जगदलपुर : भूमिजल विकास एवं प्रबंधन पर तीन दिवसीय कार्यशाला प्रारंभ : जल के उचित प्रबंधन से ही आएगी खुशहाली: कलेक्टर श्री देवांगन

जगदलपुर, 13 सितम्बर 2017

भारत सरकार के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय अंतर्गत केन्द्रीय भूमिजल बोर्ड के राष्ट्रीय भूमिजल एवं अनुसंधान संस्थान रायपुर द्वारा भूमिजल विकास एवं प्रबंधन पर तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ जगदलपुर के होटल देवांश में किया गया।
    इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर श्री धनंजय देवांगन ने कहा कि जल के उचित प्रबंधन से ही खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के 146 जिलों में से 96 जिलों को सूखा घोषित किया जा चुका है, जिनमें बस्तर संभाग के सात जिलों में पांच जिले भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में 1500 मिलीमीटर औसत वर्षा होती है और कवर्धा में 830 मिलीमीटर औसत वर्षा होती है। इसके बावजूद बस्तर में अधिकतर किसान सिर्फ धान की खेती करते हैं, जबकि कवर्धा के किसान सोयाबीन और गन्ने के साथ दलहन की खेती भी करते हैं। उन्होंने कहा कि 99 गांवों में एक भी जलस्त्रोत का न होना गंभीर खतरे की चेतावनी है तथा अब सभी को जल के उचित प्रबंधन पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ जल के संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा था और अब इसके प्रबंधन को भी महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल के उचित प्रबंधन के लिए इस प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारियों का अच्छा उपयोग विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के समय किया जा सकता है। उन्होंने बस्तर के हित में इस प्रशिक्षण को बारीकी से लेने की अपील अधिकारियों से की। उन्होंने कहा कि 1500 मिलीमीटर जल कम नहीं होता है तथा इस जल का बेहतर उपयोग कृषि के क्षेत्र में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जल के उचित प्रबंधन के लिए बच्चों को प्रारंभ से ही शिक्षित किए जाने की आवश्यकता है, जिससे भविष्य में स्थिति और भी भयावह न हो। उन्होंने समस्याओं और समाधान पर सार्थक चर्चा किए जाने पर जोर दिया।
    तीन दिवसीय इस कार्यशाला में प्रथम दिवस जल क्रांति अभियान के संबंध में जानकारी दिए जाने के साथ ही छत्तीसगढ़ में भू-जल की समस्याओं और चुनौतियां, बस्तर जिले में भूमिजल एवं भूमि जल का अनुमान पर चर्चा, द्वितीय दिवस पर भूमि-जल निगरानी, जानकारी विश्लेषण एवं इसके महत्व, कृत्रिम रिचार्ज एवं भूजल संरक्षण, भू-भौतिकी की मूलभूत बातें, भू-जल जांच के लिए भू-भौतिकीय अनुप्रयोग, भू-जल रसायन की मूल बातें, भू-जल में रासायनिक घटकों का निर्धारण, तीसरे दिन छत्तीसगढ़ में रासायनिक परिदृश्य, जल भृत मानचित्रण एवं भू-जल प्रबंधन तथा भू-जल के नियमन एवं नियंत्रण में केन्द्रीय भू-जल बोर्ड की भूमिका के संबंध मंे जानकारी दी जाएगी और चर्चा की जाएगी।
    इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रितेश अग्रवाल, केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक श्री सी पॉल प्रभाकर, श्री सुनील कुमार, वैज्ञानिक श्री महेश सोनखुसरे, श्री एके बिसवाल, श्री एके पाटिल, श्री केएल मंडल एवं श्री आरके त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के जिलास्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
क्रमांक-/1002/तंबोली


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