“रमन के गोठ” : आकाशवाणी से प्रसारित विशेष कार्यक्रम ( दिनांक 12 नवम्बर 2017 , समय प्रात: 10.45 से 11.05 बजे )

श्रोताओं नमस्कार !
पुरुष उद्घोषक

-    आकाशवाणी के विशेष प्रसारण ‘रमन के गोठ’ में हम, सभी श्रोताओं का हार्दिक स्वागत करते हैं, अभिनंदन करते हैं। कार्यक्रम की 27 वीं कड़ी के लिए आकाशवाणी के स्टूडियो में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी पधार चुके हैं।
-    डॉक्टर साहब नमस्कार, बहुत-बहुत स्वागत है आपका इस कार्यक्रम में।
मुख्यमंत्री जी
-    आप लोगों को तथा समस्त श्रोताओं को धन्यवाद।
-    आप लोगों की मेहनत और रूचि के कारण यह कार्यक्रम लगातार चल रहा है। मुझे खुशी है कि इस कार्यक्रम को सुनकर बहुत से श्रोता तथा वरिष्ठ पदों पर बैठे लोग मुझ से चर्चा करते हैं। अपने सुझाव भेजते हैं तथा अपनी रूचि के विषय को इसमें शामिल करने का आग्रह करते हैं।
-    अभी 1 नवम्बर से 5 नवम्बर तक प्रदेश में धूमधाम से राज्योत्सव मनाया गया।
-    माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी तथा उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू जी ने राज्योत्सव में पधार कर इस आयोजन को शिखर पर पहुंचा दिया।
-    प्रदेश के सभी जिलों मेें 3 नवम्बर को जिला स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन किया गया। इस आयोजन में आप सबकी सहभागिता के कारण प्रदेश में उत्साहजनक वातावरण बना है।
-    इससे हमें एक ओर जहां अपनी पुरानी उपलब्धियों को देखने का अवसर मिला है, वहीं दूसरी ओर नए लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने का संकल्प भी मजबूत हुआ है।
महिला उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, धान बोनस तिहार और राज्योत्सव के बाद राज्य में अभी कई त्यौहार होने बाकी हैं। किसानों के लिए धान खरीदी सबसे बड़ा त्यौहार है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी साल भर की तपस्या, लगन, मेहनत और निवेश का लाभ मिलता है। इस संबंध में हमारे श्रोताओं को जानकारी देना चाहंेगे ?
मुख्यमंत्री जी
-    खरीफ 2017 मौसम में हुई धान की फसल खरीदने का समय आ गया है। हमने इसके लिए सारी व्यवस्थाएं कर ली हैं और अब 15 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी प्रारंभ हो रही है, जो 31 जनवरी 2018 तक जारी रहेगी।
-    किसान भाई-बहनों को अपना धान लेकर बहुत दूर न जाना पड़े, इसलिए बड़ी संख्या में धान उपार्जन केन्द्र खोले गए हैं।
-    औसतन साढ़े 5 ग्राम पंचायतों के बीच एक धान खरीदी केन्द्र हो गया है।
-    पहले मात्र एक हजार धान खरीदी केन्द्र थे, जिसे हमने बढ़ाकर 1 हजार 992 कर दिया है, अर्थात लगभग दोगुने केन्द्रों से धान खरीदी की व्यवस्था कर दी गई है।
-    हमने धान खरीदी और भुगतान की जो पारदर्शी व्यवस्था की है, उससे जिस दिन धान खरीदी होगी, उसी दिन किसान भाई के बैंक खाते में राशि चली जाएगी और इस तरह तत्काल किसान भाई इस राशि का उपयोग कर सकते हैं।
-    इस बार धान बेचने के लिए पिछले साल की अपेक्षा 1 लाख 27 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है। इस तरह अब धान बेचने वालों की संख्या 15 लाख 79 हजार हो जाएगी, जो अब-तक की सर्वाधिक संख्या है।
-    इस वर्ष धान के समर्थन मूल्य में 80 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिसके कारण मोटा धान 1550 रूपए प्रति क्विंटल तथा पतला धान 1590 रूपए प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा, जिसका भुगतान तुरंत कर दिया जाएगा और 2018 में प्रति क्ंिवटल 300 रूपए बोनस का भुगतान भी किया जाएगा। इस तरह प्रति क्ंिवटल धान के लिए किसानों को लगभग 1900 रूपए तक मिल जाएंगे।
-    इस तरह एक फसल का दो बार भुगतान होगा, जो पहले दाम के रूप में और बाद में बोनस के रूप में होगा।
-    मैं किसान भाई-बहनों से अनुरोध करता हूं कि वे धान को सुखाकर और आवश्यक साफ-सफाई करने के बाद समिति में विक्रय हेतु लाएं, जिससे उन्हें खरीदी केन्द्रों में सुविधा होगी।
-    धान खरीदी केन्द्रों में किसानों की सुविधा और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए, इसके लिए समितियों को निर्देश दिए गए हैं।
पुरूष उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, प्रदेश में मक्के का रकबा भी लगातार बढ़ रहा है। आपने समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदी की घोषणा भी की है, तो क्या मक्का खरीदी के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है ?
मुख्यमंत्री जी
-    जहां धान नहीं होता, वहां मक्के की पैदावार बढ़ रही है। विशेषकर आदिवासी अंचलों में मक्का आय का बड़ा माध्यम रहा है।
-    मक्के की खरीदी साढ़े छह महीने तक होगी, जो 15 नवम्बर 2017 से 31 मई 2018 तक चलेगी।
-        इस वर्ष मक्का खरीदी की दर 1365 रूपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1425 रूपए प्रति क्ंिवटल कर दी गई है, अर्थात मक्के की दर में भी 60 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
-    जिस तरह धान खरीदी की व्यवस्था की गई, उन्हीं केन्द्रों से मक्का भी खरीदा जाएगा और भुगतान की राशि किसानों के खाते में तुरंत डाल दी जाएगी।
-    प्रदेश में मक्के का रकबा और उत्पादन बढ़ने का लाभ भी किसान भाइयों को मिलेगा।

महिला उद्घोषक
-    डॉ. साहब, धान खरीदी त्यौहार के बीच आपने एक और त्यौहार की घोषणा की है। तेन्दूपत्ता बोनस तिहार। कृपया इस संबंध में हमारे श्रोताओं को बताइये ?
मुख्यमंत्री जी
-    छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्रों की जीवन रेखा यदि धान की फसल है तो वन अंचलों, आदिवासी बहुल अंचलों की जीवन रेखा तेन्दूपत्ता है।
-    हमने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और किसानों को बोनस देने की व्यवस्था करके लगभग 14 लाख किसानों को नई शक्ति दी है, तो लगभग इतनी संख्या में ही वनवासी, आदिवासी परिवारों को तेन्दूपत्ता के कारोबार से लाभ देने की व्यवस्था की गई है।
-    बस्तर, सरगुजा संभाग के अलावा आंशिक रूप से राजनांदगांव, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा आदि जिलों में भी तेन्दूपत्ता होता है, जिसके संग्रहण और बिक्री का लाभ स्थानीय ग्रामीण जनता को मिलता है।
-    लगभग 14 लाख परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन तेन्दूपत्ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने तेन्दूपत्ते का संग्रहण पारिश्रमिक 450 रूपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाना शुरू किया, जिसे बढ़ाते हुए 1500 और 1800 रूपए तक ले आए थे।
-    अब नए सीजन के लिए हमने तेन्दूपत्ता संग्रहण दर 2500 रूपए प्रति मानक बोरा करने का निर्णय लिया है।
-    इस तरह हमने तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 555 प्रतिशत या साढ़े पांच गुना से अधिक बढ़ा दिया है।
-    एक बार में 700 रूपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक बढ़ाना अपने आप में बहुत बड़ा कीर्तिमान है, जिसके कारण तेन्दूपत्ता मजदूरों को अब एक तिहाई से अधिक राशि अतिरिक्त मिलेगी।
-    धान की तरह, हम तेन्दूपत्ता मजदूरों को भी बोनस देते हैं। वर्ष 2016 के तेन्दूपत्ता बोनस की राशि 274 करोड़ 38 लाख रूपए का भुगतान किया जाना है। यह राशि 901 समितियों के अंतर्गत कार्यरत लगभग 14 लाख तेन्दूपत्ता मजदूरों को मिलेगी।
-    हमने तेन्दूपत्ता बोनस तिहार मनाने का फैसला किया है, जो 1 दिसम्बर से 10 दिसम्बर तक चलेगा। इस तिहार में सिर्फ बोनस ही नहीं बांटा जाएगा, बल्कि वनवासियों के जीवन में बदलाव लाने वाली योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी होगा। हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।
-    हमने जब तेन्दूपत्ता मजदूरों को चरण-पादुका देने का फैसला किया था, तब बहुत से लोगों ने इसका मजाक उड़ाया था।
-    मैं कहना चाहता हूं कि-

जाके पैर न फटे बिवाई,
वो क्या जाने पीर पराई।

-    जंगलों में जब पैरों में कांटे चुभते हैं, तो उसका जो भयंकर दर्द होता है, वह तात्कालिक ही नहीं होता। वह दर्द रह-रहकर उठता है। क्योंकि एक दिन पैर में कांटा चुभ गया तो अगले दिन जंगल जाने से छुट्टी नहीं मिल जाती। और फिर बार-बार जख्म होता है, घाव होता है, गोखरू होता है।
-    हमने तेन्दूपत्ता तोड़ने वालों के पैरों को जख्म और दर्द से बचाने के लिए चरण-पादुका दी तो उन्हें कितनी राहत मिली, ये वही बता सकते हैं।
-    इसलिए हम हर साल चरण-पादुका देते हैं। इस साल भी देंगे।
-    ऐसे कदमों से हमने आदिवासी-वनवासी भाई-बहनों का विश्वास जीता है।
-    यही वजह है कि आज तेन्दूपत्ता मजदूरों के परिवारों में शिक्षा के प्रति, सेहत के प्रति, विकास के प्रति चेतना जागी है।
-    हमारे ‘प्रयास’ विद्यालयों में तेन्दूपत्ता मजदूरों के बच्चे भी रहते हैं, पढ़ते हैं, कोचिंग पाते हैं और कई बच्चे मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज पहुंच रहे हैं।
-    नारायणपुर जिले में छोटा सा गांव है, गढ़बेंगाल, जहां लखेश्वर प्रधान तेन्दूपत्ता से अपना जीवन चलाते हैं। लखेश्वर का बेटा विमल कुमार अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा है।
-    नारायणपुर जिले के केसरू उसेंडी की बेटी लक्ष्मी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से बी.ई. कर रही है। इसी जिले के धौड़ाई गांव की निवासी श्रीमती छम्मा बाई का बेटा वेदप्रकाश बेलसरिया, एड़का गांव के जग्गू राम दुग्गा की बिटिया कुमारी रनाय दुग्गा, बालोद जिले के बड़भूम के रामूलाल का बेटा इन्द्रजीत, रायगढ़ जिले के झगरपुर निवासी बालमुकंद का बेटा राधेश्याम, बिलासपुर जिले के जगमोहन सिंह का बेटा आंदोलन सिंह, चोटिया निवासी विरेन्द्र कुमार का बेटा गणेश कुमार, पालीबूढ़ापारा निवासी जगतपाल की बेटी चित्रलेखा, बांधापारा निवासी सुभाष राव का बेटा देवदत्त राव, जटगा निवासी कृपाल सिंह की बिटिया कुमारी उमा, बलौदाबाजार जिले के बल्दाकछार निवासी परमानंद का बेटा, लक्ष्मीनारायण जैसे दर्जनों बच्चे इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं।  
-    इसी तरह बहुत से बच्चे बी.एस.सी. एग्रीकल्चर, बी.एस.सी. नर्सिंग तथा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए चुने गए हैं।
-    एक छोटे गांव या कस्बे के किसी परिवार का बच्चा जब डॉक्टरी, इंजीनियरिंग या अन्य कॉलेजों में पढ़ने जाता है, तो वहां त्यौहार का वातावरण बनता है। जिसका असर आसपास के कई गांवों मंे होता है। इस तरह से आदिवासी अंचलों में एक बड़ी क्रांति की शुरूआत हो चुकी है, जिसके सूत्रधार वहां के होनहार बच्चे हैं। मेरा मानना है कि ये बच्चे अपने परिवार, समाज और गांव का जीवन बदल देंगे।
-    आगे चलकर तेन्दूपत्ता संग्राहकों के बच्चे बड़े-बड़े अधिकारी बनकर आएंगे।
-    इन उपलब्धियों से हमारा उत्साह बढ़ता है और हम बार-बार बताना चाहते हैं कि हमने तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए क्या किया।
-    13 वर्षों में हमने 1 हजार 842 करोड़ रूपए का संग्रहण पारिश्रमिक दिया है।
-    1 हजार 235 करोड़ रूपए का बोनस दिया है।
-    तेन्दूपत्ता संग्र्राहक परिवार के बच्चों को प्रतिवर्ष लगभग 5 करोड़ रूपए की छात्रवृत्ति दी जी रही है।
-    तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवार के मुखिया की मृत्यु होने पर आश्रित सदस्यों को निःशुल्क जनश्री बीमा योजना के तहत आर्थिक मदद की है।
-    3 लाख 63 हजार से ज्यादा परिवारों को वन अधिकार मान्यता-पत्र दिया है।
-    करीब 12 हजार सामुदायिक वन अधिकार पत्र दिए हैं।
-    खेती के लिए वनवासी परिवारों को 2 लाख 58 हजार हेक्टेयर भूमि आवंटित की है।
-    तेन्दूपत्ता के अलावा महुआ बीज, साल बीज, चिरौंजी, गुठली, हर्रा, लाख रंगीनी, लाख कुसुमी और इमली को समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था की है, जिससे वनवासियों के घर 100 करोड़ रूपए से अधिक अतिरिक्त राशि पहुंची है।
पुरूष उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, गांव-गरीब और किसान परिवारों की जिंदगी में बहार लाने के लिए, उनका जीवन रोशन करने के लिए एक और त्यौहार मनाने की चर्चा है, जिसकी शुरूआत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘सौभाग्य योजना’ के रूप में की है। इस योजना के तहत हर घर में सितम्बर 2018 तक बिजली कनेक्शन दिए जाने हैं। छत्तीसगढ़ में इसकी क्या तैयारी है ?

मुख्यमंत्री जी
-    माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हर घर में बिजली पहुंचाने के लिए ‘सौभाग्य योजना’ (सहज बिजली हर घर योजना) की शुरूआत 25 सितम्बर 2017 को की है। उन्होंने लक्ष्य दिया है कि हमें सभी घरों को बिजली की रोशनी से रोशन करना है।
-    छत्तीसगढ़ में 98 दशमलव 67 प्रतिशत गांवों में विद्युतीकरण का कार्य हो चुका है। अब मात्र 465 गांव तथा 7 हजार मजरे-पारे तथा टोलों का विद्युतीकरण करना है।
-    हम वर्ष 2018 में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा कर लंेगे।
-    जहां तक ‘प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना’ का सवाल है, तो निश्चित तौर पर हम सितम्बर 2018 तक हर घर में बिजली पहुंचाएंगे।
-    ऐसे बहुत से गांव हैं, जहां बिजली पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन कुछ घरों में बिजली कनेक्शन नहीं लगे हैं। ऐसे सभी घरों का चिन्हांकन करके, वहां बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे।
-    मैं चाहता हूं कि जल्दी ही प्रदेश में ‘ऊर्जा उत्सव’ की शुरूआत हो। जिस गांव में विद्युतीकरण के बाद, हर घर में बिजली कनेक्शन लगा दिए जाएं, हर गांव में विद्युत विकास का काम तेजी से पूरा हो और वहां ऊर्जा उत्सव मनाया जाए।
-    ‘ऊर्जा उत्सव’ के दौरान कम बिजली की खपत वाले एल.ई.डी. बल्ब, ट्यूबलाइट, पंखे, सौर ऊर्जा के लिए रूफ-टॉप योजना, सार्वजनिक उपयोग की पेयजल योजना, सोलर हाईमास्ट लैम्प आदि के लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जाए।
-    हम सौर सुजला योजना के तहत 51 हजार किसानों को सोलर पम्प काफी किफायती दाम पर दे रहे हैं। इनके उपयोग और रख-रखाव के बारे में भी इन शिविरों में चर्चा की जाए।
-    वास्तव में किसी गांव या घर में बिजली पहुंचने से, वहां के निवासियों का जीवन बदल जाता है, वे रात के समय और बिजली-चालित उपकरणों का उपयोग करके अपने समय और श्रम का बेहतर उपयोग कर सकते हैं।
-    परिवार की महिलाओं और बुजुर्गों का जीवन आसान होता है तथा आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव होता है। बिजली की रोशनी से घर की सुरक्षा भी बढ़ती है।
-    बिजली से टी.वी., कम्प्यूटर, लेपटॉप, इंटरनेट, मोबाइल आदि सुविधाओं का उपयोग भी बढ़ता है और इससे नई पीढ़ी को बहुत लाभ मिलता है।
-    बिजली और विभिन्न उपकरणों के उपयोग से नई पीढ़ी को अनेक नए अवसर मिलते हैं, जिससे वे बेहतर शिक्षा और बेहतर कैरियर की ओर आगे बढ़ते हैं। इसलिए ‘प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना’ वास्तव में विद्युत विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक को दिलाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है, जिसमें मिली सफलता को हम ‘ऊर्जा उत्सव’ के माध्यम से व्यक्त करेंगे, ऐसी हमारी योजना है।
महिला उद्घोषक
-    माननीय मुख्यमंत्री जी, आपने अभी बिजली से बुजुर्गों की सहूलियत और सुरक्षा के बारे में कहा। संयुक्त राष्ट्रसंघ की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 में वरिष्ठ नागरिकों तथा युवाओं की संख्या लगभग बराबर हो जाएगी। ऐसे में बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए क्या कुछ नए उपाय भी किए जा रहे हैं ?
मुख्यमंत्री जी
-    आज-कल देखने में आता है कि बहुत से लोग अपने माता-पिता की जिम्मेदारी सम्हालने से कतराते हैं, जिसके कारण बुजुर्गों का जीवन कठिन हो जाता है, वे दूसरों पर आश्रित होते हैं या वृद्धाश्रम की शरण में जाने को मजबूर होते हैं।
-    कुछ प्रकरणों में तो किसी दुर्घटना या अन्य कारणों से बुजुर्ग लोग अकेले रह जाते हैं, लेकिन बहुत से ऐसे प्रकरण भी सामने आते हैं कि जब बेटे, बेटी, बहू, नाती-पोते ही अपने बुजुर्गजनों की परवाह नहीं करते।
-    सबसे पहले तो मैं यही कहना चाहंूगा कि समाज में, हर व्यक्ति के भीतर इतनी संवेदनशीलता होनी चाहिए कि वह अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी आदि के प्रति प्यार और आत्मीयता की भावना रखें।
-    बचपन में अपने परिवार के सदस्यों के प्यार, प्रोत्साहन, देखरेख और प्रेरणा के कारण ही किसी व्यक्ति का विकास हो पाता है।
-    अच्छी शिक्षा-दीक्षा, अच्छी नौकरी या अच्छे काम-धंधे के पीछे हमारे बुजुर्गों की तपस्या और दुआएं ही होती हैं। जब वे कमजोर होते हैं, तब उन्हें छोड़ें नहीं, बल्कि उनका सहारा बनंे।
-    यह बात सिर्फ सहानुभूति की नहीं है। मानवीयता तो यही है कि बुजुर्गों के प्रति आप अपना कर्त्तव्य निभाएं, लेकिन यदि नहीं निभाते हैं तो यह जान लीजिए कि वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख और भरण-पोषण के लिए अनेक कानूनी प्रावधान भी किए गए हैं।
-    आईपीसी की धारा 125 के अनुसार माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उनके बच्चों की होती है।
-    बुजुर्गों की उपेक्षा करने वाले व्यक्ति के विरूद्ध थाने में शिकायत की जा सकती है।
-    बुजुर्ग इस मामले को लेकर अदालत भी जा सकते हैं।
-    माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम, 2007 के तहत वरिष्ठ नागरिकों को भरण-पोषण के लिए यह अधिकार है कि वे अनुविभागीय दण्डाधिकारी, राजस्व के न्यायालय में, आवेदन कर सकते हैं।
-    हिन्दू दत्तक एवं रखरखाव अधिनियम-1956 की धारा 20 (1) के अनुसार निःशक्त/लाचार अभिभावक की देखरेख का दायित्व पुत्र एवं पुत्री का है, जो समाज के सभी समुदाय एवं वर्गों पर लागू होती हैं।
-    आपने नए कदम के बारे में पूछा, इसलिए मैं बताना चाहता हूं कि अभी 3 अक्टूबर 2017 को छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय, रायपुर में वरिष्ठ नागरिकों के सहायतार्थ ‘सीनियर सिटीजन सेल’ की स्थापना की गई है।
-    सीनियर सिटीजन सेल का संचालन हेल्पेज इंडिया, स्वयंसेवी संस्था एवं छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
-    इस सेल में टोल-फ्री नम्बर 1800-180-1253 तथा हेल्प लाइन नम्बर 0771-2511253 के माध्यम से सम्पर्क किया जा सकता है।
-    राज्य के सभी थानों में फैमिली काउंसिलिंग/सीनियर सिटीजन हेल्प डेस्क की स्थापना की जाएगी।
-    लेकिन इन सबके ऊपर मैं फिर एक बार कहना चाहता हूं कि अपने बुजुर्गों की सेवा को अपना सौभाग्य समझना चाहिए।
-    कानूनी उपाय या वृद्धाश्रम जाने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए।
बाल दिवस-
-    अभी आपने बुजुर्गों की चिंता की। यह संयोग है कि दो दिन बाद 14 नवम्बर को बाल दिवस भी है। इस अवसर पर मैं सभी बच्चों को बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।
-    बच्चों में भगवान बसते हैं। बच्चे मन के सच्चे होते हैं। वे गीली माटी के समान होते हैं, जिन्हें सही शिक्षा और सही संस्कार देकर हम मनचाहे आकार में ढाल सकते हैं।
-    हमने प्रदेश में बचपन को बचाने और उनका भविष्य संवारने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की है।
-    मुख्यमंत्री बाल भविष्य योजना, मुख्यमंत्री बाल हृदय सुरक्षा योजना, नानचुन शिशु सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री अमृत योजना, चिरायु योजना, बाल मधुमेह योजना, मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना, सरस्वती सायकल योजना आदि।
-    ये योजनाएं बच्चों को स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारवान बनाने में मदद कर रही हैं। मैं चाहूंगा कि बच्चों को इन योजनाओं का भरपूर लाभ मिले।

पुरूष उद्घोषक
-    श्रोताओं! आपकी प्रतिक्रियाएं हमें आपके पत्र, सोशल मीडिया- फेसबुक, ट्विटर के साथ ैडै से भी बड़ी संख्या में मिल रही हैं। इसके लिए आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद।
-    आगे भी आप अपने मोबाइल के मेसेज बॉक्स में त्ज्ञळ के बाद स्पेस देकर, अपने विचार लिखकर, 7668-500-500 नम्बर पर भेजते रहिए और संदेश के अंत में अपना नाम और पता लिखना ना भूलें।
मुख्यमंत्री जी
-    श्री योगेश्वर साहू, उमेद कुमार निषाद, भिवानी दास जांगड़े, मुकेश कश्यप, राजेन्द्र कुमार दामले, फूलचंद हलवाई, छगन लाल नागवंशी, जनक राम साहू, सुन्दर लाल केंवट, दुर्गाराम साहू, राम कुमार साहू, लाभ राम कुमटे आदि बहुत से श्रोताओं ने इस कार्यक्रम को सुनकर न केवल अपनी प्रसन्नता जाहिर की है बल्कि बहुत से सुझाव भी दिए हैं। आप सभी का धन्यवाद तथा आभार।
महिला उद्घोषक
-    और श्रोताओं, अब बारी है ‘क्विज’ की।
-    18वें ‘क्विज’ का प्रश्न था-
-    किस सन् तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है ?
-    इसका सही जवाब   (A) 2022

-    सबसे जल्दी जिन पांच श्रोताओं ने सही जवाब भेजे हैं, उनके नाम हैं-


1.    सरोजनी रजक, ग्राम लक्षणपुर, जिला बलौदाबाजार
2.    श्री हरिशंकर दास, ग्राम कोटसारी, जिला बलरामपुर
3.    डामिन पटेल, घोनथा, जिला दुर्ग
4.    ममता यादव, कबीरधाम
5.    प्रियंका वर्मा, मोतीनगर, रायपुर
पुरूष उद्घोषक
-    और श्रोताओं अब समय है 19वें क्विज का, सवाल है-
-    मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना किस बीमारी से इलाज के लिए है?
-    इसका सही जवाब    (A)
   हार्ट डिसीज
                           (B)
डायबिटिज
इनमें से कोई एक है।
-    अपना जवाब देने के लिए, अपने मोबाइल के मैसेज बॉक्स में QA
लिखें और स्पेस देकर A या B जो भी आपको सही लगे, वह एक अक्षर लिखकर 7668-500-500 नम्बर पर भेज दें। साथ में अपना नाम और पता अवश्य लिखें।
-    श्रोताओं, आप सब ‘रमन के गोठ’ सुनते रहिए और अपनी प्रतिक्रियाआंे से हमें अवगत कराते रहिए। इसी के साथ आज के अंक का हम यहीं समापन करते हैं। अगले अंक में 10 दिसम्बर को होगी आपसे फिर मुलाकात। तब-तक के लिए दीजिए हमें इजाजत। नमस्कार।