमलेश दास, बिलासपुर
4.    श्री चंदन सेन, पनडढा, जिला राजनांदगांव
5. श्री पुरूषोत्तम सिन्हा, ग्राम जामगांव, जिला गरियाबंद
पुरूष उद्घोषक
-    और श्रोताओं अब समय है तेईसवां क्विज का सवाल है-
-    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण का कानून किस सन् में बनाया गया।
-    इसका सही जवाब: (A) 2013
                           (B) 2012
इनमें से कोई एक है।
-    अपना जवाब देने के लिए, अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में QA लिखें और स्पेस देकर A या B जो भी आपको सही लगे, वह एक अक्षर लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेज दें। साथ में अपना नाम और पता अवश्य लिखें।
-    आप सब ‘रमन के गोठ’ सुनते रहिए और अपनी प्रतिक्रियाआंे से हमें अवगत कराते रहिए। इसी के साथ आज के अंक का हम यहीं समापन करते हैं। अगले अंक में 10 सितम्बर को होगी आपसे फिर मुलाकात। तब-तक के लिए दीजिए हमें इजाजत। नमस्कार।