मंत्रिपरिषद के निर्णय- 2015

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक : नई उद्योग नीति का अनुमोदन

दस हजार हेक्टेयर का भूमि बैंक विकसित किया जाएगा
सिटी बस सेवाओं के लिए शहरी मार्ग निर्धारित
बेरोजगार इंजीनियरों को अब मिलेंगे और अधिक राशि के ठेके
जैव प्रौद्योगिकी विभाग को कृषि विभाग से जोड़ा गया

रायपुर, 16 जनवरी, 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित की गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने केबिनेट में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केबिनेट में राज्य सरकार की नवीन उद्योग नीति वर्ष 2014-19 का अनुमोदन किया गया। इसमें निजी क्षेत्रों में औद्योगिक पार्क स्थापना पर 5 करोड़ रुपए के अनुदान और विभिन्न उद्योगों के लिए 10 हजार हेक्टेयर का भूमि बैंक स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नई उद्योग नीति में सायकिल निर्माण, फार्मास्युटिकल, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, टेक्सटाईल उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इन्हें प्राथमिकता श्रेणी में शामिल किया जाएगा और मेगा प्रोजेक्ट की निर्धारित सीमा को इन उद्योगों के लिए कम किया गया है ताकि उन्हें कम निवेश करने पर भी मेगा प्रोजेक्ट के लाभ मिलेंगे। नई उद्योग नीति में मुख्यमंत्री क्लस्टर विकास योजना के नाम से नई योजना लागू की जाएगी, जिसमें राज्य शासन द्वारा 50 लाख रुपए तक अनुदान का प्रावधान रहेगा। पोहा मिलों को प्राथमिकता सूची में शामिल करने का भी निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई उद्योग नीति में ‘मेक इन इंडिया’ की तरह ‘मेक इन छत्तीसगढ़’ के क्रियान्वयन के लिए विनिर्माण से संबंधित क्षेत्रों को राज्य में प्राथमिकता से बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य के मूल निवासियों को स्वयं का उद्यम लगाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें रोजगार के अधिक से अधिक अवसर दिए जाएंगे। पंूजी निवेश को अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी और सुगम बनाकर राज्य में निवेश की गति को तीव्र किया जाएगा। समाज के कमजोर वर्गो जैसे अनुसूचित जाति, जनजाति, निःशक्तजन, सेवानिवृत्त सैनिक, महिला और नक्सवाद से प्रभावित परिवारों को अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। राज्य में उपलब्ध खनिज, वन सम्पदा आदि का नैसर्गिक संवर्धन किया जाएगा। राज्य के स्थायी नागरिकों के कौशल विकास में उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। केबिनेट के अन्य फैसले इस प्रकार हैं-

  • सिटी बस सेवा के लिए शहरी मार्ग-जिला रायपुर के अभनपुर, राजिम, मंदिरहसौद तथा आरंग से नया रायपुर, मंत्रालय तक और जिला मुख्यालय-धमतरी, कबीरधाम, जशपुर, कांकेर, गरियाबंद, बालोद और महासमुन्द के निकटवर्ती शहरों/नगरों तक सिटी बस सेवा के लिए पार्श्वस्थ क्षेत्र/शहरी मार्ग घोषित करने का निर्णय लिया गया।
  • प्रदेश के बेरोजगार स्नातक/डिप्लोमा (सिविल/इलेक्ट्रिकल) इंजीनियरों को सीमित निविदा पद्धति के माध्यम से निर्माण कार्यों के ठेके देने की योजना- राज्य शासन ने यह निर्णय लिया है कि भविष्य में सिविल और इलेक्ट्रिकल के बेरोजगार डिप्लोमा इंजीनियरों को 10 लाख रू. के स्थान पर 25 लाख रूपए तथा सिविल, इलेक्ट्रिकल तथा इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में बेरोजगार ग्रेजुएट इंजीनियर को 20 लाख रू. के स्थान पर 50 लाख रूपए तक के कार्य दिए जाएं। वर्तमान में प्रति वर्ष स्नातक इंजीनियर को 80 लाख रू. का कार्य देने का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर दो करोड़ रूपए किया जाएगा। डिप्लोमा इंजीनियर को 40 लाख रू. से बढ़ाकर एक करोड़ रूपए तक के कार्य दिए जा सकेंगे। इसके साथ ही आईटीआई ट्रेड में उत्तीर्ण राजमिस्त्रियों को 15 लाख रूपए तक का कार्य आवंटित करने का भी निर्णय लिया गया। राजमिस्त्री प्रत्येक वर्ष में 60 लाख रूपए तक कार्य कर सकेंगे।
  • नवगठित जिलों और प्रदेश के विकासखंड मुख्यालयों में शासकीय कर्मचारियों के लिए अधिक से अधिक संख्या में आवास गृह निर्माण के लिए वित्तीय प्रबंधन के बारे में विचार किया गया।
  • मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक आगामी 19 जनवरी को लखनऊ में होगी। इस बैठक के लिए भारत सरकार को प्रेषित प्रस्तावों के संबंध में चर्चा की गई, जिसमें छत्तीसगढ़ में  सड़कों के घनत्व को बढ़ाने और महिला एवं बाल विकास कार्यक्रमों के लिए धन राशि में वृद्धि करने के लिए, नक्सल क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए आवश्यक अतिरिक्त सहायता आदि से संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं।
  • खरीफ विपणन वर्ष 2013-14 में समर्थन मूल्य नीति के तहत धान उपार्जन के लिए भारतीय स्टेट बैंक से साख सीमा ऋण प्राप्त करने शासकीय प्रत्याभूति देने का निर्णय लिया गया।
  • सूचना एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग से जैव प्रौद्योगिकी विभाग को पृथक करने और उसे कृषि विभाग से जोड़ने का निर्णय लिया गया। अब सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का नाम ‘इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग’ होगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन किया जाएगा। जैव प्रौद्योगिकी विभाग को कृषि विभाग से जोड़ने पर जैव तकनीक के क्षेत्र में अनुसंधान आदि कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।
  • कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 में संशोधन- बैठक में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 में संशोधन करने और उसमें राईस मिल, पेडी परबायलिंग एण्ड मेकेनाइज्ड क्लिनिंग, पोहा एवं मुरमुरा मिल, हॉलर मिल, राइस ब्रान साल्वेंट एक्सट्रेक्शन प्लांट, खाद्य तेल की रिफाइनिंग (स्वतंत्र इकाई)/रिफाइनिंग को वर्तमान अपात्र उद्योगों की सूची से विलोपित कर राज्य के औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों के लिए इन्हें पात्र उद्योग मानने का निर्णय लिया गया। यह संशोधन उद्योग नीति 2014-2019 की प्रभावी तिथि एक नवम्बर, 2014 से लागू माना जाएगा। इसके अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 की समाप्ति की तारीख 31 अक्टूबर 2017 को बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2019 किया जाएगा।

क्रमांक-3337/स्वराज्य


मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक: कई अहम फैसले

भ्रष्ट अधिकारियों की अनुपातहीन संपत्ति राजसात करने बनेगा कानून
इसके लिए छत्तीसगढ़ विशेष न्यायालय अधिनियम-2015 बनाया जाएगा
विधेयक का प्रारूप अनुमोदित
इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और आईटी समर्थित सेवाओं में निवेश की नीति सहित राईट ऑफ वे नीति भी अनुमोदित

   रायपुर, 28 जनवरी, 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार भ्रष्टाचार के आरोपी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों (लोक सेवकों) की अनुपातहीन सम्पत्ति को जब्त अथवा राजसात करने के लिए छत्तीसगढ़ विशेष न्यायालय अधिनियम-2015 (विधेयक) के प्रारूप का अनुमोदन किया गया, जिसे विधानसभा के आगामी सत्र में लाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा लिए गए जीरो टॉलरेंस के संकल्प के तहत लाया जा रहा है। डॉ. रमन सिंह ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।
    उन्होंने बताया कि आज की बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स आईटी और आईटी समर्थित सेवाओं में निवेश की नीति वर्ष 2014-19 का तथा छत्तीसगढ़ की राईट ऑफ वे नीति 2015 का भी अनुमोदन किया गया। मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रॅानिक्स आईटी और आईटी समर्थित सेवाओं में निवेश की नीति वर्ष 2014-19 के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’मेक इन इंडिया की तर्ज पर हमने ’मेक इन छत्तीसगढ’ की कल्पना की है। इसके लिए उद्योग नीति और आईटी नीति में संशोधन जरूरी था। इसी के अन्तर्गत सूचना एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के नाम एवं कार्यक्षेत्र में संशोधन कर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का गठन किया गया है। राज्य में आईटी हेतु आवश्यक ईको-सिस्टम का निर्माण किया जा चुका है। इसके अन्तर्गत भौतिक, सामाजिक अधोसंरचना,एयर एण्ड टेलीकॉम कनेक्टिविटी,नवीन इलेक्ट्रॉनिक्स ,आईटी नीति एवं एकल खिड़की का निर्माण किया जाएगा।
    उद्योग नीति 2014-2019 का अनुमोदन विगत केबिनेट की बैठक में किया जा चुका है। आज की बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स,आईटी और आईटी समर्थित सेवाओं में निवेश नीति 2014-2019 का अनुमोदन किया गया। इस नीति में आईटी डेवलपर, आईटी यूनिट, इलेक्ट्रॉनिक निर्माता, डाटा सेंटर आदि पर फोकस किया गया है। इसमें हमने आईटी सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए कई प्रावधान किए हैं। जिनमें ब्याज अनुदान, स्थायी पूंजी निवेश में प्रोत्साहन, भूमि प्रीमियम, विद्युत शुल्क आदि में प्रोत्साहन अनुदान और छूट की सीमा को  बढ़ाया गया है। ब्याज अनुदान वर्तमान नीति में 7 वर्ष तक कुल ब्याज का 75 प्रतिषत और अधिकतम 60 लाख रूपए वार्षिक था। नई नीति में इसे बढ़ाकर 8 वर्ष और कुल दिए गए ब्याज का 75 प्रतिशत तथा अधिकतम एक करोड़ 10 लाख रुपए किया गया है। स्थायी पूंजी निवेश का 50 प्रतिशत अधिकतम 1.50 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन प्रावधान किया गया है, जो पहले निवेश का 45 प्रतिशत और अधिकतम 1.40 करोड़ था।
    विद्युत शुल्क में 12 वर्षों के लिए अनुदान का प्रावधान किया गया है। यदि किसी आईटी उद्योग में 50 प्रतिशत कर्मचारी छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं तो निवेशक को 5 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा अगर निवेषक आगामी वित्तीय वर्ष 2015-16 से निवेश कर उत्पादन शुरू कर देता है तो 5 प्रतिषत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रस्तावित नीति अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है।
    डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ की राईट ऑफ वे नीति 2015 के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी ग्राम पंचायतों में ब्रांडबेंड कनेक्टिविटी देने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल ऑप्टीकल फाईबर नेटवर्क बिछाने का कार्य शुरू किया है। पांच वर्ष तक हर ग्राम पंचायत तक पहुंच होगी। वर्तमान में उन्हें सड़कों के किनारे इस कार्य के लिए अलग-अलग भू-स्वामित्व वाले विभागों जैसे लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन, वन, कृषि, नगरीय निकाय आदि से अनुमति लेनी पड़ती है। इंटरनेट हेतु आप्टिकल फाईबर बिछाने के लिए अब अनुमति प्रदान करने की एक ही नीति होगी। अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
    इस नीति के क्रियान्वयन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग नोडल विभाग होगा। सस्ती दरों पर पर्याप्त बेंडविड्थ प्रदान करने के लिए अधोसंरचना विकास किया जा रहा है, ताकि एक ज्ञानवान समाज तैयार हो सके। केबिनेट की आज की बैठक में अनुमोदित नीति इसमें सहायक होगी। नीति के क्रियान्वयन से शहरों एवं राजमार्गों में अनियंत्रित खुदाई से भी राहत मिलेगी। शासकीय कार्यालयों जैसे कलेक्टोरेट, नगरनिगम, तहसील में निःशुल्क कनेक्टिविटी सेवा प्रदाता द्वारा दी जाएगी।
    छत्तीसगढ़ विशेष न्यायालय अधिनियम 2015 (विधेयक) के अनुमोदित प्रारूप का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस हमारा संकल्प है। इसके लिए हमने कठोर कानून बनाने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में आज कैबिनेट में विधेयक के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। इस विधेयक में लोक सेवकों द्वारा भ्रष्ट साधनों से अर्जित चल-अचल अनुपातहीन सम्पति को जब्त/राजसात करने का प्रावधान किया गया है। विधेयक में कुल 28 धाराएं शामिल की गई हैं।
    डॉ. सिंह ने कहा कि इस विधेयक की एक विशेषता यह भी है कि राज्य शासन द्वारा ऐसे लोकसेवकों की अनुपातहीन सम्पति के मामलों की घोषणा की जा सकेगी और इन घोषणाओं को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। विधेयक में ऐसे मामलों के लिए विशेष न्यायालय के गठन का प्रावधान किया गया है, जो इस प्रकार के मामलों की सुनवाई करेगा। इन मामलों का निराकरण एक वर्ष के भीतर किया जाएगा। मामले की जांच के दौरान सम्बधित लोक सेवक की अनुपातहीन सम्पति कुर्क की जा सकेगी, ताकि उसके द्वारा अनुपातहीन सम्पति को अन्य तरीकों से निराकृत करने की आशंका ना रहे।
    मुख्यमंत्री ने बताया कि विधेयक में प्रावधान किया गया है कि ऐसे मामलों में सम्पति कुर्क करने की पुष्टि एक माह के भीतर विशेष न्यायालय द्वारा की जाएगी। इसके साथ ही विशेष न्यायालय ऐसे कुर्क/अधिग्रहित सम्पति को प्रबंधन के लिए जिला मजिस्टेªट अथवा उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति को सौंपा जा सकेगा। अपचारी लोक सेवक को विशेष न्यायालय में सुनवाई का समुचित अवसर दिया जाएगा। प्रभावित व्यक्ति द्वारा विशेष न्यायालय के आदेश के विरूद्ध एक माह के भीतर उच्च न्यायालय में अपील की जा सकेगी। इसके अलावा बस्तर और सरगुजा राजस्व संभागों के जिलों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों की स्थानीय भर्ती के लिए वर्तमान में जारी नीति को अगले दो वर्ष के लिए बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।क्रमांक- 3505/स्वराज्य

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक : कई महत्वपूर्ण फैसले

एनीकटों-बैराजों में लगभग 39 हजार मछुआरों को मिलेगा रोजगार
मछुआ सहकारी समितियों को आवंटित किए जाएंगे एनीकट और बैराज
विदेशी प्रजाति की बिग-हेड और मागुर मछलियों पर राज्य में लगेगी पाबंदी
अर्फोडेबल आवासीय योजनाओं में गृह निर्माण मंडल को भूमि के पंजीयन और मुद्रांक शुल्क से छूट

रायपुर, 07 फरवरी 2015

राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की एक हजार से ज्यादा मछुआ सहकारी समितियों में सदस्य के रूप में शामिल लगभग 39 हजार मछुआरों को नदी-नालों में निर्मित एनीकटों और बैराजों में मछली पालन के व्यवसाय का बेहतर मौका दिया जाएगा। इससे इन मछुआरा परिवारों को रोजगार भी मिलेगा। यह निर्णय आज शाम यहां मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।
उल्लेखनीय है कि हाल के कुछ वर्षों में राज्य में नदी-नालों में लगभग 400 एनीकटों का निर्माण हो चुका है और करीब-करीब इतने ही एनीकट निर्माणाधीन है। केबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार मछुआ सहकारी समितियों को ये एनीकट और बैराज मछली पालन विभाग के संचालनालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवंटित किया जाएगा। बैठक में लिए गए एक अन्य निर्णय के अनुसार मछली पालन नीति में आंशिक संशोधन करके एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जल क्षेत्र वाले सिंचाई जलाशय मत्स्य महासंघ को दिए जाएंगे। महासंघ द्वारा इन्हें निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार नीलाम किया जाएगा। जिन निविदा कर्ताओं को ये तालाब नीलामी में दिए जाएंगे, उनके द्वारा प्रदेश के मछुआरों को मछली पालन के आधुनिक तौर-तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उनके द्वारा मछुआरों को रोजगार भी दिया जाएगा। नीलामी से मत्स्य महासंघ की आमदनी बढ़ेगी और जलाशयों में मछलियों की पैदावार में वृद्धि होगी।
मछली पालन विभाग से संबंधित एक अन्य प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद मंत्रिपरिषद ने बिग-हेड और विदेशी प्रजाति की मागुर मछलियों के छत्तीसगढ़ में प्रजनन, पालन, परिवहन और व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का भी निर्णय लिया। विदेशी नस्ल की ये मछलियां चूंकि स्थानीय प्रजातियों की मछलियों को खा जाती हैं, इससे मछलियों की स्थानीय प्रजातियों के विलुप्त होने की आशंका बनी रहती है। इसे ध्यान में रखकर विदेशी प्रजाति की बिग-हेड और मागुर मछलियों पर राज्य में पाबंदी लगाई जाएगी।
एक अन्य निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को अर्फोडेबल आवासीय योजना के तहत कमजोर आय वर्ग के लिए अंतरित होने वाली 15 प्रतिशत भूमि को पंजीयन और मुद्रांक शुल्क से छूट देने का भी निर्णय लिया गया। इस योजना में एल.आई.जी. और ई.डब्ल्यू. एस. मकानों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा कॉलोनाईजरों तथा आर.डी.ए. तथा एन.आर.डी.ए. द्वारा कमजोर और अल्प आय वर्ग की कॉलोनियों के निर्माण के लिए आरक्षित 15 प्रतिशत भूमि के गृह निर्माण मंडल अथवा नगरीय निकायों को हस्तांतरण करने पर स्टाम्प शुल्क/पंजीयन शुल्क से छूट दी जाएगी। आगामी वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए आबकारी दुकानों का व्यवस्थापन पूर्वानुसार ऑन-लाइन पद्धति से किए जाने का प्रस्ताव भी मंत्रिपरिषद की बैठक में अनुमोदित किया गया।   क्रमांक-3672/स्वराज्य

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक

सिरपुर के योजनाबद्ध विकास के लिए बनेगा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण

रायपुर, 19 फरवरी 2015/मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित केबिनेट की बैठक में प्रदेश के प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल सिरपुर (जिला महासमुन्द) में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण गठित करने का निर्णय लिया गया। यह प्राधिकरण नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 64 के तहत बनाया जाएगा। मंत्रिपरिषद ने बैठक में विधानसभा के आगामी बजट सत्र को ध्यान में रखकर राज्य सरकार के नये वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट से संबंधित तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया।  
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बैठक के बाद बताया कि सिरपुर में बनने वाले विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में सिरपुर सहित उसके आसपास के 35 गांवों को शामिल किया जाएगा और इन गांवों के योजनाबद्ध और सुव्यवस्थित विकास की एक नई शुरूआत होगी। उन्होंने कहा कि इन गांवों की नौ हजार 144 हेक्टेयर भूमि और लगभग 22 हजार की जनसंख्या को इसका लाभ मिलेगा। उनके लिए हर प्रकार की जरूरी सुविधाओं का तेजी से विकास होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की यह मंशा है कि सिरपुर और उसकी परिधि के गांवों का योजनाबद्ध ढंग से विकास हो। इसी उद्देश्य से वहां विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण बनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सिरपुर को विश्व धरोहर में शामिल कराने और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र में नई पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के गठन के बाद वहां पर्यटन सुविधाओं के विकास में भी तेजी आएगी। उल्लेखनीय है कि सिरपुर का अब तक ज्ञात इतिहास मोटे तौर पर लगभग डेढ़ हजार साल पुराना है। सिरपुर को दक्षिण कोशल की प्राचीन राजधानी भी माना जाता है, जिसे उस युग में ’श्रीपुर’ कहा जाता था। महानदी के किनारे छठवीं-सातवीं शताब्दी के इस शहर को बौद्ध, शैव, वैष्णव और जैन संस्कृतियों के संगम स्थल के रूप में भी प्रतिष्ठा मिली है। विगत तीन वर्षों से वहां हर साल जनवरी में सिरपुर राष्ट्रीय नृत्य और संगीत महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है।
आवास और पर्यावरण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में तमनार, सीपत, नया रायपुर और अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण कार्यरत हैं। इसी कड़ी में अब सिरपुर में भी विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त होंगे। उनके अलावा एक पुरातत्व विशेषज्ञ, इंजीनियर, सर्वेयर, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की भी उसमें नियुक्ति की जाएगी।क्रमांक-3867/स्वराज्य


मंत्रिपरिषद के फैसले

रायपुर, 27 फरवरी 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद मंत्री द्वय सर्वश्री केदार कश्यप और राजेश मूणत ने केबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। श्री केदार कश्यप ने बताया कि आज लिए गए निर्णय के अनुसार आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत संचालित स्कूलों, शिक्षकों आदि का स्कूल शिक्षा विभाग में हस्तांतरण किया जाएगा। वर्तमान में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत 14 हजार 563 स्कूल संचालित है, जिनमें 10 हजार 412 प्राथमिक, दो हजार 951 मिडिल स्कूल, 316 हाईस्कूल और 884 हायर सेकेण्डरी स्कूल शामिल हैं। नगरीय निकायों के अंतर्गत 43 स्कूलों का संचालन किया जा रहा है।  
उन्होंने बताया कि आदिम जाति और अनुसूचित जाति विकास विभाग तथा नगरीय निकायों द्वारा समस्त शैक्षणिक संस्थाओं और उनमें कार्यरत शिक्षकीय स्टाफ लिपिकीय अमला, भृत्य आदि को स्कूल शिक्षा विभाग में हस्तांतरित किया जाएगा। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आवासीय विद्यालयों की आवासीय व्यवस्था का दायित्व यथावत आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग का होगा।
नया रायपुर में राज्य प्रवर्तित मुख्यमंत्री आवासीय योजना - श्री राजेश मूणत ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अपनी आवास नीति में आवासहीनों, गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी है। नया रायपुर में बसाहट भी शासन की प्राथमिकता है। इस उद्देश्य से राज्य प्रवर्तित मुख्यमंत्री आवासीय योजना बनाई गई है। यह योजना मांग आधारित होगी। इसका क्रियान्वयन व संचालन बिना लाभ बिना हानि के छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के माध्यम से किया जाएगा। योजना के तहत वर्ष 2014-15 से 2017-18 तक विभिन्न श्रेणियों के 40 हजार आवासीय प्रकोष्ठ भवनों का निर्माण किया जाएगा। योाजना के तहत 31 मार्च 2016 तक प्राप्त पंजीयन आवेदनों के अनुसार ही भवनों का निर्माण होगा। राज्य सरकार ईडब्ल्यूएस भवन के लिए रूपए एक लाख तथा एलआईजी ए और बी के लिए रूपए 50 हजार की सहायता अनुदान के रूप में प्रत्येक हितग्राही को देगी। 
मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवासीय कॉलोनियों का निर्माण होगा, जिनमें आरसीसी सड़क, भूमिगत बिजली की लाईन, खेल मैदान, स्ट्रीट लाईट, स्कूल के लिए जमीन, सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घण्टे निरंतर पेयजल आपूर्ति, सामुदायिक हॉल, दुकानें आदि का निर्माण किया जाएगा। योजना में अनुसूचित जाति के लिए 6 प्रतिशत, शारीरिक विकलांगों के लिए 3 प्रतिशत, निराश्रित और विधवा महिलाओं के लिए 2 प्रतिशत तथा सरकारी कर्मचारियों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। एनआरडीए के तहत आने वाले ग्रामीण परिवारों को जिनकी जमीन एनआरडीए ने खरीदी है उन्हें एक प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। हितग्राहियों के चयन के बाद संख्या के अनुपात में प्रस्तावित भवनों का निर्माण किया जाएगा। नया रायपुर में इस योजना के लिए मात्र एक रूपए वर्गफुट पर जमीन छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि पशुधन विकास विभाग के अंतर्गत पशु चिकित्सा सेवा (राजपत्रित) के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष के स्थान पर 65 वर्ष किए जाने का निर्णय 9 दिसम्बर 2014 को लिया गया था। इसके बाद केबिनेट ने 28 जनवरी 2015 को इसके लिए छत्तीसगढ़ शासकीय सेवक (अधिवार्षिकी आयु) (संशोधन) अध्यादेश 2015 का अनुमोदन किया था, चूंकि अध्यादेश लागू होने के पहले विधानसभा का सत्र दो मार्च 2015 से शुरू हो रहा है। अतः इसे विधेयक के रूप में सत्र के दौरान सदन में लाया जाएगा, जिसका अनुमोदन आज केबिनेट में किया गया।

क्रमांक-4020/स्वराज्य

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक

रायपुर, 13 मार्च 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां विधानसभा परिसर स्थित मुख्य समिति कक्ष में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में प्रदेश सरकार के नये वित्तीय वर्ष 2015-16 के बजट का अनुमोदन किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया।क्रमांक-4192/स्वराज्य

 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक

रायपुर, 21 मार्च 2015

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक

विधायक आदर्श ग्राम योजना के लिए सशक्त समिति गठित करने का निर्णय

रायपुर 07 अप्रैल 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में विधायक आदर्श ग्राम योजना के क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय सशक्त समिति के गठन का निर्णय लिया गया। योजना के लिए पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग को नोडल विभाग के रूप में अधिकृत करने और योजना के तहत चयनित गांवों के विकास के लिए सभी 90 विधायकों की विधायक निधि से दस-दस लाख रूपए की धन राशि विभिन्न योजनाओं में अभिसरण के लिए दिए जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन भी बैठक में किया गया। इससे प्रत्येक विधायक को अपने चयनित ग्राम पंचायत में काम की प्राथमिकता तय करने में आसानी होगी। मंत्रिपरिषद की बैठक में इस महीने की 13 तारीख से शुरू हो रहे एक महीने के प्रदेश व्यापी लोक सुराज अभियान के सुचारू संचालन से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई। बैठक के बाद पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चन्द्राकर ने केबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूरे देश में 11 अक्टूबर 2014 से सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरूआत हुई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उसी तर्ज पर राज्यों में भी विधायक आदर्श ग्राम योजना संचालित करने का आग्रह किया था। इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के सभी विधायकों से आदर्श ग्राम योजना के लिए एक-एक गांव का चयन करने का आग्रह किया था। ग्राम पंचायतों के चयन का आधार सांसद आदर्श ग्राम योजना के अनुरूप सामान्य क्षेत्रों में 3 हजार से 5 हजार की जनसंख्या और आदिवासी क्षेत्रों में 1500 में 2 हजार की जनसंख्या रखी गई है। अब तक सभी विधायकों ने 90 गांवों का चयन कर लिया है। विधायक आदर्श ग्राम योजना विशुद्ध रूप से राज्य का कार्यक्रम है। इसका संचालन राज्य सरकार के सभी विभागों की भागीदारी और उनकी योजनाओं तथा कार्यक्रमों के माध्यम से किया जाएगा। श्री अजय चन्द्राकर ने यह भी बताया कि राज्य सरकार को मीना खल्खो की मृत्यु की घटना की जांच के लिए घटित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। रिपोर्ट में की गई अनुशंसाओं के आधार पर राज्य शासन द्वारा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कर एक्शन टेकन रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत की जाएगी। 

क्रमांक-67/स्वराज्य

मंत्रि-परिषद के निर्णय

प्रदेश में खरीफ 2015 में लागू होगी राष्ट्रीय फसल बीमा योजना

रायपुर, 02 मई 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के व्यापक हित में खरीफ 2015 के लिए प्रदेश में राष्ट्रीय फसल बीमा योजना (केन्द्र प्रवर्तित) लागू करने का निर्णय लिया गया। यह बीमा योजना सिंचित धान को छोड़कर असिंचित धान और मक्का अरहर, मुंगफली, सोयाबीन पर लागू होगी। बीमित राशि धान असिंचित के लिए 11600 रूपए प्रति हेक्टेयर, मक्का के लिए 12000 रूपए, अरहर (तुअर) के लिए 9400 रूपए, सोयाबीन के 18800 रूपए और मूंगफली के लिए 41900 रूपए प्रति हेक्टेयर होगी। प्रीमियम दरें धान, मक्का और तूअर के लिए बीमित राशि का ढाई प्रतिशत और तिलहन (सोयाबीन, मूगफली) के लिए बीमित राशि का 3.50 प्रतिशत होगी। इस बीमा योजना के लिए पटवारी हल्के को इकाई माना जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पीडीएस में अगले माह राशनाकार्ड धारक उपभोक्ताओं को जून-जुलाई के दो महीने का चावल एक साथ दिया जाएगा। शेष सामग्री चना, शक्कर और मिट्टी तेल का वितरण पूर्ववत किया जाएगा। इसके लिए माह मई 2015 में दो महीने के आबंटन के अनुरूप 3.82 लाख मीटरिक टन चावल का भण्डारण उचित मूल्य दुकानों में किया जाएगा। मंत्रिपरिषद में लिए गए एक निर्णय के अनुसार गैर अनुसूचित क्षेत्रों में माह मई 2015 के लिए राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के विभिन्न केन्द्रों में उपलब्ध पीली मटर दाल के शीघ्र निराकरण के लिए उसे अनुसूचित क्षेत्रों में परिवहन कर, अंत्योदय और प्राथमिकता वाले परिवारों को चना के स्थान पर दिया जाएगा। इसकी कीमत अनुसूचित क्षेत्रों में वितरित किए जा रहे चने के समान मात्र पांच रूपए प्रति किलो होगी।

क्रमांक-618/स्वराज्य

मंत्रि-परिषद की बैठक

सरगुजा-बस्तर संभागों में शिक्षकों, डॉक्टरों और नर्सों के पदों की पूर्ति आउट-सोर्सिंग से करने का निर्णय


रायपुर, 19 मई 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में हाईस्कूलों और हायर सेकेण्डरी स्कूलों सहित सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए आउट सोर्सिंग करने का निर्णय लिया गया। बैठक में बताया गया कि इन दोनों राजस्व संभागों के हाईस्कूलों तथा हायर सेकेण्डरी स्कूलों में विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और वाणिज्य विषय के व्याख्याता और शिक्षकों के कई पद रिक्त हैं। इसी तरह स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और लेब टेक्नीशियनों की भी कमी है। राज्य शासन द्वारा इन सभी पदों की पूर्ति के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन वांछित संख्या में पदों की पूर्ति नहीं हो पायी। चूंकि शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों आम जनता के लिए अत्यावश्यक सेवाएं हैं इसलिए इन सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए संबंधित पदों की पूर्ति आउट-सोर्सिंग से करने का प्रस्ताव बैठक में अनुमोदित किया गया। मंत्रि-परिषद की बैठक में बिलासपुर जिले के नसबंदी प्रकरण की विशेष जांच के लिए राज्य शासन द्वारा श्रीमती अनिता झा, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय जांच आयोग के कार्यकाल में तीन महीने की वृद्धि का कार्योत्तर अनुमोदन किया गया। आयोग द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की अवधि 12 मई को समाप्त हो रही थी, जिसे तीन महीने बढ़ाने की अधिसूचना जारी की जा चुकी है, जिसका कार्योत्तर अनुमोदन आज की बैठक में किया गया। 

क्रमांक-888 /स्वराज्य

मंत्रि-परिषद की बैठक

रमन सरकार का ऐतिहासिक फैसला : प्राकृतिक विपदा पीड़ितों को पहले की तुलना में मिलेगी कई गुना ज्यादा सहायता

मृत्यु प्रकरणों में मृतक के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे में दोगुने से ज्यादा वृद्धि : अब चार लाख रूपए की मिलेगी मदद
भारी वर्षा, बाढ़, तूफान, गाज, सर्पदंश, बिच्छु काटने, लू लगने से होने वाली मौतों में भी पीड़ित परिवारों को मिलेगी चार-चार लाख की मदद

रायपुर, 09 जून 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्राकृतिक विपदा पीड़ितों की मदद के लिए सहायता राशि के वर्तमान प्रावधानों को संशोधित कर मुआवजे में भारी वृद्धि करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।
    बैठक के बाद राजस्व एवं आपदा प्रबंधन एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज केबिनेट ने मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाकर राजस्व पुस्तक परिपत्र 6 (4) के वर्तमान प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावों का अनुमोदन कर दिया, ताकि संकटग्रस्त और पीड़ित परिवारों को राज्य सरकार द्वारा अधिक से अधिक सहायता दी जा सके। संशोधित प्रावधानों के अनुसार भारी वर्षा, बाढ़, आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली (गाज) गिरने जैसी प्राकृतिक विपदाओं में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को पहले की तुलना में अब दोगुनी से भी ज्यादा तात्कालिक आर्थिक सहायता अनुदान के रूप में मिलेगी।  
    श्री पाण्डेय ने बताया कि वर्तमान में ऐसे प्रकरणों में मृतक के परिवार को डेढ़ लाख रूपए की सहायता देने का प्रावधान है, यह प्रावधान वर्ष 2012 से लागू है, जिसे आज बढ़ाकर चार लाख रूपए कर दिया गया है। सर्पदंश, बिच्छु के डंक मारने, मधुमक्खी काटने, रसोई गैस सिलेण्डर फटने, खदान धसकने, लू लगने और गड्ढ़े में डूबने जैसी दुर्घटनाओं में भी मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रूपए की सहायता मिलेगी। किसी बस या अधिकृत पब्लिक ट्रांसपोर्ट के वाहन के नदी मेें गिरने या पहाड़ से खाई में गिरने पर मृत्यु के मामले में दी जाने वाली सहायता राशि को 75 हजार रूपए से बढ़ाकर दो लाख रूपए करने का निर्णय लिया गया है।
    उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन की तैयारी और बचाव तथा राहत कार्य करते हुए किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को मिलने वाली सहायता राशि भी 1.50 लाख के स्थान पर 4.00 लाख रूपए करने का निर्णय लिया गया है। अंग-भंग/आंख की 40 से 80 प्रतिशत तक क्षति होने पर वर्तमान में 43 हजार 500 रूपए की मदद का प्रावधान है, जो बढ़कर 59 हजार 100 रूपए हो जाएगा। इस संबंध में शासकीय चिकित्सालय के सक्षम चिकित्सक का प्रमाण पत्र लगेगा । श्री पाण्डेय ने बताया कि किसी प्राकृतिक आपदा में 80 प्रतिशत से अधिक शारीरिक अक्षमता होने पर वर्तमान में 62 हजार रूपए प्रति व्यक्ति सहायता का प्रावधान है । संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब 60 प्रतिशत से अधिक अक्षमता होने पर रूपए 2.00 लाख की मदद दी जाएगी । घरेलू सामान नष्ट होने और भीषण विपत्ति में बेघर व्यक्तियों को मिलने वाली अनुदान सहायता में भी वृद्धि की गई है।
    राजस्व मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज की बैठक में फसल हानि के मापदण्डों में भी परिवर्तन किया गया है । राज्य में किसानों को प्राकृतिक आपदा से क्षति होने पर अधिक से अधिक तत्कालिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है । श्री पाण्डेय ने बताया कि पहले 50 प्रतिशत से अधिक फसल हानि होने पर ही सहायता की पात्रता बनती थी, अब इसे संशोधित कर 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षतिग्रस्त होने पर भी सहायता की पात्रता होगी, तथा 2 हेक्टेयर तक भूमि धारण करने वाले किसानों को असिंचित भूमि के लिए निर्धारित अनुदान की दर 4,500 रूपए प्रति हेक्टेयर को बढ़ाकर 6,800/- तथा सिंचित जमीन के लिए निर्धारित अनुदान की दर 9,000/- रूपए प्रति हेक्टर को बढ़ाकर 13,500/- रूपए प्रति हेक्टर कर दिया गया है। इसके अलावा 2 हेक्टर से अधिक भूमि धारण करने वाले किसानों को भी अधिकतम 10 हेक्टर की सीमा तक 33 प्रतिशत से अधिक फसल का नुकसान होने पर असिंचित भूमि पर 6,800/- रूपए प्रति हेक्टर तथा सिंचित भूमि पर 13,500/- रूपए प्रति हेक्टर की दर से सहायता दी जाएगी। पशुहानि की दरों में भी पर्याप्त वृद्धि की गई है ।
    श्री पाण्डेय ने बताया कि गाय, भैंस आदि पशुओं की मृत्यु होने पर सहायता राशि की दर 16,400/- रूपए को बढ़ाकर 30,000/-रूपए प्रति पशु किया गया है। भेड़, बकरी, सुअर की मृत्यु पर निर्धारित 1,650/-रूपए की सहायता राशि को बढ़ाकर 3,000/- रूपए प्रति पशु कर दिया गया है । इसी तरह बैल, ऊंट, घोड़ा आदि के लिए निर्धारित दर 15,000/- रूपए को बढ़ाकर 25,000/-रूपए कर दिया गया है । मछली पालक किसानों को आंशिक नाव (नौका) हानि पर मिलने वाली सहायता राशि 3,000/- रूपए को बढ़ाकर 41,00/-रूपए तथा पूर्ण नाव हानि होने पर 7,000/- रूपए को बढ़ाकर 9,600/- रूपए कर दिया गया है । इसी तरह जाल को अधिक क्षति होने पर दी जाने वाली सहायता 15,00/-रूपए को बढ़ाकर 21,00 रूपए तथा जाल को पूर्ण हानि होने पर 1850/- रूपए को बढ़ाकर 2600/- रूपए कर दिया गया है ।
    राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री ने यह भी बताया कि प्राकृतिक विपदा में हस्तशिल्प, हाथ करघा तथा कारीगरों के उपकरणों की हानि होने पर वर्तमान में निर्धारित 3000 रूपए की सहायता राशि को बढ़ाकर 4100 रूपए कर दिया गया है। मकान हानि पर दी जाने वाली सहायता राशि की दरों में भी व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। पहले मकान के क्षतिग्रस्त होने पर 70,000/- रूपए तथा कच्चा मकान हानि के लिए 17,600/-रूपए सहायता दी जाती थी, अब पक्का या कच्चा दोनांे तरह के मकानों की हानि पर सहायता राशि सामान्य क्षेत्रों में 95100/-रूपए तथा पहाड़ी क्षेत्रों एवं आई.ए.पी. जिलों में 101900/- रूपए कर दिया गया है । राज्य में 2 हेक्टेयर बडे़ किसानों को भी 10 हेक्टर की सीमा तक 33 प्रतिशत से अधिक फसल हानि होने पर सहायता देने का निर्णय लिया गया है । अग्नि पीड़ित दुकानदारों को दी जाने वाली सहायता राशि 12000/- रूपए से बढ़ाकर 20,000/- रूपए कर दी गयी है। । बैलगाड़ी और कृषि उपकरण की हानि पर सहायता राशि वर्तमान में 7500/- रूपए देने का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 10,000/-रूपए कर दिया गया है । फलदार वृक्षों, पपीता, केला, अनार, अंगूर की फसलों के नुकसान पर अब किसानों को प्रति हेक्टेयर 13500/- रूपए और फूलों की खेती में नुकसान होने पर प्रति हेक्टेयर छह हजार रूपए की सहायता दी जाएगी।

क्रमांक-1222/स्वराज्य

मंत्रि-परिषद की बैठक

किसानों के व्यापक हित में रमन सरकार का एक और महत्वपूर्ण फैसला

किसानों को अब खेती के लिए 60 प्रतिशत नगद और  40 प्रतिशत वस्तु के रूप में मिलेगा ब्याज मुक्त ऋण

सहकारी समितियों के लगभग 25 लाख किसान उठा सकेंगे इस सुविधा का लाभ

रायपुर, 09 जून 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित केबिनेट की बैठक में किसानों के व्यापक हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस निर्णय के अनुसार अब राज्य के किसानों को प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से खेती के लिए ब्याज मुक्त अल्पकालीन ऋण सुविधा के रूप में 60 प्रतिशत राशि नगद और 40 प्रतिशत राशि वस्तु (खाद, बीज आदि) के रूप में दी जाएगी। बैठक के बाद राजस्व मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने बताया कि प्रदेश की एक हजार 333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में सदस्य के रूप में शामिल 24 लाख 88 हजार 575 किसान इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। उल्लेखनीय है कि इन समितियों में वर्ष 2012 से किसानों को मिल रहे अल्पकालीन कृषि ऋणों में 50 प्रतिशत नगद और 50 प्रतिशत वस्तु के रूप में दिया जा रहा था। किसानों को 50 प्रतिशत सामग्री का अनुपात होने के कारण कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हो रही थी। श्री पाण्डेय ने बताया कि किसानों की व्यावहारिक कठिनाईयों पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद ने संवेदनशीलता के साथ विचार करने के बाद इस प्रावधान को संशोधित करने का निर्णय लिया। अब किसानों को खेती के लिए 60 प्रतिशत नगद और 40 प्रतिशत वस्तु के रूप में ऋण सुविधा मिलेगी। मंत्रिपरिषद के इस निर्णय का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनकी मंत्रिपरिषद के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि प्राकृतिक विपदा पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज की बैठक में सहायता राशि में भारी वृद्धि करने का निर्णय भी रमन सरकार की लोक हितैषी नीति और संवेदनशील दृष्टिकोण का परिचायक है। इसी कड़ी में किसानों के हित में अल्पकालीन फसल ऋण के वर्तमान प्रावधान को संशोधित करने के उनके फैसले से किसानों में प्रसन्नता देखी जा रही है। श्री बजाज ने बताया कि राज्य की कृषि साख सहकारी समितियों में 24 लाख 88 हजार 575 सदस्य किसान हैं। उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड भी जारी किए जा रहे हैं। चालू वर्ष 2015-16 में अब तक दस हजार 991 किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं और उन्हें 52 करोड़ 30 लाख रूपए की साख सीमा स्वीकृत की गई, जबकि इन्हें मिलाकर समितियों में योजना प्रारंभ से अब तक क्रेडिट कार्ड धारकों की संख्या 20 लाख से अधिक हो गई है और उन्हें 754 करोड़ रूपए से ज्यादा साख सीमा मंजूर की जा चुकी है। जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए हैं कि तीन माह के भीतर समितियों के शत-प्रतिशत सदस्य किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी कर दिए जाएं।

क्रमांक-1224/स्वराज्य

 

केबिनेट के कुछ और फैसले

रायपुर, 09 जून 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश में आपात कालीन चिकित्सा सेवा 108-संजीवनी एक्सप्रेस के संचालन के लिए पूर्व के समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) का नवीनीकरण करते हुए उसमें छह महीने वृद्धि करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा नायब तहसीलदार से तहसीलदार के पद पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा अवधि की अनिवार्यता को एक बार के लिए शिथिल करके तीन वर्ष करने का निर्णय लिया गया। बैठक में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष के पद पर आयोग के सदस्य श्री आर.एस. विश्वकर्मा को नियुक्त करने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया गया। इस महीने की 21 तारीख को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस की तैयारी के बारे में भी केबिनेट में व्यापक चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसके लिए सभी संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर तैयारी करने के निर्देश दिए। 
 

क्रमांक-1228/स्वराज्य


मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक

नक्सल मोर्चे पर तैनात पुलिस बल के लिए आकर्षक पैकेज
जवानों के लिए सुविधाओं में भारी वृद्धि
लगभग 22 हजार जवानों को मिलेगा फायदा
सहायक आरक्षकों का मासिक वेतन 8990 से
बढ़ाकर 14,144 रूपए किया जाएगा
सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी मिलेगी
25 लाख रूपए की बीमा सुरक्षा

रायपुर, 30 जून 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित केबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। नक्सल हिंसा और आतंक की गंभीर चुनौती से जूझ रहे राज्य के बस्तर राजस्व संभाग के सभी सात जिलों में कार्यरत पुलिस बल के जवानों, सहायक आरक्षकों (पूर्व नाम एस.पी.ओ.) और गोपनीय सैनिकों के लिए एक मुश्त आकर्षक पैकेज सहित पहली बार एक साथ कई सुविधाओं को बढ़ाने का महत्वपूर्ण फैसला आज की बैठक में किया गया। इस फैसले से उन्हें वर्तमान में दी जा रही सुविधाओं में भारी वृद्धि होगी।  डॉ. सिंह ने बैठक के बाद स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों को बताया कि लगभग 22 हजार पुलिस जवानों को इन फैसलों का लाभ मिलेगा। इनमें लगभग 11 हजार नियमित आरक्षक शामिल हैं। उनके लिए सुविधाओं में वृद्धि पर राज्य सरकार पर 121 करोड़ रूपए का सालाना व्यय आएगा। मुख्यमंत्री की प्रेसवार्ता में लोक निर्माण और परिवहन मंत्री श्री राजेश मूणत, मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड, गृह और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव श्री बी.व्ही.आर. सुब्रमण्यम, जनसम्पर्क विभाग के सचिव श्री गणेश शंकर मिश्रा, वित्त विभाग के सचिव श्री अमित अग्रवाल, गृह विभाग के सचिव श्री अशोक जुनेजा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
डॉ. रमन सिंह ने मीडिया को बताया कि मंत्रिपरिषद ने बस्तर संभाग के सभी जिलों में नक्सल हिंसा और आतंक के खिलाफ मोर्चे पर तैनात राज्य पुलिस के जवानों और सहायक आरक्षकों के हित में कई अहम फैसले किए हैं। सहायक आरक्षकों का मासिक वेतन विभिन्न भत्तों सहित कुल आठ हजार 990 रूपए से बढ़ाकर 14 हजार 144 रूपए करने का भी निर्णय लिया गया है। सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी अब पुलिस जवानांे की तरह 25 लाख रूपए की बीमा सुरक्षा दी जाएगी। अब तक उन्हें केवल पांच लाख रूपए की बीमा योजना का लाभ मिलता था। उनका मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें भी 25 लाख रूपए की बीमा सुरक्षा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल समस्या आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। देश में छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित राज्य है। पूरे देश की नक्सल समस्या का 70 प्रतिशत भाग छत्तीसगढ़ में है और इसका भी लगभग 90 प्रतिशत प्रभाव बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में हैं। हमारे बहादुर पुलिस बल के जवान कठिन परिस्थितियों में भी वहां हिम्मत और हौसले के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। उनकी यह कर्तव्यपरायणता विकास कार्यों को गति देने में भी सहायक होती है। कई बहादुर जवान कर्तव्य के पथ पर शहीद हो जाते हैं और कई गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। जवानों का मनोबल बनाए रखने के लिए राज्य सरकार उन्हें हर संभव अधिक से अधिक सुविधा देने को तत्पर है।
इसी कड़ी में केबिनेट ने आज गहन विचार-विमर्श कर उनके व्यापक हित में कई निर्णय लिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि   इसका लाभ सम्पूर्ण बस्तर संभाग सहित गरियाबंद और राजनांदगांव के कुछ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के जवानों को भी मिलेगा। डॉ. सिंह ने बताया कि केबिनेट में आज लिए गए निर्णय के अनुसार इन जवानों के लिए सुविधाओं में वृद्धि करने  पर लगभग 121 करोड़ रूपए का वार्षिक व्यय संभावित है। समस्त वेतन एवं भत्ते एक जुलाई 2015 से लागू किए जाएंगे। राशन भत्ते में वृद्धि - डॉ. रमन सिंह ने बताया कि वर्तमान में बस्तर संभाग के जिलों में पुलिस बल को रूपए 650 प्रति माह राशन भत्ता एक जनवरी 2006 से दिया जा रहा है, जिसे लगभग दस वर्ष हो गए हैं। इसी प्रकार राज्य के स्पेशल टॉस्क फोर्स को 30 मार्च 2013 से रूपए 1200 प्रति माह राशन भत्ता दिया जा रहा है। मंत्रिपरिषद ने आज निर्णय लिया कि  बस्तर संभाग के सभी जिलों के पुलिस बल के साथ-साथ सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी रूपए 2000 (रूपए दो हजार) प्रतिमाह राशन भत्ता दिया जाएगा। स्पेशल टॉस्क फोर्स को भी रूपए 1200 के स्थान पर रूपए 2200 प्रति माह राशन भत्ता दिया जाएगा। इस पर लगभग 35 करोड़ 31 लाख रूपए वार्षिक व्यय आएगा।     नक्सल क्षेत्र भत्ता - वर्तमान में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत पुलिस बल को मूल वेतन का 20 प्रतिशत एवं 15 प्रतिशत नक्सल ड्यूटी भत्ता थानावार दिनांक 17 जुलाई 2009 से दिया जा रहा है। मंत्रिपरिषद ने राज्य पुलिस बल के लिए नक्सल क्षेत्र भत्ता तीन स्तरों पर देने का निर्णय लिया। अति संवेदनशील क्षेत्रों में 50 प्रतिशत, संवेदनशील क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और सामान्य प्रभावित क्षेत्रों में 15 प्रतिशत नक्सल ड्यूटी भत्ता दिया जाएगा। यह भत्ता थानेवार वर्गीकृत किया जाएगा और यह वर्ष 2018-19 तक के लिए दिया जाएगा। इसे 31 मार्च 2019 के पहले समीक्षा कर आगे बढ़ाने के बारे में विचार किया जाएगा। सहायक आरक्षकों के वेतन और भत्ते में वृद्धि - नक्सल विरोधी अभियान के लिए वर्ष 2011 से राज्य  में सहायक आरक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिन्हें वर्तमान में रूपए 3500 प्रतिमाह निश्चित वेतन एवं महंगाई भत्ते एवं अन्य भत्ते दिए जा रहे हैं। मंत्रिपरिषद ने सहायक आरक्षकों का मूल वेतन रूपए 3500 से बढ़ाकर 4300 रूपए करने का निर्णय लिया। उनका डी.ए. रूपए 3955 से बढ़ाकर 4859 रूपए किया गया। उनका राशन भत्ता 650 रूपए से बढ़ाकर रूपए 2650 और नक्सल ड्यूटी भत्ता 700 रूपए से बढ़ाकर 2150 रूपए किया गया। अब सहायक आरक्षकों का वेतन 8990 रूपए से बढ़कर रूपए 14,144 प्रतिमाह हो जाएगा। सहायक आरक्षकों के लिए निश्चित यात्रा भत्ता रूपए एक हजार देने का भी निर्णय लिया गया। सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी मिलेगा सामूहिक बीमा का लाभ - मंत्रिपरिषद ने सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी बीमा योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत उनका भी नक्सल क्षेत्रों के पुलिस बल की तरह 25 लाख रूपए का बीमा किया जाएगा। उन्हें भी अक्षमता भत्ता अधिकत्तम 20 लाख रूपए दिया जाएगा। गोपनीय सैनिक - गोपनीय सैनिकों की वर्तमान संख्या 458 से बढ़ाकर 608 करने का निर्णय लिया गया। अर्थात् 150 अतिरिक्त पद स्वीकृत किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जवानों और सहायक आरक्षकों को अच्छी क्वालिटी के रूपए 2000 के जूते और एक हजार रूपए मूल्य के अच्छी क्वालिटी के बैग (कंधे पर टांगने वाले) साल में एक बार संबंधित पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से दिए जाएंगे। इसके पहले तक उन्हें केवल 500 से 700 रूपए कीमत के जूते दिए जाते थे। अब उन्हें अच्छी क्वालिटी के जूते प्रदान किए जाएंगे। डॉ. रमन सिंह ने बताया कि बस्तर संभाग में कार्यरत पुलिस जवानों के लिए जगदलपुर में पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के माध्यम से एक सौ बिस्तरों का अत्याधुनिक अस्पताल पी.पी. माडल पर बनाया जाएगा। वर्तमान में गंभीर मरीजों को रायपुर लाना पड़ता है, लेकिन बहुत जल्द उन्हें बेहतर उपचार की सुविधा जगदलपुर में मिलने लगेगी। इस अस्पताल में आम नागरिक भी अपना इलाज करवा सकेंगे। अस्पताल पर लगभग 12 करोड़ 50 लाख रूपए का वार्षिक व्यय संभावित है।
स्थानांतरण नीति वर्ष 2015-16 का अनुमोदन
मुख्यमंत्री ने बताया कि केबिनेट में आज वर्ष 2015-16 की स्थानांतरण नीति का भी अनुमोदन कर दिया, जो इस प्रकार होगी- एक जुलाई 2015 से 20 जुलाई 2015 तक जिला स्तर पर तृतीय श्रेणी (गैर-कार्यपालिक) तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के स्थानांतरण जिले के माननीय प्रभारी मंत्री जी के अनुमोदन से कलेक्टर द्वारा किए जा सकेंगे। संबंधित विभाग के जिला कार्यालय प्रमुख द्वारा स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार कर जिला कलेक्टर को प्रस्तुत किया जाएगा। कलेक्टर द्वारा इस प्रस्ताव का परीक्षण कर उस पर जिले के प्रभारी मंत्री जी से अनुमोदन प्राप्त कर आदेश जारी किए जाएंगे। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के मामलों में उनके विभागीय संवर्ग में जिले में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के मामले में अधिकतम पांच प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। परस्पर सहमति से स्वयं के व्यय पर किए गए स्थानांतरणों की गणना उक्त सीमा हेतु नहीं की जाएगी। परस्पर सहमति से स्थानांतरण हेतु दोनों आवेदकों द्वारा आवेदन पत्र पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर आवश्यक होगा। स्वयं के व्यय पर स्थानांतरण हेतु व्यक्तिगत रूप से किए गए आवेदन पर किया गया कोई भी स्थानांतरण, परस्पर सहमति से किए गए स्थानांतरण की श्रेणी में नहीं आएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थापना के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 3 जून 2015 में शामिल नीति निर्देशों का उल्लंघन नहीं हो। स्थानांतरण से व्यथित शासकीय सेवक स्थानांतरण नीति के उल्लंघन पर स्पष्ट आधारों के साथ अपना अभ्यावेदन स्थानांतरण आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर संभागीय कमिश्नर के समक्ष प्रस्तुत करंेगे। स्थानांतरणों के विरूद्ध अभ्यावेदन पर विचार के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने पहली बार संभागीय कमिश्नरों को अधिकृत किया है।  कमिश्नर द्वारा अभ्यावेदन का परीक्षण कर अंतिम निराकरण किया जाएगा और उनका निर्णय अंतिम होगा। संभागीय कमिश्नर के निर्णय के क्रियान्वयन का दायित्व संबंधित जिला कलेक्टर का होगा।
इस अवसर पर प्रदेश के परिवहन मंत्री श्री राजेश मूणत ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज केबिनेट की बैठक में सिटी बसों के लिए मार्गों का अनुमोदन किया गया। केबिनेट ने 451 सिटी बसें चलाने का निर्णय लिया।  राज्य शहरी विकास अभिकरण  द्वारा जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन  के तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों प्राप्त कुल 451 बसों को सिटी बस के रूप में चलाने हेतु 09  सोसायटी का गठन किया गया है। कुल 220 मार्गों को सिटी बस के रूप में चलाने हेतु शहरी मार्ग/पार्श्वस्थ क्षेत्र घोषित करने के लिए मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी गई है। सिटी बस मार्गों पर चलने वाली प्रत्येक बस/प्रक्रम यात्री वाहन का किराया एवं मोटरयान कर सिटी बस के समान रहेगा। सिटी बस के किराये का निर्धारण - उन्होंने बताया कि आम जनता को सस्ती एवं सुलभ सार्वजनिक यातायात सेवा प्रदान करने हेतु सिटी बस के रूप में प्रस्तावित मार्गों पर सिटी बस के किराये की दर निर्धारित की गई है। यह दर प्रथम 2 किमी पर 5 रूपए तथा उसके  पश्चात प्रति 2 किमी पर 1 से 2 रूपए के आधार पर निर्धारित की गई है। 50 कि.मी. या अधिक दूरी के मार्गों पर 36 रूपए का टिकट लगेगा। (मंत्रि-परिषद् के आज निर्णय के आधार पर 50 किमी का प्रक्रम यात्री वाहन का किराया 43.5 होता है)

क्रमांक- 1552/स्वराज्य
 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक में हुआ फैसला

छत्तीसगढ़ के 60.28 लाख गरीब परिवारों को अब एक अक्टूबर से निःशुल्क रिफाइंड आयोडिन नमक

रायपुर, 30 जून 2015

राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 के तहत गरीब परिवारों को आयोडाइज्ड नमक के स्थान पर अब एक अक्टूबर 2015 से निःशुल्क रिफाइंड आयोडाइज्ड नमक वितरित करने का निर्णय लिया है। इस पर लगभग 83 करोड़ 23 लाख रूपए का वार्षिक व्यय अनुमानित है। यह निर्णय आज यहां मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। डॉ. सिंह ने बैठक के बाद फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 के प्रावधानों के तहत अन्त्योदय परिवारों और प्राथमिकता वाले परिवारों को राशन कार्ड पर हर महीने दो किलो निःशुल्क आयोडाईज्ड अमृत नमक उचित मूल्य दुकानों से दिया जा रहा है। लगभग 60 लाख 28 हजार राशन कार्ड धारक परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। उन्हें प्रतिवर्ष एक लाख 44 हजार मीटरिक टन आयोडाईज्ड अमृत नमक की आवश्यकता होती है। राज्य सरकार इस पर सालाना 73 करोड़ 15 लाख रूपए का अनुदान देती है। प्रदेश सरकार ने इन परिवारों को अब और भी अधिक बेहतर गुणवत्ता का नमक देने का निर्णय लिया है। उन्हें रिफाइंड आयोडाईज्ड नमक दिया जाएगा। इस समय मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, गुजारात और तमिलनाडू सहित कुछ अन्य राज्यों में भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत रिफाइंड आयोडाईज्ड नमक वितरित किया जा रहा है। उसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार ने भी अपने यहां के गरीब परिवारों को रिफाइंड आयोडाईज्ड नमक वितरित करने का आज निर्णय लिया है। यह नमक राज्य के अनुसूचित विकासखंडों में हर महीने प्रति परिवार दो किलोग्राम और गैर अनुसूचित विकासखंडों में हर महीने प्रति परिवार एक किलोग्राम के हिसाब से दिया जाएगा। इसके लिए राज्य को एक लाख 02 हजार मीटरिक टन आयोडाईज्ड नमक का वितरण किया जाएगा, जिस पर 83 करोड़ 23 लाख रूपए का वार्षिक व्यय अनुमानित है, जो वर्तमान व्यय भार से 10 करोड़ अधिक होगा। आयोडाईज्ड रिफाइंड नमक के लिए निविदा आदि की प्रक्रिया पूर्ण कर एक अक्टूबर 2015 से इसका वितरण किया जाएगा। 

क्रमांक - 1553  /स्वराज्य

 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक 

तकनीकी शिक्षा एवं जनशक्ति नियोजन विभाग का नाम अब ’कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार विभाग’ होगा

रायपुर, 12 जुलाई 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मंत्रिपरिषद ने तकनीकी शिक्षा एवं जनशक्ति नियोजन का नाम संशोधित कर ’कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार विभाग’ करने का निर्णय लिया। इसके लिए छत्तीसगढ़ शासन के कार्य आबंटन नियम में संशोधन किया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि राज्य गठन के उपरांत तकनीकी शिक्षा और जनशक्ति नियोजन विभाग के अन्तर्गत संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण रायपुर में कार्यरत है। इसके द्वारा  भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा महानिदेशालय रोजगार एवं प्रशिक्षण नई दिल्ली के निर्देशों पर अमल किया जाता है। भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने महानिदेशालय रोजगार एवं प्रशिक्षण का नाम बदलकर महानिदेशालय प्रशिक्षण किया गया है तथा इस विभाग को श्रम विभाग से हटाकर कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय को अंतरित किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्तमान में राज्य में प्रशासकीय विभाग (तकनीकी शिक्षा तथा जनशक्ति नियोजन विभाग) के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण तथा राज्य परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज सोसायटी संचालित है, जिनके माध्यम से राज्य के युवाओं के कौशल विकास से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अतः तकनीकी शिक्षा,जनशक्ति  नियोजन विभाग से प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार भारत सरकार के अनुरूप राज्य में भी विभाग का नाम संशोधित कर ’ कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार विभाग’ रखने का निर्णय मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। इसी कड़ी में आज की बैठक में छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आबंटन) नियम में संशोधन कर भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा की स्थापना को सामान्य प्रशासन विभाग से क्रमशः गृह विभाग और वन विभाग को सौंपने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में राज्य सरकार के प्रथम अनुपूरक अनुमान का अनुमोदन भी बैठक में किया गया।

क्रमांक-1757/स्वराज्य

 

      मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक : पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम के नाम पर स्कूलों में चलेगा शिक्षा गुणवत्ता अभियान

गरीबों को निःशुल्क दिए जाएंगे एल.ई.डी. लैम्प
राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग का होगा गठन
जिला पंचायतों में सदस्य संख्या बढ़ाने अध्यादेश के प्रारूप को मंजूरी
बिलासपुर नसबंदी प्रकरण जांच आयोग की अनुशंसाओं का होगा पालन 

रायपुर 26 अगस्त 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के बाद पंचायत, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री अजय चन्द्राकर ने मीडिया प्रतिनिधियों को इन फैसलों की जानकारी दी। उनकी प्रेस वार्ता में सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क श्री गणेश शंकर मिश्रा भी उपस्थित थे। श्री चन्द्राकर ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज केबिनेट में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर राज्य के स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता अभियान संचालित करने का निर्णय लिया गया। इसके अन्तर्गत राज्य के स्कूलों का अगले माह सितम्बर की 16 और 17 तारीख को मूल्यांकन विशेष ग्रामसभाओं में होगा। 
    श्री चन्द्राकर नेे बताया कि केबिनेट की बैठक में ऊर्जा दक्ष सड़क बत्ती और घरेलू लाईट में एल.ई.डी. लैम्पों के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ में गरीबी रेखा श्रेणी के लगभग 16 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को तीन नग एल.ई.डी. लैम्प निःशुल्क देने और लगभग 18 लाख ए.पी.एल श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं को पांच नग एल.ई.डी. सशुल्क देने का भी निर्णय लिया गया। सभी उपभोक्ताओं को नौ वाट के एल.ई.डी. लैम्प दिए जाएंगे। इन लैम्पों के उपयोग से बी.पी.एल श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली की आवश्यकता हर महीने 29 यूनिट से घटकर केवल सात यूनिट रह जाएगी। इस प्रकार उन्हें 22 यूनिट बिजली की बचत होगी, जिसका उपयोग उपभोक्ता द्वारा अन्य कार्यों के लिए किया जा सकेगा। ए.पी.एल. श्रेणी के उपभोक्ताओं को पांच एल.ई.डी. बल्बों के उपयोग से हर साल लगभग 444 यूनिट बिजली की बचत होगी। वितरित किए जाने वाले एल.ई.डी. बल्बो की गारंटी तीन वर्ष की होगी। गारंटी अवधि में खराब हुए बल्बो को निःशुल्क तत्काल बदला जाएगा।
    श्री चन्द्राकर ने बताया कि शासकीय कर्मचारियों की सेवा शर्तो, वेतन विसंगतियों, भर्ती, क्रमोन्नति और पदोन्नति प्रकरणों के युक्तियुक्तकरण सहित प्रशासनिक कार्यों में सुधार के लिए राज्य प्रशासनिक सुधार गठित करने का फैसला भी आज केबिनेट की बैठक में लिया गया। इसके अलावा बिलासपुर जिले के नसबंदी प्रकरणों की जांच के लिए गठित एकल सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट की अनुशंसाओं का पालन करने और इन अनुशंसाओं के तहत दोषी अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर  स्वास्थ्य विभाग द्वारा कड़ी कार्रवाई करने, अमानक और विषाक्त औषधियों (सिप्रोसिन-500 और आईब्रुफेन-400) की निर्माता एवं विक्रेता कम्पनियों के खिलाफ विधि के अनुसार अभियोजन की कार्रवाई करने का भी निर्णय लिया गया। श्री चन्द्राकर ने बताया कि केबिनेट में प्रदेश की खेती-किसानी और बारिश की स्थिति की भी समीक्षा की गयी। अल्पवर्षा अथवा खण्ड वर्षा वाले इलाकों में किसानों को राहत पहुंचाने के हरसंभव उपाय किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को किसानों के लम्बित सिंचाई पंप कनेक्शनों के मामले तत्काल हल करने, बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा बिजली ट्रांसफार्मरों के बेहतर रख-रखाव आदि के बारे में आवश्यक निर्देश दिए। सिंचाई व्यवस्था आदि के बारे में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। श्री चन्द्राकर ने बताया कि राज्य में आज 26 अगस्त तक 731 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जो पिछले साल का 90 प्रतिशत और विगत दस वर्षोें की औसत का 86 प्रतिशत है। चालू खरीफ मौसम में राज्य में 45 लाख 31 हजार हेक्टेयर में बोनी हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 102 प्रतिशत है।
मंत्रि परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय इस प्रकार है -

  •     छत्तीसगढ़ पंचायत राज (संशोधन) अध्यादेश 2015 (छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 (क्र. 1 सन् 1994) को और संशोधित करने हेतु अध्यादेश प्रारूप का अनुमोदन - प्रदेश में जिला पंचायतों का परिसीमन होने से अब 18 के स्थान पर 27 जिला पंचायतें हो गई हैं, जिससे जिला पंचायत क्षेत्रों का आकार छोटा हो गया है। कई जिला पंचायतों में 10 से 15 सदस्य हैं। वर्तमान परिवेश में सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं होने से विद्यमान प्रचलित अधिनियम में बने प्रावधान के अनुसार स्थायी समितियों के गठन की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। अतः जिला पंचायतों के सदस्यों की संख्या को ध्यान में रखते हुए अधिनियम की धारा 47 उप धारा (4) में प्रत्येक स्थायी समिति में पांच सदस्यों के स्थान पर तीन सदस्य रखने का प्रावधान करने हेतु अध्यादेश के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। वर्तमान में जनपद एवं जिला पंचायतों में पांच स्थायी समितियां होती है - सामान्य प्रशासन समिति, कृषि समिति, शिक्षा समिति, संचार एवं संकर्म समिति तथा सहकारिता और उद्योग समिति। 
  •     डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत शिक्षा गुणवत्ता में वृद्धि के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए राज्य शासन द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए स्कूलों का मूल्यांकन ग्रामसभाओं द्वारा किया जाए। ग्रामसभाओं को मूल्यांकन के बारे में सुझाव एवं सहयोग देने हेतु स्कूल शिक्षा विभाग का एक अधिकारी नामांकित किया जाएगा। स्कूलों के मूल्यांकन के लिए विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन किया जाएगा। चूंकि एक ग्राम पंचायत में चार या पांच स्कूल हो सकते हैं, इसलिए प्रत्येक गांव के अंतर्गत आने वाली शालाओं के लिए दो अलग-अलग दिनों में ग्रामसभाएं की जाएगी। ग्रामसभाओं के आयोजन के लिए विभाग द्वारा राज्य स्तर पर मास्टर ट्रनर्स प्रशिक्षित किए जाएंगे। प्रशिक्षण के बाद उनके द्वारा नामित अधिकारी और ग्रामसभा/जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने की कार्रवाई की जाएगी। जिला स्तर पर कलेक्टर द्वारा अपने जिले के माननीय जनप्रतिनिधियों यथा -माननीय सांसद, विधायक, जिला/नगरीय निकाय के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष आदि के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय शाला ग्रेडिंग समिति होगी। यह समिति ग्रामसभा/नगरीय निकायों के द्वारा मूल्यांकित स्कूलों को चार प्रकार की ग्रेडिंग - ए/बी/सी/डी ग्रेडिंग की जाएगी। सी और डी ग्रेडिंग वाले स्कूलों का निरीक्षण माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय मंत्रीगण, माननीय सांसद एवं माननीय विधायकगण, जिला पंचायत /नगरीय निकायों के माननीय अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, जनपद पंचायतों के माननीय अध्यक्ष /उपाध्यक्ष एवं निगम मंडलों के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष द्वारा किया जाएगा। इसके साथ-साथ प्रदेश के मुख्य सचिव एवं समस्त सचिव तथा प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारी (डॉक्टर और शालेय शिक्षकों को छोड़कर) स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। स्कूल निरीक्षण में कुलपति, अधिकारी एवं सेवानिवृत्त प्राचार्यों एवं व्याख्याता, प्रधानपाठक भी शामिल हो सकते हैं। प्रत्येक निरीक्षण /पर्यवेक्षण अधिकारी को एक प्राथमिक एवं एक उच्च प्राथमिक शाला के निरीक्षण का दायित्व सौंपा जाएगा। इसके लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाया गया है - सबसे पहले मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण 2 सितम्बर 2015 को होगा। नामित अधिकारियों का जिला एवं विकासखंड स्तरीय प्रशिक्षण 7 सितम्बर से 11 सितम्बर तक होगा। मूल्यांकन के लिए विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन 16 और 17 सितम्बर को होगा। ग्रेडिंग संकलन कार्य 26 सितम्बर तक होगा। स्कूल चिन्हांकन सूची एवं आवंटन 7 अक्टूबर तक होगा। स्कूलों का निरीक्षण (सुविधा अनुसार) प्रथम चरण में 8 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2015 और द्वितीय चरण में 11 जनवरी 18 जनवरी 2016 के बीच होगा। 
  •     ऊर्जा दक्ष सड़क बत्ती एवं घरेलू लाइट में एलईडी लैम्प के उपयोग को प्रोत्साहन - निर्णय लिया गया कि घरेलू लाइट में एलईडी लैम्प के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में 16 लाख बीपीएल उपभोक्ताओं को 03 नग एलईडी लैम्प निःशुल्क और 18 लाख एपीएल उपभोक्ताओं को 05 नग एलईडी लैम्प सशुल्क दिया जाए। बीपीएल उपभोक्ताओं को निःशुल्क एलईडी लैम्प वितरण में होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति वर्तमान में लागू निःशुल्क विद्युत प्रदाय योजना में देय अनुदान में समायोजित की जाएगी। इस प्रक्रिया के लिए वित्त विभाग की सहमति से आवश्यक कार्रवाई करने तथा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया। उल्लेखनीय है कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा पांच जनवरी 2015 को ऊर्जा दक्ष सड़क बत्ती एवं घरेलू लाइट में एलईडी लैम्प के प्रयोग को प्रोत्साहन देने की राष्ट्रीय कार्यक्रम की घोषणा की गई है। 
  •     स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए औषधि एवं उपकरण खरीदी हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति के संबंध में - मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय लिया कि औषधियों और उपकरणों की खरीदी के लिए पूर्व में गठित समितियों को समाप्त करते हुए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन (सी.जी.एम.एस.सी.) की क्रय/निविदा समितियों में वित्त विभाग के अभिमत के अनुसार सदस्य नामांकित किए जाए। एक करोड़ रूपए से अधिक के फर्निचर और कार्यालय उपकरण खरीदी हेतु गठित समितियों में सीएसआईडीसी, एक करोड़ से अधिक सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों की खरीदी के लिए क्रय समितियों में चीप्स और पांच करोड़ रूपए से अधिक के निर्माण कार्यों की निविदा समितियों में लोक निर्माण विभाग (अधीक्षण अभियंता से अनिम्न) को प्रतिनिधित्व दिया जाए। 
  •     डी.के.एस. भवन में सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल एवं विभागों की स्थापना का निर्णय लिया गया। इस भवन में सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल और चिकित्सा संबंधी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए सार्वजनिक -निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) आधार पर क्रियान्वयन हेतु अथवा संचालन विभागीय रूप से किए जाने हेतु निर्णय लेने के लिए विभाग को अधिकृत करने का निर्णय लिया गया। 
  •     छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन - राज्य शासन के घोषणा पत्र 2013 में राज्य में प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग गठित करने का उल्लेख है। घोषणा पत्र में अधिकारियों-कर्मचारियों की वेतन विसंगति/ भर्ती / क्रमोन्नति / पदोन्नति को युक्तियुक्त करने के लिए भी आयोग गठन का उल्लेख है। सामान्य प्रशासन विभाग के प्रस्ताव के अनुसार मंत्रिपरिषद ने दोनों उद्देश्यों को समाहित करते हुए एक सदस्यीय आयोग गठन का प्रस्ताव लिया है, जिसका नाम प्रशासनिक सुधार आयोग रखा जाएगा। आयोग के अध्ययन बिन्दु, अध्यक्ष एवं अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तों का निर्धारण सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा किया जाएगा। 
  •     बिलासपुर नसबंदी प्रकरण में जांच आयोग का प्रतिवेदन - बिलासपुर जिले के सकरी में आठ नवम्बर 2014 और गौरेला, पेण्ड्रा एवं मरवाही में 10 नवम्बर 2014 को नसबंदी शिविर आयोजित किए गए थे। इन शिविरों में 13 महिलाओं की मृत्यु हो गई थी और अन्य अनेक महिलाओं का स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया गया था। घटना की जांच के लिए राज्य शासन द्वारा एकल सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग 13/11/2014 की अधिसूचना द्वारा गठित कर सात बिन्दु निर्धारित किए गए थे। शासन को 10 अगस्त 2015 को आयोग द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। आयोग के निष्कर्षों के अनुसार नसबंदी शिविरों में अमानक एवं विषाक्त औषधियों के वितरण तथा चिकित्सकीय लापरवाही के फलस्वरूप यह घटना हुई। मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया कि जांच प्रतिवेदन में घटना के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी पाया गया है, उनके खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। नसबंदी शिविरों में वितरित की गई अमानक एवं विषाक्त औषधियों (सिप्रोसिन- 500 और आईब्रुफेन-400) की निर्माता एवं विक्रेता कम्पनियों के विरूद्ध विधि के अनुसार अभियोजन की कार्रवाई की जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जांच प्रतिवेदन में सुझाए गए उपायों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा और  सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कार्रवाई की जाए। 
  •     कपड़ा एवं शक्कर पर मूल्य संवर्धित कर (वैट) समाप्त कर प्रवेश कर लगाए जाने के संबंध में - छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम के अंतर्गत कपड़ा एवं शक्कर पर एक प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही कपड़ा पर प्रवेश कर में दी गई छूट समाप्त कर कपड़ा और शक्कर पर एक प्रतिशत की दर से प्रवेश कर लगाने का निर्णय लिया गया। 
  •     रायपुर में सेन्ट्रल ऑफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी (सीआईपीईटी) का केन्द्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में देश के 22 स्थानों में यह केन्द्र संचालित है। यह भारत सरकार के रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग द्वारा सोसायटी के रूप में पंजीकृत है, जिसके द्वारा प्लास्टिक तथा उससे संबंधित उद्योगों को श्रमशक्ति प्रशिक्षण एवं तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही है। इसमें हाई डियरिंग सेन्टर (इंजीनियरिंग शिक्षा) अन्य डियरिंग सेन्टर (डिप्लोमा तथा पीजी डिप्लोमा कोर्स) तथा वोकेशनल ट्रेनिंग सेन्टर ( चार से छह महीने के अल्पकालीन पाठ्यक्रम शामिल होंगे, इसके लिए उपकरण मशीनरी सीआईपीईटी अथवा सिपेट द्वारा  लगाया जाएगा, जबकि जमीन/भवन शासन द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। वोकेशनल ट्रेनिंग कोर्स इसी वर्ष चालू किए जाएंगे, जबकि इंजीनियरिंग कॉलेज सीएसव्हीटीयू (स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय) से संबद्धता के बाद आगामी वर्ष चालू किया जाएगा। सीपेट द्वारा संचालित कोर्स रोजगार मूलक होने से छत्तीसगढ़ के युवा वर्ग को लाभ मिलेगा।  साथ ही यहां के प्लास्टिक उद्योग को भी इसका लाभ मिलेगा। 


क्रमांक-2472/स्वराज्य

मुख्यमंत्री ने निभाया ’रमन के गोठ’ का वादा

मंत्रि-परिषद की मैराथन बैठक में किसान-हित में कई महत्वपूर्ण फैसले

राज्य के 20 जिलों की 93 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

केबिनेट के फैसले के तुरंत बाद फसलों को  बचाने गंगरेल से छोड़ा गया पानी

किसानों की समस्याओं पर केन्द्रित रही केबिनेट की बैठक

इस वर्ष नहीं मनाया जाएगा राज्योत्सव : केवल होगा अलंकरण समारोह

 

रायपुर, 15 सितम्बर 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज यहां मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के व्यापक हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेकर ’रमन के गोठ’ में किया गया अपना वादा निभाया। उन्होंने बैठक में व्यापक विचार-विमर्श के बाद राज्य के 20 जिलों की 93 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भी भेजने के निर्णय के साथ-साथ इन तहसीलों में ग्रामीणों के लिए युद्धस्तर पर रोजगारमूलक कार्य खोलने का भी निर्णय लिया। इन तहसीलों में नजरी आकलन के आधार पर खरीफ की फसल 50 पैसे से कम होने का अंदेशा है।  
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक यहां मंत्रालय में दोपहर 12 बजे शुरू हुई और बैठक साढ़े तीन घण्टे तक चलती रही। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में गत वर्ष की तुलना में केवल 83 प्रतिशत बारिश को देखते हुए पर्याप्त जल भराव वाले सभी बांधों में उपलब्ध पानी जल उपयोगिता समितियों की अनुशंसा के आधार पर सिंचाई के लिए देने का निर्णय लिया। प्रदेश के सबसे बड़े बांगो बांध से पानी पहले ही छोड़ा जा चुका है। आज केबिनेट की बैठक में गंगरेल बांध में 121 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता को देखते हुए फसलों के लिए पानी छोड़ने का निर्णय लिया और निर्णय पर तुरंत अमल करते हुए अपरान्ह में ही गंगरेल बांध के गेट खोल दिए गए। इसके अलावा पेयजल के लिए भी पानी आरक्षित रखने का निर्णय लिया गया। 
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले आकाशवाणी से प्रसारित अपनी नियमित रेडियो वार्ता ’रमन के गोठ’ में प्रदेश की ढाई करोड़ जनता को सम्बोधित करते हुए किसानों से जो वादा किया था, उसकी झलक आज केबिनेट की बैठक में देखने को मिली। उन्होंने ’रमन के गोठ’ में किसानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि प्राकृतिक विपदा की इस घड़ी में उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनकी समस्याओं और कठिनाईयों से सरकार अच्छी अवगत है। सरकार उनके साथ है और वे किसानों के लिए राहत उपायों पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए 15 सितम्बर को मंत्रि-परिषद की बैठक भी लेने जा रहे हैं। डॉ. रमन सिंह ने इस वादे को निभाते हुए आज केबिनेट की बैठक ली। पूरी बैठक के दौरान वे राज्य में अवर्षा और सूखे का हालात में किसानों के लिए काफी चिन्तित नजर आए । उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कृषि विभाग, खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग, पंचायत और ग्रामीण विकास तथा जल संसाधन विभाग किसानों को राहत पहुंचाने के लिए नीति बनाकर ऐसी कार्य योजना तैयार करे, जिसके माध्यम से वर्तमान परिस्थितियों में अवर्षा के कारण फसल क्षति के प्रभाव को कम से कम किया जा सके। वहीं फिलहाल नुकसान के फलस्वरूप किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए उन्हें अधिक से अधिक राहत उपलब्ध कराई जाए।
आज की बैठक मुख्य रूप से किसानों के हितों पर ही केन्द्रित रही। मुख्यमंत्री ने मैराथन बैठक में राज्य में वर्तमान अवर्षा की स्थिति से पड़ने वाले दुष्प्रभाव और धान की फसल को नुकसान से बचाने के उपायों पर मंत्रियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। डॉ. रमन सिंह ने बैठक में कहा कि हमारे किसान अल्प वर्षा और अवर्षा की वजह से परेशान हैं। उन्हें राहत पहुंचाने के सभी उपाय किए जाएंगे। मंत्रि-मंडल ने निर्णय लिया कि राज्य सरकार सूखे की स्थिति में किसानों के साथ खड़े रहने के अपने संकल्प पर कायम है। इसलिए राज्योत्सव इस बार नहीं मनाया जाएगा और केवल एक दिन का होगा, जिसमें अलंकरण समारोह आयोजित किया जाएगा। 
मंत्रि-परिषद ने सबसे पहले सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि नजरी आनावारी के आधार पर 20 जिलों की 93 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए और इसका प्रस्ताव भारत सरकार को भी भेजा जाए। इन सभी तहसीलों की नजरी आनावारी 50 प्रतिशत से कम पायी गई है। इन तहसीलों में लगान और अन्य सरकारी व्यय की वसूली नहीं करने के संबंध में भी निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा अन्य तहसीलों को भी आवश्यकता अनुसार सूखा ग्रस्त घोषित करने का निर्णय समय-समय पर लिया जाएगा। कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की आज की बैठक में लिए गए विभिन्न फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज केबिनेट की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि धान की फसल को बचाने के लिए सभी किसानों को नदी-नालों में बह रहे पानी का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए, किसान नदी-नाले को बांधकर डीजल पम्पों के माध्यम से भी सिंचाई करें और निस्तारी के लिए भी उपयोग करें। किसानों को डीजल पम्पों के लिए दो हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो हजार से चार हजार रूपए तक डीजल पम्प पर सब्सिडी देने का भी निर्णय लिया गया। सिंचाई पम्पों के लिए सभी अस्थायी विद्युत कनेक्शनों के आवेदन 30 सितम्बर तक स्वीकृत करने के निर्देश ऊर्जा विभाग को दिए गए। सरगुजा और बस्तर आदिवासी विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण और ग्रामीण एवं पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की राशि से चार हजार किसानों को सिंचाई के लिए बिजली का कनेक्शन देने 22 करोड़ 68 लाख रूपए मंजूर किए गए। बिगड़े ट्रांसफार्मरों को जल्द बदलने और ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीसों घण्टे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। यह भी निर्णय लिया गया कि सभी 150 तहसीलों में ग्रामीणों के लिए मनरेगा आदि योजनाओं में अधिक से अधिक रोजगारमूलक कार्य खोले जाएं। मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय फसल बीमा योजना का लाभ सभी किसानों को दिलाने का निर्णय लेकर इसके लिए आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितम्बर तक बढ़ाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजने का निर्णय लिया। प्रदेश के किसी भी गांव में भूख से मृत्यु न हो इसके लिए हर ग्राम पंचायत में एक क्विंटल चावल अग्रिम रूप से रखा जाएगा और जरूरतमंद ग्रामीणों को ग्राम पंचायत के माध्यम से निःशुल्क दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ’रमन के गोठ’ कार्यक्रम में अपने सम्बोधन में किसानों और ग्रामीणों को प्राकृतिक विपदा की घड़ी में किसानों के हित में निर्णय लेने की घोषणा की थी। उन्होंने अपनी इस घोषणा को पूरा कर दिया। विभागवार कुछ अन्य महत्वपूर्ण फैसले इस प्रकार हैं:-

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग

केबिनेट की आज की बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 के लिए समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का खरीदी तथा   कस्टम मिलिंग की नीति का अनुमोदन किया गया।  भारत सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 के लिए घोषित समर्थन मूल्य के अनुसार खरीदी की जाएगी। भारत सरकार द्वारा धान कामन ग्रेड का समर्थन मूल्य 1410 रूपए प्रति क्विंटल, धान ग्रेड ’ए’ का समर्थन मूल्य 1450 रूपए प्रति क्विंटल और मक्का का समर्थन मूल्य 1325 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। धान की नगद एवं लिकिंग में खरीदी एक दिसम्बर 2015 से 31 जनवरी 2016 तक की जाएगी। इसी तरह मक्का 1 दिसम्बर 2015 से 31 मई 2016 तक  खरीदा जाएगा। पिछले खरीफ विपणन वर्ष की तरह इस वर्ष भी किसानों से प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान की अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है। खरीफ वर्ष 2012-13 से खरीफ वर्ष 2014-15 तक उपार्जित धान में औसतन 4 प्रतिशत से ज्यादा कमी प्रतिवेदित करने वाली समितियों को खरीफ वर्ष 2015-16 में किसानों से धान खरीदी के लिए अधिकृत नहीं किया जाएगा। इसके लिए कलेक्टर से नामांकित अधिकारी द्वारा संबंधित समिति के कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले गावों के किसानों से धान की खरीदी वर्तमान उपार्जन केन्द्रों में की जाएगी। गत वर्ष धान खरीदी के लिए 36 मंडी और 77 उपमंडी प्रागंणों का उपयोग किया गया था। शेष 21 मंडी और 39 उप मंडी प्रांगणों का भी संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर धान खरीदी के लिए उपयोग किया जाएगा।
 खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 के लिए कस्टम मिलिंग के लिए अनुबंध में मिलिंग की समयावधि मिल की मिलिंग क्षमता के अनुसार निर्धारित की जाएगी। धान खरीदी कार्य में समन्वय एवं पर्यवेक्षण का कार्य जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के द्वारा किया जाता है। इसलिए अपैक्स बैंक को पृथक से समन्वय एवं पर्यवेक्षण कार्य के लिए राशि 50 पैसे प्रति क्विंटल दिए जाने का निर्णय लिया गया। मक्का उपार्जन:- खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित मक्का का सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरण नहीं होने के कारण खुली निविदा के माध्यम से विक्रय किया जाएगा। नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा खुली निविदा के माध्यम से मक्का विक्रय पर होने वाली हानि की प्रतिपूर्ति नान को राज्य शासन द्वारा किया जाएगा। मक्का के उपार्जन के लिए किसानों के पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी।

लोक निर्माण विभाग

लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर लिए गए निर्णय के अनुसार प्रदेश के राजमिस्त्री सिविल (मेसन) के रूप में अधिक से अधिक बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए उनकी अर्हता में संशोधन किया जाएगा। इसके अनुसार छत्तीसगढ़ के मूल निवासी, जो छत्तीसगढ़ राज्य के मान्यता प्राप्त मेसन टेªड में आईटीआई/ स्किल डेव्हलेपमेंट इनिशिएटिव योजना/मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना / सेक्टर स्किल काउंसिल द्वारा प्रमाण-पत्र प्राप्त/ पंजीकृत प्रशिक्षित राज मिस्त्री संघ/ प्रशिक्षित स्व सहायता समूह प्रमाण पत्र प्राप्त होने के वर्ष को छोड़कर , पांच वर्ष की अवधि तक लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ में पंजीकृत किये जा सकेंगे। पंजीयन के लिए आवेदक के किसी शासकीय या अर्द्धशासकीय अथवा गैर शासकीय संस्था में सेवारत नहीं होने का हलफनामा देने का प्रावधान है। अब ’ हलफनामा’ के स्थान पर स्वप्रमाणित प्रमाण पत्र मान्य किए जाने का निर्णय लिया गया।

वन विभाग

वन विभाग के प्रस्ताव पर केबिनेट में यह निर्णय लिया गया कि तेंदूपत्ता के व्यापार से प्राप्त शुद्ध आय में से 15 प्रतिशत राशि संग्राहक समितियों को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के व्यापार के साथ-साथ लाख पालन के लिए भी उपलब्ध कराया जाए। यह राशि समितियों को अराष्ट्रीयकृत लघुवनोपज के क्रय एवं विक्रय, भण्डारण तथा प्रसंस्करण और लाख पालन के लिए उपलब्ध करायी जाएगी। समितियों द्वारा यह कार्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में किया जाएगा।

कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग

कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग के प्रस्ताव पर शिक्षित बेरोजगारी भत्ता योजना के स्थान पर ’ युवा क्षमता विकास योजना’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। छत्तीसगढ़ में लागू शिक्षित बेरोजगारी भत्ता योजना को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर ’ युवा क्षमता विकास योजना’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। शिक्षित बेरोजगारी भत्ता योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2012-13, 2013-14 एवं 2014-15 के वे हितग्राही जिन्हें पूर्व के वित्तीय वर्षों में एक माह अथवा उससे अधिक तथा 24 माह से कम शिक्षित बेरोजगारी भत्ता प्रदान किया गया है, उन्हें शिक्षित बेरोजगारी भत्ता योजना के प्रावधान के अनुसार शेष माह के लिए नियमानुसार शिक्षित बेरोजगारी भत्ते की पात्रता होगी।

राज्य के 20 जिलों की 93 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

    रायपुर, 15 सितम्बर 2015/ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित केबिनेट की बैठक में 20 जिलों की 93 तहसीलों को आनावारी के नजरी आकलन के आधार पर सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया गया। इनमें से 73 तहसीलों में फसल 37 पैसे से 50 पैसे तक होने का अनुमान है,जबकि गरियाबंद, बालोद, दंतेवाड़ा और कोरिया जिले की 19 तहसीलों में 25 पैसे से 37 पैसे तक फसल की आनावारी का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा कोरिया जिले के एक तहसील खड़गवां में नजरी आकलन के अनुसार आनावारी 25 पैसे से कम होगी। जिन 73 तहसीलों में आनावारी 37 से 50 पैसे तक अनुमानित है, उनमें रायपुर, आरंग, अभनपुर, तिल्दा, सरायपाली, बसना, पिथौरा, बागबाहरा, महासमुन्द, राजिम, गरियाबंद, छुरा, कुरूद, मगरलोड, नगरी, पाटन, नवागढ़, साजा, थानखम्हरिया, डोंगरगांव, छुईखदान, डोंगरगढ़, मानपुर, अम्बागढ़-चौकी, जगदलपुर, बस्तर, भनपुरी, बकावण्ड, लोहाण्डीगुड़ा, कोंटा, केशकाल, बड़ेराजपुर, माकड़ी, फरसगांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बचेली, गीदम, बीजापुर, भोपालपटनम, उसूर, बिल्हा, पेण्ड्रा, बिलासपुर, पेण्ड्रारोड, मस्तूरी, कोरबा, करतला, कटघोरा, पाली, बरमकेला, लैलूंगा, रायगढ़, पुसौर, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार, खरसिया, सारंगढ़, मुंगेली, पथरिया, लोरमी, रामानुजगंज, बलरामपुर, वाड्रफनगर, राजपुर, कुसमी, शंकरगढ़, प्रतापपुर, मनोरा, पत्थलगांव, कासाबेल और कुनकुरी शामिल हैं। 19 तहसीलों में नजरी आकलन के आधार पर 25 से 37 पैसे तक आनावारी का अनुमान है। इनमें मैनपुर, देवभोग, बालोद, गुरूर, डौण्डी, डौण्डी-लोहारा, राजनांदगांव, छुरिया, खैरागढ़, मोहला, कुंआकोण्डा, कटेकल्याण, भैरमगढ़, मरवाही, पोडी-उपरोडा, बैकुण्ठपुर, सोनहत, मनेन्द्रगढ़ और भरतपुर शामिल है। कोरिया जिले में खडगवां तहसील में 25 पैसे के कम आनावारी अनुमानित है। इन तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भी भेजा जाएगा।

 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक : अनुकम्पा नियुक्ति मामलों में दस प्रतिशत का बंधन एक वर्ष के लिए समाप्त

सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति की पात्रता में  पांच साल की अचल सम्पत्ति का पत्रक अनिवार्य
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में छत्तीसगढ़ को लक्ष्य से अधिक सफलता
मुख्यमंत्री ने की फसलों की स्थिति की समीक्षा
रबी कार्यक्रम की तैयारी पर भी हुआ विचार-विमर्श
इस वर्ष 16.46 लाख हेक्टेयर में रबी की खेती का लक्ष्य

रायपुर, 08 अक्टूबर 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। विचार-विमर्श के बाद केबिनेट ने तृतीय श्रेणी के पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए दस प्रतिशत के सीमा बंधन को एक साल के लिए शिथिल करने का निर्णय लिया। बैठक में बताया गया कि इसके पहले 16 जून 2013 को तृतीय श्रेणी के पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति की दस प्रतिशत की सीमा को एक साल के लिए शिथिल किया गया था, जिसकी अवधि 13 जून 2014 को समाप्त हो चुकी है। इसके फलस्वरूप अभी अनुकम्पा नियुक्ति के कई प्रकरण लंबित हैं, जिनके निराकरण के लिए मंत्रिपरिषद ने आज की बैठक में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के बाद एक साल के लिए सीमा बंधन शिथिल करने का निर्णय लिया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकारी कर्मचारियों की विभागीय पदोन्नति के लिए अब उनकी अचल सम्पत्ति के कम से कम पांच साल के वार्षिक विवरण पत्रकों का होना अनिवार्य होगा। सामान्य प्रशासन विभाग के 17 जुलाई 2012 के आदेश के अनुसार शासकीय सेवक की अचल सम्पत्ति का वार्षिक ब्यौरा प्रस्तुत करने की जानकारी विभागीय पदोन्नति समिति के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश हैं। मंत्रिपरिषद की आज की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अब पदोन्नति प्रकरणों में प्रशासकीय विभाग द्वारा विचाराधीन सरकारी कर्मचारियों के विगत पांच वर्ष के अचल सम्पत्ति के वार्षिक ब्यौरा प्राप्त/अप्राप्त होने की जानकारी विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। केबिनेट की आज की बैठक में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छत्तीसगढ़ को लक्ष्य से अधिक शानदार सफलता मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की गई। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि इस योजना के तहत राज्य में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर तक सप्ताह व्यापी अभियान चलाकर राज्य के सभी जिलों में जिला स्तर पर मेगा ऋण शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 54 हजार के लक्ष्य के विरूद्ध 54 हजार 109 हितग्राहियों को 251 करोड़ रूपए का ऋण स्वीकृत किया गया। इनमें से अब तक 38 हजार से ज्यादा हितग्राहियों को 168 करोड़ रूपए का ऋण वितरित किया जा चुका है। मेगा ऋण शिविरों के आयोजन में बैंकों के योगदान की भी आज की बैठक में तारीफ की गई। मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य में बारिश की स्थिति, खरीफ फसलों की स्थिति और रबी कार्यक्रम की तैयारी की भी समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि राज्य में इस वर्ष एक जून से 06 अक्टूबर तक मानसून की 1007.5 मिलीमीटर औसत वर्षा रिकार्ड की गई है, जो पिछले साल की इसी अवधि की औसत बारिश का 91 प्रतिशत है और विगत दस वर्षों की औसत वर्षा का 87 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगस्त और सितम्बर में खण्ड वर्षा और अल्प वर्षा के कारण प्रदेश के कई क्षेत्रों में फसल प्रभावित हुई है। वास्तविक आकलन फसल कटाई के बाद होगा।
 मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित तहसीलों में अधिक से अधिक संख्या में रोजगारमूलक कार्य संचालित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने रबी फसलों की तैयारी की समीक्षा करते हुए कहा कि किसानों को रबी मौसम में गेहूं, और दलहन-तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। चालू वर्ष 2015-16 के प्रस्तावित कार्यक्रम में 16 लाख 46 हजार हेक्टेयर में रबी फसलों की बोनी का लक्ष्य है। इसमें से एक लाख 79 हजार हेक्टेयर में गेहूं, चार लाख 13 हजार हेक्टेयर में चना, आठ लाख 25 हजार हेक्टेयर में दलहन और दो लाख 61 हजार हेक्टेयर में तिलहन की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को रबी फसलों के लिए खाद और बीज की आपूर्ति की समुचित व्यवस्था की जा रही है।

क्रमांक - 3320/स्वराज्य

मंत्रिपरिषद के निर्णय

नजरी आनावरी के आधार पर 17 और तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय
प्रदेश की 110 सूखा प्रभावित तहसीलों के लिए 4 हजार करोड़ के राहत पैकेज का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा गया
सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की एक अतिरिक्त किश्त

रायपुर 03 नवम्बर 2015

             मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार है:-

  •    नजरी आंकलन में 50 पैसे या उससे कम आनावारी वाले 17 तहसीलों को सूखाग्रस्त करने का निर्णय। इन्हें मिलाकर राज्य में अब सूखाग्रस्त तहसीलांे की संख्या 110 हो जायेगी। इसके पहले 15 सितम्बर, 2015 की मंत्रि-परिषद की बैठक में 150 मंे से 93 तहसीलोें को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया गया था। आज जिन 17 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला किया गया उनमें, जिला बेमेतरा के अंतर्गत बेरला, बेमेतरा, जिला कवर्धा के अंतर्गत कवर्धा, बोड़ला, सहसपुर लोहारा, पंडरिया, जिला जांजगीर-चांपा में बलौदा, जिला बस्तर में जगदलपुर और बकांवड, जिला कोंडागांव में तहसील कोंडागांव, जिला कांकेर में कांकेर, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, दुर्गुकोंदल, अंतागढ़ और चारामा तथा जिला नारायणपुर में ओरछा शामिल है। यह प्रस्ताव केन्द्र को भेजा जाएगा । इन्हंे मिलाकर सभी 110 तहसीलों में किसानों और ग्रामीणों की मददके लिए लगभग 4 हजार करोड़ रूपए के राहत पैकेज का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है।
  •  खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अवधि 16 नवम्बर, 2015 से 31 जनवरी, 2016 तक निर्धारित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।
  •  छत्तीसगढ़ शासन के कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते की दर दिनांक 1 जुलाई 2015 से 6 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब यह 113 प्रतिशत से बढ़कर 119 प्रतिशत हो गया है। इसमें राज्य शासन पर लगभग 400 करोड़ रूपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। 
  • छत्तीसगढ़ में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाये तथा राज्य आपदा प्रबंधन बल (SDRF) की स्थापना का निर्णय लिया गया।  राज्य शहरीकरण की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। रायपुर, नया रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर प्रमुख शहरी केन्द्र के रूप में विकसित हो रहे है। आगामी दशकों में शहरी आबादी बहुत तेजी से बढ़ने की संभावना है। शहरों में भवनों का निर्माण भी तेजी से हो रहा है। इसे देखते हुए राज्य में एक सुदक्ष अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवायें तथा राज्य आपदा प्रबंधन बल (SDRF) की स्थापना की जरूरत महसूस की जा रही थी। आज इसका अनुमोदन किया गया। अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं को चरणबद्ध ढंग से शुरू किया जाएगा। इसके अंतर्गत वर्तमान में उपलब्ध अग्निशमन कर्मचारियों, नगर सैनिकों और राज्य आपदा प्रबंधन बल को एक कमान (छत) के नीचे लाया जाएगा। फायर स्टेशनों के लिए सभी 27 जिलों में जमीन का चयन किया जाएगा। प्रथम चरण में (पहले वर्ष में) 10 जिलों रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़ और कोरिया में ए और बी श्रेणी के दस फायर स्टेशनों की स्थापना की जाएगी। दूसरे चरण में (दूसरे और तीसरे वर्ष में) शेष 17 जिलों में फायर स्टेशन स्थापित किये जाएंगे। 
  •  108 संजीवनी एक्सप्रेस के MOU के नवीनीकरण की अवधि 31.10.2015 को समाप्त हो गई है जिसे मंत्रि-परिषद के पूर्व निर्णय दिनांक 09 जून, 2015 के अनुरूप 31 मार्च, 2016 तक बढ़ाने का निर्णय आज की बैठक में लिया गया। 
  •   मंत्रालय/विभागाध्यक्ष कार्यालयों में सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से भरे जाने वाले सहायक ग्रेड-1 के 25 प्रतिशत पद निरंतर रिक्त बने हुए है, इस परिस्थिति को देखते हुए आज की बैठक में मंत्रालय/विभागाध्यक्ष कार्यालयों में सहायक ग्रेड-1 के पद को 100 प्रतिशत सहायक ग्रेड-2 के कर्मचारियों की पदोन्नति से भरने का निर्णय लिया गया।
  •  राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण मिशन (नेशनल मिशन ऑन फुड प्रोसेसिंग) योजनाओं को कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य प्रसंस्करण मिशन के नाम से सम्मिलित करने और संचालित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। राज्य शासन द्वारा खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक नई योजना (खाद्य प्रसंस्करण योजना) तैयार की गई है। चूंकि खाद्य प्रसंस्करण की योजना कृषि , उद्यानिकी और दुग्ध प्रसंस्करण से सीधे जुड़ी हुई योजना है। अतः इसका सीधा लाभ किसानों और उद्यमियों को मिलेगा और रोजगार और स्व-रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित होंगे।    इसमें चार योजनाओं को राज्य शासन द्वारा क्रियान्वित करने का निर्णय लिया गया । इनमें 1. खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के तकनीकी उन्नयन, स्थापना और आधुनिकीकरण के लिए पूंजी लागत अनुदान 25 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम 50 लाख रूपए दिया जाएगा। 2. कोल्ड चेन, मूल्य संवर्द्धन एवं संरक्षण, अधोसंरचना विकास (उद्यानिकी एवं गैर उद्यानिकी क्षेत्र) हेतु पूंजी लागत अनुदान 35 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम 5 करोड़ एवं ब्याज अनुदान छह वर्ष तक अधिकतम 2 करोड़ रूपए दिया जाएगा। 3. ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक प्रसंस्करण केन्द्र/संग्रहण केन्द्रों की स्थापना के लिए पूंजी लागत अनुदान 50 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम 2 करोड़ 50 लाख रूपए दिया जाएगा। 4. रीफर वाहन योजना के तहत पूंजी लागत अनुदान 50 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम 50 लाख रूपए होगा।क्रमांक-3790/ स्वराज्य


मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक
सूखा प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने कई अहम फैसले
सात और तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित
सभी 117 सूखा प्रभावित तहसीलों में आरबीसी 6-4 के तहत मुआवजा वितरण अगले माह से करने का निर्णय
किसानों को अतिरिक्त 1500 यूनिट बिजली की सौगात
भारत माता वाहिनी योजना का क्रियान्वयन आबकारी विभाग के माध्यम से होगा
छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि अधिनियम में किया जाएगा संशोधन
खनिज विकास निधि की राशि का उपयोग रेल और सड़क अधोसंरचना विकास में किया जाएगा

रायपुर, 24 नवम्बर 2015

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के सूखा पीड़ित किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के बाद राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने 50 प्रतिशत से कम आनावारी वाले सात और तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया है। इनमें जिला सूरजपुर के अंतर्गत तहसील प्रेमनगर, ओड़गी और भैयाथान, जिला जशपुर के अंतर्गत जशपुर और बगीचा, जिला दुर्ग में धमधा और जिला बस्तर में बास्तानार तहसील शामिल हैं। इन्हें मिलाकर राज्य के 26 जिलों की कुल 117 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है।
मंत्रिपरिषद ने सूखा प्रभावित तहसीलों के किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के प्रावधानों के तहत मुआवजा वितरण अगले माह से शुरू करने का निर्णय लिया। राजस्व मंत्री ने बताया कि इसके लिए सभी संबंधित जिला कलेक्टरों को आवश्यक रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजने के निर्देश दिए गए। मंत्रिपरिषद ने सूखा प्रभावित किसानों के व्यापक हित में उन्हें 1500 यूनिट अतिरिक्त बिजली निःशुल्क देने का भी निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि कृषक जीवन ज्योति योजना के तहत कृषक जीवन ज्योति योजना में स्थायी एवं अस्थायी, 3 एचपी तक के पंपों पर 6000 हजार यूनिट तथा 3 से अधिक एवं 5 एचपी तक के स्थायी एवं अस्थायी पंपों पर 7500 हजार यूनिट निःशुल्क विद्युत की सुविधा दी जा रही है। मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए कृषक जीवन ज्योति योजना के अन्तर्गत किसानों को दी जा रही निःशुल्क विद्युत की वर्तमान सीमा के अतिरिक्त 1500 यूनिट की छूट दिए जाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रकार प्रभावित किसानों को इस वर्ष कुल नौ हजार यूनिट बिजली निःशुल्क मिलेगी। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2015-16 में कुल रूपए 1866 करोड़ का अनुदान राज्य शासन द्वारा दिया जाएगा, जिसमें 1500 यूनिट के लिए अनुदान की राशि 208 करोड़ रूपए शामिल है। योजना के अंतर्गत अधिकतम 5 एचपी तक के पंप कनेक्शन हेतु प्रत्येक परिवार के एक पंप पर निःशुल्क विद्युत की पात्रता रखी गयी है। वर्तमान में तीन लाख 92 हजार 525 किसानों के सिंचाई पम्पों को निःशुल्क विद्युत की सुविधा दी जा रही है, जिसमें 44 हजार पम्प कनेक्शन अस्थायी है। राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों को अगले साल खरीफ के दौरान बोनी के लिए एक क्विंटल तक धान बीज निःशुल्क देने का भी निर्णय लिया है।
श्री पाण्डेय ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज की केबिनेट बैठक में लिए गए एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार खनिज निधि की राशि का उपयोग राज्य में रेल और सड़क जैसी अधोसंरचनाओं के विकास के लिए किया जाएगा। यह राशि लगभग 600 करोड़ रूपए की होती है। भारत माता वाहिनी योजना का क्रियान्वयन आबकारी विभाग के माध्यम से करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982 में संशोधन का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत संगठित क्षेत्र के ऐसे समस्त कारखानों में जहां 9 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, उनका पंजीयन हर साल माह जून और माह दिसम्बर में किया जाएगा, ताकि उन्हें श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से संचालित योजनाओं का लाभ दिलाया जा सके। मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश में महानिदेशक स्तर का 01 असंवर्गीय पद एक वर्ष की अवधि के लिए निर्मित करने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में पुलिस महानिदेशक का संवर्गीय पद 01 तथा असंवर्गीय पद 02 स्वीकृत है। एक और पद स्वीकृत हो जाने के बाद अब पुलिस महानिदेशकों के असंवर्गीय पदों की संख्या 03 हो जाएगी।

क्रमांक-4101/स्वराज्य
 

मंत्रिपरिषद के निर्णय

रायपुर, 13 दिसम्बर 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज रविवार को यहां उनके निवास कार्यालय में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो इसक प्रकार हैं - 
(1) प्रदेश में जिला पंचायतों के परिसीमन होने से अब जिला पंचायतों की संख्या 18 से बढ़कर 27 हो गई है। जिससे जिला पंचायतों के क्षेत्र के आकार छोटे हो गए हैं। अधिकांश जिला पंचायतों में 10 से 15 सदस्य हैं। छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 47 की उपधारा (4) के तहत स्थायी समितियों में कम से कम 5 सदस्य होने चाहिए। वर्तमान में कई जिला पंचायतों में सदस्यों की संख्या कम होने से स्थायी समितियों के गठन में दिक्कतें आ रही हैं। इसलिए स्थायी समितियों में 5 के स्थान पर 3 सदस्य करने का प्रस्ताव है। केबिनेट ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 47 की उपधारा (4) में आवश्यक संशोधन करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को अधिकृत किया है। 
(2) छत्तीसगढ़ फिजियोथेरेपी एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपी परिषद विधेयक 2015 को मंत्रिपरिषद की बैठक में विधानसभा के आगामी सत्र में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया। यह परिषद फिजियोथेरेपी एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट का पंजीयन करेगी तथा संस्थाओं की गुणवत्ता एवं मापदण्ड का निर्धारण करेगी। राज्य में फिजियोथेरेपिस्ट पंजीयन के उपरांत ही व्यवसाय कर सकंेगे। परिषद के पदेन अध्यक्ष संचालक चिकित्सा शि़क्षा तथा 06 अन्य सदस्य होंगे। विधेयक में बिना पंजीयन के व्यवसाय करने वाले फिजियोथेरेपिस्ट के लिए नियमानुसार एक लाख रूपए दण्ड का प्रावधान किया गया है तथा अनुवर्ती अपराध हेतु एक वर्ष तक के कारावास दण्ड का प्रावधान है। 
(3) मंत्रिपरिषद द्वारा रेंज पुलिस स्थापना बोर्ड के गठन का निर्णय लिया गया। इसमें संबंधित रेंज के पुलिस महानिरीक्षक इसके सभापति तथा उस रेंज के दो जिलों के पुलिस अधीक्षक इसके सदस्य होंगे। बोर्ड को निरीक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारियों का रेंज के अन्तर्गत स्थानातंरण और पदस्थापना का अधिकार होगा।
(4)     छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982 संगठित क्षेंत्र अर्थात् कारखानों तथा उन स्थापनाओं पर प्रभावशील है जहां 9 से अधिक कर्मचारी कार्यरत होते है । इस अधिनियम के अंतर्गत संगठित क्षेत्र के श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण के लिए छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मण्डल का गठन किया गया है । मण्डल द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती है । मण्डल योजनाओं का क्रियान्वयन कर्मचारियों एवं नियोजकों से प्राप्त अभिदाय तथा शासन द्वारा प्राप्त अनुदान की निधि से करता है । 
    राज्य में संगठित क्षेत्र के अंतर्गत 5 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं इन कर्मचारियों के पंजीयन के संबंध में इस अधिनियम में वर्तमान में कोई प्रावधान नहीं है जिसके कारण समस्त कर्मचारियों को युक्तियुक्त ढंग से योजना के अंतर्गत हित लाभ प्राप्त नही हो पाता । अतः संगठित क्षेत्र के समस्त कर्मचारियों को पंजीकृत करने प्रावधान रखे जाने हेतु छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक 2015 लाने का निर्णय लिया गया है । 
(5) मंत्रिपरिषद द्वारा पंचायतों तथा नगरीय निकायों को राज्य की समेकित निधि से दिए जाने वाले राजस्व के अंश की अनुशंसा करने वाले राज्य वित्त आयोग को बहुसदस्यीय बनाने हेतु विधानसभा के आगामी सत्र में संशोधन विधेयक लाने का निर्णय लिया गया है। राज्य वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 243 (झ) के अन्तर्गत पंचायतों एवं नगरीय निकायों को सौंपे गए कार्यों के लिए राज्य के राजस्व का क्या हिस्सा दिया जाए, इस संबंध में अनुशंसाएं करता है। इसका गठन हर पांच वर्ष में किया जाता है। वर्तमान में छत्तीसढ़ राज्य वित्त आयोग अधिनियम 1994 में आयोग हेतु एक अध्यक्ष व एक सदस्य का प्रावधान है। द्वितीय राज्य वित्त आयोग द्वारा आयोग के कार्यभार और विशेषज्ञता को देखते हुए अगले राज्य वित्त आयोग को बहुसदस्यीय बनाने की अनुशंसा की गई थी, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार किया था । इसी अनुक्रम में आज मंत्रिपरिषद द्वारा आगामी विधानसभा सत्र में आयोग की संरचना को एक अध्यक्ष और दो सदस्य बनाने के लिए विधेयक प्रस्तुत करने का निर्णय लिया गया है।

क्रमांक-4418/कुशराम

 

मंत्रि-परिषद के फैसले : नए सरकारी और अर्धशासकीय भवनों में रूफ-टॉप सोलर पावर प्लांट अनिवार्य : किसानों के लिए अल्पकालीन कृषि ऋण राहत योजना 2015 का अनुमोदन: लगान और सिंचाई टैक्स माफ

आई.टी. उद्योगों के लिए नवाचार एवं
उद्यमिता विकास नीति भी अनुमोदित

सरकारी नौकरियों में स्थानीय निवासियों को
आयु सीमा में मिलेगी पांच वर्ष की छूट

रायपुर, 29 दिसम्बर 2015

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज रात यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में अनेक निर्णय लिए गए । बैठक के बाद पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चंद्राकर ने केबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि शासकीय, अर्ध-शासकीय एवं संस्थागत निकायों के नवीन भवनों पर रूफ टॉप सोलर पॉवर प्लॉंट की स्थापना को अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय 1 जनवरी 2016 के बाद से लागू होगा। राज्य के विभिन्न भवनों पर 10 से 50 किलोवॉट क्षमता के पावर प्लांट स्थापित किये जायेंगे। इस निर्णय से पूरे राज्य में लगभग 200 मेगावॉट क्षमता के सोलर पावर प्लॉंट स्थापित होने की संभावना है, जो राज्य की विद्युत की कुल मांग का 5 प्रतिशत से अधिक है, अर्थात विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा क्रय की जा रही मंहगी बिजली की बचत होगी जो उपभोक्ता की बिजली की दरों को प्रतिस्पर्धा में कम रखने में सहायक होगी तथा राज्य की पर्यावरण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह एक दूरगामी कदम है।
श्री चंद्राकर ने बताया कि देश में ऊर्जा की मांग और आपूर्ति में 12 प्रतिशत का अंतर है। देश में कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता का केवल 7.7 प्रतिशत उत्पादन वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों से हो रहा है। हमारी उत्पादन क्षमता का 60 प्रतिशत से अधिक उत्पादन कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से होता है। देश में उपलब्ध कोयले में राखड़ का प्रतिशत 40 से 45 प्रतिशत होने के कारण इन ताप बिजली संयंत्रों के संचालन से पर्यावरण पर भी विपरित प्रभाव पड़ता है। भारत में सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की संभावना बहुत अधिक है। देश में लगभग 300 दिनों से ज्यादा समय तक अच्छी धूप रहती है। छत्तीसगढ़ के मामले में सौर ऊर्जा की उपलब्धता 340 दिन से अधिक है। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि ऐसी स्थिति में राज्य में रूफ-टॉप सोलर प्लांट स्थापित कर बिजली की खपत को नियंत्रित करने और बिजली के मद में उपभोक्ताओं के व्यय को कम करने में भी सफलता मिल सकती है।
श्री चंद्राकर ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने आज की बैठक में राज्य के सूखा प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए अल्पकालीन कृषि ऋण राहत योजना 2015 का अनुमोदन किया । विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा सूखा प्रभावित किसानों के लिए अल्पकालीन कृषि ऋण में राहत दिए जाने की घोषणा की गयी थी, जिसके अन्तर्गत राज्य के सभी सूखा प्रभावित किसानों को खरीफ 2015 के अल्पकालीन कृषि ऋण को ब्याज रहित मध्यकालीन ऋण में परिवर्तन अथवा आंशिक ऋण माफी के विकल्प दिए जाएंगे। इस योजना के अनुसार 37 पैसे आनावारी तक सूखा प्रभावित गांवों में ऋण परिवर्तन पर 30 प्रतिशत, 50 प्रतिशत एवं 20 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज रहित किश्तों में वर्ष 2017-18 तक भुगतान किया जा सकेगा। शेष ग्रामों में दो बराबर किश्तों में ऋण भुगतान की सुविधा होगी। विकल्प में 75 प्रतिशत ऋण जमा करने की दशा में 25 प्रतिशत ऋण माफ किया जाएगा। श्री चंद्राकर ने बताया कि मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सूखा प्रभावित 117 तहसीलों के किसानों को सुविधा और आर्थिक सहयोग प्रदान करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 के कृषि भूमि पर अधिरोपित भू-राजस्व (लगान) को माफ करने की माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा का अनुमोदन किया गया। सूखा प्रभावित 117 तहसीलों में किसानों के सिंचाई टैक्स को माफ करने की माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा का भी अनुमोदन किया गया ।
आई.टी. उद्योगों के लिए नवाचार एवं
उद्यमिता विकास नीति भी अनुमोदित

श्री चंद्राकर ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने आज की बैठक में छत्तीसगढ़ की नवाचार एवं उद्यमिता विकास नीति का अनुमोदन किया। सूचना प्रौद्योगिकी (आई. टी.) आधारित, युवा केन्द्रित उद्योगों को राज्य में बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य है। श्री चंद्राकर ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की यह नीति  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’स्टार्ट-अप इंण्डिया-स्टैण्ड-अप इण्डिया’ के विजन के अनुरूप होगी। इससे मेक-इन-छत्तीसगढ़ और स्टार्ट-अप छत्तीसगढ़ को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके तहत ऐसे लघु, मध्यम और सूक्ष्म आईटी उद्यमी लाभान्वित होंगे जो छत्तीसगढ़ में अपना उद्यम स्थापित करेंगे। इससे छत्तीसगढ़ के युवाओं को आईटी आधारित उद्योगों में रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। अनुमोदित नीति के तहत 100 करोड़ की राशि का वेंचर केपिटल फण्ड स्थापित किया जाएगा, जिसे छत्तीसगढ़ में नये स्थापित होने वाले आईटी उद्योगों में निवेश किया जाएगा। इस नीति के तहत राज्य में अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लगभग 32 करोड़ रूपए की लागत से कोर इनक्यूबेटर-सह एक्सीलरेटर की स्थापना की जाएगी, जहां स्टार्ट-अप-इनक्यूबेट किए जाएंगे। इससे प्रदेश के उद्यमियों को राज्य में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सूचना-प्रौद्योगिकी सेवाएं प्राप्त होंगी। अनुमोदित नीति के तहत नए स्थापित होने वाले आई.टी. आधारित उद्योेगों के उद्यमियों को हैण्ड होल्डिंग, मेंटरशिप प्रशिक्षण दिलाया जाएगा और वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।
स्थानीय बेरोजगारों को सरकारी नौकरियों
के लिए आयु सीमा में पांच साल की छूट

श्री चंद्राकर ने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आज की बैठक में मंत्रिपरिषद ने राज्य शासन के विभागों में सीधी भर्ती के पदों के लिए स्थानीय निवासियों को 35 वर्ष की अधिकतम निर्धारित आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट देने का भी निर्णय लिया। राज्य शासन की सेवाओं में सीधी भर्ती की पदो ंके लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष और स्थानीय निवासियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित है। राज्य सरकार द्वारा शिक्षित बेरोजगारों के हित में वर्ष 2013 में स्थानीय निवासियों को विभागों में की जाने वाली सीधी भर्ती में अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष में पांच वर्ष की छूट केवल एक बार के लिए प्रदान की गई थी। यह छूट कैलेण्डर वर्ष 2014 में समाप्त हो जाने के कारण शिक्षित बेरोजगारों के हित में कैलेण्डर वर्ष 2016 की समाप्ति तक प्रदान करने का निर्णय आज की बैठक में लिया गया। श्री चंद्राकर ने बताया कि विशेष वर्गों को अधिकतम आयु सीमा में प्राप्त हो रही छूट यथावत रहेगी, लेकिन सभी छूटों को मिलाकर अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष से अधिक नहीं होगी। यह छूट गृह (पुलिस) विभाग में सीधी भर्ती के पदों पर की जाने वाली भर्तियों के लिए लागू नहीं होगी।


क्रमांक-4648/स्वराज्य