रायपुर : ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सेप्टिक टैंक शौचालय की अपेक्षा लीच पिट शौचालय ज्यादा उपयुक्त

     रायपुर, 23 अगस्त 2017

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए ग्रामीणों  को शौचालय का निर्माण कर उसके उपयोग करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। हितग्राही शौचालय की तकनीक का चयन स्वयं कर सकता है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लीच पिट शौचालय निर्माण के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया जाता है, जबकि सेप्टिक टैंक वाले शौचालयों के निर्माण को प्रोत्साहित नहीं करने के निर्देश भी जारी किए गए है। 
  स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में सेप्टिक टेंक वाले शौचालय को अच्छा विकल्प समझा जाता है, किन्तु ऐसा है नहीं। सेप्टिक टेंक वाले शौचालय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयुक्त विकल्प नहीं है। सेप्टिक टेंक वाले शौचालयों में जमा स्लज को पुनः उपचारित कर निपटान किया जाना आवश्यक होता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयुक्त दो लीच पिट तकनीक वाले शौचालयों में एक गढ्ढा भरने में लगभग 4 से 5 वर्ष लगते है तथा गढ्ढा भरने के लगभग 06 माह बाद मल खाद में परिवर्तित हो जाता है। वहीं एक गढ्ढा भरने पर चेंबर के माध्यम से दूसरे गढ्ढे का उपयोग किया जाता है। लीच पिट शौचालय में 01 मीटर गोलाई एवं 01 मीटर गहराई के दो गढ्ढे निर्मित किये जाते है। 
       अधिकारियों ने बताया कि सेप्टिक टेंक वाले शौचालयों में ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है, जबकि लीच पिट शौचालयों में रूरल पैन लगे होने के कारण इसमें कम पानी की खपत होती है। सेप्टिक टेंक वाले शौचालय के निर्माण में अधिक जगह व पैसा लगता है, जबकि लीच पिट वाले शौचालयों में कम जगह व कम खर्च होता है। सेप्टिक टेंक भरने के बाद उसे खाली करने में उच्च आवर्ती लागत लगती है, जबकि लीच पिट वाले शौचालय के गढ्ढे में मल खाद में बदल जाता है, जिसमें किसी प्रकार की बदबू या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक जीवाणु नहीं होते। इसमें निर्मित खाद को आसानी से कोई भी व्यक्ति निकाल कर खेत अथवा बागवानी में उपयोग कर सकता है। 
  स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारियों ने बताया कि सेप्टिक टेंक वाले शौचालय में मल का विघटन वायु की उपस्थिति में होता है इसलिए गैस पाईप की आवश्यकता होती है जबकि लीच पिट शौचालय में मल का विघटन वायु की अनुपस्थिति में होता है, इसलिए गैस पाईप की आवश्यकता नहीं होती। लीच पिट शौचालय में गढ्ढे में जुड़ाई के समय छेद छोड़े जाते है, जिसमें से मल का पानी व बदबूदार गैस को जमीन सोख लेती है। सेप्टिक टेंक में यदि बदबूदारी/जहरीली गैस निकालने के लिए गैस पाईप नहीं लगाया जाये तो या कम उंचाई का लगाया जाये तो जहरीली गैस से परिवार के सदस्यों या आसपास के रहने वालों को गंभीर नुकसान हो सकता है। उपरोक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एम.एस.एक्ट 2013 में यह प्रावधान किया गया है कि सेप्टिक टेंक/सिवर लाईन की सफाई हेतु मजदूरों का नियोजन न किया जाए। यदि ऐसा करना आवश्यक हो तो सेप्टिक टेंक का कोई भी कार्य मजदूरों द्वारा आक्सीजन मास्क एवं आवश्यक उपकरणों का उपयोग करते हुए ही किया जाये। सेप्टिक टेंक का निर्माण पक्का ही हो सकता है, वहीं लीच पिट का निर्माण स्थानीय सामग्री से भी किया जा सकता है। सेप्टिक टेंक के निर्माण हेतु कुशल मिस्त्री की आवश्यकता होती है, जबकि लीच पिट का निर्माण कोई भी व्यक्ति सरलता से कर सकता है। सेप्टिक टेंक से बदबूदार पानी आउटलेट से निकलता है, जबकि लीच पिट में सभी पानी जमीन के अंदर सोख लिया जाता है। 


क्रमांक-2216/ओम
 


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