रायपुर : हमर छत्तीसगढ़ योजना : युवाओं ने सीखा हुनर, मिला रोजगार : गांव को खुले में शौचमुक्त बनाने में निभाई अहम भूमिका

रायपुर. 14 सितम्बर 2017

राज्य शासन के दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना से युवाओं को अपना हुनर निखारने का मौका मिल रहा है। योजना के तहत वे अपने मनपसंद कार्यों का प्रशिक्षण लेकर तत्काल रोजगार भी हासिल कर रहे हैं। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण केंद्र से ईंट बनाने का काम सीखने वाले उमझर गांव के छह युवाओं ने प्रशिक्षण के तुरंत बाद दो लाख ईंटों का निर्माण किया है। इन ईंटों का उपयोग स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में बन रहे शौचालयों में किया जा रहा है। ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण के तुरंत बाद इन युवाओं को न केवल अच्छा रोजगार मिल गया है, बल्कि यह स्वच्छ भारत मिशन में भी अपना योगदान दे रहे हैं। ईंट निर्माण और राजमिस्त्री का काम सीखे युवाओं की बदौलत उमझर अब खुले में शौचमुक्त गांव बन गया है।

हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन-भ्रमण पर आए कोरिया जिले के उमझर पंचायत के सरपंच श्री बसंत सिंह बताते हैं कि किसी कारणवश पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले युवाओं को काम-धंधे की बहुत दिक्कत थी। खेती के अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं था। आसपास कोई औद्योगिक क्षेत्र नहीं होने से उन्हें नियमित काम भी नहीं मिलता था। ऐसे में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना से वे न सिर्फ अपना कौशल निखार रहे हैं, बल्कि प्रशिक्षण के तुरंत बाद रोजगार भी मिल रहा है।

उमझर के सरपंच श्री बसंत सिंह बताते हैं कि गांव से छह किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय बैकुंठपुर में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण केंद्र खुलने से इलाके के कम-पढ़े लिखे युवाओं को उम्मीद की नई किरण मिली है। उनका पंचायत भी गांव में प्रशिक्षण के इच्छुक लड़के-लड़कियों की तलाश कर उन्हें रोजगारपरक कार्यों में दक्ष करने की पहल करता है। वे बताते हैं कि उनके गांव के 14 युवाओं ने बैकुंठपुर के ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण केंद्र से अलग-अलग कार्यों का छह-छह महीने का प्रशिक्षण लिया है। आठवीं से दसवीं तक शिक्षित छह युवाओं ने ईंट निर्माण, पांच ने राजमिस्त्री और तीन लड़कों ने मैकेनिकल कार्यों का प्रशिक्षण लिया है।

सरपंच श्री सिंह बताते हैं कि गांव के लड़कों के ईंट निर्माण का प्रशिक्षण पूरा होते ही ईंट बनाने का ठेका मिल गया। इनका इस्तेमाल शौचालय निर्माण में किया जा रहा है। वे कहते हैं कि पंचायत के पास ज्यादा फंड नहीं होने के कारण इन युवाओं को ईंट बनाने कहा गया। युवाओं के लिए भी यह अपने हुनर को आजमाने और रोजगार हासिल करने का अच्छा मौका था। लड़कों ने कड़ी मेहनत कर तीन महीने में ही दो लाख ईंट बना दिए। शौचालय बनाने में राजमिस्त्री का प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं की भी मदद ली गई। कौशल प्रशिक्षण केंद्र से राजमिस्त्री का काम सीखे युवाओं ने लगन से काम कर गांव में 250 घरों में शौचालय बनाए। उमझर को खुले में शौचमुक्त बनाने में इन युवाओं का बड़ा योगदान है।

श्री सिंह कहते हैं कि ग्रामीण कौशल प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षित युवाओं की सफलता को देखकर अब गांव के अन्य युवा भी कौशल विकास के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उनकी पंचायत भी गांव के हर जरूरतमंद लड़के-लड़कियों के कौशल उन्नयन के लिए तत्पर है। पंचायत द्वारा गांव के ऐसे सभी युवाओं को प्रशिक्षण दिलाने की पहल की जाएगी।

 क्रमांक-2552/कमलेश   

 


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