रायपुर : छत्तीसगढ़ हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकों की खरीदी में कॉलेजों-विश्वविद्यालयों को अब मिलेगी 20 प्रतिशत की छूट : उच्च शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हिन्दी ग्रंथ अकादमी प्रबंधक-मंडल की बैठक

रायपुर, 05 सितम्बर 2017

उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी के प्रबंधक-मंडल की बैठक आयोजित की गई। अकादमी के अध्यक्ष और उच्च शिक्षा मंत्री श्री पाण्डेय ने बैठक में अधिकारियों को स्नातक और स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्य पुस्तकें एवं संदर्भ पुस्तकें हिन्दी में प्रकाशित करने के लिए ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों का पैनल तैयार करने के निर्देश दिए।
    उन्होंने कहा कि विषयवार पैनल बनाकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को उसमें शामिल किया जाए। बैठक में हिंदी ग्रंथ अकादमी की प्रकाशित पुस्तकों की खरीदी में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को दस प्रतिशत के स्थान पर बीस प्रतिशत छूट देने का निर्णय लिया गया। श्री पाण्डेय ने अधिकारियों से कहा कि वे इस बारे में सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सूचित करें। उन्होंने यह भी कहा अकादमी के प्रबंधक मंडल की बैठक अब हर छह महीने में आयोजित की जाएगी। श्री पाण्डेय ने अकादमी द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों को गुणवत्ता पर विशेष रूप से बल दिया।
    प्रबंधक मंडल की आज की बैठक में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मानसिंह परमार, सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बंशगोपाल सिंह, बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शैलेन्द्र कुमार, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति प्रा. मांडवी सिंह, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जी.बी. गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी गं्रथ अकादमी  के संचालक श्री शशांक शर्मा और प्रबंधन मंडल के अन्य सदस्य उपस्थित थे।
    छत्तीसगढ़ राज्य हिंदी ग्रंथ अकादमी के संचालक श्री शंशाक शर्मा ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए हिंदी ग्रंथ अकादमी के अब तक किए गए कार्यो की जानकारी दी । उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 में छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी की स्थापना की गई। छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी गं्रथ अकादमी द्वारा अपने स्थापना वर्ष 2006-07- से वर्ष 2017-18 तक विभिन्न विषयों पर अब तक 97 पुस्तकंे प्रकाशित की गई । इनमें  56 पाठ्यक्रमों की पुस्तकें और 38 किताबें  संदर्भ साम्रगी के रूप में प्रकाशित की गयी है। तीन पुस्तकें प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर प्रकाशित की गयी है।

क्रमांक-2406/स्वराज्य

 

 


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