उत्तर बस्तर (कांकेर) : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म दिवस ‘‘सेवा दिवस‘‘ के रूप में मनाया जाएगा- मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह

किसानों को धान बोनस दीपावली से पहले हर जिले में मनाया जाएगा ‘बोनस तिहार’
रमन के गोठ की 25वीं कड़ी का रेडियो सामूहिक श्रवण कार्यक्रम माकड़ीखूना में सम्पन्न

    उत्तर बस्तर (कांकेर) 10 सितंबर 2017

 रमन के गोठ सामूहिक रेडियो श्रवण कार्यक्रम का आयोजन आज कांकेर विकासखण्ड के ग्राम माकड़ीखूना के पंचायत भवन में सम्पन्न हुआ। सामूहिक रेडियो श्रवण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के किसानों से विगत तेरह वर्षों में 06 करोड़ 91 लाख 59 हजार मीटरिक टन धान खरीद कर उन्हें सहकारी समितियों के जरिए लगभग 75 हजार करोड़ रूपए का भुगतान कर लाभान्वित किया है। उन्होंने कहा कि जब हमने सरकार की बागडोर संभाली उसके पहले छत्तीसगढ़ के किसानों से सिर्फ 05 लाख मेट्रिक धान की खरीदी होती थी। उन्हें भुगतान मिलने में भी काफी तकलीफ होती थी, लेकिन हमने कम्प्यूटर आधारित पारदर्शी व्यवस्था की है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए एक हजार 333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के अंतर्गत 1989 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदी की व्यवस्था की गई है, ताकि किसानों को अपने गांव से दूर ना जाना पड़े।
    मुख्यमंत्री डॉ. सिंह आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ की 25 वीं कड़ी में प्रदेश वासियों को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों सहित पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर राज्य में होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर छत्तीसगढ़ में भी 15 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए स्वच्छता को जनआंदोलन और गांधी जयंती को इसका प्रतीक बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि श्री मोदी ने आकाशवाणी से अपने ‘मन की बात’ में लोगों से 15 सितम्बर से दो अक्टूबर तक ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाने का आव्हान किया है। डॉ. सिंह ने कहा कि 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री श्री मोदी का जन्म दिन को हम सब मिलकर उनका जन्म दिन ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाएं। मुख्यमंत्री ने श्री मोदी के नये कार्यक्रम ‘संकल्प से सिद्धी’ में भी जनभागीदारी का आव्हान किया।  
      उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में समितियों में 78 लाख 35 हजार मेट्रिक टन धान खरीद कर किसानों को दस हजार 362 करोड़ रूपए का समर्थन मूल्य और दो हजार 374 करोड़ रूपए का बोनस दिया गया था। वर्ष 2015 में राज्य में बड़ा सूखा पड़ा था, जिसके कारण किसानों को राहत देने के उपाय किए गए थे और लगभग 1800 करोड़ रूपए से अधिक राशि उन्हें अलग-अलग मदों से दी गई थी। इस बीच किसानों के लिए अनेक कल्याणकारी निर्णय लिए गए। फसल विविधिकरण, कृषि लागत मे कमी, वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों से लाभदायक फसलों की खेती को बढ़ावा देने जैसे कई उपाय किए गए। उत्पादकता में वृद्धि के कारण प्रदेश को तीन बार चावल उत्पादन और एक बार दलहन उत्पादन पर कृषि कर्मण पुरस्कार मिला। बागवानी के क्षेत्र में शानदान उपलब्धि के कारण छत्तीसगढ़ को एग्रीकल्चर लीडरशिप एवार्ड 2017 भी प्राप्त हुआ है। राज्य में विगत तेरह वर्षो में उद्यानिकी का रकबा चार गुना और उत्पादन पांच गुना बढ़ा है।
    डॉ. सिंह ने ‘रमन के गोठ’ में कहा - इस बार जब मानसून कमजोर हुआ और प्रदेश के कुछ जिलों में सूखे के हालात पैदा हुए, तो इसकी चिंता छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक में की गई। मैं अपने शीर्ष नेतृत्व से मिलने जब दिल्ली गया तो हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने काफी संजीदगी से राज्य की स्थिति की चर्चा की और मेरे सुझाव पर सहमत हुए कि हमें छत्तीसगढ़ के किसानों को धान का बोनस देना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की संवेदनशीलता और किसानों के प्रति उनका स्नेह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने बोनस के लिए तत्काल सहमति प्रदान की और आगे बढ़कर कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में तकलीफ नहीं होनी चाहिए। उन्हें हर संभव मदद की जानी चाहिए। इस प्रकार हमने खरीफ वर्ष 2016 में खरीदे गए धान का बोनस इस दीपावली के पहले किसानों को देने का निर्णय लिया है।
    मुख्यमंत्री ने कहा - वर्ष 2016 में तेरह लाख से ज्यादा किसानों से 69 लाख 59 हजार मीटरिक टन धान की खरीदी हुई थी, जिस पर प्रति क्विंटल 300 रूपए की दर से 2100 करोड़ रूपए के बोनस का भुगतान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा - हमने दीपावली के पहले ‘बोनस तिहार’ मनाने और हर जिले में किसानों को बोनस देकर उनका उत्साह बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अपने राष्ट्रीय नेतृत्व और प्रधानमंत्री को अपनी ओर से तथा प्रदेश के किसानों की ओर धन्यवाद दिया।
डॉ. रमन सिंह ने अपनी रेडियो वार्ता में पंडित दीनदयाल उपाध्याय को विशेष रूप से याद करते हुए कहा उन्होंने ने एकात्म मानववाद और अंत्योदय के माध्यम से दुनिया को मानवता की सेवा का अद्भुत संदेश दिया था। पं.दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था कि हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत माता है। यदि इसमें से ‘माता’ हटा दे तो भारत केवल जमीन का टुकड़ा रह जाएगा। मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन दर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि पंडित उपाध्याय जी ने कहा था कि एक बीज से विकसित जड़े, तना, शाखाएं, पत्तियां, फूल और फल सबके रंग-रूप-गुण अलग-अलग होते है, लेकिन उस बीज के द्वारा इनकी एकता के रिश्ते की पहचान होती है। इस तरह उन्होंने मानव जाति के लिए एकात्मकता का सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसमें इंसान-इंसान के बीच एकता हो और संघर्ष का कहीं कोई स्थान ना हो। उन्होंने समाज के सबसे कमजोर तबके पर सबसे ज्यादा ध्यान देने को कहा था, ताकि वह तेजी से उपर आए और अमीरी-गरीबी का भेद ना रहे। उन्होंने कहा कि कमजोर तबकों को भी जीवन को सरल बनाने वाली और प्रगति की सारी व्यवस्था का लाभ मिले, इसलिए हम पंडित दीनदयाल उपाध्याय को युग पुरूष मानते हैं।
    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व और कृतित्व से सबको अवगत कराने के लिए छत्तीसगढ़ में 15 सितम्बर से 25 सितम्बर तक 11 दिन तक विशेष आयोजन करने की घोषणा राज्य सरकार द्वारा की गई है, ताकि समाज में समरसता के साथ विकास का रास्ता आसान हो सके। डॉ.  रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों में 15 सितम्बर से 25 सितम्बर तक पंडित उपाध्याय के जीवन पर केन्द्रित लोक-संगीत, नृत्य, नाटक, निबंध, चित्रकला, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं होंगी। विश्वविद्यालय में एकात्म मानववाद पर सम्मेलन, सेमीनार आदि का आयोजन किया जाएगा। सभी 27 जिलों में विभिन्न स्थानों पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी पर आधारित कथा का आयोजन होगा। गांवों में खेल-कूद प्रतियोगिता, स्वास्थ्य शिविर और कृषि मेले जैसे आयोजन होंगे। उनकी जन्म-जयंती पर 25 सितम्बर को प्रदेश में विशेष ग्राम सभाओं का भी आयोजन किया जाएगा, जहां उनकी जीवनी पढ़कर सुनाई जाएगी और विभिन्न विभागों द्वारा जनता को अंत्योदय सहित गरीबी उन्मूलन योजनाओं की भी जानकारी दी जाएगी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती समारोह ‘कार्यक्रमों का समापन 11 फरवरी 2018 को पंचायती राज सम्मेलन के रूप में किया जाएगा। डॉ. रमन सिंह ने अपनी रेडियो वार्ता में बताया कि प्रदेश में पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीब कल्याण वर्ष मानते हुए स्थायी महत्व के अनेक कदम उठाए गए हैं। कमजोर तबको को मकान दिलाने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय आवास योजना संचालित की जा रही है। अनेक योजनाओं का नामकरण उनके नाम पर किया गया है। ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों को उनका सम्पूर्ण वांग्मय पुस्तक के सेट दिए गए हैं। नगरीय निकायों को भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पुस्तकों का पठन-पाठन हर स्तर पर हो, ताकि एकात्म मानववाद और अंत्योदय की अवधारणा का सबको लाभ मिले। डॉ. सिंह ने कहा कि नया रायपुर में मंत्रालय को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले मार्ग का नामकरण एकात्म पथ किया गया है। साथ ही मुख्य चौराहे पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई। जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था।
    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कोरबा जिले के कटघोरा विकासखण्ड के स्याहीमुड़ी गांव में 40 एकड़ जमीन पर 125 करोड़ रूपए की लागत से पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षणिक परिसर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। जहां कक्षा पहलीं से लेकर बारहवीं तक चार हजार बालक-बालिकाओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा मिलेगी। इस परिसर में दिव्यांग बच्चों के लिए 100 सीटर आवासीय विद्यालय भी बनेगा। परिसर में पढ़ाई और प्रशिक्षण की अत्याधुनिक व्यवस्था होगी। यह परिसर ग्रीन बिल्डिंग और आईएसओ प्रमाणित होगा, ऐसी व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ऐसे विशाल शिक्षा परिसर बनाने के लिए हमारे प्रयास लगातार जारी हैं। इसके पहले बस्तर अंचल के दंतेवाड़ा जिले के ग्राम जावंगा में शिक्षा परिसर बनाया गया, जिसे काफी प्रसिद्धि मिली। इसी तरह के परिसर बीजापुर और सुकमा जिलों में भी बनाए जा रहे हैं। जिनमें विभिन्न योजनाओं से मदद ली गई है। यह अपनी तरह का एक नवाचार है।  कार्यक्रम में ग्राम माकड़ी सिंगराय के श्रवणकर्ता श्री पुनीतराम मंडावी,श्री सन्ताराम जैन, ग्राम कोंगेरा के श्री सुनील कुमार साहु, श्री सतुश साहू, ग्राम माकड़ीखूना की श्रीमती लता यादव ने रमन के गोठ कार्यक्रम का श्रवण कर मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी लाभप्रद, ज्ञानवर्धक और जनकल्याणकारी बताया।
    इस अवसर पर सरपंच माकड़ीखूना श्रीमती माया कावड़े, उपसरंपच सांवतराम नेताम, पंच श्रीमती इंदिरा नेताम, श्री ललित राम साहू, भूतपूर्व पंच श्रीमती हेमलता कोर्राम, प्रेरक रंजीत जैन, रोजगार सहायक श्री कमलेश कावड़े, करारोपण अधिकारी श्री संतोष कौशिक, सचिव प्रीतराम साहू और ग्रामीणजन उपस्थित थे।

क्र/   /संत कुमार

 


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