रायपुर : राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मण्डल की बैठक

छत्तीसगढ़ में 19 हजार करोड़ से ज्यादा के खनिजों का हुआ उत्पादन

राज्य सरकार को मिला चार हजार करोड़ से अधिक का राजस्व

 खनिजों की खोज के लिए भू-वैज्ञानिक कार्यक्रमों का अनुमोदन

  रायपुर, 31 अगस्त 2017

 खनिज सम्पदा से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में  पिछले वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान ं लगभग 19 हजार 213 करोड़ रूपए के विभिन्न खनिजों का उत्पादन हुआ। इससे प्रदेश सरकार के खनिज साधन विभाग को 4141 करोड़ रूपए का राजस्व मिला। पिछले दस वर्ष में राज्य के खनिज राजस्व में लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई है। यह जानकारी आज यहां राज्य स्तरीय भू-वैज्ञानिक कार्यक्रम मंडल की 17वीं बैठक में दी गई। 
प्रदेश सरकार के खनिज साधन विभाग के सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह की अध्यक्षता में यह बैठक स्थानीय सिविल लाईन स्थित नवीन विश्राम भवन के सभाकक्ष में आयोजित की गई। खनिजों की खोज और उनके उत्खनन से जुड़े राज्य और केन्द्र सरकार के विभिन्न विभागों और विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी तथा भू-वैज्ञानिक बैठक में शामिल हुए। विचार विमर्श के बाद चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 के भू-वैज्ञानिक क्षेत्रीय कार्यक्रम को बैठक में अंतिम रूप दिया गया। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि राज्य में चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 के चूना पत्थर के लिए बलौदाबाजार जिले के सरसेनी, कठिया-पचरी-भरवाडीह क्षेत्रों में, जांजगीर-चाम्पा जिले के घुटिया में और बस्तर जिले के चपका-इच्छापुर क्षेत्र में तथा बॉक्साइड के लिए सरगुजा जिले के सरभंजा क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण-पूर्वेक्षण कार्यों का अनुमोदन किया गया। 
    खनिज साधन विभाग के सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी देश एवं राज्य के विकास में खनिजों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। खनिजों के पूर्वेक्षण एवं अतिरिक्त खनिज भंडार के प्रमाणीकरण के लिए भौमिकी संस्थाओं के संयुक्त प्रयास द्वारा राज्य में खनिज आधारित नये उद्योगों की स्थापना की जा सकती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में खनिज के विकास के लिए कार्य करने वाली एजेंसियों के बीच और अधिक समन्वय से कार्य करने की सलाह दी। श्री सिंह ने केन्द्र सरकार के नवीन संशोधित खान एवं खनिज अधिनियम 2015 के अनुसार राज्य में खनिज अन्वेषण कार्यों द्वारा नीलामी योग्य खनिज ब्लॉक शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए। 
बैठक में प्रदेश सरकार के भौमिकी और खनिकर्म संचालनालय की संचालक श्रीमती अलरमेल मंगई डी. ने बताया कि पिछले दस वर्षों में राज्य में खनिज राजस्व में लगभग छह गुना बढ़ोतरी हुई है। गौण खनिज से प्राप्त राजस्व को पंचायत एवं नगरीय निकायों में अंतरण किया गया है। इसका उपयोग अधोसंरचना विकास एवं सामाजिक विकास में किया जा रहा है। बैठक में बताया कि बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में चूना पत्थर के लिए कुकुरडीह, गुमा, बस्तर जिले के चपका क्षेत्र एवं कबीरधाम जिले में बॉक्साईट के लिए सलगी क्षेत्र में एक्सप्लोरेश का कार्य पूर्ण हो चुका है। नीलामी के लिए भौमिकी प्रतिवेदन तैयार किए जा रहे हैं। 
अधिकारियों ने आज की बैठक में बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में खनिजों की खोज तथा पूर्व से चिन्हित पूर्वेक्षण कर नीलामी योग्य ब्लॉक तैयार करने के लिए नेशनल मिनरल एक्सप्लोशन ट्रस्ट (एन.एम.ई.टी.) का गठन संशोधित खान एवं खनिज अधिनियम के तहत किया गया है। इस ट्रस्ट में 154 करोड़ रूपए का अंशदान प्राप्त हो चुका है। खान मंत्रालय भारत सरकार द्वारा रायपुर जिले के दो क्षेत्रों में चूना पत्थर और कबीरधाम जिले के दो क्षेत्रों में बाक्साइड ब्लॉक में खनिज एक्सप्लोशन निगम के माध्यम से अनुवेषण कार्यों के लिए एन.एम.ई.टी. से स्वीकृति दी गई है। यह कार्य प्रगति पर है। उन्होंने बैठक में उपस्थित भू-वैज्ञानिकों और वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि छत्तीसगढ़ में नये खनिज भंडारों के मिलने की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में कार्यरत संस्थाओं के समन्वय से नये खनिज भंडारों की खोज की जा सकती है, जो प्रदेश के औद्योगिक विकास में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि अधिकांश संस्थान लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर एवं बाक्साइट के खोज तथा पूर्वेक्षण कार्य में संलग्न है। इसके फलस्वरूप खनिजों के नये स्थल प्रकाश में आए हैं और चिन्हित खनिजों के भंडार में वृद्धि हुई है। 
    भारत सरकार के भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के उप महानिदेशक डॉ. शब्बीर हुसैन ने बताया कि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ मंे हीरे के लिए किम्बरलाइट रॉक महासमुंद जिले में, बॉक्साइट के लिए जशपुर जिले में, चूना पत्थर के लिए कबीरधाम जिले में, ग्लूकोनाईट के लिए महासमुन्द जिले में और टंगस्टन खनिज के लिए जशपुर जिले में सर्वेक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि भू-रासायनिक सर्वे कार्य बलरामपुर-रामानुजगंज, कांकेर, गरियाबंद, दुर्ग, बस्तर, सूरजपुर, जशुपर, सरगुजा, रायगढ़ और कोरिया जिले में प्रगति पर है। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जी.एस.आई.) द्वारा मांड रायगढ़ कोल फील्ड के जोबरो, टेंडूमूरी, पुरूंगा ब्लॉक तथा तातापानी-रामकोला कोयला प्रक्षेत्र के सेंदूर ब्लॉक में कार्य किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में कोयला का वृहद भंडार मिलने की अपार संभावना है। 
    बैठक में चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में छत्तीसगढ़ में विभिन्न संस्थाओं में किए जाने वाले खनिज अन्वेषण कार्य पर चर्चा की गई। भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण रायपुर यूनिट के निदेशक श्री आनंद प्रकाश राय और उपमहानिदेशक डॉ. आई.डी. आशिया, भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) के रायपुर कार्यालय के श्री बी.एल. गुर्जर सहित एटामिक मिनरल डिविजन, मिनरल एक्सप्लोरेशन कार्पोरेशन, सेन्ट्रल माइनिंग प्लानिंग एंड डिजाइन बिलासपुर, सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च बिलासपुर, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एन.एम.डी.सी.) और छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के भू-वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।    

 
क्रमांक-2330/काशी


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