जशपुरनगर : रमन के गोठ की चौबीसवीं कड़ी का प्रसारण सुना गया : पांच हजार दिनों की सफलता का श्रेय आम जनता को- डॉ. रमन सिंह

     जशपुरनगर 13 अगस्त 2017

जशपुर जिले में रमन के गोठ की चौबीसवीं कड़ी का प्रसारण उत्साह के साथ रविवार को सुना गया। रेडियो के साथ विभिन्न समाचार चैनलों में इसके प्रसारण की व्यवस्था होने से जिले भर में इसे सुना गया। जिला मुख्यालय के जिला गं्रथालय में सामूहिक रूप से रमन के गोठ सुनने के लिए प्रोजेक्टर की व्यवस्था की गई थी। जशपुर एसडीएम श्री एस एस. दुबे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री एस.एन. पण्डा, नगर पालिका सीएमओ श्री जितेन्द्र कुशवाहा, बीईओ जशपुर श्री डी.के. यादव, गणमान्य नागरिक, अधिकारियों-कर्मचारियों, शिक्षकों, स्कूल एवं छात्रावास के विद्यार्थियों सहित बड़ी संख्या में जनसामान्य उपस्थित थे। ’रमन के गोठ’ को सामूहिक रूप से सुनने के लिए जनपद एवं नगर पंचायतों सहित अन्य स्थानों में व्यवस्था की गई थी। लोक शिक्षा केन्द्रों में भी प्रसारण को सुना गया। नवसाक्षरों सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिकों सहित ग्रामीणजनों ने लोक शिक्षा केन्द्रों में रमन के गोठ को सुना। यहां लोगों ने उत्साहपूर्वक मुख्यमंत्री की बातंे सुनी। जिले के सभी अनुभाग और सभी विकासखण्ड के क्षेत्रों में नागरिकों ने टेलीविजन एवं रेडियो पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की वार्ता ’रमन के गोठ’ को बड़े उत्साह एवं उमंग से सुना। नगर एवं गांव में महिलाओं, पुरूषों, बुजुर्गो के अलावा बच्चों ने भी प्रदेश के मुखिया की वार्ता को सुना। सभी ने 20 मिनट के कार्यक्रम ’रमन के गोठ’ का प्रसारण धैर्यपूर्वक सुना।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री हर महीने के दूसरे रविवार को सबेरे 10.45 से 11.05 बजे तक टी.व्ही एवं आकाशवाणी के जरिये राज्य की जनता के साथ अपने विचारों को साझा करते हैं। डॉ. सिंह ‘रमन के गोठ’ शीर्षक इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की सामाजिक-सांस्कृतिक और प्रशासनिक गतिविधियों तथा अपनी सरकार की विकास योजनाओं के बारे में वार्तालाप शैली में जनता को जानकारी देते हैं। उनका यह अभिनव कार्यक्रम भेंटवार्ता पर आधारित होता है, जो राजधानी रायपुर सहित राज्य में स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों और विभिन्न न्यूज चैनल और सभी एफएम रेडियो में भी प्रसारित होता है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपनी सरकार के पांच हजार दिनों की सफलता का श्रेय आम जनता को दिया है और उनके प्रति आभार व्यक्त किया है।
डॉ. रमन सिंह ने पांच हजार दिनों की महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने वर्ष 2003 से अब तक सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा-तब राज्य का बजट केवल सात हजार करोड़ था, आज 80 हजार करोड़ से ज्यादा का हो गया है। प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आमदनी 12 हजार रूपए से बढ़कर 82 हजार रूपए तक पहुंच गई है। शासन-प्रशासन की सेवाओं को जनता के नजदीक ले जाने के लिए 11 नये जिलों का निर्माण किया। अब राज्य में 27 जिले हो गए हैं। प्रदेश मे तहसीलों की संख्या 98 से बढ़कर 150, नगर पंचायतों की संख्या 49 से बढ़कर 112, नगर पालिकाओं की संख्या 28 से बढ़कर 43 और नगर निगमों की संख्या दस से बढ़कर 13 हो गई है। डॉ. सिंह ने कहा-जन-धन योजना, मुद्रा योजना, स्वच्छता अभियान, उज्ज्वला योजना सहित प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ अग्रणी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने चार विशेष प्राधिकरणों का गठन किया है। सरगुजा और उत्तर क्षेत्र, बस्तर और दक्षिण क्षेत्र विकास प्राधिकरण, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं पिछड़ा क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन करके आदिवासियों, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ विकास का रास्ता बन गया है। इन चारों प्राधिकरणों की बैठक एक ’मिनी कैबिनेट’ की तरह होती है, जहां समस्याओं के निराकरण के लिए जनप्रतिनिधि और अधिकारी मिलकर निर्णय लेते हैं।
शिक्षण संस्थाओं की संख्या में असाधारण वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षण संस्थाओं की संख्या में असाधारण वृद्धि हुई है। प्राथमिक स्कूलों की संख्या 13 हजार से बढ़कर 38 हजार, मिडिल स्कूलों की संख्या पांच हजार से बढ़कर 16 हजार 500, हाईस्कूलों की संख्या 900 से बढ़कर 2600 और हायर सेकेण्डरी स्कूलों की संख्या 600 से बढ़कर 3715 तक पहुंच गई है। बच्चों का ड्रापआउट रेट में 11 प्रतिशत से घटकर सिर्फ एक प्रतिशत रह गया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांति हुई है। वर्ष 2003 में एक भी राष्ट्रीय स्तर का संस्थान नहीं था।
उन्होंने कहा-यदि राज्य नहीं बना होता तो, छत्तीसगढ़ को न तो आईआईटी मिलता और न ही ट्रिपल आईटी। प्रदेश में एम्स और आईआईएम की स्थापना हो गई है। सरकारी विश्वविद्यालयों की संख्या तीन से बढ़कर 13 हो गई। सरकारी कॉलेज जो सिर्फ 116 थे। आज 224 तक पहुंच गए हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या दो से बढ़कर दस, इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 50, कृषि महाविद्यालयों की संख्या 4 से बढ़कर 21, पालीटेक्निक संस्थाओं की संख्या दस से बढ़कर 51,आईटीआई की संख्या 61 से बढ़कर 176 और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के बच्चों के लिए छात्रावासों और आश्रम शालाओं की संख्या 1837 से बढ़कर 3250 हो गई है।
बिजली का उत्पादन बढ़ा
मुख्यमंत्री ने बिजली उत्पादन और विद्युत अधोसंरचनाओं के विकास में राज्य की उपलब्धियों का भी ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बिजली उत्पादन 4732 मेगावाट से बढ़कर 22 हजार 764 मेगावाट तक पहुंच गया है। अति उच्च दाब बिजली उपकेन्द्रों की संख्या 28 से बढ़कर 96 हो गई है। ट्रांसमिशन लाईनों की संख्या 5205 सर्किट किलोमीटर से बढ़कर 11522 सर्किट किलोमीटर तक पहुंच गई है। राज्य की बिजली ट्रांसमिशन क्षमता 1350 मेगावाट से बढ़कर 6350 मेगावाट और विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या 18 लाख से बढ़कर 42 लाख हो गई है। डॉ. रमन सिंह ने बताया कि राज्य में बिजली की प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक खपत इन पांच हजार दिनों में 350 यूनिट से बढ़कर 1724 यूनिट हो गई है, जो देश में सर्वाधिक है। हम प्रदेश के किसानों को सिंचाई पम्पों के लिए सालाना 7500 यूनिट बिजली मुफ्त दे रहे हैं। राज्य में विद्युत पम्प कनेक्शनों की संख्या 72 हजार से बढ़कर लगभग चार लाख तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा-प्रदेश में अब बिजली कटौती नहीं होती। यह भी पांच हजार दिनों की एक बड़ी उपलब्धि है।
राज्य में बिछाया जा रहा अच्छी सड़कों का जाल
डॉ. सिंह ने कहा-राज्य में अच्छी सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। विगत पांच हजार दिनों में 60 हजार किलोमीटर सड़कों, 1200 बड़े और मध्यम पुलों और 23 हजार से ज्यादा पुलियों का निर्माण किया गया है। रेल नेटवर्क को बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल पर आधारित रणनीति तैयार की गई है। विगत 150 वर्षों में राज्य में सिर्फ 1187 किलोमीटर रेल नेटवर्क बना, जबकि हम लोगों ने 1300 किलोमीटर अतिरिक्त रेल मार्ग बनाने का लक्ष्य काम शुरू कर दिया है। जल्द ही राज्य के कई जिले रेल सुविधाओं से जुड़ जाएंगे।
खाद्य सुरक्षा और धान खरीदी की व्यवस्था
 मुख्यमंत्री ने गरीबों के लिए खाद्य और पोषण सुरक्षा कानून तथा किसानों से समर्थन मूल्य नीति के तहत धान खरीदी की बेहतरीन व्यवस्था को पांच हजार दिनों की यादगार उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लगभग 59 लाख परिवारों को एक रूपए किलो चावल दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए कौशल उन्नयन का कानूनी अधिकार देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। किसानों को खेती के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों की मजदूरी 350 रूपए से बढ़ाकर 1800 रूपए कर दी गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत पांच हजार दिनों में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नये अस्पताल खुले हैं और नये डॉक्टरों की भर्ती हुई है। शिशु मृत्यु दर 76 से घटकर 41 और मातृ मृत्यु दर 407 से घटकर 221 हो गई है। प्रदेश के सभी परिवारों को स्मार्ट कार्ड के जरिए स्वास्थ्य बीमा की सुविधा देने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। महिलाओं को पंचायत चुनावों से लेकर सरकारी नौकरियों तक आरक्षण दिया गया है। महिला स्व-सहायता समूहों को विभिन्न व्यवसायों के लिए सिर्फ 3 प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा दी जा रही है। विभिन्न सरकारी योजनाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाकर महिला सशक्तिकरण का अभियान चलाया जा रहा है।

 

 


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