राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा 8 सितम्बर तक : दो वर्षों में 616 लोगों ने किया नेत्रदान

विगत छह वर्षों में पांच लाख से अधिक लोगों ने कराया मोतियाबिंद को ऑपरेशन
ग्यारह लाख छात्र-छात्राओं को हुआ नेत्र परीक्षण

रायपुर, 04 सितम्बर 2017

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा प्रदेष में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। 25 अगस्त से शुरू नेत्रदान पखवाड़ा 08 सितम्बर तक चलेगा। पिछले दो वर्षों में 616 लोगों ने नेत्रदान किया हैं। इसमें वर्ष 2015-16 में 282 और वर्ष 2016-17 में 334 लोगों द्वारा नेत्रदान किया गया। स्वास्थ विभागों के जनहित में किए जा रहे प्रयासों के कारण मोतियाबिंद ऑपरेशन कराने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विगत छह वर्षों में पांच लाख 14 हजार 888 लोगों ने मोतियांबिंद का ऑपरेशन कराया। इसमें वर्ष 2011-12 में 88 हजार 969, वर्ष 2012-13 में 64 हजार 306, वर्ष 2013-14 में 83 हजार 926, वर्ष 2014-15 में 76 हजार 50 तथा 2015-16 में एक लाख 9 हजार 910 मोतियाबिंद के आपरेषन किये गये। वर्ष 2016-17 में 1 लाख नौ हजार 627 मोतियाबिंद के नियमित आपरेषन किये गये। इसके अतिरिक्त 11 लाख से अधिक छात्रों का नेत्र परीक्षण किया गया।  स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि प्रदेश के 21 जिलों में मोतियाबिंद के आपरेषन नियमित रूप से किये जा रहे हैं।  शेष छह जिले सुकमा, बलरामपुर, बीजापुर, सूरजपुर, बालोद तथा मुंगेली में नेत्र सहायक के माध्यम से ऑंखों की स्क्रीनिंग किया जा रहा है। ऑखों में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर नजदीक के जिलों में रिफर भी किया जा रहा है।
मोतियाबिंद पका हो तो तुरंत कराए ऑपरेशन-स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मोतियाबिंद के लक्षणों में मोतियाबिंद बढ़ती उम्र के साथ आने वाली स्वाभाविक बीमारी है। देष में कुल दृष्टिहीनता का 62 प्रतिशत भाग मोतियाबिंद के कारण ही होता है। मोतियाबिंद होने पर प्रारंभिक अवस्था में दूर कि वस्तुये धुंधली दिखाई देने लगती है। धीमे-धीमे दृष्टि कमजोर होती जाती ह,ै ऐसे लक्षण महसूस होने पर नेत्र विशेषज्ञ से मिलकर सलाह लेना चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि मोतियाबिंद पूर्णतः साध्य बीमारी है। इसका इलाज केवल शल्य क्रिया से ही संभव है। मोतियाबिंद  के शल्य क्रिया करने के लिए इसका पका होना आवश्यक नहीं है। जब कभी भी मोतियाबिंद के कारण रोजमर्रा के कार्यो में कठिनाई आने लगे, शल्य क्रिया करायी जा सकती है। शल्य क्रिया के लिए किसी मौसम विशेष की प्रतीक्षा भी नहीं करनी चाहिए।  चिकित्सकों ने बताया की मोतियाबिंद अथवा इसकी शल्य क्रिया से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसकी शल्य क्रिया अत्यंत सफल होती है और दृष्टि पुनःस्थापित हो जाता है ।

क्रमांक-2380/ओम


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