रायपुर : हमर छत्तीसगढ़ योजना : चरण पादुका, सुरक्षा बीमा और शिक्षा प्रोत्साहन योजना से तेंदूपत्ता संग्राहकों की जिंदगी हुई आसान

हाथियों के हमले से प्रभावित परिवारों को मुआवजे से मिली राहत

रायपुर. 01 दिसम्बर 2017

तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं ने उनकी जिन्दगी आसान बना दी है। नि:शुल्क सामूहिक सुरक्षा बीमा योजना, नि:शुल्क चरण पादुका वितरण योजना एवं बच्चों के लिए संचालित शिक्षा प्रोत्साहन योजना ने वनवासी परिवारों की मुश्किलें कम की हैं। तेंदूपत्तों की सही कीमत और बोनस मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति भी लगातार बेहतर होती जा रही है। जंगली हाथियों के हमले से हताहत परिवारों को तत्काल मुआवजा राशि  मिलने से उन्हें राहत मिल रही है।
    हमर छत्तीसगढ़ योजना में अध्ययन भ्रमण पर रायपुर आए सरगुजा जिले के बागडोली पंचायत के पंच श्री शिवप्रसाद पैकरा कहते हैं कि हमारी आजीविका का साधन जंगल ही है। वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण कर हम लोग अपना जीवन-यापन करते हैं। सरकार द्वारा चरण पादुका दिए जाने से पैरों में बिना किसी तकलीफ के हम लोग वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जंगल जाते हैं। वे कहते हैं कि शिक्षा प्रोत्साहन योजना से छात्रवृत्ति मिलने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई आसान हो गई है। तेंदूपत्ता संग्राहकों का शासन द्वारा नि:शुल्क सामूहिक सुरक्षा बीमा कराए जाने से उन्हें बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिली है।
    सीतापुर विकासखंड के बागडोली के पंच श्री शिवप्रसाद पैकरा बताते हैं कि वनोपज संग्रहण के दौरान जंगली जानवरों के हमले की आशंका बनी रहती है। जंगली हाथियों की आमद से अब खतरा और भी बढ़ गया है। हिंसक हो चुके हाथी गांव में भी पहुंच जाते हैं और खेतों तथा घरों को नुकसान पहुंचाते हैं। वे बताते हैं कि हाथियों के हमले से गांव में कुछ लोगों की मत्यु तक हो गई है। शासन ने हिंसक वन्य प्राणियों द्वारा जनहानि पर क्षतिपूर्ति मुआवजे के रूप में पीड़ित परिवारों को चार-चार लाख रूपए दिए हैं। वहीं घायलों के परिजनों को दो-दो लाख रूपए दिए गए हैं। अप्रिय घटनाओं में जान गवां चुके और घायल हुए लोगों की भरपाई तो नहीं हो सकती, पर सरकार की ओर से मिले मुआवजे से प्रभावित परिवारों को काफी राहत मिली है। संकट की घड़ी में इससे बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई में काफी मदद मिल रही है।


क्रमांक-3768/कमलेश

 


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