गरियाबंद : धान सिर्फ फसल ही नहीं, सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा है- डॉ. रमन सिंह : धान ही नहीं तेन्दूपत्ता संग्राहकों और गन्ना उत्पादकों को भी बोनस

गरियाबंद 07 अक्टूबर 2017

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने मासिक रेडियोवार्ता रमन के गोठ में कहा है कि धान छत्तीसगढ़ के किसानों की आमदनी का मुख्य जरिया है और यह हमारे लिए सिर्फ फसल नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुनी करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके लिए राज्य को तीन अलग-अलग जलवायु क्षेत्र में बांटकर कार्ययोजना तैयार की है। जमीन की विशेषता के अनुरूप किसानों को बीज उपलब्ध कराए गए और प्रशिक्षण भी दिया गया। राज्य सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में खेती और उससे संबंधित व्यवसायों  का टर्नओव्हर 44 हजार करोड़ रूपए तक पहुंच गया है, जिसे वर्ष 2022 तक बढ़ाकर हम 87 हजार करोड़ रूपए तक पहुंचाना चाहते हैं। जिला स्तरीय कार्यक्रम छुरा विकासखण्ड के ग्राम खरखरा में आयोजित किया गया था, जहां पर अुनविभागीय अधिकारी बी.आर. साहू, तहसीलदार राकेश साहू, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के.एस. नागेश, सरपंच श्रीमती ईश्वरी बाई ध्रुव सहित ग्रामीणों ने रमन के गोठ का श्रवण किया।  
    मुख्यमंत्री ने अपने रेडियावार्ता में कहा कि वर्ष 2003-04 से 2016-17 तक 14 वर्ष में राज्य सरकार ने किसानों से छह करोड़ 91 लाख मीटरिक टन से ज्यादा धान खरीदकर सहकारी समितियों के जरिए उन्हें 75 हजार करोड़ रूपए का भुगतान किया है। वर्ष 2016-17 में सरकार ने उनसे 69 लाख मीटरिक टन धान खरीदा, जिस पर उन्हें 300 रूपए प्रति क्विंटल की दर से 2100 करोड़ रूपए का बोनस दिया जा रहा है। उन्होंने कहा-बोनस केवल धान के लिए नहीं है, बोनस तेन्दूपत्ता संग्राहकों और गन्ना उत्पादक किसानों को भी दिया जा रहा है। वर्ष 2004 से 2017 तक जहां तेन्दूपत्ता संग्रहण में एक हजार 904 करोड़ रूपए का पारिश्रमिक दिया गया, वहीं उनको वर्ष 2004 से 2015 तक लगभग एक हजार 223 करोड़ रूपए का बोनस भी मिला। प्रदेश में संचालित चार शक्कर कारखानों की सहकारी समितियों में ढाई लाख से ज्यादा गन्ना उत्पादक किसान सदस्य के रूप में शामिल हैं। उन्हें 50 रूपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष 2017-18 में खरीदे गए धान का बोनस भी किसानों को दिया जाएगा, जो उन्हें अगले साल मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस बार अगर किसान राज्य की सरकारी समितियों के उपार्जन केन्द्रों में धान बेचेंगे तो उन्हें प्रति क्विंटल के बढ़े हुए समर्थन मूल्य और 300 रूपए बोनस मिलाकर प्रति क्विंटल 1890 रूपए यानी लगभग 1900 रूपए मिलेंगे।
    डॉ. सिंह ने कहा कि राज्य के 96 तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित किया है, जहां किसानों को राहत देने के उपाय भी शुरू किए गए हैं। इन परिस्थितियों में जब 2100 करोड़ रूपए का बोनस हमारे किसानों के घर पहुंचेगा तो न सिर्फ इस साल वे दीवाली का त्यौहार खुशी से मना पाएंगे, बल्कि सूखे से लड़ने और आगे की कार्ययोजना बनाने में भी सक्षम होंगे। उन्होंने अपने रेडियो प्रसारण में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री मोदी के आशीर्वाद से ही राज्य सरकार को यह निर्णय लेने की शक्ति मिली। डॉ. रमन सिंह ने अपने रेडियोवार्ता में कहा कि प्रदेश भर में लगभग 14 लाख से 15 लाख लोगों की जिन्दगी तेन्दूपत्ता संग्रहण से चलती है। राज्य सरकार ने उनकी मजदूरी की दर 350 प्रतिमानक बोरा से बढ़ाते हुए 1800 रूपए कर दिया है। प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 25 हजार आदिवासी परिवारों को तेन्दूपत्ता तोड़ने में जो दिक्कत होती है, उसे ध्यान में रखकर उन्हें हर साल दो हजार रूपए कैम्पा निधि से दिए जा रहे हैं, ताकि तेन्दूपत्ता तोड़ने से उनको जो आमदनी होती, उसकी भरपाई की जा सके। चरणपादुका योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 14 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका प्रदाय किया गया, इसका असर यह हुआ है कि पिछले आठ-दस वर्षों में पैर कटने की या जख्म होने की घटनाओं में काफी कमी आयी है। राज्य सरकार तेन्दूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, आईटीआई और पालीटेक्निक में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति भी दे रही है। डॉ. सिंह ने प्रदेश के वनवासियों को साल बीज, हर्रा, कुसुमी लाख, रंगीनी लाख, चिरौंजी, इमली और महुआ गुठली के संग्रहण के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में धान के साथ-साथ अब मक्के की खेती में भी वृद्धि हो रही है। राज्य में उद्यानिकी फसलों, दलहन-तिलहन के उत्पादन सहित डेयरी, पशुपालन और मछली पालन को बढ़ावा देने के फलस्वरूप किसानों की आमदनी में भी वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों को दीपावली की बधाई देते हुए कहा कि गांव में बने दीये तथा मिट्टी के सामानों का उपयोग करें। चीनी पटाखे, चीनी बिजली के सामान आदि का उपयोग न करें। अपने चारों ओर साफ-सफाई रखें तथा किसी भी तरह का प्रदूषण न फैलने दें।
समाचार क्रमंाक - 1456/सुरेन्द्र
संलग्न  फोटो  रमन के गोठ


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