बलरामपुर : “रमन के गोठ” का 26वीं कड़ी का प्रसारण : दीपावली में मिट्टी के बने दीये का उपयोग करें: डॉ. रमन सिंह

बलरामपुर 08 अक्टूबर 2017

आकाशवाणी से प्रसारित रमन के गोठ 26वीं कड़ी का बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायत मुख्यालय, नगरीय निकाय एवं जिला मुख्यालय में लोगों ने बड़े ही तल्लीनता से सुना। विकासखण्ड रामचन्द्रपुर के पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास रामानुजगंज के छात्रों ने “रमन के गोठ” का श्रवण किया। छात्रावास में रहने  वाले किसान के बेटे भागीरथी, विनोद कुमार, बिशुनदेव, आनन्द सिंह, अनिल कुमार सहित अन्य छात्रों दीपावली के पूर्व बोनस तिहार मनाने एवं किसानों को बोनस मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का आभार प्रकट किया।
रमन के गोठ कार्यक्रम ने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आगामी धनतेरस, करवाचौथ, दीपावली, भाईदूज, एकादशी के त्यौहार पर प्रदेश वासियों को बधाई एवं शुभकानायें दी। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बोनस तिहार से गांव-गांव में दीपावली के पहले से ही दीपावली शुरू हो गई है। उत्साह और जोश का उपयोग किसान भाई भावी योजना बनाने के लिए स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए भी करें। दीपावली पर चीनी पटाके एवं चीनी समान आदि उपयोग न करें। गांव बनी हुई दीप और मिट्टी के बने हुये समानों को उपयोग करें। अपने चारों साफ-सफाई रखें किसी भी प्रकार का प्रदूषण ने करें। चाहे वो शोर प्रदूषण हो, जल प्रदूषण हो या वायु प्रदूषण हो।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बोनस तिहार मनाया जा रहा है। जिससे प्रदेश के किसानों को प्रति क्विंटल तीन सौ रूपये की दर से बोनस दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा के रूप में पहचाना जाता था। प्रदेश के किसानों को धान की खेती पर निर्भर न होकर अन्य फसल के लिए प्रोत्साहित करते हुए गेंहू, चना, दलहन, तिलहन की फसल लेने प्रेरित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश धान का कटोरा के अलावा उद्यानिकी के क्षेत्र में बढ़ावा देकर सब्जी के कटोरा के रूप में पहचाना जाएगा। उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए कृषक उत्पादक संगठन बनाए जा रहे हैं। जिसमें 40 हजार से अधिक किसान पंजीकृत हो चुके हैं। आगामी वर्ष 2017-18 को बोनस 2018-19 में दिया जाएगा। किसानों द्वारा खरीदी गई धान की समर्थन मूल्य 80 रूपए बढ़ने के बाद और 300 रूपए बोनस मिलने के बाद किसानों की धान की कीमत 1890 रूपए यानी लगभग 1900 रूपए प्रति क्विंटल मिलेगी। प्रदेश के 96 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जिसे राहत देने के उपाय भी शुरू किए हैं। इन परिस्थितियों में 2100 करोड़ रूपए का बोनस जब किसान भाइयों के घर जाएगा, तो न सिर्फ इस साल की दीवाली खुशी से मना पाएंगे बल्कि सूखे से लड़ने और आगे की कार्ययोजना बनाने में सक्षम होंगे। किसानों के घर पैसा आने पर घर में मांगलिक कार्य होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोनस केवल धान के लिए नहीं है, बोनस तेन्दूपत्ता संग्राहकों और गन्ना उत्पादक किसानों को भी दिया जा रहा है। चरणपादुका योजना की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका देने का असर यह हुआ है कि पिछले आठ-दस वर्षों में पैर कटने की या जख्म होने की घटनाओं में काफी कमी आयी है। राज्य सरकार उनके बच्चों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, आईटीआई और पालीटेक्निक में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति भी दे रही है। प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 25 हजार आदिवासी परिवारों को तेन्दूपत्ता तोड़ने  में जो दिक्कत होती है, उसे ध्यान में रखकर उन्हें हर साल दो हजार रूपए कैम्पा निधि से दिए जा रहे हैं।


समाचार क्रमांक 834/2017

 

 


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