पुरूष उद्घोषक
         

  • श्रोता हो नमस्कार।
  • आकाशवाणी कर विशेष प्रसारण ‘रमन के गोठ‘ में हमन जम्मो श्रोता मनकर हार्दिक     स्वागत करथन, अभिनंदन करथन। कार्यक्रम कर 26 वीं कड़ी बर आकाशवाणी कर     स्टूडियो में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी पधाएर चुकिन हैं।
  • डॉक्टर साहेब नमस्कार! बहुत-बहुत स्वागत हवे राउर ए कार्यक्रम में।

मुख्यमंत्री जी            

  • मोर स्वागत करे बर धन्यवाद। वास्तव में धन्यवाद कर पात्र छŸाीसगढ़ कर जनता हवे, जेहर हर महिना दूसरा इतवार कर इंतजार करेल आउ ए कार्यक्रम  ला सुईन के मोला     अपन प्रतिक्रिया भेजेल।-  
  • मैं जम्मों श्रोता मन कर हार्दिक स्वागत करथों आउ अभिनंदन करथों, काबर कि राउर  मन के रूचि आउ प्रेरणा ले ए कार्यक्रम हर कड़ी दर कड़ी आगु बढ़त जाथे।

महिला उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, बितल महिना जब रउरे ए कार्यक्रम में आए रहेन, ते घनी रउरे     समर्थन मूल्य मंे धान बेचवईया किसान भाई मन ला बोनस देहे कर घोषणा करे रहेन,     जेकर पूरा प्रदेश में किसान भाई आउ उनकर परिवारजन दिल ले स्वागत करे रहिन। ए     धाएर जब रउरे आए ही तब बोनस वितरण कर शुरूआत होए चुकिस है। हर जिला में     ‘बोनस तिहार‘ मनाल जाथे। धान के बोनस कर का आशय हवे आउ एकर ले किसान     मन ला का लाभ होही ?

मुख्यमंत्री जी

  • धान सैकड़ों बछर ले छŸाीसगढ़ कर किसान मन के आय कर मुख्य जरिया हवे आउ     धान हमर बर अबगा फसल ना लागे बल्कि ए हमर सांस्कृतिक विरासत ले जुड़ल हवे।
  • एकर बाद भी तब प्रदेश में धान खरीदेकर उचित बेवस्था नई करल गए रहिस। रउरे मन     देखब कि बछर 2000-2001 में राज्य में सरकार बने कर बाद ओघनी पहिला धाएर     लगभग 4 लाख 63 हजार मीट्रिक टन धान खरीदी होईस आउ राज्य गठन कर बाद     तीन बछर में औसतन 10 लाख मीट्रिक टन धान खरीदल गईस। जबकि हमन धान     खरीदी कर बेवस्था ला सुचारू बनाएन।
  • हर बछर अगर 2003-04 के बाद देखब तो 2017 आत-आत औसतन 60 ले 70 लाख     मीट्रिक टन धान खरीदेन बछर 2013-14 में 78 लाख मीट्रिक टन ले बगरा धान खरीदे     कर कीर्तिमान बनाएन।
  • बछर 2003 आउ 2004 ले अगर रउरे देखब तो बछर 2016-17 तक 6 करोड़ 91 लाख     59 हजार मीट्रिक टन धान के खरीदी करत अब तक किसान मन ला लगभग 75 हजार     करोड़ रूपिया कर भुगतान, धान कर कीमत के रूप में करल गईस।
  • हमन खरीफ 2016-17 में समर्थन मूल्य उपर लगभग 69 लाख मीट्रिक टन धान किसान     मन ले खरीदेन, जेकर उपर 300 रूपिया प्रति क्विंटल बोनस देहे कर निर्णय लेहेन। ए     नियर किसान मनला लगभग 2100 करोड़ रूपिया कर बोनस देहल जाथे।
  • मैं किसान मन ला एकर बर बहुत-बहुत बधाई देहूँ कि किसान मेहनत करेल, परिश्रम     करेल, घाम में, बरखा में, जाड़ा में आउ ओकर पसीना कर एक-एक बूँद ले, धान कर     एक-एक दाना उपजेल।
  • धान कर कीमत निश्चित रूप ले उनकर परिश्रम कर कीमत आउ ओमे जो लागत लगेल,     ओ लागत ले कहीं न कहीं ओला लगेल कि ओके अगराहा राशि भेंटाए, बोनस कर रूप     में आउ हमन न केवल 2013-14 में किसान मन ला 2 हजार 434 करोड़ रूपिया कर     बोनस देहेन। बल्कि 2015 में हमन सूखा राहत में लगभग 2 हजार करोड़ रूपिया कर     सहायता राशि देहेन।
  • खरीफ 2016-17 कर बोनस 2100 करोड़ रूपिया किसान मन ला देहे बर ‘ बोनस     तिहार‘ कर आयोजन करल गईसे।
  • आगामी बछर 2017-18 बर भी हमन कहे हन कि बोनस 2018-19 में देहल जाही।     एकर तरह ले किसान मन कर बेहतरी बर।
  • एगोट खुशखबरी की आएज अगर किसान जो धान बेचथे, समर्थन मूल्य 80 रूपिया बाढ़े     कर बाद आउ 300 रूपिया बोनस मिले कर बाद किसान मन ला धान कर कीमत 1890     रूपिया मने लगभग 1900 रूपिया प्रति क्विंटल किसान मन ला मिलही।
  •  ए धाएर अकाल कर फेर छाया हवे। प्रदेश कर 96 तहसील मन ला सूखाग्रस्त घोषित     करल गईसे। जेकर ले राहत देहे कर उपाय भी हमन शुरू करे हन।
  • ए परिस्थिति में 2100 करोड़ रूपिया के बोनस, जब हमर किसान भाई मन कर घरे     जाही तो न केवल ए साल कर दिवाली खुशी ले मनाए पाहीं बल्कि सूखा ले लड़े आउ     आगु कर काम कर योजना बनाए में अपन आप ला सक्षम पाहीं।
  • किसान मन कर घरे पईसा आए ले घर में मांगलिक काम होही, किसान अपन बेटा-बेटी     मन कर शादी-बियाह कईर सकहीं आउ जरूरी समान खरीदहीं, जरूरी निर्माण कार्य     करहीं ए नियर किसान आउ गांव के विकास होही।
  • मैं माननीय प्रधानमंत्री जी ला एकर बर आभार व्यक्त करना चाहथों कि उनकर आशीर्वाद     ले ही राज्य सरकार ला ए निर्णय लेहे के शक्ति मिलिस।

पुरूष उद्घोषक

  • डॉ. साहेब, का बोनस कर बेवस्था अबगा धान बर हवे? प्रदेश में ढेरे जगहा में तो धान     नई होएल अईसा स्थिति में ओ अंचल कर किसान मन बर रउरे का कस मदद करत ही ?

मुख्यमंत्री जी

  • छत्तीसगढ़ कर मैदानी इलाका में तो धान कर खेती होएल ज्यादातर, बाकी हमन जब दक्षिण आउ उŸार कती बढ़ब, एक कती तो पूरा बस्तर संभाग ला लेई चाहे सरगुजा संभाग ला लेई, ओमन बर लघु वनोपज आय कर प्रमुख साधन होएल। आउ बस्तर कर बात मैं अगर शुरू करों तो बस्तर में तेन्दूपत्ता संग्रहण उनकर आय के सबले रोंट साधन     हवे। 14-15 लाख लोग कर जिनगी तेन्दूपत्ता कर संग्रहण ले चलेल।
  • तेन्दूपŸाा संग्रहण के मजदूरी दर मात्र 350 रूपिया रहिस जेला बढ़ाए के हमन 1800     रूपिया कइर देहेन।
  • बछर 2004 ले 2017 तक अगर 1 हजार 904 करोड़ रूपिया तेन्दूपŸाा कर संग्रहण में     पारिश्रमिक मिलिस तो ओही  अवधि में 2004 ले 2015 तक 1 हजार 223 करोड़ रूपिया     बोनस भी देहल गईस।
  •  मने जेतना राशि संग्रहण बर ओमन ला देथन, लगभग ओतने राशि हमर तेन्दूपŸाा कर     बोनस के रूप में मिलेल। बोनस अबगा धान बर नई है, बोनस तेन्दूपŸाा बर भी देहल     जाएल। एकरे संगे हमन उनकर बेहतर बेवस्था बर तेन्दूपŸाा संग्राहक बर अईसा योजना     बनाएन जे उनकर सोच में बदलाव लाने बर है, उनकर जीवन में एगोट बेहतरी बर हवे।
  • जईसे चरन-पादुका देना। तेन्दूपŸाा संग्राहक बिहाने उइठ के 4 बजे तेन्दूपŸाा टोरे     जाएल, ओकर गोड में कंटा गड़ेल। ओ कंटा कर बाद घाव हो जाएल, कए धाएर गोड़     काटे कर जरूरत पड़ेल।
  • एक छोटे अकन काम चरन-पादुका 14 लाख झन ला देहे ले ए असर होईस है कि     पिछला 8-10 साल में जो गोड़ कटे के एम्पुटेेशन के जो घटना होत रहिस, काटे कर     जरूरत पड़त रहिस, ओेमे कमी आईस है। आउ चरन-पादुका कर उपयोग करना शुरू     कईर देहिन हैं। एगोट परिवर्तन उनकर विचार में आईस है।
  • साड़ी ओमन ला देथन, उनकर बीमा बर राशि हवे। उनकर बच्चा मन ला मेडिकल     कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, आईटी आई मंे, पॉलीटेक्निक में अगर पढ़ना है तो ओमन     ला छात्रवृŸिा  भी देथन, फीस कर बेवस्था भी होएल। ओमनकर बेटी मन बर कन्यादान     योजना, तेन्दूपŸाा संग्राहक मनबर निःशुल्क शादी कर योजना होएल।
  • एक प्रकार ले तेन्दूपŸाा उनकर जीवन कर हिस्सा हवे। आउ जब बोनस कर बात होएल     तो आगु बईढ़ के हमन एगोट आउ निर्णय लेहे हन कि 25 हजार आदिवासी परिवार     अईसा हवे जे संरक्षित वन मे रथें। मने ओमन ला तेन्दूपŸाा टोरे में दिक्कत होएल, ओमन     तेन्दूपŸाा टोएर नई पाएं, ओमन ला 2 हजार रूपिया कर राशि कैम्पा ले प्रति परिवार हर     साल देथन ताकि तेन्दूपŸाा टोरे ले जो ओमनला आमदनी होतिस ओकर भरपाई हमन     करेकर प्रयास करथन।
  • प्रदेश में ढेरे संख्या में वनवासी सरई बिहन, हर्रा, कुसुमी लाख, रंगीनी लाख, चिरौंजी,     अमली, महुआ, गुठली कर संग्रह ले अपन आजीविका चलात हैं। ए परिवार मनला सुघर     आस देवाए बर हमन एमें लघु वनोपज के खरीदी कर न्यूनतम समर्थन मूल्य ए जो     मिनिमम सपोर्ट प्राइज, जब हमन धान कर बात करथन, गेहूँ कर बात करथन तो वन     क्षेत्र में रहे वाला वनवासी भाई बर तो एही उनकर सबकुछ हवे, एकरे ले उनकर शादी     बियाह होएल। ओकरे ले घर आजीविका चलेल। जब तक मिनिमम सपोर्ट प्राइज तय नई     करब तब तक व्यापारी ओकर लाभ लेथें आउ ए पूरा लघु वनोपज, औने-पौने दाम में     बेसाथे हमन सबकर बर न्यूनतम समर्थन मूल्य करेन आउ एला करे ले लगभग 100     करोड़ रूपिया वनवासी मनला मिलथे आउ एगोट तय कीमत होए जाए ले ओकर से     नीचे ओ चीज नई बिक सके।
  • आदिवासी क्षेत्र में धान कर संगे संग मकई कर खेती में भी जोरदार वृद्धि होईसे।
  • बिŸाल डेढ़ दसक में 5 लाख क्विंटल मकई खरीद के 40 करोड़ रूपिया कर भुगतान     करल गईसे।
  • प्रदेश में आएज 4 गोट शक्कर कर कारखाना हवे, जेहर सहकारी क्षेत्र कर हवे आउ     करीब ढाई लाख ले बगरा किसान सहकारी शक्कर कारखाना कर सदस्य बनिन हैं, ओ     मन ला किसान मन जईसा, जईसे हमन धान बर देहेन, जईसे लघुवनोपज पर देथन,     गन्ना किसान मन ला भी 50 रूपिया प्रति क्विंटल कर दर ले बोनस देथन।
  • ए नियर छŸाीसगढ़ कर समाज में जहां-जहां अलग प्रकार के खास तरह के खेती     होएल, ओमन ला बोनस देहे कर काम के हमन शुरूआत करे हन आउ एकर किसान     मनकर अर्थव्यवस्था में ओमन के बहुत लाभ मैं देखथों।

महिला उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी रउरे कई धाएर कहे ही कि किसान मन कर आय बढ़ाए कर     ओमन कर अबगा धान कर भरोसा में रहना उचित नई है। रउरे बिŸाल 14 बछर में     अईसा कोन सा उपाय करे ही, जेकर ले किसान मन ला आय कर आने साधन मिल     सके ?

मुख्यमंत्री जी

  • राउर सवाल कर आधा जवाब तो मैं आगुए दे देहे हों।
  • रउरे के ए जाएन के खुशी होही कि छŸाीसगढ़ धान कर कटोरा तो हवे ही, एकर संगे     संग फल, सब्जी कर टोकरा भी बईन गईस है।
  • हमर विभिन्न प्रयास से प्रदेश में दो फसली क्षेत्र में 5 लाख हेक्टेयर ले बइढ़ के साढे़ 10     लाख हेक्टेयर होए गईस है।
  • फसल सघनता 119 प्रतिशत ले बइढ़ के 137 प्रतिशत होए गईसे।
  • धान उत्पादन में 39 प्रतिशत के बढ़वार होईस है तो गेहूँ उत्पादन में 24 प्रतिशत, दलहन     आउ तिलहन उत्पादन में भी 17 प्रतिशत कर वृद्वि होईसे।
  • बिŸाल एक दसक में उद्यानिकी फसल कर रकबा 2 लाख हेक्टेयर ले बइढ़ के 8 लाख     31 हजार हेक्टेयर होए गईसे। करीब चाएर गुना उद्यानिकी फसल में बढ़ोŸारी दिखथे।     आउ उद्यानिकी फसल मन कर उत्पादन 17 लाख मीट्रिक टन ले बइढ़ के 91 लाख     मीट्रिक टन होए गईसे।
  • किसान मन ला अब ए कहब कि क्रॉप डायर्सिफिकेशन सिरिफ नारा नई है। अब हमर     इहां के किसान एला अपनात जाथें। ए जो 8-10 गुना वृद्धि रउरे देखथी उद्यानिकी में     ओहर अपन आप में चमत्कृत करे वाला है।
  • उद्यानिकी फसल मन ला बढ़ावा देेहे बर ‘कृषक उत्पादक संगठन‘ बनाल जाथे, जेमे 40     हजार ले बगरा किसान पंजीकृत होए चुकिन हैं। ए नियर हमन उद्यानिकी फसल कर     उत्पादन के संगे-संग उनकर प्रबंधन आउ विपणन कर व्यवस्था भी करथन।
  • खेती कर संग हमन डेयरी, पशुपालन, मछरी पालन ला बढ़ावा देके भी किसान मन कर     आय बढ़ाए हन।
  • 804 मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन ले बइढ़ के 1387 मीट्रिक टन होए गईसे।
  • अण्डा उत्पादन 78 करोड़ नग ले बइढ़ के 167 करोड़ नग होए गईसे।
  • मछरी उत्पादन 1 लाख 10 हजार मीट्रिक टन ले बाएढ़ के 3 लाख 75 हजार मीट्रिक     टन होए गईसे।

पुरूष उद्घोषक

  • माननीय मुख्यमंत्री जी, छŸाीसगढ़ में विभिन्न स्थान में आने-आने तरह के खेती ला     बढ़ावा देहे बर नावाँ-नावाँ उपाय करेकर खबर आत है। रउरे अईसा कुछ प्रयास कर     बारे में हमर श्रोता मन ला बताना चाहब ?

मुख्यमंत्री जी

  • मैं तो ए कहना चाहूँ कि हमर किसान भाई मन ए साबित करिन है कि अगर ओमन ला     सही समय में सही सलाह मिले तो ओ आगु बइढ़के खेती कर नावा तरीका अपनाथे।
  • कृषि लागत ला कम करे बर आउ विभिन्न तरह कर आर्थिक मदद ले किसान मन कर     क्रय शक्ति बाढ़ेले आउ किसान मन कर नावाँ सुविधा आउ उपकरण उपयोग बर मैं कुछ     उदाहरण देना चाहथों।
  • राज्य गठन घनी 1 हजार टेक्टर, हर साल खरीदल जात रहिस, अब 2009-10 कर बाद     अगर आएज तक मैं कहों तो 1 हजार ले बाएढ़ के औसतन 10 हजार ले बगरा टेक्टर     हर साल किसान भाई खरीदथें।
  • एकर ले हमर प्रदेश में किसान मन जग डेढ़ लाख ले बगरा टेक्टर होए गईसे जेहर     हमर बाढ़त क्षमता आउ कृषि विकास कर बाढ़त गति कर प्रतीक हवे।
  • सन् 2011 तक हार्वेस्टर कर संख्या नहीं के बराबर रहिस, जबकि अब 1400 हार्वेस्टर     पंजीकृत होए गईसे।
  • छŸाीसगढ़ में सिरिफ 72 हजार सिंचाई पम्प रहिस आउ आएज मैं कहथों 2017 कर     आत-आत लगभग साढ़े 4 लाख किसान भाई जग सिंचाई कर पम्प होए गईसे। हमन     अभी 51 हजार ले बगरा सोलर पम्प देथन ताकि जहाँ बिजली कर बेवस्था नई है उहाँ     भी सोलर पम्प कर माध्यम ले किसान सिंचाई कईर सकें।
  • एगोट बदलाव मैं बस्तर में देखथों, सहकारिता जईसा उपाय बस्तर में सफल होथें।     आदिवासी परिवार मन ला स्व सहायता समूह कर माध्यम ले तीन-तीन सौ काजू कर     पौधा देहल जाथें। जेला राजस्व आउ वन विभाग कर भुईया में लगाहीं। एगोट अनुमान     हवे कि एकर ले 35 करोड़ ले बगरा रूपिया कर करोबार होही।
  • केरल, कर्नाटक, गोवा में बस्तर कर काजू के बिक्री बर अनुबंध करे के तियारी भी है।
  • बस्तर में करीब 8 हजार ले  बगरा हेक्टेयर जमीन में काजू कर पौधा लहलहाथे। आउ     इहाँ काजू कर सालाना उत्पादन 6 हजार मीट्रिक टन ले बगरा होए गईसे। एकर ले     बास्तानार, बकावंड, बस्तर, तुरेनार, तोकापाल, आउ दरभा जईसा क्षेत्र में खाली पड़ल     जमीन कर अलावा जंगल ला अतिक्रमण ले छुटकारा दिलाए में मदद मिलथे।
  • काजू कर प्रसंस्करण अब बस्तर में ही करल जाही, एकर बर आसना में काजू प्रसंस्करण     कारखाना लगाल जाथे। सहकारिता मॉडल उपर आधारित ए कारखाना कर संचालन भी     स्व सहायता समूह ही करही।
  • एगोट दूसरा बदलाव बस्तर कर उदाहरण जब मैं देथों तो सीताफल ला मैं देखथों,     कांकेर जिला में कांगेरवेली फ्रेश कस्टर्ड एप्पल प्रोजेक्ट शुरू होए गईसे। सहकारी समिति     बनाए के सीताफल उत्पादक किसान मनला एकर ले जोड़ल गईसे।
  • सीताफल के पेड़ मन कर सर्वेक्षण कराल गईसे, जेमे 3 लाख 19 हजार ले बगरा निजी     आउ सरकारी जमीन में पेड़ कर चिन्हांकन करल गईसे।
  • सीताफल उत्पादक किसान मन ला जिला प्रशासन कति ले पल्प बनाए कर मशीन, फ्रिज     उपलब्ध कराल गईसे।
  • आईसक्रीम बनाए कर सीताफल कर पल्प के ऑनलाईन बुकिंग होए लगिसे।
  • आएज रायपुर के बजार में न केवल कांकेर के सीताफल कर पल्प ले आईसक्रीम बल्कि     सीताफल कर भी बिक्री बड़ा पैमाना में होथे आउ बाहिरी भी जाए लगिसे।
  • सीताफल कर छँटाई, आकर्षक पैकिंग कईर के बड़ा बजार में बेचे कर सफल बेवस्था     ओमन करिन हैं।
  • जलवायु कर अनुसार ड्रेगन फ्रूट, खजूर, चेरी, आडू, आलू, बुखारा, ऑलिव, शहतुत     जईसा फल मन कर खेती बर राष्ट्रीय बागवानी मिशन कर अंतर्गत अनुदान देहल जाथे।
  • एगोट आउ प्रयोग जैविक खेती कर हमन छŸाीसगढ़ में करथन आउ एकर भी अगुवाई     बस्तर हर ही करिसे। आएज राज्य में लगभग 23 हजार रकबा में जैविक खेती ला     बढ़ावा देहल जाथे।        
  • आउ मैं बधाई देहूँ सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर आउ गरियाबंद कर किसान मन     ला जेमन जैविक खेती बर पूरा जिला में अभियान छेड़िन हैं। ए 5 जिला मन पूरा तरह     ले जैविक जिला बनाल जाथे। जबकि आने जिला कर एक-एक गोट विकासखण्ड ला     जैविक खेती बर चुनल गईसे।
  • एगोट प्रयोग सामूहिक खेती बर करल जाथे, कोरिया जिला कर ओमझर ग्राम पंचायत में     रशीदा बानो, फुलकुंवर , रखीमुनि महिला मन मिल के अपन ही नहीं बल्कि धरती कर     किस्मत बदल देहिन हैं। जहां आगु मोटा चावल होए ले गरीबी पसरे रहिस उहें ए     महिला मन सब्जी कर खेती कईर के अपन आय कई गुना बढ़ाए लेहिन है आउ अंचल     में एगोट मिसाल बइन गईन हैं।
  • उŸार-बस्तर जिला कर चारामा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत तारस गांव कर निवासी श्री     अम्मू राम अब बेरोजगार नई हवें बल्कि सफल व्यवसायी कहलाथें। ओ महात्मा गांधी     नरेगा आउ ग्रामीण बैकयार्ड कुक्कुट पालन योजना मन कर तालमेल ले कडकनाथ मुर्गी     पालन शुरू करिन। एकर ले कड़कनाथ कर प्रजाति ला नावां जीवन मिलिस। संगे-संग     श्री अम्मू राम कर भी विकास होईस है।
  • मोके लगथे कि अबगा धान उपर निर्भरता अब नई रही। धान कर अलावा गेहूँ, मकई     आउ तिलहन, दलहन कर संगे डेयरी आउ दूसरा व्यवसाय कती छŸाीसगढ़ कर किसान     बढ़थें आउ अब ए किसान अपन सफलता कर नावां इबारत खुद अपन हाथ ले लिखथें।     खुद अपन मेहनत ले लिखथें।

महिला उद्घोषक

-    माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आवाहन करिन हैं कि     भारत के आजादी कर 75 वाँ वर्षगाँठ 15 अगस्त 2022 तक किसान मन कर आय दुगुना     करना है जे उदाहरण रउरे देहेन, ओकर ले अईसा लगथे कि छŸाीसगढ़ कर किसान     भाई-बहिन ए दिशा में आगु बढ़थें। बछर 2022 के का तस्वीर होही, ए संबंध में राउर     विचार जाने बर हमर श्रोता काफी उत्सुक हवें।
मुख्यमंत्री जी
-    हमन बहुत गंभीरता ले चिंतन कईर के प्रदेश ला तीन अलग जलवायु क्षेत्र में विभाजित     करेन आउ ओकर बर कार्य योजना बनाए हन, जमीन कर विशेषता कर अनुरूप बिहन     चयन करल गईस आउ किसान मन ला ओकर बर प्रशिक्षण देहल गईस।
-    ए पूरा बात ले हमन कहि सकत हन कि किसान मन कर न केवल टर्न ओव्हर बढ़िसे     बल्कि वर्तमान में कृषि आउ संबंधित जे बजार मूल्य 44 हजार करोड़ रूपिया है एगोट     रोंट लक्ष्य बनिसे। ए सब उपाय ला देखत हमन ओला 2022 तक 44 हजार करोड़     रूपिया ले बढ़ाए के 87 हजार करोड़ रूपिया कर टर्न ओव्हर करना चाहथन। यानि कृषि     आउ संबंधित क्षेत्र कर टर्न ओव्हर दुगुना ले बगरा होए जाही।       
-    खेती किसानी कर संस्कृति हमर ग्रामीण जिनगी में कए गोट रंग भरिसे, जेकर आनंद ही     अनोखा हवे। एक आनंद ला दुई लाईन में बताना चाहूँ -
        महर-महर महमहावत हवे, धनहा खेत के माटी हर,
        सुवा ददरिया गावत हवे, खेत हारिन के सांटी हर।
        महतारी भुईया ले हमर, धान पाके महल बनाबो,
        फोर के तरिया खेत पलोबो, सोन असन हम धान उगाबो।
-    एसांे ‘बोनस तिहार‘ ले गांव-गांव में दिवाली कर पहिले ले दिवाली शुरू होए गईसे।
-    ए उत्साह आउ जोश कर उपयोग हमर किसान भाई भावी योजना बनाए बर स्वच्छता     आउ स्वास्थ्य बर भी करहीं।
-    दिवाली में चीनी पटाखा, चीनी बिजली कर समान मन कर उपयोग झिन करें।
-    गांव में बनल दीया आउ माटी कर सामान के उपयोग करें।
-    अपन चारों कती साफ-सफाई राखें आउ कोनो तरह के प्रदूषण चाहे रासायनिक प्रदूषण     होए चाहे आने काहीं आउ।
-    जो गांव अभी ओडीएफ नई हैं ओला तेजी ले खुला में शौचमुक्त बनाना है। एकरे संग     सफाई ले रहें आउ गंदगी नई करे के आदत भी डालना है। काबर की स्वच्छता आउ     सेहत ले ही हमर समृद्धि टिकाऊ बनेल। नरक-चौदस में शौचालय में दीया राखे कर     हमर पुराना परम्परा हवे ओला जिन्दा करी।
-    जम्मों किसान भाई-बहिन मन ला अवईया तिहार, करवाचौथ, धनतेरस, देवारी, गोवर्धन     पूजा, मातर, भाईदूज, एकादशी जम्मों तिहार कर ढेरेच बधाई आउ बहुत-बहुत     शुभकामना।
महिला उद्घोषक
-    श्रोता हो! राउर प्रतिक्रिया हमन ला राउर पत्र, सोशल मीडिया, फेसबुक, ट्विटर कर संगे     एसएमएस ले भी बड़ा संख्या में मिलथे एकर बर रउरे मन ला बहुत-बहुत धन्यवाद।
-    आगु भी रउरे अपन मोबाईल कर मैसेज बॉक्स में आरकेजी कर बाद स्पेस लेके अपन     विचार लिखके 7668-500-500 नम्बर में भेजत रही आउ संदेश कर आखिरी में अपन     नाम पता लिखना झिन भुलाब।
मुख्यमंत्री जी
-    मैं धन्यवाद देना चाहथों रविन्द्र भाटिया, खूबचंद सिन्हा, विनोद मून, अब्दूल फहीम खान,     भूपेन्द्र सेन, बी.डी. महंत, जवाहर सिन्हा, आरती साहू, सोमेश सिन्हा आउ बहुत सारा     श्रोता मन ए कार्यक्रम ला सुइन के अपन न केवल प्रसन्नता जाहिर करिन है आउ बहुत     सुझाव देहिन हैं। राउर सब झन के धन्यवाद आउ आभार।
-    राउर सुझाव मन ले मोला प्रेरणा मिलेल। रउरे सब झनला फेर एक धाएर धन्यवाद।
पुरूष उद्घोषक
-    आउ श्रोता हो, अब बेरा हवे क्विज कर।
-     सत्रहवाँ क्विज कर प्रश्न रहिस -
-    पं. दीनदयाल उपाध्याय शैक्षणिक परिसर, स्याहीमुड़ी कोन जिला में है ?
-    एक सही जवाब (बी)    कोरबा
-    सबले हालु जे पांच श्रोता मन सही जवाब भेजिन हैं ओमन कर नाम हवे -
    1.    श्री अभिजीत कुर्रे, छुरीकला, जिला कोरबा
    2.    श्री लखन वासनिक, रायपुर,
    3.    श्री राजेश विश्वास, कांकेर
    4.    श्री सन्नी खुंटे, ग्राम लवन, जिला बलौदाबाजार
    5.    श्री यशवंत साहू, सोनडोंगरी जिला रायपुर
महिला उद्घोषक           
-    आउ श्रोता हो अब बेरा हवे 18 वाँ क्विज कर, सवाल हवे -
-    कोन सा सन तक किसान मन कर आय दुगुना करे कर लक्ष्य हवे ?
-    एकर सही जवाब (ए)      2022    (बी)    2025
-    एमे से कोई एक हवे।
-    अपन जवाब देहे बर, अपन मोबाईल कर मैसेज बॉक्स में क्यूए लिखी आउ स्पेस देके ‘ए‘     चाहे ‘बी‘ जो भी रउरे के सही लगे, जो एक अक्षर लिखके 7668-500-500 नम्बर में     भेज देई। संग में अपन नाम आउ पता जरूर लिखी।
-    श्रोता हो, रउरे ‘रमन के गोठ‘ सुनत रही आउ अपन प्रतिक्रिया ले हमन ला अवगत     करात रही। एकरे संगे आएज के अंक कर हमन इहें समापन करथन। अगला अंक में 12  नवम्बर के होही राउर मन से फेर भेंट। तब तक बर देई हमन ला विदा नमस्कार।