सूरजपुर : रमन के गोठ पच्चीसवीं कड़ी कार्यक्रम को उत्साह से सुना गया

सूरजपुर- 10 सितम्बर 2017

जम्मो संगी-जहुंरिया, सियान-जवान, महतारी-बहिनी मन ला जय जोहार।तीजा-पोरा, जन्माष्टमी, गणेश पाख, बकरीद तिहार, राजी-खुसी निपट गे। जम्मो मन उमंग अउ उत्साह ले भरके, अपन काम-धंधा म जुट गे हो।पितर पाख शुरू हो गे हे। अपन पुरखा मन ल सुरता करथन, तरपन करथन अउ पितर मन ल पानी देथन।पितर पाख बीतही तो नवरात्रि शुरू होही। हमर राज्य के चारो मुड़ा म आदि शक्ति देवी बिराजे हे। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया, मां चन्द्रहासिनी के शक्ति पीठ हावे। एकर अलावा हरेक जिला, हरेक शहर, हरेक गांव म घलोक अलग-अलग स्वरूप म देवी के वास हे।  नौ दिन तक देवी मां के नौ स्वरूप के उपासना चलही। बड़े-बड़े ठउर म मां दुर्गा बइठाही। अउ 30 तारीख के दशहरा तिहार होही। दंतेश्वरी माई के परताप हे कि हमर बस्तर दशहरा दुनिया के सबसे जादा 75 दिन तक चलने वाला उत्सव हे।
     आप सब मन ल नवरात्रि अउ दशहरा तिहार गाड़ा-गाड़ा बधई अउ शुभकामना देवत हवं।सबसे पहले तो मैं पं. दीनदयाल उपाध्याय को सादर नमन करता हूं। भगवान हर युग में कोई ऐसी विलक्षण प्रतिभा को इस संसार में भेजता है, जो दुनिया को सही दिशा दे सकें। पं. उपाध्याय ऐसे ही मनीषी हुए हैं।
पं. उपाध्याय का जन्म साधारण गृहस्थ परिवार में हुआ था लेकिन वे इतने मेधावी थे कि मैट्रिक तथा इंटरमीडियट की परीक्षा में प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान पर आए थे। सिविल सेवा की परीक्षा में सफल हुए लेकिन अपना कैरियर बनाना उनके जीवन का लक्ष्य नहीं था। इसलिए उन्होंने मां भारती की सेवा का रास्ता चुना। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के रूप में ऐसे जीवन- दर्शन की खोज की, जो हमारे अस्तित्व का आधार है।पं. उपाध्याय जी ने एकात्म मानववाद और अंत्योदय के माध्यम से दुनिया को मानवता की सेवा का अद्भुत संदेश दिया था।उन्होंने कहा था कि हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत माता है। यदि इसमें से माता हटा दे तो भारत केवल जमीन का टुकड़ा रह जाएगा।
पं. उपाध्याय ने कहा था कि-‘एक बीज से निकली जड़ें, तना, शाखाएं, पत्तियां, फूल और फल सबके रूप-रंग-गुण अलग हैं लेकिन बीज के द्वारा इनके एकत्व के रिश्ते की पहचान होती है। इसी तरह उन्होंने मानव जाति के लिए एकात्मता का सिद्धांत प्रतिपादित किया था, जिसमें इंसान-इंसान के बीच एकता हो, संघर्ष का कहीं कोई स्थान न हो।’
       उन्होंने समाज के सबसे कमजोर तबके पर सबसे ज्यादा ध्यान देने को कहा था ताकि वह तेजी से ऊपर आए और अमीरी-गरीबी का भेद न रहे। कमजोर तबकों को भी जीवन को सरल बनाने वाली तथा प्रगति की सारी व्यवस्था का लाभ मिले।
इसलिए हम पं. दीनदयाल उपाध्याय को युग पुरूष मानते हैं और उनके व्यक्तित्व तथा कृतित्व से सबको अवगत कराने के लिए छत्तीसगढ़ मंे 15 सितम्बर से 25 सितम्बर तक 11 दिन तक विशेष आयोजन करने की घोषणा राज्य सरकार द्वारा की गई है, ताकि समाज में समरसता के साथ विकास का रास्ता आसान हो सके।
15 सितम्बर से 25 सितम्बर तक प्रदेश के सभी स्कूल तथा कॉलेजों में पं. उपाध्याय के जीवन पर केन्द्रित लोक संगीत, नृत्य, नाटक, निबंध, चित्रकला, भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं होंगी।
 विश्वविद्यालयों में एकात्म मानववाद पर सम्मेलन, सेमीनार आदि का आयोजन होगा।सभी 27 जिलों में विभिन्न स्थानों पर पं. दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी पर आधारित कथा का आयोजन होगा। ग्रामीण अंचलों में खेलकूद प्रतियोगिताओं, स्वास्थ्य शिविरों, कृषि मेलों जैसे अनेक आयोजन होंगे।
पूरे प्रदेश में उपाध्याय जी के जन्म दिवस 25 सितम्बर को विशेष ग्राम सभा का आयोजन होगा, जहां उनकी जीवनी पढ़कर सुनाई जाएगी। विभिन्न विभागों द्वारा अंत्योदय तथा गरीबी उन्मूलन पर चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।प्रदेश में पं. दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर संचालित विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों की जानकारी संकलित कर आम जनता को प्रदान की जाएगी।
इस तरह अंत्योदय के लिए राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर जन-जागरण किया जाएगा, जिससे जरूरतमंद हितग्राही इन योजनाओं का लाभ ले सकें।‘पं. दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती समारोह कार्यक्रम’ का समापन 11 फरवरी 2018 को पंचायती राज सम्मेलन के रूप में किया जाएगा।
    आपको यह जानकर खुशी होगी कि प्रदेश में पं. दीनदयाल उपाध्याय गरीब कल्याण वर्ष मनाते हुए स्थाई महत्व के अनेक कदम उठाए गए हैं।कमजोर तबकों को आवास उपलब्ध कराने के लिए पं. दीनदयाल आवास योजना संचालित की जा रही है। इसी प्रकार अनेक योजनाओं का नामकरण पं. उपाध्याय के नाम पर किया गया है।पं. दीनदयाल उपाध्याय सम्पूर्ण वांग्मय पुस्तक के सेट सभी ग्राम तथा जनपद पंचायतों को उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही नगरीय-निकायांे को भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मैं निवेदन करूंगा कि इन पुस्तकों का पठन-पाठन हर स्तर पर हो ताकि एकात्म मानववाद और अंत्योदय की अवधारणा का लाभ सबको मिले।
     नया रायपुर में मंत्रालय को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले मार्ग का नाम एकात्म पथ रखा गया है। साथ ही मुख्य चौराहे पर पं. दीनदयाल उपाध्याय की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसका लोकार्पण, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किया गया था।
हमारे शासन-प्रशासन की बड़ी विशेषताओं में नवाचार की बड़ी भूमिका रही है। मैं आपको बताना चाहता हूं कि कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड में स्याहीमुड़ी गांव में पं. दीनदयाल उपाध्याय शैक्षणिक परिसर का निर्माण बड़ी तेजी से किया जा रहा है।इस अंचल में अनुसूचित जनजाति की बहुलता है।अर्थात इस परिसर का लाभ अंत्योदय में मिलेगा।40 एकड़ भूमि में 125 करोड़ रूपए की लागत से 4 हजार सीटर शैक्षणिक परिसर अपने आप में बहुत विशाल और अद्भुत है।
यहां पहली से लेकर बारहवीं तक 4 हजार बालक-बालिकाओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा मिलेगी। 100 सीटर दिव्यांग आवासीय विद्यालय भी बनेगा। इस परिसर में अत्याधुनिक शिक्षण-प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी।यह परिसर ग्रीन बिल्ंिडग तथा आईएसओ प्रमाणित होगा, ऐसी व्यवस्था की जा रही है।सरकारी क्षेत्र में, आदिवासी बहुल अंचलों में ऐसे विशाल शिक्षा परिसर बनाने की कड़ी में हमारा प्रयास लगातार जारी है, इसके पूर्व बस्तर के दूरस्थ जिले दंतेवाड़ा में जावंगा शिक्षा परिसर बनाया गया, जिसे काफी ख्याति मिली हुई है।इसी तरह के परिसर बीजापुर तथा सुकमा जिलों में भी बनाया जा रहा है, जिनमें सीएसआर, डीएमएफ तथा अन्य योजनाओं से वित्तीय मदद दी गई है, जो कि अपनी तरह का एक नवाचार है।
   धान, छत्तीसगढ़ की जान है। हमारे किसान भाइयों-बहनों एवं उनके परिवार का जीवन, धान की खेती, धान की अच्छी फसल और उसकी बिक्री से ही चलता है। किसानों की व्यक्तिगत तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था में धान का बड़ा योगदान है। इसलिए हमने धान खरीदी की व्यवस्था में सुधार को अपनी सबसे पहली प्राथमिकता बनाया था।जब हमने सरकार की बागडोर सम्हाली, तब प्रदेश में मुश्किल से 5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी होती थी। खरीदी की प्रक्रिया बहुत कठिन थी और किसानों को भुगतान पाने में भी बहुत तकलीफ होती थी।
   हमने कम्प्यूटर आधारित पारदर्शी व्यवस्था की। 1 हजार 333 प्राथमिक साख सहकारी समितियों के 1 हजार 989 उपार्जन केन्द्रों में धान खरीदने के इंतजाम किए ताकि किसानों को अपना गांव छोड़कर दूर न जाना पड़े।वर्ष 2003-2004 से लेकर वर्ष 2016-17 तक 6 करोड़ 91 लाख 59 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी करते हुए किसानों को लगभग 75 हजार करोड़ रूपए का भुगतान किया गया।
हमने अपने घोषणा पत्र का पालन करते हुए वर्ष 2013-14 में खरीदे गए 78 लाख 35 हजार मीट्रिक टन धान पर, 3 सौ रूपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस का भुगतान भी किया। तब किसानों के घर में समर्थन मूल्य के 10 हजार 362 करोड़ रूपए तथा बोनस के 2 हजार 374 करोड़ रूपए पहुंचे थे।वर्ष 2015 में प्रदेश में बड़ा सूखा पड़ा था, जिसके कारण राहत के उपाय किए गए थे और 18 सौ करोड़ रूपए से अधिक की राशि किसान भाइयों को अलग-अलग मदांे से दी गई थी।
इस बीच प्रदेश में किसानों के लिए अनेक कल्याणकारी निर्णय लिए गए। फसल विविधीकरण, कृषि लागत में कमी, वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों से लाभदायक फसलों की खेती को बढ़ावा जैसे अनेक उपाय किए गए।कृषि लागत में, कमी उत्पादकता में वृद्धि के कारण प्रदेश को तीन बार चावल उत्पादन तथा एक बार दलहन उत्पादन के लिए ‘कृषि कर्मण’ पुरस्कार मिला।हार्टिकल्चर के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियों के कारण छत्तीसगढ़ को ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप एवार्ड 2017’ प्राप्त हुआ है। प्रदेश में विगत 13 वर्षों के कार्यकाल में उद्यानिकी का रकबा चार गुना तथा उत्पादन पांच गुना बढ़ा है।इस बार जब मानसून कमजोर हुआ और प्रदेश के कुछ जिलों में सूखे के हालात पैदा हुए तो इसकी चिंता छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक में की गई।
   माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की संवेदनशीलता और किसानों के प्रति उनका स्नेह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने बोनस के मुद्दे पर तत्काल सहमति प्रदान की और आगे बढ़कर कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में तकलीफ नहीं होनी चाहिए और उन्हें हर संभव मदद की जानी चाहिए।
इस तरह हमने यह निर्णय लिया है कि खरीफ 2016 में खरीदे गए धान का बोनस इसी दीवाली के पहले किसानों को दे दिया जाए।वर्ष 2016 में 13 लाख से अधिक किसानों से 69 लाख 59 हजार मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी, जिस पर प्रति क्ंिवटल 300 रूपए का बोनस देने से लगभग 21 सौ करोड़ रूपए की राशि का भुगतान होगा।
हमने तय किया है कि दीवाली के पहले ‘बोनस तिहार’ मनाएंगे और हर जिले में बोनस देकर किसान भाई-बहनों का उत्साह बढ़ाएंगे।खरीफ 2017 की धान खरीदी का बोनस वर्ष 2018 में देने का निर्णय भी हमने कर लिया है।
मैं पुनः कहना चाहता हूं कि हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व तथा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा दिए गए सम्बल और संवेदनशील निर्णय के कारण प्रदेश में किसानों को बोनस प्रदाय का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसके लिए मैं अपनी ओर से, किसानों की ओर से उन्हें सादर धन्यवाद प्रेषित करता हूं।
माननीय मोदी जी ने कहा है कि सन् 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा आत्मसात किया था, जिसके 5 साल बाद सन् 1947 में भारत आजाद हो गया।माननीय मोदी जी ने संकल्प की महत्ता पर जोर दिया है और कहा है कि संकल्प ही सिद्धि का मार्ग है। उन्होंने भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के लिए एक नया भारत गढ़ने का संकल्प लिया है।
  वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए रोडमैप तैयार किया है।
यद्यपि हमारे किसान अभी ज्यादातर धान पर निर्भर है। लेकिन हमने अन्य लाभदायी फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कार्य योजना बनाई है।कृषि के साथ उद्यानिकी, डेयरी, पिगरी, फिशरी, रेशम, लाख, कृषि उत्पाद तथा वनोपज प्रसंस्करण जैसे सभी क्षेत्रों को जोड़ा है।कृषि उत्पादों की भण्डारण क्षमता लगातार बढ़ा रहे हैं, साथ ही मार्केटिंग नेटवर्क भी मजबूत कर रहे हैं। ई-नाम (इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट) के माध्यम से प्रदेश की 14 मंडियों को जोड़ा जा चुका है।
सिंचाई क्षमता बढ़ाई जा रही है।
किसानों को शिक्षण-प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान से समृद्ध किया जा रहा है।हमारा लक्ष्य है कि वर्तमान में कृषि तथा संबंधित बाजार मूल्य 44 हजार करोड़ रूपए है,उसे 2022 तक बढ़ाकर 87 हजार करोड़ रूपए करना है।वर्ष 2018 में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लेंगे।वर्ष 2018 में हम सम्पूर्ण ओडीएफ का लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।इसी तरह साक्षरता, शिक्षा, कुपोषण, टीकाकरण, मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर आदि लक्ष्यों को भी हासिल करेंगे, जिसके लिए विभागवार कार्य योजना बनाई जा रही है।
  वास्तव में स्वच्छता अनेक समस्याओं का सामाधान है इसलिए यह सबसे बडी सेवा है। प्रधानमंत्री जी ने स्वच्छता को जन आन्दोलन बना दिया है और गांधी जयंती को इसका प्रतीक।हम छत्तीसगढ में 15 सितम्बर से 02 अक्टूबर के बीच बड़ा अभियान चलाएंगे जिसमे समस्त जनप्रतिनिधियों से लेकर नगरीय और ग्रामीण निकायो के जन प्रतिनिधि की भूमिका सुनिश्चित होगी इस दौरान ज्यादा से ज्यादा निकायों को ओ.डी.एफ. घोषित करने का प्रयास किया जाएगा ताकि हमारे 2018 के
माननीय मोदी जी का जन्म दिन
एक और खुशखबरी आप लोगों के साथ बांटना चाहता हूं।हमारे लोकप्रिय और यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का जन्मदिन 17 सितम्बर को है।
विगत तीन वर्षों की अथक और निरंतर सेवा से उन्होंने देश के जन-जन का दिल जीता है। गरीब और कमजोर तबकों के जीवन में नई आशा का संचार किया है।
मैं अपील करता हूं कि हम सब मिलकर मोदी जी के जन्म दिन17 सितम्बर को ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाएं।इस दिन प्रदेश के अस्पतालों, महापुरूषों की प्रतिमाओं, बाग-बगीचों, सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैण्ड, रेलवे स्टेशन, स्कूल-कॉलेज, तालाबों, गरीब बस्तियों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया जाए।
गरीब बस्तियों में तथा अन्य स्थानों पर मेडिकल कैम्प आयोजित किए जाएं। विभिन्न सामाजिक व स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से सेवा कार्य किए जाएं।मोदी जी की प्रेरणा से स्वच्छता तथा अन्य कार्यों में जनभागीदारी का जो वातावरण बना है, उसकी कुछ मिसालें आप लोगों के साथ शेयर करना चाहता हूं।मंुगेली जिले के लोरमी विकासखण्ड के कुछ युवा साथी मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने बताया कि लोरमी में सर्वदलीय मंच का गठन किया गया है, जिसमें अनेक सामाजिक संगठनों की भागीदारी है। जनपद पंचायत, डड़सेना युवा मंच, मनियारी बचाओ अभियान आदि। युवाओं की टोली ने लोरमी के मुक्तिधाम की साफ-सफाई का जिम्मा ले लिया है और प्रत्येक रविवार को यहां श्रमदान करते हैं। मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई कि लोरमी जैसी जगह के नौजवान रविवार को पिकनिक मनाने नहीं जा रहे हैं बल्कि साफ-सफाई के लिए निकल रहे हैं।युवाओं की टोली ने अब मनियारी नदी की सफाई, वृक्षारोपण, खरपतवार की साफ-सफाई तथा दवा का छिड़काव आदि अनेक काम भी हाथ में ले लिए हैं। स्वच्छ भारत अभियान के लिए ऐसी खबरें बहुत सुखद है।
 नवनीत प्रताप देव, दिलीप अग्निहोत्री, राज सिंह आहूजा, वीरेन्द्र मलहोत्रा, योगेन्द्र वर्मा, हरि राम, आशीष भट्टाचार्य, आलोक नीर, चुन्नी लाल साहू, सुजित शाजी, संजीव तिवारी, के.पी. कैवर्त, चन्द्रहास पंडा आदि बहुत से साथियों ने 5 हजार दिन पूरा करने के लिए मुझे बधाई दी है। आप सभी का धन्यवाद तथा आभार।
समाचार //2017


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