रायपुर : बुनकर सहकारी समितियों से हर महीने  19.50 लाख मीटर कपड़ा तैयार कराने के निर्देश 

इस वर्ष जिले को दिया गया 30 करोड़ नग कोसा उत्पादन का लक्ष्य
ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा

रायपुर 31 जुलाई 2017

 ग्रामोद्योग मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने आज यहां मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की राज्य स्तरीय बैठक लेकर काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने शासकीय वस्त्र प्रदाय योजना के तहत बुनकर सहकारी समितियों से हर महीने 19 लाख 50 हजार मीटर कपड़ा तैयार कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। श्री मोहले ने स्कूलों में लगने वाले गणवेश कपड़ों की बुनाई प्राथमिकता से कराने और बच्चों के गणवेश की सिलाई गणुवत्ता पूर्ण और पेन्ट-शर्ट की सही साईज सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। इसके लिए शिक्षा विभाग से समय पर पेन्ट-शर्ट की साइज प्राप्त कर ले। प्रदेश में कोसा कपड़ों की मांग को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष जिलों को 30 करोड़ नग कोसा उत्पादन का लक्ष्य दिया गया। बैठक में नेसर्गिक एवं डाबापालित कोसा उत्पादन के लिए जिले का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया। प्रदेश में कोसा उत्पादन की लक्ष्य पूर्ति के लिए वन विभाग के सहयोग से कैम्पा मद से ज्यादा से ज्यादा कोसा प्रगुणन केम्प आयोजित करने, हरियर छत्तीसगढ़ के तहत अधिक से अधिक पौध रोपण करने और नैसर्गिक वनों में कोसा तितलियां छोड़ने के निर्देश दिए गए। श्री मोहले ने प्रदेश में उत्पादित कोसे को राज्य शासन द्वारा निर्धारित दर पर सबसे पहले पंजीकृत बुनकरों को विक्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामोद्योग नीति के तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने और खादी कपड़ों को बढ़ावा देने के लिए विभागीय अधिकारियों को गम्भीरता से काम करने कहा। उन्होंने महासमुंद जिले के बसना-सरायपाली क्षेत्र में बुनकर सहकारी समितियों की सुविधा के लिए हाथकरघा का कार्यालय सरायपाली में स्थापित करने और गरियाबंद में संचालित बांस शिल्प परियोजना के तहत वहां के बांस शिल्पियों को पर्याप्त मात्रा में बांस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में श्री मोहले ने हस्तशिल्पों और माटी शिल्पियों का सर्वे कर उनका डाटाबेस तैयार करने और खादी बोर्ड की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रमे के तहत बैंकों से समन्वय कर अधिक से अधिक लोगों को स्वरोजगार हेतु मार्जिंग मनी स्वीकृत करने के निर्देश दिए। श्री मोहले ने प्रदेश में कम्बल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए चार नये कम्बल प्रोसेसिंग मशीन खरीदने का प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन बुनाई  प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित बुनकरों को हाथकरघा (लूम) और धागा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
 बैठक में ग्रामोद्योग विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने प्रस्तुतिकरण के जरिये विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य शासन के सहयोग से राजनादगांव जिले के विकासखण्ड छुरिया के ग्राम आमगांव में चार करोड़ पांच लाख की लागत से कम्बल प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की गई है। कम्बल प्रोसेसिंग यूनिट का कार्य मार्च 2016 से शुरू किया गया। अब तक एक लाख 59 हजार नग कम्बल और लगभग सात हजार मीटर ऊलन ब्लेजर का प्रोसेस कराया जा चुका है। इसके पहले पानीपत हरियाणा से प्रोसेसिंग कार्य कराया जाता था। राज्य में 16 हजार 667 करघों पर लगभग 70 हजार बुनकर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से संलग्न है। वर्ष 2016-17 में बुनकरों को लगभग 50 करोड़ रूपए का पारिश्रमिक वितरण किया गया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 2016-17 में 605 ग्रामोद्योग इकाईयों के लिए 14 करोड़ 85 लाख रूपए का अनुदान दिया गया। इससे पांच हजार 392 लोगों को रोजगार मिला। उन्होंने बताया कि माटीकला बोर्ड द्वारा तीन हजार 167 माटी शिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चाक दिया गया है। बैठक में ग्रामोद्योेग से संबद्ध रेशम, हाथकरघा, हस्तशिल्प, माटीकला और खादी-ग्रामोद्योग बोर्ड के अधिकारियों सहित सभी जिला अधिकारी उपस्थित थे।


क्रमांक-1852/काशी/फत्ते
 


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