मंत्रिपरिषद के निर्णय- 2017

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में केबिनेट की बैठक

शिक्षित बेरोजगारों के हित में बड़ा फैसला-सीधी भर्ती के पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा में वर्ष 2017 तक पांच वर्ष की छूट, विशेष वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष इस कैलेण्डर वर्ष तक जारी रहेगी

रेखीय परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण पर मुआवजे के 50 प्रतिशत के बराबर या अधिकतम पांच लाख रूपए का पुनर्वास अनुदान मिलेगा: निर्णय का लाभ जनवरी 2014 से मिलेगा

रायपुर, 03 जनवरी 2017 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में नये कैलेण्डर वर्ष 2017 की पहली केबिनेट की बैठक हुई। बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। स्थानीय शिक्षित बेरोजगारों, राईस मिलरों, सड़क, रेल मार्ग, नहर आदि से प्रभावित भू-विस्थापितों के व्यापक हित में कई बड़े फैसले किए गए।

  • छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षित बेरोजगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य के स्थानीय निवासियों को सीधी भर्ती के पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष में 5 वर्ष की छूट और अन्य विशेष वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा में देय सभी छूटों को मिलाकर उनके लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष की अवधि को कैलेण्डर वर्ष 2017 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

उल्लेखनीय कि राज्य शासन द्वारा स्थानीय निवासियों को अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष में दी गई पांच वर्ष की छूट कैलेण्डर वर्ष 2016 की समाप्ति तक दी गई थी, जिसकी अवधि 31 दिसम्बर 2016 को समाप्त हो गई थी। इसी तरह वर्ष विशेष वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा में 17 दिसम्बर 2014 को दी गई सभी छूटों को मिलाकर उनके लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई थी, इसकी अवधि को कैलेण्डर वर्ष 2017 तक बढ़ाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।

  • पुनर्गठित रायपुर और दुर्ग संभाग के जिलों में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण के प्रतिशत को संशोधित करने का निर्णय लिया गया। फरवरी 2013 में रायपुर संभाग का पुनर्गठन करने के बाद दुर्ग संभाग का गठन हुआ। संभागों के पुनर्गठन के फलस्वरूप वर्तमान रायपुर संभाग और दुर्ग संभाग में वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर संभागों और उनके अन्तर्गत शामिल जिलों के लिए आरक्षण का प्रतिशत संशोधित करने की आवश्यकता को देखते हुए निम्नानुसार निर्णय लिया गया:-

रायपुर संभाग में प्रचलित आरक्षण का प्रतिशत

प्रस्तावित आरक्षण का प्रतिशत

अनुसूचित जाति का 13 प्रतिशत

अनुसूचित जाति का 14 प्रतिशत

अनुसूचित जनजाति का 17 प्रतिशत

अनुसूचित जनजाति का 17 प्रतिशत

अन्य पिछड़ा वर्ग का 14 प्रतिशत

अन्य पिछड़ा वर्ग का 14 प्रतिशत

दुर्ग संभाग में प्रचलित आरक्षण प्रतिशत

वर्तमान में लागू नहीं

अनुसूचित जाति का 12 प्रतिशत

 

अनुसूचित जनजाति का 17 प्रतिशत

 

अन्य पिछड़ा वर्ग का 14 प्रतिशत

बलौदाबाजार जिले में प्रचलित आरक्षण प्रतिशत

अनुसूचित जाति का 10 प्रतिशत

अनुसूचित जाति का 21 प्रतिशत

अनुसूचित जनजाति का 37 प्रतिशत

अनुसूचित जनजाति का 13 प्रतिशत

अन्य पिछड़ा वर्ग का 14 प्रतिशत

अन्य पिछड़ा वर्ग का 14 प्रतिशत

  • रेखीय परियोजनाओं (सड़क, रेल मार्ग, नहर आदि) के लिए भूअर्जन से प्रभावित प्रत्येक खातेदार को भूमि के मुआवजे के अतिरिक्त पुनर्वास अनुदान के रूप में इतनी राशि दी जाएगी, जो भूमि के मुआवजे के 50 प्रतिशत के बराबर अथवा अधिकतम 5 लाख रूपए होगी। यह निर्णय भूतलक्षीय प्रभाव से एक जनवरी 2014 से लागू करने का निर्णय लिया गया।
  • मिलर द्वारा दो माह की मिलिंग क्षमता से कम धान की अरवा मिलिंग कर सम्पूर्ण चावल जमा करने पर उसे कोई प्रोत्साहन राशि देय नहीं होगी, केवल भारत सरकार द्वारा निर्धारित कस्टम मिलिंग दर दी जाएगी, लेकिन विशेष परिस्थितियों में (जैसे धान उपार्जन एंजेसी द्वारा मिलिंग के लिए धान उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में ,इत्यादि) प्रबंध संचालक मार्कफेड द्वारा प्रकरण का पूर्ण परीक्षण किया जाएगा और गुण-दोषों के आधार पर मिलर के द्वारा मिलिंग की गई उपरोक्त धान की मात्रा पर दो महीने की मिलिंग क्षमता के बराबर धान मिलिंग करने पर निर्धारित प्रोत्साहन राशि दी जा सकेगी।
  • खरीफ विपणन वर्ष 2016-17 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग के लिए अनुमोदित नीति में संशोधन करने का निर्णय लिया गया । इसके अनुसार मिलर द्वारा अपने राईस मिल की दो महीने की कस्टम मिलिंग क्षमता के बराबर धान की मिलिंग कर सम्पूर्ण चावल जमा करने पर उसे अरवा कस्टम मिलिंग के लिए 30 रूपए प्रति क्विंटल की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

बारदाना व्यवस्था -खरीफ विपणन वर्ष 2016-17 में मिलरों के पास शेष एक भर्ती बारदानों को मिलरों की अभिरक्षा में रखी धान उपार्जन एजेंसी (मार्कफेड) की परिसम्पति मानी जाएगी और उनका उपयोग अगले खरीफ विपणन वर्ष में धान खरीदी के लिए किया जाएगा। मिलरों के पास शेष ऐसे एक भर्ती बारदानों की कटौती की दर बारदानों की मूल कीमत 62 प्रतिशत के मान से सुरक्षा निधि के रूप में मार्कफेड द्वारा रखी जाएगी, इसमें से मिलर द्वारा 50 प्रतिशत राशि बैंक गारंटी के रूप में और 50 प्रतिशत की राशि मिलर को देय भुगतान से कटौती कर रखी जाएगी।

  • जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बिलासपुर को 10 करोड़ रूपए का सॉफ्ट लोन छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) रायपुर से लेने के लिए राज्य शासन द्वारा दी गई शासकीय प्रत्याभूति का कार्योत्तर अनुमोदन किया गया और देय 5 प्रतिशत प्रत्याभूति शुल्क की छूट देने का भी निर्णय लिया गया।

क्रमांक-4794/स्वराज्य

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद
की बैठक: कई महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर 24 जनवरी 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो इस प्रकार हैं:-

  • छत्तीसगढ़ आबकारी (संशोधन) अध्यादेश 2017 का अनुमोदन किया गया। मंत्रिपरिषद के  अनुमोदन के पश्चात यह अध्यादेश अनुमोदन के लिए माननीय राज्यपाल को भेजा जाएगा। 
  • अध्यादेश के अनुसार देशी तथा विदेशी मदिरा दुकानों के राजस्व को सुरक्षित रखने तथा राज्य की जनता के स्वास्थ्य हित की दृष्टि से देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर विक्रय का अधिकार सार्वजनिक उपक्रम को दिया जाएगा।  इसके लिए राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व वाली नवीन सार्वजनिक उपक्रम बनाया जाएगा। 
  •  इस पर अमल के लिए छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 18 (क) में संशोधन हेतु अध्यादेश लाने का निर्णय लिया गया।
  • बस्तर और सरगुजा संभागों के सभी जिलों के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती में उसी जिले के स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने का प्रावधान 17 जनवरी 2012 से लागू किया गया था। इसकी अवधि समय-समय पर बढ़ायी गई थी। वर्तमान में अवधि 16 जनवरी 2017 को समाप्त हो गई है, जिसे 17 जनवरी 2017 से 31 दिसम्बर 2018 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया। गौरतलब है कि वर्तमान में इन प्रावधानों से दोनों संभागों में 10 हजार 526 आदिवासी युवाओं को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति मिली है। 
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आवश्यकता के अनुसार दो माह का राशन एक साथ वितरित करने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। राशन कार्डधारक एक साथ दो माह का राशन एक साथ ले सकेंगे। राज्य शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। प्रत्येक राशन दुकान में चावल महोत्सव का आयोजन कर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने राशन का वितरण किया जाएगा। पीडीएस में दो माह के चावल का आबंटन 3 लाख 48 हजार टन होगा, जिसे एक मुश्त प्रदाय करने पर आपूर्ति निगम के गोदामों में पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध होगा। 
  • पंजीकृत किसान जो अपना धान 31 जनवरी की मध्य रात्रि के पूर्व समितियों के उपार्जन केन्द्रों में लाएंगे, उनका धान अवश्य खरीदा जाएगा।क्रमांक-5183/कुशराम

 

केबिनेट के निर्णय (दिनांक 15.2.2017)

रायपुर 15 फरवरी 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक के बाद वाणिज्यिक-कर और उद्योग मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने केबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। मंत्रिपरिषद में लिए गए फैसले इस प्रकार हैं:-
कोचियों पर लगेगा प्रभावी अंकुश

  •     नई आबकारी नीति का अनुमोदन किया गया। इस नीति से कोचियों के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगेगा। राज्य शासन द्वारा आबकारी सचिव की अध्यक्षता 11 सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। समिति में शासन, समाजसेवी संस्थाओं और आम जनता के प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे। समिति देश के पूर्ण शराब बंदी वाले तीन राज्यों का दौरा करेगी। इसके अलावा तीन ऐसे राज्यों का भी दौरा समिति द्वारा किया जाएगा, जहां शराब का विक्रय सरकारी नियंत्रण में होता है। समिति तीन माह में अपनी रिर्पोट राज्य सरकार को देगी। भारत माता वाहनियों को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा।

सहकारी शक्कर कारखानों को मिलेगा शक्कर का बेहतर मूल्य

  •     सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों के लिए नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा निविदा आमंत्रित कर खुले बाजार से शक्कर खरीदी जाएगी। खुली निविदा में राज्य के सहकारी शक्कर कारखानों को भी शामिल होने की स्वतंत्रता रहेगी। इस निर्णय से प्रदेश के सहकारी शक्कर कारखानों को खुले बाजार में प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। इसके फलस्वरूप सहकारी शक्कर कारखानांे को सुदृढ़ बनाया जा सकेगा। खुली निविदा से शक्कर खरीदी की व्यवस्था होने तक पीडीएस के लिए आगामी तीन माह के शक्कर की आपूर्ति राज्य के सहकारी शक्कर कारखानों द्वारा की जाएगी।


मानव अंगों के अवैध कारोबार में लगे व्यक्तियों के लिए बुरी खबर

  •    केन्द्र के मानव अंग प्रतिरोपण (संशोधन) अधिनियम 2011 का अनुमोदन। मुख्यबिन्दु इस प्रकार है:-

1. पूर्व अधिनियम में दाता और ग्राहिता याने डोनर और रिसिपियेंट के बीच निकट संबंध होना अनिवार्य था, लेकिन मातृ पक्ष को शामिल नहीं किया गया था, अब निकट संबंधों में मातृ पक्ष को भी शामिल किया गया है। इससे दाता और ग्राहता का क्षेत्र विस्तृत हो गया है।

2. अंगों के अतिरिक्त उत्तकों को भी इस संशोधन के दायरे में लाया गया है।
3. इस चिकित्सकीय कार्य में गलत तरीके से अथवा व्यवसाय करने वालों के लिए उकसाने वालों के लिए भी दण्ड का प्रावधान किया गया है।
4. मूल अधिनियम की धारा 18 में जहां 5 वर्ष की सजा और 10 हजार के जुर्माने का प्रावधान था, उसे बढ़ाकर 10 वर्ष की सजा और 20 लाख रूपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
5. इस प्रकार मानव अंगों का प्रतिरोपण (संशोधन) अधिनियम 2011 में कुल 14 संशोधन किए गए हैं। विधानसभा में संकल्प पारित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में स्थापित होगा निजी क्षेत्र का पहला डाटा सेंटर

  •    सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) निवेश नीति 2014-2019 के तहत निवेशकों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का निर्णय। एक बड़ा डाटा सेंटर छत्तीसगढ़ में स्थापित किया जाएगा।  पाई डाटा सेंटर कम्पनी द्वारा  इस पर लगभग 200 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इसमें करीब 300 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। यह राज्य में निजी क्षेत्र का पहला डाटा सेंटर होगा।


अन्य विषय
 

  •     भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के निर्माण कार्यों के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र से ली गई 130 एकड़ जमीन के बदले अन्य जमीन देने के प्रस्ताव का  अनुमोदन किया गया।
  •     स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सम्मान निधि 15 हजार रूपए से बढ़ाकर 25 हजार रूपए की जाएगी।
  •     लोकतंत्र सेनानियों (मीसा बंदियों) के लिए भी सम्मान राशि 5 हजार से बढ़ाकर 8 हजार, 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार और 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रूपए किया जाएगा।
  •    राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग में डिप्टीकलेक्टरों के 78 नये पद स्वीकृत। अब इन पदों की संख्या 372 से बढ़कर 450 हो जाएगी।
  •     राज्य भविष्य निधि पर देय ब्याज दर 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक 8 प्रतिशत पर स्थिर रखा जाएगा।क्रमांक /5627/स्वराज्य

 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक

 राज्य कर्मचारियों को एक जनवरी 2016 से मिलेगा सातवां वेतनमान

जुलाई 2017 से सातवें वेतनमान का होगा नगद भुगतान
शासकीय सेवकों के लिए बनेगी छानबीन समितियां
रियल एस्टेट कारोबार में पारदर्शिता के लिए बनेगा नियामक प्राधिकरण

रायपुर 22 अप्रैल 2017

 मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक के बाद उद्योग और वाणिज्यिक -कर मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने मंत्रिपरिषद के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2016 से लागू करने का निर्णय लिया है। शासकीय कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के अनुसार नगद वेतन भुगतान जुलाई 2017 से किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार के लगभग दो लाख 60 हजार कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा और शासन पर 3500 करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक भार आएगा।
शासकीय सेवकों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए बनेगी छानबीन समितियां
उन्होंने बताया कि बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्य शासन द्वारा पचास वर्ष की आयु अथवा 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर शासकीय सेवकों के अभिलेखों की छानबीन और समीक्षा के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के 22 अगस्त 2000 के परिपत्र की कंडिका-2 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए निर्धारित मानदण्डों और प्रक्रिया में आंशिक संशोधन करने का निर्णय लिया गया। अगर समीक्षा और छानबीन में अनिवार्यऐसे शासकीय सेवकों की ईमानदारी और सनिष्ठा संदेह जनक मिलेगी तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त किया जा सकेगा। इस संबंध में शासकीय सेवक का सम्पूर्ण अभिलेख देखा जाएगा।(ब) शारीरिक क्षमता में कमी होने, शासकीय सेवक के वार्षिक प्रतिवेदन में सम्पूर्ण सेवा काल के अभिलेखों का समग्र मूल्यांकन ’अच्छा’ (ख) श्रेणी से कम होने पर भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकेगी।
इसके लिए छानबीन समिति का गठन किया जाएगा-राजप़ित्रत अधिकारियों के लिए प्रशासकीय विभाग के भारसाधक सचिव की अध्यक्षता में, विभागाध्यक्षों के लिए मुख्य सचिव अथवा उनके द्वारा नामांकित अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छानबीन समिति का गठन किया जाएगा। अराजपत्रित अधिकारियों के लिए विभागाध्यक्ष स्तर की छानबीन समिति गठित की जाएगी। यह समिति केवल विभागाध्यक्ष कार्यालय के शासकीय सेवकों के अभिलेखों की ही छानबीन करेगी, जहां विभागाध्यक्ष के अधिकार एक से अधिक अधिकारियों को हों, वहां पर वह विभागाध्यक्ष छानबीन समिति का अध्यक्ष होगा, जो समन्वय का कार्य करता है, जैसे प्रमुख अभियंता, प्रधान मुख्य वन संरक्षक आदि। यह समिति ऐसे अराजपत्रित कर्मचारियों के अभिलेखों की भी छानबीन का कार्य करेगी, जिनके गोपनीय प्रतिवेदन संबंधित विभागाध्यक्ष के स्तर पर रखे जाते हैं। विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया जाएगा। इसी तरह संभाग स्तर पर राजस्व कमिश्नर और  जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में छानबीन समिति होगी।
राज्य में बनेगा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण
प्राधिकरण के आदेशों की अवहेलना पर जेल का भी प्रावधान
मंत्रिपरिषद के बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्य में रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। यह आवासीय और कारोबारी दोनों तरह की परियोजनाओं में पैसों के लेन-देन पर नजर रखेगा। डेव्हलपर केवल वे ही प्रोजेक्ट बेच पाएंगे, जो पंजीकृृत हैं। इसके अन्तर्गत 500 वर्गमीटर या आठ अपार्टमेंट तक की निर्माण परियोजनाओं को छोड़कर सभी निर्माण परियोजनाओं को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकृत कराना होगा। डेव्हलपर की परियोजनाओं से संबंधित हर गतिविधि में पारदर्शिता रहेगी।
उल्लेखनीय है कि पहले खरीददार केवल उतना ही जान पाता था, जितना उसे बिल्डर द्वारा बताया जाता था, लेकिन अब नियामक प्राधिकरण बनने पर वेबसाइट के माध्यम से आवासीय प्रोजेक्ट से संबंधित सभी जरूरी और महत्वपूर्ण जानकारी खरीदार को मिल सकेगी। रियल एस्टेट परियोजना में बदलाव से पहले दो-तिहाई खरीददारों की मंजूरी आवश्यक होगी। आवासीय के साथ-साथ व्यावसायिक प्रापर्टी पर भी यह नियम लागू होंगे। प्राधिकरण द्वारा विवादों का निपटारा 60 दिनों के भीतर किया जाएगा। बिल्डर द्वारा ग्राहकों से ली जाने वाली 70 प्रतिशत धनराशि को अलग बैंक खाते में रखना होगा और उसका उपयोग केवल निर्माण कार्य में करना होगा। बिल्डर को परियोजना संबंधी समस्त जानकारी जैसे-प्रोजेक्ट के ले-आउट की स्वीकृति, ठेकेदार का नाम, परियोजना की मियाद, भवन सौंपने की समय-सीमा आदि की सटीक जानकारी खरीददार को अनिवार्य रूप से देनी होगी। पूर्व सूचित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा नहीं करने पर बिल्डर द्वारा उपभोक्ता को ब्याज का भुगतान करना होगा। यह उसी दर पर होगा, जिस दर पर बिल्डर द्वारा भुगतान में हुई चूक के लिए उपभोक्ता से ब्याज वसूला जाता है।
नये नियमों के अनुसार बिल्डर अपनी सम्पत्ति को ’सुपर बिल्टअप एरिया’ के स्थान पर कार्पेट एरिया के आधार पर फ्लैट विक्रय कर सकेगा। खरीददारों के हाथ में फ्लैट आने के तीन महीने के भीतर रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का गठन करना होगा, ताकि वे साझी सुविधाओं की देखभाल कर सकें। रियल एस्टेट विनायमक प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना करने पर बिल्डर के लिए तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान और रियल एस्टेट एजेंट और उपभोक्ता के लिए एक वर्ष की सजा का प्रावधान रखा गया है। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार द्वारा 26 मार्च 2016 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 प्रशासित किया गया है, जिसकी 92 में से 59 धाराएं एक मई 2016 से पूरे देश में लागू हो चुकी है। घरेलू खरीददारों के हितों की रक्षा और रियल एस्टेट में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने में मदद करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
योग आयोग का गठन किया जाएगा
मंत्रिपरिषद ने योग आयोग के गठन का भी निर्णय लिया। यह समाज कल्याण विभाग के अन्तर्गत होगा। राज्य के प्रत्येक नागरिक को स्वस्थ जीवन के लिए योग से परिचित कराना। योग शिक्षा के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली का विकास इसका उद््देश्य है। शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए ग्राम स्तर पर योगाभ्यास और प्रशिक्षण तथा योग संबंधी जागरूकता का समुचित प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
जीएसटी के लिए कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन
जीएसटी के लिए राज्य शासन के कार्य आबंटन नियम में संशोधन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एक जुलाई 2017 से पूरे देश में एक समान वस्तु एवं सेवाकर अधिनियम 2017 लागू किया जाएगा।  अतः वाणिज्यिक कर विभाग ने इस विषय को छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है, जिसका आज अनुमोदन किया गया। बैठक में छत्तीसगढ़ माल एवं सेवाकर विधेयक 2017 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
राज्य कर्मचारियों मिलने वाले सातवें वेतनमान के मुख्य बिन्दु
मंत्रिपरिषद में लिए गए निर्णय के अनुसार सातवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं के आधार पर लागू केन्द्रीय वेतनमान के अनुरूप राज्य कर्मचारियों को भी सातवां वेतनमान दिया जाएगा। यह एक जनवरी 2016 से लागू होगा और नये वेतन का नगद भुगतान जुलाई 2017 से किया जाएगा। इसके मुख्य बिन्दु इस प्रकार होंगे-वेतन बैंड तथा ग्रेड वेतन की वर्तमान प्रणाली के स्थान पर नया वेतन मैट्रिक्स लागू होगा। कर्मचारियों का वर्तमान श्रेणी वेतन मैट्रिक्स में निर्धारित लेवल के आधार पर तय होगा। कर्मचारियों के लिए लागू सभी वर्तमान 17 ग्रेडों को नये वेतन मैट्रिक्स मंें समाहित किया जाएगा। न्यूनतम वेतन वर्तमान में 6050 रूपए है, उसके स्थान पर यह 15600 होगा। वेतन पुनरीक्षण के लिए वर्तमान मूल वेतन के 2.57 गुणांक के आधार पर पुनरीक्षित मूल वेतन का निर्धारण वेतन मैट्रिक्स में निर्धारित स्तर पर किया जाएगा। वेतन वृद्धि की दर पूर्ववत तीन प्रतिशत रहेगी। जुलाई 2017 के वेतन से नगद भुगतान किया जाएगा और जनवरी 2016 से जून 2017 तक की बकाया राशि के भुगतान के संबंध में अलग से निर्णय लिया जाएगा। छत्तीसगढ़ पेंशनरों को भी राज्य पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों के तहत मध्यप्रदेश शासन की सहमति प्राप्त करने के बाद सातवें वेतन की अनुशंसा का लाभ दिया जाएगा। मकान किराया भत्ता और अन्य भत्ते के लिए अलग से निर्णय लिया जाएगा।क्रमांक- 398/स्वराज्य

 

मंत्रिपरिषद की बैठक: महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर, 23 मई 2017

    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो इस प्रकार हैः-


प्रदेश में 15 प्रजातियों की लकड़ियों को ट्रांजिट पास से छूट 

  •     छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम 2001 में संशोधन - मंत्रीपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ अभिवहन (वनोपज) नियम 2001 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत 15 विभिन्न प्रजातियों के लकड़ियों के परिवहन के लिए अभिवहन पास की जरूरत नही होगी। इनमें सिरिस, रिमझा, रबर, शंकुधारी प्रजातिया (पाईन प्रजातियों को छोड़कर), आस्ट्रेलियन बबूल, केसिया साइमिया, बकैन, ग्लेरिसीडिया, खमेर, कदम, सिस्सू, कपोक, महारूख और सिल्वर ओक शामिल है।इसके अलावा सात जिलों सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, धमतरी, कवर्धा और महासमंुद में बांस को भी अभिवहन पास (ट्रांजिट पास) से छूट दी जाएगी।

शक्कर की कीमतों में कोई वृद्धि नही

  •     भारत सरकार से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत शक्कर की प्राप्त सबसिडी को अन्त्योदय परिवारों से बढ़ाकर सभी राशन कार्डधारी परिवारों (58,24,676 परिवार) को एक किलोग्राम प्रतिमाह प्रति राशनकार्ड की देने का निर्णय लिया गया।

प्रदेश की 3120 बसाहटों में दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

  •     राज्य की ऐसी 3120 बसाहटें जो वर्तमान में विद्युतिकरण हेतु संचालित केन्द्र सरकार एवं राज्य शासन की योजनाओं में शामिल नही है, उनमें दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के मापदण्डो के अनुसार विद्युतीकरण का निर्णय लिया गया। इस पर लगभग 190 करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे।

सामान्य भविष्य निधि पर ब्याज दर का निर्धारण

  •     राज्य भविष्य निधि पर देय ब्याज दर का निर्धारण- मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य की सामान्य भविष्य निधि तथा अंशदायी भविष्य निधि पर 1.04.2017 से 30.06.2017 तक की अवधि के लिए ब्याज दर 7.9 प्रतिशत रखने का निर्णय लिया गया।

माननीय मंत्रियों और संसदीय सचिवों के स्वेच्छा अनुदान की राशि में वृद्धि - माननीय मंत्रियों की स्वेच्छा अनुदान राशि एक करोड़ रूपए से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रूपए, राज्य मंत्रियों की स्वेच्छा अनुदान राशि 80 लाख रूपए से बढ़ाकर एक करोड़ और संसदीय सचिवों की स्वेच्छा अनुदान राशि 50 लाख से बढाकर 70 लाख रूपए करने का निर्णय लिया गया। 


तीन राजस्व संभागों के आदिवासी बहुल इलाकों में 
छत्तीसगढ़ निवासी विद्या मितानों की सेवाएं लेने का निर्णय

  •  लोक सुराज अभियान के दौरान जिलेवार समीक्षा के यह पाया गया कि स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत  रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के अधिसूचित अनुसूचित जनजाति के विकासखण्डों और इन संभागों के सामान्य विकासखण्डों के अधिसूचित माडा पाकेट क्षे़त्रों के हाईस्कूलों और हायर सेकेण्डरी स्कूलों के अंग्रेजी, गणित, वाणिज्य और विज्ञान समूह के व्यख्याताओं के 1882 पद रिक्त है जो कुल पदों का लगभग 40 प्रतिशत है। इन क्षेत्रों में स्थित विकासखण्डों और माडा पाकेट क्षेत्रों में अंग्रेजी, गणित, वाणिज्य और विज्ञान समूह के विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी को देखते हुए इन स्कूलों में भी बस्तर और सरगुजा संभागों की तर्ज पर प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से विद्या मितानों के रूप में छत्तीसगढ़ के निवासियों की सेवाएं प्राप्त करने निर्णय आज मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया। क्रमांक-864/स्वराज्य

ऊर्जा प्रभार में प्रति यूनिट 1.40 रूपए की छूट देने का निर्णय

रायपुर 23 मई 2017
 
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता मंे आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के उद्योगों को बड़ी राहत देने का निर्णय लिया गया। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस महत्वपूर्ण निर्णय के अनुसार पिछले वर्ष की तरह छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कम्पनी लिमिटेड से बिजली की सप्लाई प्राप्त करने वाले एचव्ही-4 संवर्ग के उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में एक रूपए 40 पैसे प्रति यूनिट की छूट 1 अप्रैल 2017 से 30 सितम्बर 2017 तक दी जाएगी। इस राहत पैकेज के तहत राज्य शासन द्वारा उद्योगों को लगभग 282 करोड़ रूपए की सबसिडी दी जाएगी। मंत्रिपरिषद ने आज की बैठक में 1 अप्रैल 2017 से 30 सितम्बर 2017 तक की अवधि में उद्योगों को विद्युत शुल्क में भी बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत मिनी स्टील प्लांट, स्टील उद्योग राईस/दाल मिल आदि को विद्युत शुल्क में 3 प्रतिशत की राहत मिलेगी। राज्य के स्टील उद्योगों द्वारा स्थापित केप्टिव पॉवर प्लांट के ऑक्जलरी खपत और उत्पादित बिजली के स्वयं की इकाईयों में उपयोग करने पर भी विद्युत शुल्क में बड़ी राहत दी गई है। इसके अलावा ऐसे बड़े स्टील उद्योग, जिनकी वार्षिक क्षमता 2 मिलियन टन से ज्यादा है और स्वयं के केप्टिव पॉवर प्लांट से उत्पादित बिजली का उपयोग कर रहे है, उन्हें भी 3 प्रतिशत की राहत दी गई है।क्रमांक-865/स्वराज्य
 
 
मंत्रिपरिषद की बैठक
 

रायपुर 20 जून 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

 

सौर ऊर्जा नीति 2017-2027 का अनुमोदन

  • सौर ऊर्जा नीति 2017-27 का अनुमोदन। राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के दोहन के लिए वर्ष 2002 में जारी नीति की वैधता 31 मार्च 2017 तक थी। विगत कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी बदलाव हुए हैं। लागत व्यय में कमी आयी है तथा अपरम्परागत स्रोत आधारित बिजली खरीदी की अनिवार्यता के लिए विनियमों में परिवर्तन हुआ है। इसे ध्यान में रखकर  आगामी दस वर्ष में इस क्षेत्र में निवेश की बहुत अधिक संभावनाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ में नई सौर ऊर्जा नीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है। आज केबिनेट में वर्ष 2017 से 2027 तक के लिए सौर ऊर्जा नीति का अनुमोदन किया गया। यह नीति जारी होने की तारीख होने से 31 मार्च 2027 तक प्रभावशील रहेगी। इस नीति के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:-

1.     कोई भी व्यक्ति, पंजीकृत व्यक्ति, केन्द्रीय और राज्य विद्युत उत्पादन और वितरण कम्पनियां, सार्वजनिक अथवा निजी क्षेत्र के सौर बिजली परियोजना विकासकर्ता  तथा इन परियोजनाओं से  संबंधित उपकरणों के निर्माणकर्ता और सहायक उद्योग इसके पात्र होंगे चाहे वे समय-समय पर यथा संशोधित विद्युत अधिनियम 2003 के अनुशरण में सौर ऊर्जा  परियोजनाओं  का संचालन केप्टिव उपयोग अथवा बिजली विक्रय के उद्देश्य से  कर रहे हैं।

2.     नई सौर ऊर्जा नीति (2017-27) के तहत 10 किलोवॉट तक के रूफ टॉप, सोलर पॉवर प्लांट को ग्रिड कनेक्टिविटी की सुविधा दी जाएगी।

3.      प्रत्येक सौर ऊर्जा विद्युत परियोजना द्वारा संयंत्र की स्वंय की खपत और राज्य के भीतर की गई केप्टिव खपत पर विद्युत शुल्क से भुगतान की छूट मिलेगी । यह छूट सौर ऊर्जा नीति के तहत मार्च 2027 तक स्थापित होने वाली परियोजनाओं को मिलेगी।

4.     छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा समय-समय पर अधिसूचित औद्योगिक नीति के तहत अपरम्परागत स्रोत आधारित बिजली संयंत्रों को प्राप्त होने वाली सुविधाओं की पात्रता होगी।

 

भण्डार क्रय नियम 2002 में संशोधन प्रस्ताव का अनुमोदन

  • छत्तीसगढ़ शासन भंडार क्रय नियम 2002 में संशोधन के लिए वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रस्ताव  का अनुमोदन किया गया। भारत सरकार के डीजी एस एण्ड डी द्वारा संचालित जेम (Government e-Market Place) का उपयोग छत्तीसगढ़ सरकार के विभागों  द्वारा करने के लिए यह संशोधन अनुमोदित किया गया। 

इलेक्ट्रॉनिक सामग्री खरीदी के लिए भण्डार क्रय नियम में संशोधन

  • शासकीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, मण्डलों, जिला और जनपद पंचायतों तथा नगरीय निकायों में इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ शासन भण्डार क्रय नियम 2002 में संशोधन हेतु वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। इसके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित सामग्री खरीदने के लिए संबंधित नीति, नियम एवं प्रक्रिया तथा आवश्यक होने पर दर निर्धारण का कार्य इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किया जाएगा। इसके लिए सामग्री की सूची का निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा भण्डार क्रय नियम के अनुसार किया जाएगा। क्रमांक-1219/स्वराज्य
 

मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर 11 जुलाई 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:-

स्थानांतरण नीति वर्ष 2017 का अनुमोदन

स्थानांतरण 11 जुलाई से 31 जुलाई 2017 तक होंगे। ऐसे शासकीय सेवक एक ही स्थान पर दो वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ हों, केवल उन्हीं के स्थानांतरण किए जाएंगे और सभी श्रेणियों के स्थानांतरण आदेश शासन स्तर पर प्रशासकीय विभाग द्वारा विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद ही जारी किए जाएंगे। एक अगस्त 2017 से स्थानांतरण पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा। स्थानांतरण आदेश जारी होने पर यदि किन्ही कारणों से आदेश को निरस्त या संशोधित करना जरूरी हो, तो ऐसे स्थानांतरण समन्वय में अनुमोदन के बाद ही निरस्त अथवा संशोधित किए जाएंगे। प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामले में उनके संवर्ग में कार्यरत अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 15 प्रतिशत, तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के मामले में 10 प्रतिशत और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामले में अधिकतम 05 प्रतिशत तक स्थानांतरण किए जा सकेंगे। 

कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति में मण्डी शुल्क छूट के 
प्रावधान को स्पष्ट करने हेतु संशोधन


वर्तमान में कृषि एवं खाद्य उत्पादन के प्रसंस्करण उद्योगों को राज्य की मंडियों से सर्वप्रथम कच्चा माल खरीदी की तारीख से 05 वर्ष तक के लिए कृषि उत्पादों पर लगने वाले मंडी शुल्क से पूर्ण छूट का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रसंस्करण इकाई द्वारा किए गए स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत के बराबर होती है। इसे संशोधित करते हुए यह निर्णय लिया गया कि कृषि एवं खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण उद्योगों को राज्य की मंडियों/ सीधे उत्पादनकर्ता किसान/इकाई/ राज्य के बाहर से सर्वप्रथम कच्चा माल खरीदने पर खरीदी दिनांक से 05 वर्ष तक के लिए कृषि उत्पादों पर लगने वाली मंडी शुल्क से पूर्ण छूट दी जाएगी। छूट की अधिकतम सीमा प्रसंस्करण इकाई द्वारा किए गए स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत के बराबर होगी। यह छूट शासन द्वारा अनुमोदित सूची के कृषि उत्पादों पर मिलेगी।

छग सिविल सेवा (आचरण)नियम 1965 में संशोधन


छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 22 के उप नियम (4) में यह प्रावधान है कि प्रत्येक शासकीय सेवक भारत सरकार तथा राज्य सरकार के परिवार कल्याण से संबंधित नीतियो का पालन करेगा। इसका आशय यह था कि इस उपनियम के प्रयोजन के लिए शासकीय सेवक के दो से अधिक बच्चे होने को अवचार माना जाएगा, यदि उनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद हो। बैठक में इस प्रावधान को विलोपित करने का निर्णय लिया गया।


जीएसटी के लिए केन्द्र सरकार के प्रति आभार प्रदर्शन

पूरे देश में केन्द्रीय मंत्रिपरिषद द्वारा माल और सेवा कर (जीएसटी) लागू की गई है। इसके लिए केन्द्रीय मंत्रिपरिषद की 22 जून 2017 की बैठक में संकल्प पारित गया था। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज की केबिनेट में इस संकल्प के लिए केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आभार प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जीएसटी स्वतंत्र भारत में सबसे बड़ा आर्थिक सुधार है। यह राष्ट्रीय एकता, आर्थिक संघवाद और संघीय लोकतंत्र का एक शानदार उदाहरण है । केन्द्र सरकार तथा सभी राज्य सरकारों और सभी राजनीतिक दलों के बीच परस्पर सहयोग से ही यह संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री ने कहा 22 जून 2017 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केन्द्रीय केबिनेट की बैठक में श्री मोदी ने जीएसटी में योगदान के लिए सभी राज्य सरकारों, सभी मुख्यमंत्रियों, सभी प्रदेश के वित्त मंत्रियों और राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त सभी राजनीतिक दलों, सभी ससंद सदस्यों और सभी राज्य विधानसभा के सदस्यों तथा उद्योग और व्यापार संगठनों और समाज के सभी वर्गों के प्रति आभार व्यक्त किया था, जिनके सहयोग से एक जुलाई 2017 से देश में यह लागू हुआ है। क्रमांक-1537/स्वराज्य


 

मंत्री परिषद की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर, 24 जुलाई 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्री परिषद  की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-
  • राज्य सामान्य भविष्य निधि और अंशदायी भविष्य निधि पर 01 जुलाई 2017 से 30 सितम्बर 2017 तक की अवधि के लिए ब्याज दर 7.8 (सात दशमलव आठ) प्रतिशत रखने का निर्णय लिया गया। वर्तमान में भारत सरकार ने भी इस अवधि के लिए सामान्य भविष्य निधि तथा अन्य निधियों के अभिदाताओं के लिए ब्याज दर कुल जमा रकम पर 7.8 प्रतिशत निर्धारित किया है। आज केबिनेट में निर्णय लिया गया कि भविष्य में भारत सरकार की अधिसूचना के अनुरूप ब्याज दर निर्धारित करने के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया जाए।
  • मंत्री परिषद ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा के अनुसार सुत सारथी-सईस/सहीस जातियों को पिछड़ा वर्ग की सूची के सरल क्रमांक 65 से विलोपित करने का निर्णय लिया , क्योंकि भारत सरकार द्वारा इन जातियों को छत्तीसगढ़ राज्य की अनुसूचित जाति की सूची के सरल क्रमांक 25 में शामिल कर लिया है। 
  • विधेयकों को मंजूरी -मंत्रि परिषद ने आज जिन विधेयकों का अनुमोदन किया, वे इस प्रकार हैं-
  1.  छत्तीसगढ़ निराश्रितों एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम 1970, यथा संशोधित 2010 में संशोधन।
  2. छत्तीसगढ़ नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2017
  3. छत्तीसगढ़ आबकारी (संशोधन) विधेयक 2017
  4. जीएसटी लागू होने के कारण छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर अधिनियम 2005 में संशोधन हेतु विधेयक।
  5. छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा शर्तों का विनियमन) विधेयक 2017।
  6.  छत्तीसगढ़ औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) विधेयक 2017।
  7. छत्तीसगढ़ श्रम विधियां (संशोधन) और प्रकीर्ण उपबंध विधेयक 2017।
  8.  प्रथम अनुपूरक अनुमान वर्ष 2017-18 का विधानसभा में उपस्थापन बाबत तथा छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक 2017 का अनुमोदन। क्रमांक-1747/स्वराज्य

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर 23 अगस्त 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो निम्नानुसार है:-

संचार क्रांति योजना (स्काई)

दो चरणों में 55 लाख से अधिक स्मार्ट फोन का वितरण

  • प्रदेश में शहरी एवं ग्रामीण छत्तीगसढ़ के मध्य की डिजिटल दूरी को समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा संचार क्रांति योजना शुरू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत दो चरणों में 55 लाख से अधिक स्मार्ट फोन का वितरण किया जायेगा।
  • प्रथम चरण में वर्ष 2017-18 एवं 2018-19 तक एक हजार से अधिक जनसंख्या वाले सभी ग्रामीण परिवारों, एक हजार से कम जनसंख्या वाले गाँव, जहाँ मोबाईल कवरेज पूर्ण/आंशिक रूप से उपलब्ध है, शहरी गरीब परिवारों एवं कॉलेज के युवाओं को 50.8 लाख स्मार्ट फोन का वितरण किया जायेगा।
  • दूसरे चरण में एक हजार से कम जनसंख्या वाले ग्रामों में, जहाँ मोबाईल कवरेज उपलब्ध नहीं है, 4.8 लाख परिवारों को स्मार्ट फोन का वितरण किया जायेगा। परिवार में महिला होने की स्थिति में महिला को ही मोबाईल वितरित करने का निर्णय राज्य शासन द्वारा लिया गया। साथ ही राज्य शासन ने यह निर्णय लिया है कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को स्वयं के खर्चे पर नेटवर्क विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। जिन हितग्राहियों को स्मार्ट फोन वितरित किए जाएंगे उनको फोन नंबर पूर्व से ही आबंटित होंगे। यह नंबर आधार एवं बैंक खाते से भी जुड़े होंगे। इससे सभी हितग्राही फोन निरंतर रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में हितग्राहियों का चयन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जायेगा। शहरी क्षेत्र के हितग्राहियों को चयन नगरीय प्रशासन विभाग और कॉलेज में युवाओं को चयन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया जायेगा। मोबाईल फोन का वितरण जिला कलेक्टर द्वारा राशन दुकान, पंचायत भवन अथवा अन्य सुविधाजनक निश्चित स्थान से किया जाएगा। योजना के अंतर्गत टॉवर लगाने के लिए शासकीय भवनों की छत निःशुल्क उपलब करायी जाएगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन भी किया जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि समाजिक, आर्थिक जाति जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ़ में मोबाईल फोन का घनत्व सबसे कम है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 29 प्रतिशत परिवारों के पास ही फोन है। जबकि देश का औसत 72 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ में कनेक्टीविटी कम होने का प्रमुख कारण 44 प्रतिशत वनक्षेत्र, जनसंख्या का कम घनत्व होना मुख्य है। इसे देखते हुए राज्य शासन ने मोबाईल डिवाईस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए संचार क्रांति योजना प्रारंभ की है। मोबाईल के प्रयोग से क्षेत्र में कृषि एवं अन्य व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा। स्वास्थ्य सुविधाओं, डॉयल 102, पीडीएस आदि का क्रियान्वयन और भी अधिक प्रभावशाली ढंग से किया जा सकेगा। साथ ही ई-गवर्नेंस सेवाओं की प्रदायगी ग्राम स्तर तक करने का सुविधा मिलेगा। इस योजना से पूरे राज्य में मोबाईल नेटवर्क स्थापित करने में सहायता मिलेगी ।

नया रायपुर स्मार्ट सिटी कॉरेपोरेशन लिमिटेड के गठन को मंजूरी

  • नया रायपुर को स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत विकसित किये जाने हेतु नया रायपुर स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड (एन.आर.एस.सी.सी.एल)का गठन किया गया है। भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप विशेष प्रयोजन यान (स्पेशल पर्पस व्हीकल) का गठन किया गया है। राज्य मंत्री परिषद द्वारा इसे आज मंजूरी प्रदान की गई है।
  • स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत बनने वाले इस एसपीव्ही के कार्याें की निगरानी आवास एवं पर्यावास द्वारा की जाएगी। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नया रायपुर 16 सौ 96 करोड़ रूपय के निर्माण एवं विकास कार्य किए जाएगे। नया रायपुर को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 500-500 करोड़ अनुदान दिया जाएगा तथा शेष राशि का प्रबंध एनआरडीए तथा निजी भागीदारी से किया जाएगा।
  • मिशन के तहत एरिया बेस्ड डेव्हलपमेंट तथा शहरी स्तर पर विभिन्न कार्य कराये जाएगे । इसके तहत इंटर मोडल ट्रांजिट हब, कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सिस्टम,एक्सपिरिएन्स सेन्टर , ट्रेड सेन्टर, अर्फोडेबल हाउसिंग, स्मार्ट रोड, बस स्टेैण्ड , सायकल स्टैण्ड , अरबन पार्क , हेल्थ एटीएम जैसे सार्वजनिक उपयोग तथा शहरी प्रबंधन को सुनियोजित करने वाले कार्य शामिल हंै। इसके साथ ही हरित शहर के लिहाज से संपूर्ण विकास कार्य किये जाएगे। पब्लिक यूटिलिटी के लिहाज से स्मार्ट वॉटर , एनर्जी , वेस्ट मैनेजमेंट जैसे कार्य शामिल होंगे। इसके तहत स्मार्ट मिटरिंग, रेन वॉटर हारवेस्टिंग, ई टॉयलेट, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले कार्य किये जायेगे । इसी प्रकार संपूर्व शहर को एक डिजिटल प्लेटफार्म में लाया जाएगा तथा नया रायपुर में शामिल गांव स्मार्ट गांव के तौर पर विकसित होंगे । इस प्रकार एरिया बेस्ड डेव्हलपमेंट के तहत 12 सौ 63 करोड़ रूपय तथा पैन सिटी डेव्हलपमेंट के तहत 415.7 करोड़ रूपय का व्यय किया जाएगा।
  • एसपीव्ही का गठन कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(45) के अंतर्गत शासकीय कंपनी के रूप में किया गया है। इसके तहत इसके संचालक मंडल में नया रायपुर डेव्हलपमेंट अथॉरिटी के संचालक मंडल के अध्यक्ष होंगे साथ ही एसपीव्ही के सीईओ इसके प्रबंध निदेशक होंगे तथा एनआरडीए के सीईओ, आवास पर्यावरण विभाग के प्रतिनिधि जिला कलेक्टर पुलिस अधीक्षक  तथा शहरी विकास मंत्रालय के प्रतिनिधि इसके निदेशक होंगे साथ ही एक स्वतंत्र निदेशक एवं  पांच विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे।

नया रायपुर में धार्मिक, अध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक प्रयोजन हेतु संस्थाओं को भू-खण्डों का रियायती दरों पर आबंटन

·       मंत्रिपरिषद की आज की बैठक में अक्षर धाम (स्वामी नारायण) 10 एकड़, इस्कॉन 10 एकड़, वेदमाता गायत्री ट्रस्ट 5 एकड़, मंदिर हेतु 1-1 एकड़, मस्जिद, चर्च, गुरूद्धारा हेतु 1-1 एकड़, इन संस्थाओं को धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक प्रयोजनों के आयोजन से नया रायपुर में बसाहट को प्रोत्साहन हेतु मंजूरी प्रदान की गई है।

·       इन संस्थाओं के आने से देश एवं विदेश के पर्यटक आकर्षित होंगे, जिससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

·       धार्मिक/आध्यात्मिक/सांस्कृतिक प्रयोजनों के लिए नियमानुसार आरक्षित प्रीमियम एवं भू-भाटक की राशि का 25 प्रतिशत भार एनआरडीए द्वारा वहन किया जाएगा, जिसकी प्रतिपूर्ति अन्य प्रयोजनों के लिए चिन्हित भूमि पर भारित किया जाएगा।

·       उपरोक्त प्रयोजनों के लिए 50 प्रतिशत प्रीमियम/भू-भाटक की राशि  राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी, जो शासन से एनआरडीए को प्रतिपूर्ति की जाएगी।

·       संबंधित संस्था को राज्य शासन के द्वारा निधार्रित शर्तो के अधीन निर्माण कार्य पूर्ण करना होगा।  

  • वल्र्ड रिनिवल स्प्रीच्यूअल ट्रस्ट (प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईष्वरीय विष्वविद्यालय)  को सेक्टर-20, कयाबांधा में कुल रकबा 6049.59 वर्गमीटर भूमि दिया गया है। वल्र्ड रिनिवल स्प्रीच्यूअल ट्रस्ट एक आध्यात्मिक संस्था है। जनमानस में जीवन को बेहतर रूप से जीने के लिये मार्गदर्शन दिया जाता है। इनकी संस्थाएँ विश्वस्तर पर उक्त कार्य का सम्पादन कर रही है। इस कारण 30 वर्ष का लीज रेंटरू. 1 प्रतिवर्ष निर्धारित करने की मंजूरी दी गई।
  • श्री सत्य साँई हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट को सेक्टर-02, नवागांव में रकबा 12.10 हेक्टेयर भूमि दिया गया है। सत्य साँई संजीवनी हॉस्पिटल के द्वारा बच्चों के हृदय संबंधित रोगों का निःशुल्क उपचार किया जाता है, जहां देश-विदेश के बच्चों का उपचार होता है। इस संस्था द्वारा अब तक 3620 आॅपरेशन किया गया है। इस कारण 90 वर्ष का लीज रेंटरू. 1 प्रतिवर्ष निर्धारित करने की मंजूरी दी गई।

सत्य साँई संजीवनी हॉस्पिटल, नया रायपुर के नजदीक मंगल भवन (धर्मशाला) निर्माण हेतु भूमि आबंटन।

  • मंगल भवन हेतु सेक्टर-02 में सत्य साँई संजीवनी हॉस्पिटल के नजदीक 25000 वर्गफीट भूमि, सत्य साँई संजीवनी हॉस्पिटल के नजदीक मरीजों के ठहरने के लिये अलग से कोई धर्मशाला नहीं है। ईलाज हेतु प्रदेश, देश-विेदेश के अन्य स्थानों से आने वाले मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिये मंगल भवन (धर्मशाला) के निर्माण की मंत्री परिषद ने मंजूरी प्रदान की है।
  • प्रीमियम, वार्षिक लीज रेन्ट, एनआरडीए द्वारा निर्माण में किये गये व्यय की राशि कुल  रू. 1 प्रतिवर्ष, लीज रेंट निर्धारित करने का निर्णय लिया गया।
  • संस्था द्वारा 2.50 करोड़ की लागत से 300 बिस्तरों के मंगल भवन का निर्माण किया जायेगा।

छत्तीसगढ़ राज्य की इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा में निवेश नीति 2014-19  में संशोधन

  • छत्तीसगढ़ राज्य की इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित सेवा में निवेश नीति 2014 लागू की गयी है। इस नीति के लागू होने के पश्चात् राज्य में नए निवेश को आशातीत सफलता प्राप्त हुई है। वर्ष 2014 के पश्चात् देश के अनेक राज्यों में नयी नीति लागू की गयी है, जिसमें अन्य राज्यों ने अनेक नवीन प्रस्ताव दिए हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा अपनी नीति में संशोधन किए जाने का निर्णय लिया गया है।
  • राज्य शासन द्वारा मुख्यतः स्थायी पूंजी निवेश अनुदान, लीज/किराये पर छूट, रोजगार सृजन हेतु अनुदान और बड़े निवेश हेतु अनुदान में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त शासन द्वारा बिजली बिल भुगतान में अनुदान, बाजार विकास हेतु सहायता, अनुसंधान एवं विकास हेतु सहायता एवं ईको सिस्टम के लिए सहायता को प्रोत्साहित करने के लिए नए अनुदान करने का निर्णय लिया गया है। यह सभी संशोधन एवं प्रोत्साहन अधिसूचना जारी होने की तिथि से लागू होगी।

स्थायी पूंजी निवेश अनुदान के अंतर्गत जहाँ पहले राज्य में ईकाई की स्थापना पर भूमि लागत को छो़ड़कर 50 प्रतिशत तक अधिकतम 1.5 करोड़ की छूट का प्रावधान था, जिसे बढ़ाते हुए राज्य शासन ने अब 100 करोड़ रूपये तक निवेश में प्रत्येक 10 करोड़ पर 15 प्रतिशत, अधिकतम 15 करोड़ प्रति ईकाई कर दिया है। 100 करोड़ से अधिक निवेश पर और अधिक छूट देने के लिए राज्य शासन द्वारा प्रत्येक प्रकरण पर विचार किया जा सकता है।

राज्य में स्थापित ऐसी ईकाई जिसका संचालन किराया/लीज के स्थान पर किया जा रहा है। उन ईकाईयों को पूर्व में अधिकतम 03 वर्ष के लिए किराये के 50 प्रतिशत राशि अधिकतम 10 लाख रूपये प्रतिवर्ष छूट प्रदान की जा रही थी, उसे बढ़ाते हुए अधिकतम 05 वर्ष के लिए 10-30 हजार वर्गफीट स्थान के लिए किराये का 50 प्रतिशत अधिकतम राशि 20 लाख प्रति ईकाई कर दिया है। 30 हजार वर्गफीट से अधिक किराये वाले स्थान पर अब 50 प्रतिशत राशि एवं अधिकतम 30 लाख रूपये प्रति ईकाई अनुदान कर दिया गया है।

  • राज्य में स्थापित करने वाले डेटा सेंटरों, ईएसडीएम कंपनियों एवं क्लाउड सेवा प्रदाताओं ईकाईयों को वाणिज्य उत्पादन प्रारंभ होने के दिनांक से 05 वर्ष तक अधिकतम 1.5 करोड़ की बिजली बिल भुगतान पर अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में स्टार्ट-अप एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी ईकाई के अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रस्तावित व्यय राशि का दुगुना अनुदान अधिकतम 1 करोड़ रूपये तक दिया जायेगा।
  • इसके अतिरिक्त नया रायपुर के 50 एकड़ क्षेत्र का सीमांकन डेटा सेंटर, क्लाउड सर्विस प्रदाता की आवश्यकता के अनुरूप किया गया है। यहाँ 365 दिन 24 घंटे आबाधित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने का निर्णय भी लिया गया   है ।ीभी्ीीभी्िउडडडलिया लिलिलिलिलिया   जिसर  आई.टी. और आई.टी.ई.एस. उद्योग के लिए भिलाई और रायपुर में प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास हेतु राज्य शासन के अनुदान से चिप्स द्वारा स्थापित परिसर में पे एंड यूज (pay and use) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी ।

छत्तीसगढ़ में खाद्य, फल, सब्जी एवं गैर काष्ठीय वन उत्पादन प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने हेतु विशेष पैकेज देने के लिये राज्य की कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 में संशोधन की मंजूरी दी गई।

संशोधन के अनुसार विशेष पैकेज -

  • फल एवं सब्जियों के सुरक्षित भण्डार एवं प्रसंस्करण के लिये विशष पैकेज

केवल फल एवं सब्जी परिक्षण/प्रसंस्करण करने वाले नवीन उद्योगों, जिसमें प्लांट एवं मशीनरी में रूपए 25 हजार में 25 लाख तक पंूजी निवेश हो, के लिये लागू होगा।

  • इससे अधिक लागत वाले इकाईयो को औद्योगिक नीति 2014-19 कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 छ.ग. राज्य खाद्य प्रसंस्करण मिशन की योजनाओं का लाभ पात्रतानुसार मिलेगा
  • यह विशेष पैकेज 31-10-2019 तक लागू रहेगा।
  • पैकेज की सुविधाएं एवं अनुदान

(i)- ब्याज अनुदान

सावधि ऋण पर निम्नानुसार ब्याज अनुदान देय होगा:-

(अ) सामान्य वर्ग के लिए - 10 वर्ष तक सावधि ऋण पर कुल भुगतान किए गए ब्याज का 70 प्रतिशत अधिकतम सीमा 05 लाख वार्षिक।

(ब) अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए- 10 वर्ष तक सावधि ऋण पर कुल भुगतान किए गए ब्याज का 70 प्रतिशत अधिकतम सीमा 10 लाख वार्षिक।

(ii)- स्थायी पूंजी निवेश अनुदान:-

(अ) सामान्य वर्ग के लिए -

रूपए 25 हजार से - 10 लाख तक

स्थाई पूंजी निवेश का 40 प्रतिशत अधिकतम सीमा 05 लाख

रूपए 10 लाख से - 25 लाख तक

स्थाई पूंजी निवेश का 50 प्रतिशत अधिकतम सीमा 12.5 लाख

(ब) अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए -

रूपए 25 हजार से - 25 लाख तक

स्थाई पूंजी निवेश का 60 प्रतिशत अधिकतम सीमा 15 लाख

 

(iii)- विद्युत शुल्क छूट:- खपत की गई विद्युत पर 10 वर्ष तक विद्युत शुल्क से पूर्ण छूट

(iv)- भूमि उपयोग में परिवर्तन- औद्योगिक प्रयोजन पर भू-उपयोग परिवर्तन अधिकतम 15 हजार फुट भूमि (परिवार में केवल एक खातेदार के लिए) डायवर्सन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट।

  • उपरोक्त विशेष पैकेज के साथ-साथ औद्योगिक नीति 2014-19 के अनुदान, छूट एवं रियायतों के तहत स्टॉम्प शुल्क में छूट, औद्योगिक क्षेत्रों/पार्को के भू-आबंटन पर भू-प्रीमियम में छूट, परियोजना प्रतिवेदन अनुदान, गणुवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, तकनीकी पेटेन्ट अनुदान व प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान तथा निशक्त अनुदान पात्रता अनुसार प्राप्त होंगे।

प्रदेश के किसी संभाग में रूपए 500 करोड़ से अधिक स्थायी पूंजी निवेश वाली प्रथम खाद्य, फल, सब्जी एवं गैर काष्ठीय वन उत्पाद प्रसंस्करण परियोजना के लिये विशेष पैकेज

इस पैकेजे में निम्नांकित छूट एवं अनुदान पात्रतानुसार दिये जायेंगे:-

1 लैण्ड बैक में भूमि आबंटित किये जाने पर प्रब्याजि में 75 प्रतिशत की छूट।

2 भूमि आंबटन पर स्टाम्प ड्यूटी से 100 प्रतिशत छूट।

3 बैंको से ऋण पर प्रथम 3 वर्षो के लिए स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट।

4 सावधि ऋण पर 10 वर्ष तक 100 प्रतिशत ब्याज (कुल स्थायी पूंजी निवेश के 50 प्रतिशत की सीमा तक) की प्रतिपूर्ति।

5 खपत की गई विद्युत पर 15 वर्ष तक विद्युत शुल्क से 100 प्रतिशत छूट।

6 15 वर्ष तक मंडी शुल्क से 100 प्रतिशत छूट, अधिकतम सीमा- कुल स्थायी पूंजी निवेश के 75 प्रतिशत की सीमा।

7 परियोजना में संलग्न छत्तीसगढ़ के स्थानीय तकनीकी एवं कुशल कामगारों के कौशल विकास हेतु, परियोजना में वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ होने के दिनांक से प्रथम 500 कामगारों के प्रथम 12 माह के देय ईपीएफ बराबर की राशि की प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में दी जायेगी।

टीप- उपरोक्त विशेष पैकेज के साथ-साथ परियोजना को औद्योगिक नीति 2014-19, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012 एवं छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य प्रसंस्करण मिशन में वर्णित अन्य अनुदान, छूट एवं रियायतों हेतु अधिसूचित नियमों में उल्लेखित पात्रता अनुसार समान स्वरूप का अनुदान होने की दशा में उद्यमी द्वारा चयनित कोई भी एक ही अनुदान भी प्राप्त होगा।

सूखे की स्थिति पर चर्चा

  • बैठक में प्रदेश में संभावित सूखे की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रदेश की माननीय मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों एवं जिले के प्रभारी सचिवों को जिले में जाकर वर्षा की स्थिति का आंकलन करने और सूखे की स्थिति होने पर वहां रोजगार, पेयजल आपूर्ति, चारा की उपलब्धता आदि की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

गौ-शालाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए

 मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन

मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश में गौ-शालाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडलीय उप समिति के गठन का निर्णय लिया गया है। इस उप समिति में कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय चन्द्राकर, उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय एवं नगरीय प्रशासन तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री अमर अग्रवाल होंगे।क्रमांक-2215/कुशराम

 

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय

रायपुर, 12 सितम्बर 2017

  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।  बैठक के प्रारंभ में मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ के किसानों को धान का बोनस देने की सहमति के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।

प्रदेश के 21 जिलों की 96 तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित करने का निर्णय: भू-राजस्व माफ
  • खरीफ फसल 2017 के बारे में जिला कलेक्टरों से प्राप्त नजरी आंकलन के अनुसार 27 में से 21 जिलों की 96 तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया गया।
  •  सूखा प्रभावित क्षेत्रों में रोजगारमूलक राहत कार्य जल्द शुरू किए जाएंगे।
  •  मनरेगा के तहत नाला बंधान कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। 
  •  सिंचाई नलकूपों को बाधारहित बिजली देने के लिए ऊर्जा विभाग को निर्देश दिए गए। 
  •  प्रत्येक परिवार को मनरेगा के तहत 100 दिन के बजाय 200 दिन का रोजगार दिलाने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा। 
  •  राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी 6-4) के प्रावधानों के अनुसार फसल क्षति हेतु अनुदान सहायता वास्तविक अनावारी रिपोर्ट आने पर दी जाएगी। 
  •  भारत सरकार को विस्तृत मेमोरेण्डम भेजा जाएगा। 
  •  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा राशि दिलायी जाएगी। 
  •  प्रत्येक ग्राम पंचायत में हर जरूरतमंद व्यक्ति के लिए कम से कम क्विंटल चावल सुरक्षित रखा जाएगा। 
  •  सूखा प्रभावित तहसीलों में भू-राजस्व को माफ करने का निर्णय लिया गया।
  •  प्रभावित तहसीलों में पेयजल समस्या के निराकरण के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
  •  प्रभावित तहसीलों में बीज और डीजल अनुदान के लिए भारत सरकार के कृषि मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। 
  •  बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार ग्रीष्मकालीन धान की खेती के लिए नलकूपों से सिंचाई पूरी तरह प्रतिबंधित की जाएगी।
  •  जिन जिलों की 96 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित करने का निर्णय लिया गया उनमें रायपुर जिले की चार, बलौदाबाजार जिले की छह, गरियाबंद जिले की तीन, महासमुंद जिले की पांच और धमतरी जिले की चार तहसीलें शामिल हैं। दुर्ग जिले की तीन, बालोद जिले की चार, बेमेतरा जिले की पांच, राजनांदगांव जिले की नौ, कबीरधाम जिले की चार, कोण्डागांव जिले की चार, नारायणपुर जिले की दो, कांकेर जिले की सात, दंतेवाड़ा जिले की पांच, बीजापुर की चार, बिलासपुर जिले की आठ, मुगेली की तीन, रायगढ़ की छह, जांजगीर चांपा की चार, कोरबा जिले की एक और कोरिया जिले की पांच तहसीलें शामिल है।

प्रदेश में सूखा प्रभावित तहसीलों की संख्या

क्रमांक

जिला

सूखा प्रभावित तहसील

कुल संख्या

1

रायपुर

रायपुर, तिल्दा, अभनपुर, आरंग

04

2

बलौदाबाजार

बलोदाबाजार, सिमगा, भाटापारा, पलारी, कसडोल, बिलाईगढ़

06

3.

गरियाबंद

गरियाबंद, छुरा, मैनपुर,

03

4

महासमुंद

महासमुंद, बसना, सरायपाली, पिथौरा, बागबहरा

05

5.

धमतरी

कुरूद, धमतरी, मगरलोड, नगरी

04

6

दुर्ग

धमधा, दुर्ग, पाटन

03

7

बेमेतरा

बेमेतरा, बेरला, साजा, थान खम्हरिया, नवागढ़

05

8.

बालोद

गुण्डरदेही, डौंडी-लोहारा, डौंडी, गुरूर

04

9.

राजनांदगांव

छुईखदान, खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगावं, छुरिया, अम्बागढ़ चैकी, मोहला, मानपुर, डोंगरगांव

09

10

कबीरधाम

कवर्धा, पण्डरिया, बोड़ला, सहसपुर-लोहारा

04

11

कोण्डागांव

माकड़ी, फरसगांव, बड़ेराजपुर,केसकाल

04

12

दंतेवाड़ा

गीदम, दंतेवाड़ा, कटेकल्याण, कुआकोण्डा, बड़ेबचेली,

05

13

कांकेर

कांकेर, चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, पंखाजूर, दुर्गकोंदल

07

14

बिलासपुर

बिल्हा, मस्तूरी, मरवाही, कोटा, तखतपुर, बिलासपुर, पेण्ड्रारोड, पेण्ड्रा

08

15

मुगेली

मुगेली, लोरमी, पथरिया

03

16

जांजगीर-चांपा

जैजेपुर, डभरा, अकलतरा, बलोदा

04

17

कोरबा

पाली

01

18

रायगढ़

रायगढ़, सारंगढ़, धर्मजयगढ़, पुसौर, बरमकेला, तमनार

06

19

कोरिया

बैकुण्ठपुर, सोनहत, खड़गंवा, मनेन्द्रगढ़, भरतपुर

05

20

नारायणपुर

नारायणपुर, ओरछा

02

21

बीजापुर

बीजापुर, भोपालपट्नम, भैरमगढ़, उसूर

04

 

 

कुल प्रभावित तहसीलों की संख्या

96

 

 

धान पर प्रोत्साहन राशि (बोनस) देने का निर्णय
 
  •  खरीफ वर्ष 2016-17 में सहकारी समितियों में खरीदे गए धान पर किसानों को 300 रूपए प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देशों का प्रारूप तैयार किया है, जिसका अनुमोदन आज केबिनेट की बैठक में किया गया। ये दिशा निर्देश इस प्रकार है:-
  •  प्रदेश के समस्त भू-स्वामी कृषक, जिनसे खरीफ 2016-17 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राज्य शासन द्वारा धान उपार्जित किया गया था, वे इसके पात्र होंगे।
  •  खरीफ वर्ष 2016-17 में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से धान बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।  
  •  प्रोत्साहन राशि वितरण योजना का क्रियान्वयन खाद्य विभाग द्वारा राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के माध्यम से किया जाएगा। 
  •  किसानों को पात्रता के अनुसार धान प्रोत्साहन राशि (बोनस) का भुगतान दीपावली 2017 के पहले सीधे उनके बैंक खाते में किया जाएगा।
 
खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 के लिए समर्थन मूल्य पर धान और मक्का उपार्जन तथा कस्टम मिलिंग नीति का अनुमोदन
 
  •  भारत सरकार के खाद्य विभाग द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 में औसत अच्छी किस्म (एफ.ए.क्यू.) के धान और मक्का के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। समर्थन मूल्य धान कामन के लिए 1550 रूपए, धान ए-ग्रेड के लिए 1590 रूपए और मक्का के लिए 1425 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। 
  •  इन दरों पर छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियों के उपार्जन केन्द्रों में किसानों से धान की नगद और लिंकिंग में खरीदी 15 नवम्बर 2017 से 31 जनवरी 2018 तक की जाएगी।
  •  मक्के की खरीदी 15 नवम्बर 2017 से 31 मई 2018 तक की जाएगी।
  •  इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश खाद्य विभाग पृथक से जारी किया जाएगा।

द्वितीय अनुपूरक अनुमान वर्ष 2017-18 का अनुमोदन

  •  बैठक में  द्वितीय अनुपूरक अनुमान वर्ष 2017-18 का अनुमोदन किया गया।
  •  छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन विधेयक 2017) के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।​​​​​​​​​
क्रमांक 2509/स्वराज्य/कुशराम