रायपुर : प्रदेश के 27.63 लाख ग्रामीणों को मिली 33 हजार  वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्रों की देखभाल की जिम्मेदारी

इस वर्ष तेन्दूपत्ता श्रमिकों को मिला
करीब 308 करोड़ रूपए का पारिश्रमिक

प्राथमिक वनोपज समितियों में 17.10 लाख मानक बोरा पत्तों का संग्रहण

      रायपुर, 12 अगस्त 2017

 राज्य में इस वर्ष 17 लाख 10 हजार मानक बोरा तेन्दूपत्ते का संग्रहण हुआ है। इसके लिए संग्राहकों को 1800 रूपए प्रति मानक बोरे की दर से 307 करोड़ 80 लाख रूपए का पारिश्रमिक दिया गया है। प्रदेश के वन क्षेत्रों में रहने वाले 13 लाख से अधिक परिवारों को 901 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के जरिए प्रदेश सरकार द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण के साथ ही अन्य लघु वनोपजों के संग्रहण कार्य में  स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त रोजगार मिल रहा है।
वन मंत्री श्री महेश गागड़ा ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ की वन सम्पदा को वन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की आजीविका से जोड़कर उनकी आर्थिक बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। श्री गागड़ा ने बताया कि राज्य में वनों की सुरक्षा, उनकी देखभाल और उनके विकास में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के लिए सात हजार 887 वन प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है, जिनमें 27 लाख 63 हजार सदस्य शामिल हैं। इन सदस्यों में महिलाओं की संख्या 14 लाख 36 हजार है। राज्य में लगभग 20 हजार गांव है। संयुक्त वन प्रबंधन योजना के तहत इनमें से वन क्षेत्रों की सीमा के पांच किलोमीटर भीतर स्थित लगभग 11 हजार गांवों में 7887 वन प्रबंधन समितियों को प्रदेश के कुल वन क्षेत्रफल का 55 प्रतिशत अर्थात करीब 33 हजार 190 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्रों में वनों के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें लघु वनोपजों के प्रसंस्करण कार्यों में भी रोजगार दिया जा रहा है। 
वन मंत्री श्री महेश गागड़ा ने आज यहां बताया कि प्रदेश के दस हजार से अधिक संग्रहण केन्द्रों में तेन्दूपत्ता सहित अन्य लघु वनोपजों के संग्रहण की व्यवस्था की गई है। यह कार्य छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ की देख रेख में 31 जिला यूनियनों के अंतर्गत 901 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों द्वारा अपने सदस्यों के माध्यम से किया जा रहा है। श्री गागड़ा ने बताया कि वन विभाग द्वारा राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से तेन्दूपत्ता, कुल्लू, खैर, बबूल और भावड़ा गोंद का संग्रहण और विपणन का कार्य भी किया जा रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत इन समितियों के सदस्यों को साल बीज, हर्रा, इमली, चिरौंजी गुठली, महुआ बीज तथ कुसुमी और रंगीनी लाख के संग्रहण से भी अच्छी अतिरिक्त आमदनी हो रही है।   
उन्होंने बताया कि चालू वर्ष 2017 में इन समितियों के जरिए पिछले महीने की 31 तारीख तक एक लाख 26 हजार 424 क्विंटल साल बीज दस रूपए प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया। इसकी कीमत 12 करोड़ 64 लाख रूपए से अधिक है। इस दौरान 60 रूपए प्रतिकिलोग्राम की दर से 136 क्विंटल चिरौंजी, 20 प्रति किलोग्राम की दर से 850 क्विंटल महुआ बीज भी संग्रहणकर्ताओं से खरीदा गया। वर्ष 2016 में भी साल बीज, हर्रा, चिरौंजी, महुआ बीज, कुसमी लाख और रंगीनी लाख की खरीदी वनोपज समितियों द्वारा अपने सदस्यों से की गई थी। 
श्री गागड़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हर साल गर्मियों में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य में लगे ग्रामीणों की आमदनी बढ़ाने के लिए कई उपाए किए हैं। वर्ष 2003 में तेन्दूपत्ता शाख कर्तन की दर 22 रूपए प्रति मानक बोरा थी, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2017 में 52 रूपए कर दिया है। वहीं तेन्दूपत्ता संग्रहण दर वर्ष 2003 में केवल 450 रूपए प्रति मानक बोरा थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप चालू वर्ष 2017 में इसे बढ़ाकर 1800 रूपए प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। श्री गागड़ा ने बताया कि तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर में राज्य सरकार ने लगातार वृद्धि की है। वर्ष 2007 में 500 रूपए, वर्ष 2008 में 600 रूपए, वर्ष 2009 में 650 रूपए, वर्ष 2010 में 700 रूपए, वर्ष 2011 में 800 रूपए, वर्ष 2012 में 1100 रूपए, वर्ष 2013 में 1200 रूपए, वर्ष 2016 में 1500 रूपए और वर्ष 2017 में 1800 रूपए प्रति मानक बोरे के हिसाब से पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है।
श्री गागड़ा ने बताया कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को इसके व्यापार से प्राप्त आमदनी की 80 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में दी जा रही है। इसके अलावा 15 प्रतिशत राशि प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों को लघु वनोपजों की खरीदी, बिक्री, उनके भण्डारण और प्रसंस्करण के लिए दी जा रही है, जबकि शेष पांच प्रतिशत राशि का उपयोग घाटे वाली समितियों के घाटे की अस्थायी प्रतिपूर्ति के लिए परिक्रमण निधि के रूप में राज्य लघुवनोपज संघ के मुख्यालय में सुरक्षित रखी जा रही है। 
वन मंत्री ने बताया कि तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के मुखिया के लिए जनश्री बीमा योजना शुरू की गई है, जिसमें 12 लाख 15 हजार लोगों का बीमा किया गया है, वहीं संग्राहक परिवारों के 18 वर्ष से 59 वर्ष तक 17 लाख सदस्यों को निःशुल्क समाजिक सुरक्षा बीमा योजना में शामिल किया गया है। उन्हें अटल समूह बीमा योजना से भी जोड़ा गया है। उनके बच्चों के लिए शिक्षा प्रोत्साहन योजना वर्ष 2011-12 से शुरू की गई है। इसके अंतर्गत आठवीं से बारहवीं तक की परीक्षाओं में अंकों के आधार पर प्रत्येक प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति के सतर पर एक छात्र और एक छात्रा का चयन किया जाता है। अधिकतम अंक मिलने पर छात्र-छात्रा को दो हजार रूपए, दसवीं में अधिकतम अंक मिलने 2500 रूपए और बारहवीं में तीन हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। 

क्रमांक-2030/स्वराज्य


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