रायपुर : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय बार्क के सहयोग से बनाएगा 36 उच्च पोषणयुक्त खाद्य उत्पाद : कुलपति डॉ. पाटील की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया निर्णय

रायपुर, 07 नवम्बर 2017

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा कुपोषण की विश्वव्यापी समस्या से मुक्ति की दिशा में कारगर पहल की जा रही है। विश्वविद्यालय द्वारा भाभा अटॉमिक रिसर्च सेन्टर (बार्क) के सहयोग से उच्च पोषक तत्वयुक्त खाद्य उत्पादों का निर्माण किया जायेगा। ये उत्पाद विश्वविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न फसल प्रजातियों से तैयार किये जाएंगे तथा कुपोषण दूर करने में मदद करेंगे। इन उच्च पोषक खाद्य उत्पादों को तैयार करने की प्रौद्योगिकी बार्क द्वारा उपलब्ध कराई जायेगी। कुलपति डॉ. एस.के. पाटील की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित एक बैठक में आठ फसलों से 36 खाद्य उत्पादों का निर्माण किये जाने का निर्णय लिया गया जिनमें शकरकंद, कुटकी, अलसी, रागी, मुनगा, राजगिरा और जिंक राईस पर आधारित खाद्य उत्पाद शामिल हैं।

    बैठक में कुलपति डॉ. पाटील ने कहा कि आज पूरे विश्व में कुपोषण की समस्या एक गंभीर चुनौती बनी हुई है जिससे भारत भी जूझ रहा है। पोषण के मामले में हमारे देश की स्थिति अच्छी नहीं है और इस दिशा में काफी प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिये केन्द्र सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है और हाल में ही राजधानी दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड फूड एक्सपो इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। डॉ. पाटील ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा ऐसी अनेक फसल प्रजातियां विकसित की गई है जो पोषक तत्वों से भरपूर है। इनमें शकरकंद, कुटकी, अलसी, रागी, मुनगा, राजगिरा, जिंक राईस आदि प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि इन फसल प्रजातियों में उपलब्ध पोषक तत्वों का उपयोग कुपोषण दूर करने मंे आसानी से किया जा सकता है। इसी सिलसिले में भाभा अटॉमिक रिसर्च सेन्टर (बार्क) के सहयोग से इन फसल प्रजातियों से विभिन्न खाद्य उत्पादों का निर्माण करने का निर्णय लिया गया है जो उपभोक्ताओं को भरपूर पोषण प्रदान करेंगे। इस संबंध में विश्वविद्यालय द्वारा जल्द ही बार्क के साथ अनुबंध किया जायेगा।
    बैठक में आठ फसलों से कुल 36 पोषक उत्पाद निर्मित किये जाने का निर्णय लिया गया जिनमें शकरकंद के मीठे क्यूब्स, रेडी टू ईट बेबी फूड, शकरकंद चिप्स, फिंगर चिप्स, शकरकंद फ्लोर, कुटकी की इंस्टेंट खीर, अलसी के बिस्किट, नानखटाई, चिकी, माऊथ फ्रेशनर, ओमेगा-3 रिच कैप्सूल, जिंक राईस का पोहा एवं चिवड़ा (रेडी टू ईट), डायबा पोहा, डायबा चिवड़ा, बादशाह भोग, विषणुभोग, दूबराज, सुगंध भोग की इंस्टेंट खीर, रागी माल्ट, मुनगा टी बैग्स, लीफ पावडर, फेस पैक, राजगिरा बिस्किट तथा इंस्टेंट खीर शामिल हैं। इसके साथ ही रागी, अलसी तथा राजगिरा से निर्मित न्यूट्रीबार भी तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा कड़कनाथ मुर्गा प्रजाति का ड्रेस्ड मीट (रेडिएशन प्रोसेस) तथा केन्ड मीट का भी उत्पादन करने पर सहमति व्यक्त की गई। बैठक में संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ. एस.एस. राव, संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. एम.पी. ठाकुर सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित थे।

  क्रमांक-3362/राजेश


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