कोण्डागांव : ‘‘रमन के गोठ‘‘ की 26वीं कड़ी : ग्राम बड़ेबेंदरी के कृषकों ने धान बोनस पर जताया आभार : ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण शासन की प्रथम प्राथमिकता - डॉ. रमन सिंह

धान के साथ-साथ तेन्दूपत्ता और गन्ने के लिए भी मिलेगा ‘‘बोनस‘‘

कोण्डागांव, 08 अक्टूबर 2017

08 अक्टूबर 2017 को आयोजित रेडियोवार्ता ‘‘रमन के गोठ‘‘ कार्यक्रम उन्नत कृषि, तकनीक एवं किसानों के बेहतरी पर फोकस रहा। विकासखण्ड कोण्डागांव के बड़ेबेंदरी के कोटवार पारा में आयोजित उक्त कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों ने उल्लेखनीय भागीदारी दिखाई वहीं ग्राम के बोनस प्राप्त करने वाले कृषकों ने भी माननीय मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए धान बोनस की घोषणा का तहे दिल से स्वागत किया।
    अपने रेडियो वार्ता में माननीय मुख्यमंत्री ने धान को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके लिए राज्य को तीन अलग-अलग जलवायु क्षेत्र में बांटकर कार्ययोजना तैयार की है। जमीन की विशेषता के अनुरूप किसानों को बीज उपलब्ध कराए गए और प्रशिक्षण भी दिया गया। राज्य सरकार के प्रयासों से छत्तीसगढ़ में खेती और उससे संबंधित व्यवसायों  का टर्नओव्हर 44 हजार करोड़ रूपए तक पहुंच गया है, जिसे वर्ष 2022 तक बढ़ाकर हम 87 हजार करोड़ रूपए तक पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003-04 से 2016-17 तक 14 वर्ष में राज्य सरकार ने किसानों से छह करोड़ 91 लाख मीटरिक टन से ज्यादा धान खरीदकर सहकारी समितियों के जरिए उन्हें 75 हजार करोड़ रूपए का भुगतान किया है। वर्ष 2016-17 में सरकार ने उनसे 69 लाख मीटरिक टन धान खरीदा, जिस पर उन्हें 300 रूपए प्रति क्विंटल की दर से 2100 करोड़ रूपए का बोनस दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा-बोनस केवल धान के लिए नहीं है, बोनस तेन्दूपत्ता संग्राहकों और गन्ना उत्पादक किसानों को भी दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा होने के साथ-साथ अब फलों और सब्जियों का टोकरा भी बन गया है। सरकार के प्रयासों से दो फसली रकबा पंाच लाख हेक्टेयर से बढ़कर दस लाख 50 हजार तक पहुंच गया है। फसल सघनता 119 प्रतिशत से बढ़कर 137 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही तेन्दूपत्ता संग्राहकों के जीवन में बेहतरी के लिए योजनाएं बनाई गई है। चरणपादुका योजना की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 लाख तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका देने का असर यह हुआ है कि पिछले आठ-दस वर्षों में पैर कटने की या जख्म होने की घटनाओं में काफी कमी आयी है। राज्य सरकार उनके बच्चों को मेडिकल, इंजीनियरिंग, आईटीआई और पालीटेक्निक में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति भी दे रही है। प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 25 हजार आदिवासी परिवारों को तेन्दूपत्ता तोड़ने  में जो दिक्कत होती है, उसे ध्यान में रखकर उन्हें हर साल दो हजार रूपए कैम्पा निधि से दिए जा रहे हैं।
    डॉ0 सिंह ने बस्तर अंचल में कृषि परिदृश्य पर परिवर्तन के विषय में कहा कि बस्तर अंचल में आठ हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में काजू के पौधे लहलहा रहे हैं और वहां इसका वार्षिक उत्पादन छह हजार मीटरिक टन से ज्यादा हो गया है। इससे बास्तानार, बकावण्ड, बस्तर, तुरेनार, तोकापाल और दरभा क्षेत्रों में खाली पड़ी जमीन और जंगल को अतिक्रमण से बचाने में भी मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा- काजू प्रसंस्करण के लिए बस्तर के ग्राम आसना में सहकारिता के मॉडल के अनुरूप कारखाना लगाया जा रहा है। इसका संचालन भी स्व-सहायता समूह द्वारा किया जाएगा। आदिवासी परिवारों को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से काजू के 300-300 पौधे दिए जा रहे हैं, जो राजस्व और वन विभाग की भूमि पर लगाए जाएंगे।
    कार्यक्रम के अंत में जिला कलेक्टर समीर विश्नोई ने ग्रामीणों से मुखातिब होते हुए कहा कि कृषक मात्र कृषि पर निर्भर न रहे आय का अन्य जरिया भी तलाशे वर्तमान में उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन क्षेत्र में आकर्षक विकल्प है। जिन्हें विभागीय योजनाओं के सहयोग से अपनाया जा सकता है। चूंकि जिले में जीविकोपार्जन का मुख्य जरिया कृषि ही है अतः हमें कृषि से संबंधित अन्य क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाशनी होगी। इसके पूर्व उन्होंने ग्राम पंचायत बड़ेबेंदरी को ओडीएफ ग्राम घोषित करने के लिए ग्रामीणों की सहभागिता हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान सीइओ जनपद पंचायत डिगेश पटेल, सरपंच धीरजू राम कोर्राम, आर.एस.कोर्राम, प्रमोद सॉव, जगजीवन, सदाब्रीज, विरेन्द्र साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।


क्रमांक/355/रंजीत


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