रायपुर : हमर छत्तीसगढ़ योजना : रात में भी अपने काम निपटाए जा सकते हैं यह बिजली लगने के बाद ही जाना

रायपुर. 18 सितम्बर 2017

कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के जैतपुरी पंचायत के लोग अब बेहद खुश हैं। करीब साल भर पहले ही उनके गांव में बिजली आई। बिजली लगने से वहां लोगों का जीवन बदल गया है। पेयजल व्यवस्था, मनोरंजन के साधन, बच्चों की पढ़ाई और सिंचाई की सुविधा में बड़ा बदलाव आ गया है। अब शाम-रात को अंधेरा घिरने के बाद भी बच्चे बिजली की रोशनी में पढ़ रहे हैं। बारिश न होने पर किसान मोटर पंप चलाकर सिंचाई कर रहे हैं। जैतपुरी के लोगों ने कभी मोबाइल फोन के बारे में सोचा भी नहीं था। बिजली आने के बाद वहां के लोग मोबाइल से बाहर या दूर गांव में रहने वाले रिश्तेदारों से बात कर ले रहे हैं। विद्यतीकरण से एक साल में ही गांव में बड़ा परिवर्तन आ गया है।

      हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन भ्रमण पर राजधानी रायपुर आए कोंडागांव जिले के फरसगांव विकासखंड के जैतपुरी पंचायत के पंच श्री नेगीराम नेताम कहते हैं कि अब जाकर समझ आ रहा है कि बिजली हर गांव के लिए कितना जरूरी है। रात में भी अपने घर और व्यवसाय के काम निपटाए जा सकते हैं, यह बिजली लगने के बाद ही मालूम चला। वे बताते हैं कि साल भर पहले मुख्यमंत्री मजरा टोला विद्युतीकरण योजना के तहत लगभग 1,500 की आबादी वाले उनके गांव में बिजली आने से लोगों की जीवन-शैली में बड़ा बदलाव आया है।

      पंच के तौर पर तीसरी बार निर्वाचित 80 वर्ष के श्री नेगीराम नेताम कहते हैं कि ग्रामीणों की जिंदगी चिमनी के टिमटिमाते उजाले में बीत रही थी। बिजली नहीं होने से कितना नुकसान है, इसका अंदाजा भी नहीं था। दीये और चिमनी की टिमटिमाती रोशनी में आखिर रात में जागता भी कौन! रात आठ बजे ही ऐसा लगता जैसे बहुत रात हो चुकी है। गांववाले घर के दरवाजे बंद कर सो जाते। रात में भी काम किया जा सकता है ऐसा तो कभी सोचते ही नहीं थे।

श्री नेताम बताते हैं कि बिजली के बिना मोटर पंप चलाने की सोच भी नहीं सकते थे। बारिश न होने पर खेतों की सिचाई भी नहीं हो पाती थी। बच्चे पूरा दिन स्कूल में बिताने के बाद जब शाम को घर लौटते तो थोड़ी ही देर में अंधेरा हो जाता। फिर पढ़ाई चिमनी या लालटेन के भरोसे ही होती। वे बताते हैं कि बिजली आने के बाद अब लोग टी.वी. एवं मोबाइल जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्रमांक-.2627../कमलेश


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