दुर्ग : केचुआ खाद बनाने किसानों को मिला प्रशिक्षण

दुर्ग, 13 सितम्बर 2017

कृषि विभाग की आत्मा योजना के अंतर्गत किसानों को आज केचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) बनाने की प्रक्रिया समझाई गई। विकासखण्ड स्तरीय प्रशिक्षण में दुर्ग के लगभग एक सौ किसान शामिल हुए।  प्रशिक्षण मंे आए कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि भविष्य अब जैविक खादों का है। रासायनिक खाद का उपयोग बहुत हो चुका। खेत की मिट्टी रासायनिक खाद के असंतुलित उपयोग  के चलते पत्थर सरीखे कठोर होती जा रही है। यह काफी महंगी भी है। इन रासायनिक उर्वरकांे का सस्ता और अच्छा विकल्प नाडेप और केचुआं खाद है। वैज्ञानिकों ने किसानों को केचुआ के जीवन चक्र और इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पहले हमारे पूर्वजों ने जैविक पद्धति से खेती करते थे तो बड़ी मात्रा में केचुआ खेतों में होती थी। यह खेत की मिट्टी को पोली रखती थी जिसके कारण हवा और प्रकाश जमीन के अंदर तक घुसती है और पौधों को काफी फायदा होता है। केचुआं किसानों का मित्र और सहयोगी जीव है। जैविक पद्धति से खेती कर रहे कुछ किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। इनमें मचान्दुर के श्री धनकुमार और श्री शिवकुमार, आलबरस के श्री महेश कुमार और श्री लक्ष्मण देशमुख, पुरई के मनतिन बाई और पीपरछेड़ी के श्री प्रहलाद यादव और गौकरण साहू प्रमुख रूप से शामिल हैं। उन्होंने किसानों को जैविक खाद बनाने के तरीके बताए और फायदा गिनाए। प्रशिक्षण में प्रमुख तौर से कृषि वैज्ञानिक श्री संतोष मिश्रा, श्री डी.के. सिंह, एसएडीओ श्री जैन, आईपीएल कम्पनी के श्री ओपी गिरी ने वर्तमान समय में जैविक खाद की उपयोगिता और महत्व तथा इसके बनाने के तरीके विस्तार से बताए।

क्रमांक-873/पटेल


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