गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन का संदेश : पुलिस परेड मैदान रायपुर 26 जनवरी 2017

प्रिय बहनों, भाइयों और प्यारे बच्चों,

    गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर, आप छत्तीसगढ़वासियों सहित समस्त देशवासियों एवं विदेशों में बसे भारतीयों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मैं सेना और सुरक्षा बलों में कार्यरत जांबाज जवानों को सलाम करता हूं, जिनकी बदौलत हमारी सीमाएं तथा देश की एकता और अखण्डता सुरक्षित है।

    देश के लिए अपनी जान की परवाह भी न करने की हमारी गौरवशाली परम्परा है। आजादी की लड़ाई के दौरान ऐसे असंख्य युवा सामने आए थे, जिन्होंने गुमनाम रहकर भी राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उन अनाम सेनानियों के साथ मैं उन सभी को नमन करता हूं, जिन्होंने आजादी की लड़ाई से लेकर देश के नवनिर्माण तक के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया। महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपतराय, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, सावरकर बंधु, अशफाक उल्लाह खां, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, सरोजिनी नायडू जैसी अनेक विभूतियांे की यादें हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी। वहीं छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर गेंद सिंह, गुंडाधूर, वीर नारायण सिंह, पंडित रविशंकर शुक्ल, पंडित सुंदरलाल शर्मा, ठाकुर प्यारेलाल सिंह आदि विभूतियों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई में योगदान दिया। इस तरह छत्तीसगढ़ उस दौर से ही राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा हुआ है।
    आज का दिन, विशेष तौर पर संविधान निर्माताओं के प्रति आभार मानने का भी है। मैं संविधान निर्मात्री सभा के सभी सदस्यों और सहयोगियों को नमन करता हूं और विशेषकर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद व डॉ. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का पावन स्मरण करता हूं, जिन्होंने भारत के संविधान की रचना करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।    भारत को दुनिया के महानतम गणतंत्र का गौरव मिला है, जिसके कारण समस्त देशवासियों को गरिमा और सम्मान से रहने के साथ मौलिक अधिकारों की सौगात भी मिली है। यह देश हम सबका है। इस देश पर हम सबका अधिकार है, तो इस देश को आगे बढ़ाना तथा सबकी आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करना भी हम सबका कर्तव्य है।    भारत दुनिया में संघीय शासन व्यवस्था का भी सर्वोत्तम उदाहरण है। मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को साधुवाद देता हूं, कि उन्होंने केन्द्र तथा राज्य सरकारों को मिलाकर ‘टीम इण्डिया’ का नाम दिया है। उन्होंने हमारे संविधान की भावना के अनुरूप राज्यों के आर्थिक संसाधन 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया, अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योजना बनाने तथा व्यय करने की छूट दी है। इससे गणतंत्र को मजबूती मिली है। गरीबों को आवास देने की पूर्व प्रचलित योजनाओं की तुलना में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ में कई गुना अधिक लक्ष्य और आवंटन दिया गया है और समस्त आवासहीन परिवारों को वर्ष 2022 तक पक्के आवास बनाकर देने का लक्ष्य रखा गया है। मुझे खुशी है कि ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ सहित राज्य की विभिन्न योजनाओं के समन्वय से यह लक्ष्य समय पर पूरा होगा। प्रधानमंत्री जी द्वारा किए गए विमुद्रीकरण के क्रान्तिकारी और ऐतिहासिक उपाय को छत्तीसगढ़ में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। राज्य की जनता, बैंक कर्मियों, कारोबारियों और सरकार के विभिन्न अंगों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन जिस कर्तव्य-भाव से किया है, वह सराहनीय है। इस प्रक्रिया से एक ओर जहां देश को आतंकवादी ताकतों से लड़ने में मदद मिली है, वहीं छत्तीसगढ़ को नक्सलवादियों पर अंकुश लगाने में भी कामयाबी मिली है।

    आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की दिशा में ‘कैशलेस लेन-देन’ को प्रोत्साहित करने में छत्तीसगढ़ की बढ़त काबिले-तारीफ है। एक माह के अल्प-समय में ही लगभग 16 लाख लोगों को प्रशिक्षित कर, उन्हें छत्तीसगढ़ की ‘डिजिटल आर्मी’ का सदस्य बनाया गया है। समाज के विभिन्न वर्गों को इस ‘डिजिटल आर्मी’ में समाहित करते हुए राज्य में नगद-विहीन अर्थव्यवस्था कायम करने की दिशा में अच्छी प्रगति हुई है। राज्य में पंचायत स्तर पर 9 हजार सामान्य सेवा केन्द्रों को ‘इंटरनेट कनेक्टिविटी’ के माध्यम से इतना सक्षम बनाया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर ये बैंक शाखा जैसी सेवाएं दे सकें। माननीय प्रधानमंत्री जी ने संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर के नाम पर ‘भीम एप’ जारी कर  ‘आधार कार्ड इनेबल्ड’ लेन-देन को जन-जन का साधन बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। 11 लाख किसानों को ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ‘कैशलेस’ बनाया जाएगा। जन-धन खाताधारकों को ‘रूपे कार्ड’ जारी करने का काम 68 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। ‘पी.ओ.एस.’ मशीनों को ‘वैट’ से मुक्त कर दिया गया है। कई बाजार तथा ग्रामीण निकाय ‘कैशलेस’ हो चुके हैं। इस तरह इन प्रयासों का लाभ गांव, गरीब और किसानों को मिलेगा, जिससे उन्हें अपनी मेहनत, अपनी प्रतिभा, अपने अधिकार की पूरी राशि उनके बैंक खातों में मिलेगी। नगद राशि को सुरक्षित रखने या उससे संबंधित धोखाधड़ी के तनाव से बच सकेंगे और अपना पूरा ध्यान, अपनी आजीविका व अन्य कार्यों पर लगा सकेंगे। ‘छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम’ से प्रदेश की 84 प्रतिशत आबादी भूख और कुपोषण की चिंता से मुक्त हुई है, वहीं पारदर्शी वितरण के लिए 12 हजार से अधिक उचित मूल्य दुकानों को कम्प्यूटरीकृत करने का काम 98 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इन दुकानों को शीघ्र ‘कैशलेस’ करने का लक्ष्य है। आम जनता की गरिमा, स्वावलंबन और सम्मान को लेकर अनेक बड़े फैसले लिए गए हैं, जिनका लाभ छत्तीसगढ़ की जनता को मिलने लगा है। ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के तहत राज्य सरकार 35 लाख महिलाओं की रसोई को धुंआमुक्त करने का लक्ष्य समय पर पूरा करेगी। अल्प-अवधि में एक ओर जहां 6 लाख से अधिक घरों में रसोई गैस दी जा चुकी है, वहीं दुर्गम अंचलों में 50 सहकारी समितियों को गैस वितरक भी नियुक्त किया गया है। इस तरह इस योजना से ग्रामीण अंचलों को बहुआयामी लाभ मिल रहा है। महिलाओं की सुरक्षा हेतु सर्वसुविधायुक्त ‘सखी’ (वन स्टॉप सेंटर) की स्थापना में छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। रायपुर के बाद अब सभी जिलों में यह संस्था स्थापित की जाएगी।

    युवाओं को उच्च शिक्षा के ज्यादा अवसर देने के लिए 48 शासकीय महाविद्यालयों में 11 हजार सीटें बढ़ाई गई हैं। विगत एक वर्ष में 14 स्नातक महाविद्यालयों का उन्नयन किया गया, जिससे अब प्रदेश के सभी जिलों में कम से कम एक स्नातकोत्तर महाविद्यालय खोलने का लक्ष्य पूरा हो गया है। गुणवत्ता वृद्धि के सतत् प्रयासों से अब प्रदेश में 2 विश्वविद्यालयों तथा 5 महाविद्यालयों को ‘नेक’ से ‘ए-ग्रेड’ की मान्यता मिल गई है। सरगुजा में नया मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हो जाने से राज्य के आदिवासी बहुल अंचलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का सपना भी पूरा हो गया है। मुझे खुशी है कि दिव्यांगजनों की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तीन नई योजनाएं शुरू की गई हैं, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को 2 हजार से लेकर 50 हजार रूपए तक की राशि पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी, वहीं किराए का भवन लेकर रहने वाले बच्चों को 5 हजार से 10 हजार रूपए तक की आर्थिक मदद की जाएगी।

    श्रमिक कल्याण के लिए संकल्पित छत्तीसगढ़ सरकार ने कुछ कदम और आगे बढ़ाते हुए ‘सफाई कर्मकार कल्याण निधि’ का गठन किया है और घरेलू तथा ठेका में काम करने वाली महिलाओं के लिए एक पृथक मण्डल का गठन इस दिशा में मील का पत्थर होगा।     प्रत्येक व्यक्ति की समस्या हल करने और उसे विकास के नए रास्ते प्रदान करने से ही गणतंत्र मजबूत होगा। किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने हेतु वर्षवार लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ से अऋणी किसानों की सहभागिता में 181 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। वैज्ञानिक ढंग से खेती के लिए एक वर्ष में 25 स्थायी तथा 111 मिनी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है। विभिन्न प्रयासों से कृषि उत्पादन में वृद्धि तथा किसानों को अपनी मेहनत का सही दाम दिलाया जा रहा है।   समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का भुगतान ‘कैशलेस’ तरीके से किसानों के बैंक खातों में करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने हेतु प्रदेश की 14 नियमित कृषि उपज मंडियों को चिन्हांकित किया गया है, जिसमें से 5 ने ‘ई-नाम पोर्टल’ से क्रय-विक्रय शुरू कर दिया है तथा 9 मंडियां शीघ्र इससे जुड़ जाएंगी। नागरिक सुविधाएं बढ़ाते हुए 1032 राजस्व गांवों का सर्वेक्षण करने तथा राजस्व अभिलेख तैयार करने, ग्रामीण अंचलों में आबादी भूमि का पट्टा वितरण करने, नगरीय क्षेत्रों का नए सिरे से राजस्व सर्वेक्षण करने, राजस्व अभिलेखों को ऑनलाइन करने के बाद उसे अद्यतन करने हेतु पटवारियों को ‘लैपटॉप’ प्रदान करने जैसी योजनाओं के अच्छे परिणाम मिलेंगे।

    मुझे खुशी है कि ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के अन्तर्गत 2 जिले, 41 विकासखण्ड, 5 नगरीय निकाय, 5,300 से अधिक ग्राम पंचायतें तथा 9,300 से अधिक गांव ‘ओ.डी.एफ.’ घोषित हो चुके हैं। 2 अक्टूबर 2018 तक राष्ट्रीय लक्ष्य से एक वर्ष पहले ही हम पूरे राज्य को ‘ओ.डी.एफ.’ बना लेंगे। मैं चाहूंगा कि इस नेक काम के लिए प्रदेशवासियों का भरपूर सहयोग मिले। ‘हमर छत्तीसगढ़ योजना’ के अन्तर्गत प्रदेश के 2 लाख जनप्रतिनिधियों को राजधानी नया रायपुर सहित विकास प्रेरक संस्थानों में भ्रमण कराया जा रहा है, जिससे ये लोग विकास की रणनीतियों और उपलब्धियों को नजदीक से देख-समझ रहे हैं। इससे ग्रामीण अंचलों में आत्मविश्वास और जनभागीदारी बढ़ रही है। नया रायपुर देश के सबसे नियोजित राजधानी शहर के साथ ही, अपनी विशिष्ट और अत्याधुनिक अधोसंरचना के कारण रोजगार और विकास के अवसरों से समृद्ध है।

    खनिज धारित अंचलों की आबादी को उनका हक और बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए सभी जिलों में ‘जिला खनिज संस्थान न्यास’ का गठन कर दिया गया है, जिससे इन अंचलों में पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, कौशल उन्नयन, शिक्षा, कृषि, स्वच्छता, अधोसंरचना निर्माण आदि कार्यों को गति दी जाएगी। इस न्यास में 940 करोड़ रूपए की राशि जमा हो चुकी है तथा 24 सौ करोड़ रूपए की परियोजनाएं बनाई जा चुकी हैं, जिनसे इस अंचल में लोगों का जीवन सुगम और सुखद होगा। नई खनिज नीति के तहत खदानों की ‘ई-नीलामी’ सफलतापूर्वक करने वाला देश का पहला राज्य भी छत्तीसगढ़ बन गया है। सार्वजनिक सुविधाएं और अधोसंरचना का विकास वह तत्व है, जो एक साथ हजारों-लाखों लोगों का जीवन सुगम करता है। राज्य में 10 हजार किलोमीटर से अधिक नई सड़कों, 13 सौ किलोमीटर से अधिक नए रेलमार्गों के निर्माण से राज्य के सभी अंचलों में भौतिक रूप से पहुंच आसान हो जाएगी। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी नेटवर्क, सामान्य सेवा केन्द्रों की स्थापना, ऑनलाइन सेवाओं का लाभ, बहुत व्यापक स्तर पर आम जनता को मिलेगा। ‘बस्तर नेट’ योजना से बस्तर के 5 जिलों में 9 सौ किलोमीटर का ‘ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क’ इस अंचल को आपस में तथा पूरे राज्य, देश और दुनिया से जोड़ देगा।

बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति भी सरकार की प्राथमिकता है। 1,054 नए बिजली उपकेन्द्रों की स्थापना से इस अभियान को गति मिलेगी। बस्तर के 1,080 गांवों का विद्युतीकरण शीघ्र पूरा होगा। इसके अलावा जिन खेतों में किसी भी कारण से बिजली से चलने वाले पम्प नहीं लग पाए, वहां काफी रियायती दर पर सौर ऊर्जा से चलने वाले पम्प लगाने हेतु ‘सौर सुजला योजना’ शुरू की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य व्यापार सुगमता (ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस) की दिशा में लगातार बेहतर कार्य कर रहा है और इस वर्ष फिर देश के 4 अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। ‘मेक इन छत्तीसगढ़’ तथा ‘स्टार्टअप छत्तीसगढ़’ के आकर्षक प्रावधानों से हम ‘मेक इन इण्डिया’ के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध हैं। राज्य में निवेश लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। स्थानीय जनता को बेहतर रोजगार मुहैया कराने के लिए प्रतिवर्ष लगभग एक लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि की तरह वनोपज का प्रसंस्करण भी प्राथमिकता में है। लघु वनोपजों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था का शानदार परिणाम मिला है। इस वर्ष इमली तथा साल बीज, समर्थन मूल्य से बेहतर कीमत पर बिके हैं। इस तरह वनांचलों में भी बेहतर आमदनी का जरिया बनाने में मिली सफलता उत्साहवर्धक है। बस्तर के सुदूर अंचलों में एजुकेशन सिटी, लाइफ लाइन एक्सप्रेस, अस्पतालों में ऑपरेशन की सुविधा जैसे अनेक नए उपायों से सुरक्षा और विकास के साथ विश्वास की बयार भी चल रही है, जिससे यह विश्वास जागा है कि राज्य में नक्सलवाद का अंत निकट है।     मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ में ‘गण-तंत्र’ को सार्थक बनाने के लिए जन-जन के सशक्तिकरण का अभियान बहुत गंभीरता और समर्पण के साथ चल रहा है। इस अभियान की सफलता से हम छत्तीसगढ़ को देश का सबसे खुशहाल व समृद्ध राज्य बनाएंगे, जहां विकास में प्रत्येक छत्तीसगढ़वासी की महत्वपूर्ण भूमिका दर्ज हो।

जय हिन्द।
जय छत्तीसगढ़।